11/06/2026
दिल्ली में शिखा सिंह और सौरभ के बीच चल रहे विवाद ने एक परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया था। सालों तक केस, तनाव और लड़ाई में सबसे ज्यादा दर्द उस पिता ने सहा, जिसने अपनी बेटी के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। हालात इतने खराब हो गए कि वह अपना इलाज तक नहीं करा पा रहे थे। लगातार चिंता और मानसिक तनाव ने उन्हें अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा दिया।
कहा जाता है कि जब सौरभ को अपने ससुर की गंभीर हालत का पता चला, तो उन्होंने पुराने झगड़े और शिकायतों को भुलाकर इंसानियत का फर्ज निभाया। वह अस्पताल पहुंचे, अपने ससुर को बेहतर इलाज दिलवाया और उनके स्वस्थ होने तक साथ खड़े रहे। जिस व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट में लड़ाई चल रही थी, वही व्यक्ति मुश्किल समय में सहारा बन गया।
आज दिल्ली कोर्ट में जब शिखा की तारीख थी और उन्होंने अपने पिता को स्वस्थ देखा, तो शायद उनके दिल में वर्षों से जमा गुस्सा और शिकायतें पिघल गईं। बताया जाता है कि पति के सामने पहुंचते ही उन्होंने तलाक के कागज़ फाड़ दिए और सौरभ को गले लगा लिया। उस पल कोर्ट में मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
रिश्ते तब नहीं टूटते जब झगड़े होते हैं, रिश्ते तब टूटते हैं जब इंसानियत खत्म हो जाती है। और जहां इंसानियत जिंदा हो, वहां उम्मीद भी जिंदा रहती है। ❤️🥺