22/05/2026
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि एक ही घटना या 'कारण-ए-दावा' (Cause of Action) के विभिन्न अपराधों को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करके कई जगहों पर मुकदमे दर्ज करना विधिसम्मत नहीं है।
इस अहम फैसले से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:एक घटना, एक मुकदमा: अदालत ने माना कि एक ही घटना से उत्पन्न होने वाले सभी अपराधों की जांच और मुकदमा एक साथ चलाया जाना चाहिए, न कि उन्हें अलग-अलग टुकड़ों में बांटकर दर्ज किया जाना चाहिए।ज्यादती और उत्पीड़न पर रोक: जस्टिस एम.ए. चौधरी की एकल पीठ ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का इस्तेमाल निजी प्रतिशोध लेने या नागरिकों के संसाधनों और स्वतंत्रता का शोषण करने के लिए टूल (हथियार) के रूप में नहीं किया जा सकता।न्यायिक अराजकता: एक ही कारण-ए-दावा को केवल अपराधों की शब्दावली (nomenclature) बदलकर कई आपराधिक मामलों में विभाजित करना कानूनी रूप से पूरी तरह से अस्वीकार्य है, जिससे न्यायिक अराजकता पैदा होती है।यह व्यवस्था हाईकोर्ट ने 'विश्वेंद्र सिंह बनाम यूटी ऑफ जेएंडके' (Vishvendra Singh v. UT of J&K) मामले की सुनवाई करते हुए दी, जिसमें एक कंपनी द्वारा दिल्ली के एक व्यक्ति के खिलाफ अलग-अलग अदालतों (श्रीनगर, बडगाम और नई दिल्ली) में एक ही घटना को लेकर कई मामले दर्ज कराए गए थे। अदालत ने इन सभी समानांतर मामलों को खारिज करते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना।