25/05/2026
🚩🚩गंगा दशहरा: दस पापों का नाश और रामेश्वरम स्थापना का दिव्य योग🚩🚩🚩🚩
*आज के दिन गंगा स्नान से दूर होते हैं वाणी, शरीर और मन के दस प्रकार के पाप*
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को _गंगा दशहरा_ मनाया जाता है। शास्त्रों में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इसी तिथि को माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। इस दिन दस प्रकार के उत्तम योग बनते हैं और गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है।
*कौन से हैं दस पाप:*
पुराणों में कहा गया है कि मनुष्य से वाणी, शरीर और मन से दस तरह के पाप होते हैं।
*वाणी के चार पाप:*
_पारुष्यमनृतं चैव पैशुन्यं चापि सर्वशः।_
_असम्बद्धप्रलापश्च वाङ्मयं स्याच्चतुर्विधम्।।_
अर्थात कठोर बोलना, झूठ बोलना, चुगली करना और व्यर्थ की बातें करना, ये वाणी के चार पाप हैं।
*शरीर के तीन पाप:*
_अदत्तानामुपादानं हिंसा चैवाविधानतः।_
_परदारोपसेवा च कायिकं त्रिविधं मतम्।।_
अर्थात बिना दिए किसी की वस्तु लेना, शास्त्र विरुद्ध हिंसा करना और परस्त्री गमन, ये शरीर के तीन पाप हैं।
*मन के तीन पाप:*
_परद्रव्येष्वभिध्यानं मनसानिष्टचिन्तनम्।_
_वितथाभिनिवेशश्च मानसं त्रिविधं स्मृतम्।।_
अर्थात दूसरे के धन का लालच करना, दूसरों का बुरा सोचना और व्यर्थ की जिद करना, ये मन के तीन पाप हैं।
मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से इन दसों पापों का क्षय होता है। विशेष रूप से पर स्त्री एवं पर द्रव्य हरण का पाप, दूसरों का धन पाने की इच्छा का पाप और मानसिक रूप से दूसरों के कष्ट का चिंतन करने का पाप दूर होता है।
*रामेश्वरम स्थापना का दिव्य संयोग:*
सेतुबंध रामेश्वरम महात्म के संदर्भ में पुराणों में उल्लेख है:
_ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशम्यां बुधहस्तयोः।_
_गरानन्दे व्यतीपाते कन्याचन्द्रे वृषे रवौ॥_
_दशयोगे सेतुमध्ये लिङ्गरूपधरं हरम्।_
_रामो वै स्थापयामास शिवलिङ्गमनुत्तमम्॥_
अर्थात इसी गंगा दशहरा की तिथि को दस उत्तम योग बने थे: _ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र, गर करण, आनंद योग, व्यतीपात योग, कन्या राशि में चंद्र और वृष राशि में सूर्य।_ इसी विशेष मुहूर्त में भगवान श्री रामचंद्र जी ने रामेश्वरम में महादेव के उत्तम शिवलिंग की स्थापना की थी। इसलिए इस तिथि को _सेतुबंध रामेश्वर दर्शन_ का भी विशेष पुण्य बताया गया है: _अस्यामेव सेतुबन्धे रामेश्वरदर्शनम् अस्यां स्थापितत्वात्।।_
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*गंगा दशहरा पर 43 मिनट का दुर्लभ महायोग, आचार्य अविनाश शास्त्री बोले: जल संरक्षण ही सच्ची गंगा पूजा*
*26 मई 2026, मंगलवार* को गंगा दशहरा का महापर्व है। इस वर्ष _प्रातः 07:04 बजे से 07:47 बजे तक 43 मिनट_ का अत्यंत दुर्लभ चतुर्ग्रही महासंयोग बन रहा है।
*फाइनल पंचांग - गंगा दशहरा 26.05.2026, मंगलवार:*
**योग कारक** **विवरण**
**मास + पक्ष** ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष
**तिथि** दशमी, प्रातः 07:47 बजे तक। उसके बाद एकादशी
**सूर्य** वृष राशि में
**चंद्रमा** कन्या राशि में
**नक्षत्र** हस्त, प्रातः 07:04 बजे से
**महायोग का समय** **प्रातः 07:04 से 07:47 तक = 43 मिनट**
_महत्व_: दशमी तिथि + वृष के सूर्य + कन्या के चंद्रमा + हस्त नक्षत्र = चतुर्ग्रही महासंयोग। शास्त्रों के अनुसार इसी शुभ मुहूर्त में माँ गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इस 43 मिनट में किया गया गंगा स्मरण, दान, जप 10 जन्मों के पाप नाशक माना जाता है।
*पौराणिक कथा: गंगा अवतरण*
मान्यता है कि राजा भगीरथ ने अपने 60 हजार पूर्वजों सगर पुत्रों के उद्धार हेतु कठोर तप कर माँ गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाने का वरदान पाया। भगवान शिव ने गंगा के प्रचंड वेग को अपनी जटाओं में समाहित कर ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में गंगा को धरती पर प्रवाहित किया। तभी से यह दिन 'गंगा दशहरा' कहलाता है।
*ज्योतिषाचार्य आचार्य अविनाश शास्त्री का वक्तव्य:*
ज्योतिषाचार्य _आचार्य अविनाश शास्त्री_ ने बताया, _"26 मई को बन रहा योग हजारों वर्षों में कभी-कभी आता है। प्रातः 07:04 से 07:47 तक के 43 मिनट में गंगा स्मरण का विशेष फल है। परंतु कलियुग में सबसे बड़ा पुण्य नदियों को स्वच्छ रखना है। प्लास्टिक, कचरा गंगा में प्रवाहित करना महापाप है। जल का अपव्यय रोकना ही सच्ची गंगा पूजा है।"_
*इतिहासकार धर्मवीर कुमार का ऐतिहासिक पक्ष:*
वरिष्ठ इतिहासकार _धर्मवीर कुमार_ ने कहा, _"गंगा केवल नदी नहीं, भारत की सांस्कृतिक धुरी है। ऋग्वेद से गुप्तकाल तक, स्वतंत्रता संग्राम से आज तक गंगा तट ही चिंतन का केंद्र रहा है। बेगूसराय का सिमरिया घाट प्राचीन काल से गंगा संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। ह्वेनसांग ने भी गंगा की पवित्रता का उल्लेख किया है। गंगा सूखी तो संस्कृति सूख जाएगी। अतः गंगा की निर्मलता बनाए रखना ऐतिहासिक दायित्व भी है।"_
*गंगा दशहरा पर क्या करें:*
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान, गंगा जल का आचमन, दान-पुण्य और दस प्रकार की वस्तुओं का दान: दस फल, दस दीप, दस पान, दस सेर तिल आदि करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
_नोट: गंगा स्नान संभव न हो तो घर पर ही नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर "ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः" मंत्र से स्नान करें।_
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*प्रेषक:*
*आचार्य अविनाश शास्त्री*
फलित ज्योतिषाचार्य
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा
संपर्क: 8271569010
ई-मेल: [email protected]