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प्रशांत फाउंडेशन इटावा द्वारा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु विगत कई वर्षों से वृहद स्तर पर चलाए जा रहे वृक्षदान महाअ...
27/11/2025

प्रशांत फाउंडेशन इटावा द्वारा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु विगत कई वर्षों से वृहद स्तर पर चलाए जा रहे वृक्षदान महाअभियान , त्रिवेणी मिशन, मिशन हरियाली एवं मिशन ग्रीन अर्थ के तहत रूद्राक्ष मैन डॉ रिपुदमन सिंह यादव , संस्थापक प्रशांत फाउंडेशन इटावा ने , समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रेमी आदरणीय श्री गौरव यादव पचौतिया जी को क्रशूला का पौधा भेंट किया।


#वृक्षारोपण🌱🌳🌲

प्रशांत फाउंडेशन इटावा द्वारा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु विगत कई वर्षों से वृहद स्तर पर चलाए जा रहे वृक्षदान महाअ...
27/11/2025

प्रशांत फाउंडेशन इटावा द्वारा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु विगत कई वर्षों से वृहद स्तर पर चलाए जा रहे वृक्षदान महाअभियान , त्रिवेणी मिशन, मिशन हरियाली एवं मिशन ग्रीन अर्थ के तहत रूद्राक्ष मैन डॉ रिपुदमन सिंह यादव , संस्थापक प्रशांत फाउंडेशन इटावा एवं स्वेक्षा चतुर्वेदी ने , समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रेमी आदरणीय श्री गौरव यादव पचौतिया जी को क्रशूला का पौधा भेंट किया।


#वृक्षारोपण🌱🌳🌲

संविधान दिवस हमें हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता है ..prashantfoundation.com            ...
26/11/2025

संविधान दिवस हमें हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता है ..prashantfoundation.com

संविधान दिवस हमें हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता है , prashantfoundation.com            ...
26/11/2025

संविधान दिवस हमें हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता है , prashantfoundation.com

जब स्टेडियम की लाइटें चमकीं… पूरा देश चीख उठा—"ये हैं हमारी बेटियाँ!" 🇮🇳🔥वो पल किसी फ़िल्म जैसा था…एक-एक पसीने की बूंद म...
25/11/2025

जब स्टेडियम की लाइटें चमकीं… पूरा देश चीख उठा—"ये हैं हमारी बेटियाँ!" 🇮🇳🔥वो पल किसी फ़िल्म जैसा था…एक-एक पसीने की बूंद में संघर्ष था,हर टैग, हर टैकल में देश का गर्व था। लड़कियों को रोकने वाले तो बहुत थे, लेकिन इन शेरनियों ने दुनिया को जवाब दिया -"हम किसी से कम नहीं!"
कबड्डी… वो खेल जिसे कभी लोग सिर्फ "गली का खेल" कहते थे।
लेकिन आज उसी खेल में
भारत की बेटियाँ WORLD CUP की ट्रॉफी लेकर खड़ी थीं।

इन्हें कहा गया—
"ये खेल लड़कियों के बस का नहीं…”
"शादी कर लो… खेल छोड़ दो…”
"इतना भाग-दौड़ कौन करेगा…"

पर इन शेरनियों ने हार नहीं मानी।
सुबह की ठंडी हवा, ज़मीन की मिट्टी,
टूटे घुटने, छिलते हाथ…
सब सहा, लेकिन सपना नहीं छोड़ा।

और वो दिन आया…
जब पूरी दुनिया के सामने
तिरंगा लहराया— और बेटियाँ विजेता बनकर लौटीं।





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