30/03/2025
संभल के सीओ अनुज चौधरी का यह बयान कि "अगर आपको ईद की सेवइयां खिलानी हैं तो आपको गुजिया भी खानी पड़ेंगी" एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। यह केवल एक साधारण कथन नहीं, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारे को बनाए रखने की एक गहरी सीख है।
भारत विविध संस्कृतियों और धर्मों का संगम है, जहाँ हर त्योहार न केवल एक समुदाय का होता है बल्कि सभी के लिए खुशी और उत्सव का अवसर बनता है। ईद पर सेवइयां खिलाने और होली पर गुजिया खाने का अर्थ सिर्फ मिठाइयों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने की प्रक्रिया है। जब एक समुदाय दूसरे समुदाय के त्योहारों की मिठास को अपनाता है, तो आपसी प्रेम और विश्वास मजबूत होता है।
भाईचारा तभी संभव है जब हर कोई एक-दूसरे की परंपराओं का सम्मान करे और उन्हें खुले दिल से स्वीकार करे। यदि कोई एक समुदाय दूसरे समुदाय की खुशियों में शामिल होता है, लेकिन बदले में वही भावनाएँ नहीं मिलतीं, तो कहीं न कहीं समाज में दूरियाँ बढ़ने लगती हैं। यही वजह है कि हमें सिर्फ अपने त्योहारों को नहीं, बल्कि दूसरों के त्योहारों को भी अपनाने और उनकी खुशियों में शामिल होने की जरूरत है।
भारत की संस्कृति हमेशा से ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की रही है, जहाँ सभी को एक परिवार की तरह माना जाता है। ऐसे में, त्योहारों की मिठास का सही आनंद तभी लिया जा सकता है जब हम दिलों की दूरियों को मिटाकर, सच्चे भाईचारे की भावना को अपनाएँ।
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