25/05/2026
कांग्रेस का सबसे बड़ा धोखा यही है
कि वह मंच पर मुसलमानों का
सबसे बड़ा हितैषी बनकर रोती है,
लेकिन जब कोई मुस्लिम नेता
हक की बात करता है,
तो उसे पार्टी के अंदर
सबसे बड़ा दुश्मन समझकर
हाशिए पर धकेल दिया जाता है
कांग्रेस बोलती कुछ है, करती कुछ और है
यही कांग्रेस की राजनीति का मूल मंत्र है…
सबसे बड़ा उदाहरण है
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुर्रहमान अंतुले का
जब उन्होंने मुस्लिम नौजवानों को
फर्जी आतंकवाद के नाम पर फंसाए जाने का मुद्दा उठाया,
तो कांग्रेस ने उन्हें इतना साइड कर दिया
कि वे राजनीति में दोबारा नजर तक नहीं आए
हाल के दिनों में भी
यही पैटर्न दोहराया जा रहा है:
तमिलनाडु में कांग्रेस यूथ के महासचिव
अलीम अल बुहारी को
मुसलमानों के मुद्दे उठाने के कारण
निलंबित कर दिया गया…
कर्नाटक में मुस्लिम बहुल सीट पर
हिंदू उम्मीदवार उतारने का विरोध करने पर
कांग्रेस ने Minority Department को ही भंग कर दिया
और MLC अब्दुल जब्बार साहब को
पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया…
बिहार में कद्दावर नेता
शकील साहब को भी धीरे-धीरे हाशिए पर डाल दिया गया…
कांग्रेस मुसलमानों के वोट तो चाहती है,
लेकिन उनके हितों की लड़ाई लड़ने वाले
अपने नेताओं को भी बर्दाश्त नहीं कर सकती…
राहुल गांधी मंच पर खड़े होकर
भावुक भाषण देते हैं
लेकिन जब मुसलमानों के मुद्दे पर
कांग्रेस के मुस्लिम नेता बोलते हैं,
उन्हें सजा दे दी जाती है
राहुल का डायलॉग बाजी
और कांग्रेस की ग्राउंड रियलिटी में जमीन-आसमान का फर्क है…
ये घटनाएं संयोग नहीं हैं
ये कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं
कांग्रेस मुसलमानों को "गुलाम वोट बैंक" के रूप में देखती है,
न कि समान अधिकारों वाले नागरिकों के रूप में
जब कोई मुस्लिम नेता
इस गुलामी से बाहर निकलकर
असली मुद्दे उठाता है
चाहे फर्जी एनकाउंटर हों,
पुलिस अत्याचार हों,
या टिकट वितरण में अन्याय
तो कांग्रेस उसे "दल-विरोधी" करार देकर बाहर कर देती है!
Rahul Gandhi जी का यह ब्यान हवा हवाई है या धरातल उतरेगा ??