31/05/2026
दिल्ली के जहांगीरपुरी में अरबाज़ की हत्या हुई, गाज़ियाबाद में सूर्या चौहान की जान ले ली गई। दोनों मामलों में इंसान की मौत हुई, दोनों परिवारों ने अपना बेटा खोया। लेकिन कार्रवाई और मीडिया कवरेज को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एक तरफ़ यूपी में मुख्य आरोपी का एनकाउंटर हुआ, दूसरी तरफ़ दिल्ली में आरोपियों की गिरफ़्तारी हुई। फिर भी मीडिया का रवैया दोनों मामलों में अलग-अलग क्यों दिखाई देता है?
क्या इंसाफ़ और ख़बरों का पैमाना पीड़ित या आरोपी की पहचान देखकर तय होना चाहिए, या हर मामले को एक समान गंभीरता से देखा जाना चाहिए?
यही सवाल आज लोग पूछ रहे हैं।