29/05/2026
#धनबाद,शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में नई शिक्षा नीति (NEP), जनजातीय विकास, ग्रामीण क्षेत्र के उत्थान, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण तथा हरित पर्यावरण के महत्व पर विशेष चर्चा की गई।
Arise News
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने जनजातीय समुदायों के लिए संचालित सरकारी छात्रवृत्ति योजनाओं, ग्रामीण विकास योजनाओं तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल शिक्षा, ई-फंड, कौशल विकास कार्यशालाओं, इंटर्नशिप एवं नवाचार कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया गया।
महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर पर NAAC, शिक्षकों तथा विभिन्न संस्थानों के सहयोग से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु संचालित कार्यक्रमों की जानकारी भी दी गई। बी.बी.एम.के.यू. एवं आई.एस.एम. के संयुक्त “साथी कार्यक्रम” का उल्लेख करते हुए बताया गया कि इसके माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीकी एवं व्यावसायिक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
डॉ. कला सोना पाल
सहायक प्राध्यापक, भूगोल विभाग, एस.के.बी.यू., पुरुलिया (पश्चिम बंगाल)
ने अपने वक्तव्य में विभिन्न क्षेत्रों में जनजातीय गरीबी की स्थिति की तुलनात्मक समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने गरीबी की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI), मानव विकास सूचकांक (HDI), भौतिक जीवन गुणवत्ता सूचकांक (PQLI) तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) सहित विभिन्न गरीबी संकेतकों की चर्चा की। साथ ही, नीति आयोग द्वारा जारी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय गरीबी के आँकड़ों का विश्लेषण करते हुए सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं पर प्रकाश डाला।
डॉ. शशांक पाठक
पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राणीशास्त्र विभाग, विमेन्स कॉलेज, जामताड़ा
ने झारखंड की जनजातीय वनस्पतियों एवं औषधीय पौधों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विभिन्न औषधीय पौधों के वैज्ञानिक नामों एवं उनके उपयोगों की जानकारी दी। साथ ही, जनजातीय समुदायों द्वारा अपनाई जाने वाली वृक्षारोपण पद्धतियों, पौधों के संरक्षण तथा पर्यावरण संतुलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने औषधीय, आर्थिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से पौधों के महत्व पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की।
डॉ. के. एम. सिंह
सहायक प्राध्यापक, अंग्रेज़ी विभाग, बी.बी.एम.के.यू.
ने अपने संबोधन में जारवा जनजाति एवं अन्य आदिवासी समुदायों की वास्तविक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय प्रकृति और मानवता के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंध स्थापित करते हैं तथा उनका जीवन-दर्शन प्रकृति संरक्षण, सामुदायिक सहयोग और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित है।
उन्होंने बताया कि आदिवासी भारत की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक हैं, किन्तु वर्तमान समय में वे पहचान के संकट (Identity Crisis) का सामना कर रहे हैं। शिक्षा को प्रभावी एवं समावेशी बनाने के लिए मातृभाषा में शिक्षा (Mother Tongue Education) की आवश्यकता पर उन्होंने विशेष बल दिया।
डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि आदिवासी समुदाय वन एवं जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी सांस्कृतिक परंपराएँ, लोकनृत्य एवं सामुदायिक जीवन प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हैं। आदिवासी नृत्य एवं संस्कृति भारतीय विरासत की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित एवं प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा समाज एवं पर्यावरण के सतत विकास हेतु सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया गया।
उक्त अवसर पर प्राचार्य प्रो डॉ संजय कुमार सिंह प्रो बि वर्मा प्रो उदय शंकर सिंह प्रो कौशल सिंह प्रो सुभाष शाह प्रो सत्येंद्र प्रसाद प्रो कामिनी कुमारी प्रो मुजफ्फर आलम प्रो बीभा कुमारी प्रो सुनीता कुमारी प्रो सिमरन कुमारी प्रो रमेश भट्ट प्रो रितेश तिवारी प्रो टिकट मांझी प्रो अनिता कुमारी राजीव कुमार शर्मा आशीष चटर्जी मनजीत राय धीरज कुमार मिश्रा सुलेखा कुमारी प्रीति कुमारी संगीता कुमारी सीमंतो मंडल निपेन मंडल अमित मंडल विद्युत मंडल विशेश्वर मरांडी अमीत मंडल किंकर मंडल चंचल दास प्रशांत कुमार मंडल संजय बनर्जी दुखी दास सुमन माझी सुरेश मरांडी रिना तिवारी सहित कॉलेज के पूरे परिवार सम्मिलित थें