28/04/2026
इतने प्रमाण ही काफी हैं इतिहास को जानने के लिए 👈
जब पासी समाज में पहले से ही अरख, भरपासी, राजपासी, राजवंशी, त्रिशूलीय, कमानी, व्याधा, खटीक इत्यादि पहले से ही पाया जाता है तो दूसरी जाति होने का सवाल ही नहीं उठता है, गजेटियर पूरा पढ़ो उसमें आगे साफ लिखा है पासी जाति के ही शाखा अर्ख है, कही अर्खवंशी नहीं लिखा है! आधा अधूरी बातें share करना हमेशा खतरनाक होता है! ये बताओ अर्कवंशी OBC राजपूत (ठाकुर) वंश से आता है क्या?? अवध में पूरा शासन पासीयो का रहा है तो चंद अर्खवंशी आकर सत्ता पे काबिज हो जायेंगे क्या? जब गजेटियर में साफ लिखा है को राजपासी राजा कंस के दो पुत्र मलीहा और सलीहा पासी हुए तो और कोई सवाल ही खड़ी नहीं होती पासी लोग पागल नहीं हैं किसी के भी महापुरुषों को अपना बताने लगे, पासी समाज के लोग ने इतिहास नहीं लिखा है जो हम बोल सकते हैं कि वह लोग कुछ भी मैनग्रंथ कहानी बना के लिख दिया है! ये कहानी अंग्रेजों ने लिखा हैं और मुगलों के पूर्वजों ने, पासी समाज के लोगों को पता भी नहीं होगा शायद उनके पूर्वज लोक कथा में बताते थे लेकिन वह लोगों को मजाक लगता था लेकिन उनके और RSS से जुड़े लोग खोज करने लगे तो ऐसी ऐसी किताबें मिली कि दिमाग घूम गया, फिर जाकर RSS के स्वेंगसेवक ही बताए उनलोगों को की पासी का इतिहास क्या है! राजनीतिक अलग चीज है लेकिन हमें ये भी कबूल करना चाहिए कि पासी समाज हिन्दुत्व को हमेशा कायम रखा, वह लोग नागवंशी है, इतिहास बताती है कि देश के कुछ भूभागों पे नागो का शासन था, पासी समाज को बाद में SC में सिर्फ नॉर्थ इंडिया में रखा गया है, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में OBC और कर्नाटक तमिलनाडु केरल में जेनरल में भी आते है! पासी समाज के 20 के करीब शाखा है और सभी किसी न किसी हथियार के नाम पे रखा गया है, जो जो कला में निपुण्य था उसे उसी उपाधि से संबोधित किया गया, इतिहास पढ़ो आँख बंदकर के सिंह लगा देख के गुमराह न हो, अर्खवंशी का भी उत्पत्ति पासी से ही हुआ होगा, क्यों कि ठाकुर में ऐसी कोई शाखा नहीं पाई गई है राजनीतिक तौर पे obc के कुछ जातियों को राजनीतिक करने के लिए क्षत्रिय बता दिया, ऐसे तो इतिहास गवां देता है कि पासी भी भारशिव नागवंशी क्षत्रिय थे, दिल्ली पे सात पुश्तों तक राज करने बले पासी उपाधि धारण करने वाले महाराजा त्रिलोकचंद्र पासी ही थे! महाराजा त्रिलोकचंद्र पासी के भाई क्षत्रिय कन्या वैश्य राजपूत से शादी किया था उसका उल्लेख इतिहास में मिलता है! आज कल जाति पाती भेद भाव रह कहा गई ये सब जितना जल्दी खत्म हो जाए इतना ही अच्छा है भारत को विकसित के साथ इस्लामिक खतरों के चुनौती से लड़ने के लिए हिन्दू एकता ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए! हम सभी सप्त ऋषियो के संतान है और सभी का DNA एक है आज कल सभी वर्ग के लोग सभी काम कर रहा है! इसलिए को बड़ा छोटा नहीं है! इतने सबूत मिलते हैं पासी राजा मलीहा पासी और सलीहा पासी के बड़े में की पढ़ते पढ़ते पागल हो जाओगे, खोज करो ज्यादा से ज्यादा पढ़ो लिखो और किसी को गुमराह न करो, सामाजिक समरसता पे काम करो! आज के समय में कोई बड़ी जाति नहीं कोई छोटी जाति नहीं सभी हिन्दू एक हैं! सिर्फ उतर प्रदेश में 1.5 करोड़ से ज्यादा पासी है जो कि ज्यादातर अवध क्षेत्र में रहता है, पासी समाज जिसके साथ गया है उसका सरकार बना है,BJP का कोर वोटर पासी समाज है उसको पहले ही नाराज कर चुके हैं झाटभरों के चक्कर में इसलिए लोक सभा चुनाव में आधी पे आ गए, अगर समय रहते नहीं संभाला तो उतर प्रदेश से बाबा का जाना तय है क्यों कि कितना भी उतर प्रदेश में विकास कर दो लास्ट में वोट देने जाति देख के ही जाते है ये भी कर्वी सच है! रियल लाइफ में जियो हवा हवाई में न रहो!