Manoj Choudhary

Manoj Choudhary WORK AS JOURNALIST( VIDEO EDITOR) VIDEO EDITOR

11/06/2026

दिल्ली में शिखा सिंह और सौरभ के बीच चल रहे विवाद ने एक परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया था। सालों तक केस, तनाव और लड़ाई में सबसे ज्यादा दर्द उस पिता ने सहा, जिसने अपनी बेटी के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। हालात इतने खराब हो गए कि वह अपना इलाज तक नहीं करा पा रहे थे। लगातार चिंता और मानसिक तनाव ने उन्हें अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा दिया।
कहा जाता है कि जब सौरभ को अपने ससुर की गंभीर हालत का पता चला, तो उन्होंने पुराने झगड़े और शिकायतों को भुलाकर इंसानियत का फर्ज निभाया। वह अस्पताल पहुंचे, अपने ससुर को बेहतर इलाज दिलवाया और उनके स्वस्थ होने तक साथ खड़े रहे। जिस व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट में लड़ाई चल रही थी, वही व्यक्ति मुश्किल समय में सहारा बन गया।
आज दिल्ली कोर्ट में जब शिखा की तारीख थी और उन्होंने अपने पिता को स्वस्थ देखा, तो शायद उनके दिल में वर्षों से जमा गुस्सा और शिकायतें पिघल गईं। बताया जाता है कि पति के सामने पहुंचते ही उन्होंने तलाक के कागज़ फाड़ दिए और सौरभ को गले लगा लिया। उस पल कोर्ट में मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
रिश्ते तब नहीं टूटते जब झगड़े होते हैं, रिश्ते तब टूटते हैं जब इंसानियत खत्म हो जाती है। और जहां इंसानियत जिंदा हो, वहां उम्मीद भी जिंदा रहती है। ❤️🥺

11/06/2026

एक मां की पूरी दुनिया उसकी बेटी होती है। और जब वही बेटी मूक-बधिर हो, तब मां ही उसकी आवाज बन जाती है। मुजफ्फरनगर की एक विधवा मां आज न्याय की गुहार लगा रही है। आरोप है कि उसकी मूक-बधिर बेटी के इलाज के दौरान पैसों की मांग की गई और पूरी रकम न मिलने पर उसकी चोट और गंभीर हो गई। जांच जारी है, सच सामने आना बाकी है, लेकिन एक सवाल पूरे देश से जवाब मांग रहा है — आखिर उस मासूम बच्ची का कसूर क्या था? वह न सुन सकती है, न बोल सकती है, न अपना दर्द बता सकती है। जब दर्द बढ़ा होगा तो उसकी आंखों से निकले आंसू ही उसकी भाषा रहे होंगे। देश में बेटियों की सुरक्षा और सम्मान के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जब किसी बेबस बेटी के दर्द की ऐसी खबर सामने आती है तो हर संवेदनशील इंसान का दिल रो पड़ता है। अगर आरोप सही हैं तो यह सिर्फ एक बच्ची का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है कि सच सामने आए और न्याय मिले। क्योंकि किसी भी सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर और सबसे मासूम लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है।

11/06/2026

एक वायरल वीडियो ने फिर एक बार देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अस्पताल में मरीज के परिजनों से खुद ड्रिप चढ़ाने को कहा गया और वीडियो बनाने पर इलाज रोकने की बात कही गई। यदि यह सच है, तो यह सिर्फ एक अस्पताल की कहानी नहीं, बल्कि उस दर्द की कहानी है जिसे करोड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार हर दिन झेलते हैं।एक तरफ मंचों से विकास की बातें होती हैं, नई योजनाओं और बड़े सपनों की बातें होती हैं, लेकिन जब किसी मां का बेटा, किसी पिता की बेटी या किसी परिवार का कमाने वाला सदस्य अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहा होता है, तब उसे भाषण नहीं, इलाज चाहिए होता है।सोचिए... अगर उस बिस्तर पर आपका अपना कोई होता, अगर आपके सामने आपका पिता दर्द से कराह रहा होता, आपकी मां की सांसें टूट रही होतीं, या आपका बच्चा इलाज का इंतजार कर रहा होता, और आपको कहा जाता कि खुद ही उसका इलाज करो... तब आपके दिल पर क्या गुजरती?आम आदमी हर चीज पर टैक्स देता है। दवा पर, खाने पर, कपड़ों पर, पेट्रोल पर, बिजली पर। लेकिन जब उसे सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब क्या उसे सम्मान और इलाज दोनों मिल पाते हैं?यह पोस्ट किसी एक अस्पताल की नहीं, उस दर्द की बात है जिसे लाखों परिवार महसूस करते हैं। उम्मीद है कि सच सामने आएगा, जिम्मेदारी तय होगी और मरीजों को वह सम्मान मिलेगा जिसके वे हकदार हैं।

10/06/2026

एक पार्किंग विवाद, एक थार, एक पिस्टल और कुछ सेकंड का गुस्सा... लेकिन सोचिए, अगर उस रात गोली चल जाती तो कितने घरों की खुशियां उजड़ जातीं। बड़े-बड़े शहरों में सुरक्षा के दावे किए जाते हैं, कानून के राज की बातें होती हैं, लेकिन जब मामूली कहासुनी में हथियार निकल आते हैं तो सबसे ज्यादा डर उस आम इंसान को लगता है जिसके पास न पैसा है, न रसूख और न ही सुरक्षा का कोई सहारा। अमीर और ताकतवर लोग शायद ऐसे विवादों को भूल जाएं, लेकिन गरीब परिवार हर दिन इस डर के साथ जीते हैं कि कहीं किसी का गुस्सा उनके अपनों की जिंदगी न छीन ले। कानून का असली मतलब तभी है जब सड़क पर खड़ा आखिरी व्यक्ति भी खुद को सुरक्षित महसूस करे, क्योंकि किसी की जान किसी गाड़ी, पैसे या अहंकार से कहीं ज्यादा कीमती होती है।

08/06/2026

📍 मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश
📅 08 जून 2026

मुरादाबाद से सामने आया एक वायरल वीडियो सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता और डर को सामने लाता है।

बताया जा रहा है कि एक सरकारी एम्बुलेंस तेज रफ्तार से अस्पताल की ओर दौड़ रही थी। एम्बुलेंस के अंदर एक गंभीर मरीज मौजूद था, जिसकी हर सांस कीमती थी। परिवार की आंखों में उम्मीद थी कि अस्पताल पहुंचने से पहले ऑक्सीजन और इलाज उसके अपने की जिंदगी बचा लेंगे।

लेकिन तभी एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया।

वायरल वीडियो में ऑक्सीजन सिलेंडर का लॉक फंसा हुआ दिखाई देता है। आरोप है कि लॉक खोलने के लिए सही उपकरण या चाबी का इस्तेमाल करने के बजाय एम्बुलेंस अटेंडेंट हथौड़े से लगातार वार करता नजर आया। जिस ऑक्सीजन सिलेंडर से किसी की जिंदगी बचनी थी, उसी के साथ इस तरह का जोखिम भरा व्यवहार देखकर लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो गए।

परिजनों का कहना है कि मरीज की हालत बेहद नाजुक थी। इसी चिंता और मजबूरी में उन्होंने पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

अगर वीडियो में दिखाई गई घटना सही है, तो यह सिर्फ एक तकनीकी खराबी की कहानी नहीं है। यह उस दर्द, डर और बेबसी की कहानी है जिसे हर वह परिवार महसूस करता है जब उसका कोई अपना एम्बुलेंस में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा होता है।

सोचिए उस मां का दिल किस तरह कांपा होगा...
उस पत्नी की आंखों से कितने आंसू निकले होंगे...
उन बच्चों ने कितनी दुआएं मांगी होंगी...

क्योंकि एम्बुलेंस में लेटा मरीज सिर्फ एक मरीज नहीं था।

वह किसी मां का बेटा था...
किसी पिता का सहारा था...
किसी पत्नी की पूरी दुनिया था...
किसी बच्चे का भविष्य था...

जब कोई परिवार अस्पताल की तरफ दौड़ता है, तो वह सिर्फ इलाज नहीं ढूंढ रहा होता, वह अपने अपनों की जिंदगी बचाने की आखिरी उम्मीद ढूंढ रहा होता है।

💔 "एक वायरल वीडियो खत्म हो जाएगा, लेकिन इलाज के लिए संघर्ष कर रहे परिवारों का दर्द और उनकी आंखों में बसी दहशत शायद कभी खत्म नहीं होगी। क्योंकि अस्पताल में भर्ती हर मरीज सिर्फ एक नाम नहीं, किसी का पूरा संसार होता है।"

08/06/2026

फिलीपींस में आए विनाशकारी भूकंप ने लाखों लोगों को सदमे में डाल दिया है। कुछ ही सेकंड में कई घर मलबे में बदल गए, कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया और हजारों लोग बेघर हो गए। यह दर्द सिर्फ फिलीपींस का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का दर्द है। जब भी प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है, उसकी सबसे बड़ी कीमत आम और बेगुनाह लोग चुकाते हैं। जंगलों की कटाई, बढ़ता प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन दुनिया के लिए गंभीर चेतावनी हैं। हालांकि भूकंप पृथ्वी की प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन पर्यावरण के प्रति हमारी लापरवाही दुनिया को और अधिक संवेदनशील बना रही है। आज फिलीपींस के लिए दुआ कीजिए, उन बच्चों के लिए जो अपने माता-पिता से बिछड़ गए, उन माता-पिता के लिए जो अपने बच्चों को खो चुके हैं, और उन परिवारों के लिए जो मलबे के बीच अपने जीवन को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। 🙏💔🕯️

08/06/2026

वो मंच पर नाच रही थी। लोग उसे देख रहे थे, तालियां बजा रहे थे। लेकिन शायद किसी ने यह नहीं सोचा कि मंच पर खड़ी वह लड़की भी किसी मां की बेटी है। उसका काम लोगों का मनोरंजन करना था, किसी को उसकी मर्यादा तोड़ने का अधिकार देना नहीं।
दर्द इस बात का नहीं कि घटना मंच पर हुई, दर्द इस बात का है कि आज भी कुछ लोग महिलाओं को इंसान से ज्यादा एक वस्तु समझते हैं। सम्मान किसी पेशे का मोहताज नहीं होता। एक महिला चाहे घर संभाले, नौकरी करे या मंच पर प्रस्तुति दे, उसका सम्मान हर हाल में सुरक्षित रहना चाहिए।
किसी भी महिला की मुस्कान के पीछे कितनी मेहनत, कितने संघर्ष और कितने सपने छिपे होते हैं, यह शायद वही जानती है। इसलिए आइए, हम ऐसा समाज बनाएं जहां बेटियों को डर नहीं, सम्मान मिले... जहां तालियां उनके हुनर के लिए बजें, उनकी बेइज्जती के लिए नहीं।

07/06/2026

"पापा, मैं स्कूल से घर आ रही हूँ..."
शायद यह एक साधारण वाक्य है, लेकिन हर मां-बाप के लिए उनकी बेटी की सुरक्षित वापसी दुनिया की सबसे बड़ी खुशी होती है।
वाराणसी के शिवपुर क्षेत्र से सामने आई घटना ने एक बार फिर देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जब स्कूल से लौटती बेटियां भी खुद को सुरक्षित महसूस न करें, तो यह सिर्फ कानून का नहीं, इंसानियत का भी सवाल बन जाता है। एक बेटी के सपने, उसकी मुस्कान और उसका आत्मविश्वास किसी भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। अगर वही बेटियां डर के साये में जीने को मजबूर हों, तो हमें खुद से सवाल पूछना होगा कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं। इस वीडियो का उद्देश्य किसी राजनीति को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि बेटियों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है।"बेटी बचाओ, बच्चों को बचाओ, इंसानियत को बचाओ।"

01/06/2026

HN College, Kanpur, Uttar Pradesh कुछ बच्चे अपने सपनों की फोटोकॉपी करवाने गए थे…लेकिन वापस डर, दर्द और टूटे हुए सिस्टम की तस्वीर लेकर लौटे। नाले की स्लैब टूटी जरूर है…
लेकिन सच ये है कि इस देश में सबसे पहले गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के सपने टूटते हैं। हम जनता दिन-रात मेहनत करके टैक्स भरते हैं… ताकि हमारे बच्चों को सुरक्षित सड़कें मिलें, अच्छी शिक्षा मिले, मजबूत सिस्टम मिले। लेकिन बदले में क्या मिला…? टूटी सड़कें…पेपर लीक…बेरोजगारी…
और अब परीक्षा देने आए बच्चे नाले में गिर रहे हैं नेताओं के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं…और हमारे बच्चे यहां जान जोखिम में डालकर एक नौकरी के लिए लड़ रहे हैं। बहुत दर्द होता है ये सोचकर कि इस देश में गरीब का बच्चा पढ़ भी ले…तो सिस्टम उसे आगे बढ़ने नहीं देता।

27/05/2026

“पब्लिक को बवाल करने दो…”
कथित तौर पर CO संजय सिंह के नाम से वायरल हुए इस बयान ने सिर्फ सोशल मीडिया पर बहस नहीं छेड़ी, बल्कि लाखों आम लोगों के अंदर छुपे डर और दर्द को भी बाहर ला दिया। जनता पुलिस और प्रशासन को इसलिए सम्मान देती है क्योंकि उसे भरोसा होता है कि मुश्किल वक्त में कोई उसके साथ खड़ा होगा। लेकिन जब जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोग ही “दूर खड़े होकर देखने” जैसी बातें करते दिखाई दें, तब इंसान सिर्फ सिस्टम से नहीं… उम्मीद से भी हारने लगता है।
सरकारी अधिकारी जनता के सेवक कहलाते हैं, मालिक नहीं। वर्दी की असली ताकत हथियार या कुर्सी नहीं, बल्कि जनता का भरोसा होता है। अगर वही भरोसा टूट गया तो समाज के अंदर सिर्फ गुस्सा नहीं, खामोश डर भी पैदा होता है। आज दर्द सिर्फ एक वीडियो का नहीं है… दर्द उस आम आदमी का है जो हर दिन यह सोचकर जीता है कि शायद उसकी जान और उसकी आवाज़ इस सिस्टम में उतनी महत्वपूर्ण नहीं जितनी होनी चाहिए।

Address

Devli
Delhi
110062

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Manoj Choudhary posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Manoj Choudhary:

Share

Category