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* राजस्थान की पीली सरसों का शुद्ध तेल उपलब्ध है।* सामान्य काली सरसों का शुद्ध तेल उपलब्ध है।* काली सरसों और पीली सरसों क...
18/04/2025

* राजस्थान की पीली सरसों का शुद्ध तेल उपलब्ध है।
* सामान्य काली सरसों का शुद्ध तेल उपलब्ध है।
* काली सरसों और पीली सरसों की 100% शुद्ध खल उचित दर पर उपलब्ध है।
* स्व निर्मित 100% शुद्ध गुड़ और शक्कर भी हर समय उपलब्ध हैं।
* सभी प्रकार के साबुत व पिसे हुए मसाले/बेसन/आटा आदि भी जल्द उपलब्ध।

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17/12/2020

सर्द हवाओं के झोंकों से बेखबर रात में यूपी गेट पर स्टेज के सामने लपेटी हुई दरी/कालीन का घोड़ा बना कर खेलता हुआ किसान .....

04/07/2020

FARMERS! WHAT TO DO IN THEIR FILEDS DURING THE MONTH OF JULY. DO SOME AGRONOMIC PRACTICES, FOLLOW CROP SUGGESTIONS, APPLY PROER DOSE OF NPUTS

22/06/2020

गेलार्डिया की फरवरी-मार्च में बुवाई करने पर फूल गर्मियों में, मई-जून में बुवाई करने पर बरसात में और सितम्बर-अक्टूब.....

21/06/2020

भारत में आ गई कोविड 19 वायरस की दवाई, कीमत कुल 103 रुपये, DGCI ने दी मंजूरी कोरोना वायरस से पूरी दुनिया पीड़ित है, उसके निदा.....

21/06/2020

धान के प्रमुख कीट तना भेदक (सिरपोफात्रा ईनसरटुल्स) – यह धान की फसल में लगने वाला सबसे प्रमुख कीट है, जो कि धान उगाये ज...

19/06/2020

गृह वाटिका (भाग 1) अच्छे स्वास्थ्य के साथ समय का सदुपयोग

हमारे शरीर की शक्ति, स्फूर्ति, वृद्धि तथा अनेक रोगों से बचाने की ताकत के लिये महत्वपूर्ण तत्व जैसे कार्बोहाईड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज लवणों की आवश्यकता होती है। भोजन को पौष्टिक, संतुलित तथा सस्ता बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की सब्जियों का खाने में उपयोग बहुत आवश्यक है। पौष्टिक एवं संतुलित भोजन के अभाव में हम कुपोषण से होने वाली बीमारियों जैसे शरीर में खून की कमी, दाँत व हडिडयों का कमजोर बनना, अंधापन, मुँह व जीभ में छाले, शारीरिक भागों की असन्तुलित बनावट, त्वचा का फटना, हाथ-पैरों की सूजन आदि के शिकार हो जाते हैं।
एक व्यक्ति को अपना भोजन पौष्टिक व संतुलित रखने के लिए कम से कम प्रतिदिन 125 ग्राम पत्तेदार सब्जियाँ, 100 ग्राम जड़ वाली सब्जियाँ तथा 75 ग्राम अन्य प्रकार की सब्जियां खानी चाहिएं परन्तु अभी तक भी सब्जी का प्रति व्यक्ति औसत उपभोग बहुत कम है। इस समस्या का समाधान यह है कि हम अपने घरों में या घरों के आस-पास खाली जगह में शाक-वाटिका अर्थात् किचन गार्डन बनाकर सब्जियाँ उगाएं। अगर घर में जगह उपलब्ध नहीं है तो कुछ सब्जियों को गमलों, डिब्बों आदि में छतों, बालकनियों, सीढियों आदि पर रखकर पैदा करें। ऐसा करने से आप मनपसंद पौष्टिक सब्जियाँ जो अधिक ताजी, स्वादिष्ट तथा विषैली दवाओं के असर से मुक्त होंगी, अपने भोजन में प्रयोग कर सकेगें। गृह वाटिका से आपके आस-पास का वातावरण भी प्रदूषण से बचेगा तथा आप सब्जियों पर आने वाले खर्च में भी कुछ कमी कर सकेंगे।
गृह वाटिका के लिये स्थान चयन - घर में अथवा घर के आस-पास उपलब्ध जगह में गृह-वाटिका बनाई जा सकती है परन्तु यह योजना बनाये जाने से पूर्व यह देख लें कि इस जगह में धूप आती हो। जल निकास अच्छा हो, पानी देने की सुविधा हो तथा यह स्थान आपकी रसोई तथा स्नानघर के निकट हो, जिससे इनका पानी गृह वाटिका में काम में लाया जा सके।
गृह वाटिका का आकार - यह परिवार तथा उपलब्ध क्षेत्र पर निर्भर करता है। 5-6 सदस्यों के औसत परिवार को वर्षभर सब्जियाँ प्रदान करने के लिये लगभग 200 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में गृह वाटिका पर्याप्त है। उपलब्ध जगह एवं परिवार की आवश्यकता को ध्यान में रखकर बड़े, मध्यम, छोटे एवं बहुत छोटे आकार की गृह वाटिका बनाई जा सकती है।
बड़े आकार की गृह वाटिका में सभी प्रकार की सब्जियाँ उगाई जा सकती हैं। कुछ फल वाले वृक्ष जैसे आम की आम्रपाली किस्म, अमरुद - इलाहबाद सफेदा, एल-49, पपीता - पूसा नन्ना, अंगूर - पूसा सीड लैस, ब्यूटी सीड लैस व नींबू तथा अनार भी उगाये जा सकते हैं।
मध्यम आकार की गृह वाटिका में शकरकन्द, आलू, प्याज, कद्दू, तरबूज, खरबूज आदि को छोड़कर सभी सब्जियाँ तथा जगह की उपलब्धता के अनुसार अंगूर, नींबू, तथा केला भी उगाया जा सकता है।
छोटे आकार वाली गृह वाटिका जहाँ 2 मी. x 3 मी. क्षेत्र के 4-5 प्लॉट ही उपलबध हों, कम समय में उपज देने वाली सब्जियाँ जैसे टमाटर, बैंगन, मूली, गाजर, पालक, मेथी, धनिया, मिर्च, भिन्डी आदि ही उगायी जानी चाहियें।
बहुत छोटे आकार की गृह वाटिकाओं में जहाँ एक या दो प्लॉट (2 मी. x 3 मी.) ही उपलब्ध हों बहुत चुनी हुई सब्जियाँ लेकिन अत्यन्त पोषक जैसे अमरेन्थस, पालक, मेथी, मूली, गाजर, टमाटर, फ्रैंचबीन, पुदीना, मिर्च, शलजम, धनिया ही उगाया जाना चाहिए।
डिब्बे या गमलों में उगाये जाने के लिये टमाटर, बैंगन, मिर्च, शिमला मिर्च, मूली, गाजर, मेथी, पालक, भिन्डी, ग्वार, ब्रोकली, आदि सब्जियाँ उपयुक्त हैं।
इन डिब्बों तथा गमलों की तली में छेद होना आवश्यक है। जिससे आवश्यकता से अधिक पानी निकल जाए। इन डिब्बों को टैरेस, विन्डोसिल, बालकनी, बरामदा तथा छत पर रखा जा सकता है।
गृह वाटिका का रेखांकन - आमतौर पर घर का पिछवाड़ा जहाँ सारे दिन धूप रहती है तथा घर के सभी सदस्य सुबह-शाम गृह वाटिका में काम कर सकें, ऐसे स्थान का चयन किया जाता है। गृह वाटिका, स्थान उपलब्धता के अनुसार वर्गाकार, आयताकार हो सकती है। फिर भी आयताकार वाटिका अच्छी मानी जाती है। गृह वाटिका के किसी छायादार कोने में कम्पोस्ट के लिए गड्ढा रखा जाता है। जिसमें पौधों की जड़ें, तना, पत्तियाँ एकत्रित की जा सकें जो बाद में सड़कर अच्छा उर्वरक खाद बन जाती है। वाटिका के बीच से रास्ता तथा सिंचाई की नाली रखते हैं। सब्जियों के प्लॉट से जुड़ता हुआ जल निकास का प्रावधान भी रखा जाता है। जिससे वर्षा ऋतु में अनावश्यक पानी गृह वाटिका से बाहर निकाला जा सके। बेल वाली सब्जियों को दीवार पर चढ़ा दिया जाता है। यदि गृह वाटिका का आकार बड़ा है तो फल वाले वृक्ष भी लगाये जा सकते हैं। जिन्हें उत्तर की तरफ लगाना चाहिए। जिससे उनकी छाया सब्जियों को प्रभावित न कर सके।
गृह वाटिका के लिये आवश्यक सामग्री
बीज - उन्नत किस्मों के अच्छे बीज सफल वाटिका बनाने में पहली महत्वपूर्ण आवश्यकता है। अच्छे बीज राष्ट्रीय बीज निगम, राज्य बीज निगम, कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि विश्वविद्यालय या उद्यान विभाग से प्राप्त किये जा सकते हैं।
खाद एवं उर्वरक - गोबर या कम्पोस्ट खाद, केंचुए की खाद, यूरिया, सुपर फास्फेट तथा म्यूरेट ऑफ पोटाश।
यंत्र - फावड़ा, खुर्पी, फव्वारा, ओकरी, बाल्टी, सुतली, सिकेटियर, छोटा स्प्रेयर आदि।
दवाएं - कीटनाशी एवं फफूंदीनाशक दवाओं की आवश्यकता कीड़े व बीमारियों का प्रकोप खत्म करने के लिए कई बार होती है। कीटनाशक दवा, एमपी डस्ट, राख, इमिडाक्लोरोप्रिड, साफ, रोगोर तथा फफूंदीनाशक बावस्टीन के साथ जैविक खाद का प्रयोग प्रभावी रहता है।

सब्जियों से प्राप्त पोषक तत्व
कार्बोहाईड्रेट - आलू, शकरकंद, अरबी, चुकन्दर आदि।
प्रोटीन - मटर, सेम, फ्रेन्च बीन, लोबिया, ग्वार, चौलाई, बांकला आदि।
विटामिन ए - गाजर, पालक, शलजम, चौलाई, टमाटर, शकरकंद, पीला कद्दू, पत्तागोभी, मेथी, धनिया आदि।
विटामिन बी - मटर, सेम, लहसुन, अरबी आदि।
विटामिन सी - टमाटर, शलजम, हरी मिर्च, फूलगोभी, गाँठ गोभी, करेला, मूली का पत्तियाँ, चौलाई साग आदि।
कैल्शियम - चुकन्दर, चौलाई, मेथी, शलजम की पत्तियाँ, धनिया, सीताफल, कददु, प्याज, टमाटर आदि।
पोटेशियम - शकरकंद, आलू, करेला, मूली, सेम आदि।
फॉस्फोरस - लहसुन, मटर, करेला, आदि।
आयरन - कोला, चौलाई, मेथी, पुदीना, पालक, मटर आदि।
गृह वाटिका में सफलतापूर्वक सब्जियों को उगाने के लिये यह जानना भी आवश्यक है कि कौन से मौसम में कौन-कौन सी सब्जियाँ उगायी जा सकती हैं। उत्तरी भारत के मैदानी भागांे में सब्जियाँ उगाने के तीन प्रमुख मौसम हैं तथा इसमें उगाई जाने वाली सब्जियां इस प्रकार हैं -
1. जाड़े या रबी का मौसम (अक्टूबर से फरवरी तक) - आलू, फूल गोभी तथा पत्ता गोभी, ब्रोकली, ब्रुसल्स-स्प्राउट, शलजम, गाजर चुकन्दर, प्याज, लहसुन, बांकला, सेलरी, पारस्ले, मटर, पालक, मैथी, सरसों टमाटर आदि।
2. गर्मी का मौसम (मार्च से जून) - भिन्डी, लोबिया, ग्वार, टमाटर, बैंगन, मिर्च, मीठी मिर्च, सेम, फ्रैंचबीन, कद्दु, लौकी, करेला, तोरी, खीरा, खरबूज, तरबूज, पेठा, ककड़ी, परवल, चिचिड़ा, चौलाई, अरबी, कुल्फा, गरमी की मूली, पालक, एस्पेरेगस, आदि।
3. वर्षा या खरीफ का मौसम (जुलाई से अक्टूबर तक) - भिन्डी, लोबिया, ग्वार, मिर्च, सेम, कददु, तोरी, करेला, खीरा, टिन्डा, परवल, बरसाती मूली, बैंगन, टमाटर, शकरकंद, अरबी, चौलाई, कुल्फा, आदि।

15/04/2020

अब सोलर पैनल से रात में भी बनेगी बिजली

आप सभी सोलर पैनल के बारे में तो जानते ही होंगे, आज कल बहुत से लोग अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवा रहे हैं। इस पैनल से सूरज की ऊर्जा की मदद से बिजली बनती है और इसका इस्तेमाल हम घर में बिजली उपकरण चलाने के लिए करते हैं। लेकिन आज कल एक नई तरह के सोलर पैनल की ख़बरें सामने आ रही हैं।

इन नई तकनीक के पैनल्स को एंटी सोलर पैनल कहा जाता है। यानि इनका बिजली बनाने का तरीका आम सोलर पैनल से बिलकुल उल्टा है। इसी कारण इनका नाम एंटी सोलर पैनल रखा गया है। आपको बता दें कि इन एंटी सोलर पैनल्स को कैलिफोर्निया की एक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया है।

इस सोलर पैनल की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इस सोलर पैनल को बिजली बनाने के लिए सूरज की रौशनी की जरूरत नहीं है बल्कि ये बिजली बनाने का काम रात के अँधेरे में करते हैं। यानि अगर सोलर पैनल और एंटी सोलर पैनलस को एकसाथ लगाकर कोई भी बड़ा सेटअप तैयार किया जाता है तो वहां पर 24 घंटे बिजली बनाई जा सकती है।

दिन में सोलर पैनल बिजली बनाएंगे और रात में एंटी सोलर पैनल इस काम को करेंगे। ये पैनल पूरा महीना और पूरा साल लगातार 24 घंटे बिजली बनाते रहेंगे। हलाकि फ़िलहाल इन पैनल्स को अच्छी तरह से टेस्ट किया जा रहा है और इनकी बिजली बनाने की क्षमता को भी धीरे धीरे बढ़ाया जाएगा। और उसके बाद इन्हे मार्किट में लांच कर दिया जाएगा।

15/04/2020

लॉकडाउन 2: किसानों को 3 दिन के भीतर मिलेगा फसलों का दाम

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि किसानों से खरीदी गई फसलों के दाम का भुगतान महज तीन दिन के भीतर किया जाएगा और राज्यों से फसल खरीद की समुचित व्यवस्था करने को कहा गया है। कोरोनावायरस की रोकथाम के मद्देनजर देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद मध्यप्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद बुधवार से शुरू हो रही है। हरियाणा ने पहले सरसों और बाद में 20 अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू करने की घोषणा की है। कैलाश चौधरी ने आईएएनएस से कहा, “कोरोना महामारी के संकट की घड़ी में केंद्र सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनके हित में कई फैसले लिए गए हैं”'

उन्होंने कहा कि पहले जहां फसलों की खरीद के बाद किसानों को फसल के दाम के भुगतान में महीने भर का विलंब हो जाता था, वहां अब महज तीन दिनों के भीतर उनको फसलों का दाम मिलेगा और इस संबंध में राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे इसकी रिपोर्ट जल्द भेजें। चैधरी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने कहा है कि किसानों का कोई काम नहीं रूकेगा और लॉकडाउन के दौरान किसानों से जुड़े तमाम कायोर्ं को चालू रखने की छूट दी गई है।”

उन्होंने कहा कि रबी फसलों की खरीद सुचारू ढंग से चलाने के लिए सरकार ने राज्यों से कहा कि वे पंचायत स्तर पर भी फसल की खरीद की व्यवस्था करें और जिस एजेंसी से खरीद करवाना चाहें करवाएं, मगर सामाजिक दूरी के निदेशोर्ं का पालन हो क्योंकि कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए यह जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी फसल बेचने में कोई दिक्कत न हो इसके लिए केंदर सरकार ने चना और सरसों की खरीद की रोजाना लिमिट 25 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल कर दी है। मतलब, जहां एक किसान से पहले एक दिन में 25 क्विंटल की खरीद की जाती थी, वहां अब 40 क्विंटल तक खरीदी जाएगी।

14/04/2020

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Kheti ka Doctor is heartily dedicated for development of farming community

14/04/2020

महिलाओं के जनधन खातों में भेजी गई राशि को लेकर सरकार ने कही ये बात, आपके लिए जानना है जरूरी

महिलाओं के जनधन खातों में भेजे गए पैसे पूरी तरह सुरक्षित हैं और कोई भी खाताधारक इसे अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से कभी भी निकाल सकता है। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को यह बात कही। मंत्रालय ने जनधन खातों में भेजे गए पैसे को लेकर अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि खाताधारकों के पैसे पूरी तरह सुरक्षित हैं। उल्लेखनीय है कि इस तरह की अफवाह फैल रही थी कि अगर इन पैसों को तत्काल नहीं निकाला गया तो सरकार इसे वापस ले लेगी।

वित्त मंत्रालय निर्मला सीतारमण ने 20.5 करोड़ महिला जनधन खाताधारकों के खाते में अगले तीन माह तक हर माह 500 रुपये भेजने की घोषणा पिछले महीने की थी। देशभर में लागू लॉकडाउन के दौरान लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए वित्त मंत्री ने इस सहायता राशि को महिला जनधन खाताधारकों के खातों में सीधे भेजने की घोषणा की।

वित्तीय सेवाओं के सचिव ने देर रात ट्वीट कर कहा, ''हम यह आश्वस्त करना चाहते हैं कि जनधन खातों में जमा किए गए रुपये पूरी तरह सुरक्षित हैं। खाताधारक बैंक की शाखा या एटीएम से कभी भी पैसे निकाल सकते हैं। पैसे की सेफ्टी को लेकर अफवाहों पर ध्यान मत दीजिए।''

14/04/2020

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की आज के संबोधन की प्रमुख सात बातों पर ध्यान दें:-
1 - पहली बात
अपने घर के बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें, विशेषकर ऐसे व्यक्ति जिन्हें पुरानी बीमारी हो, उनकी हमें Extra Care करनी है, उन्हें कोरोना से बहुत बचाकर रखना है।

2 - दूसरी बात-
लॉकडाउन और Social Distancing की लक्ष्मण रेखा का पूरी तरह पालन करें , घर में बने फेसकवर या मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।

3 - तीसरी बात-
अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए, आयुष मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें,
गर्म पानी, काढ़ा आदि का निरंतर सेवन करें।

4 - चौथी बात-
कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने में मदद करने के लिए आरोग्य सेतु मोबाइल App जरूर डाउनलोड करें। दूसरों को भी इस App को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करें।

5- पांचवी बात-
जितना हो सके उतने गरीब परिवार की देखरेख करें, उनके भोजन की आवश्यकता पूरी करें।

6- छठी बात-
आप अपने व्यवसाय, अपने उद्योग में अपने साथ काम करे लोगों के प्रति संवेदना रखें,
किसी को नौकरी से न निकालें।

7 - सातवीं बात-
देश के कोरोना योद्धाओं, हमारे डॉक्टर- नर्स, सफाई कर्मी, पुलिसकर्मी का पूरा सम्मान करें ।

👉 पूरी निष्ठा के साथ 3 मई तक #लॉकडाउन के नियमों का पालन करें,
जहां हैं,
वहां रहें,
सुरक्षित रहें।

वयं राष्ट्रे जागृयाम”,
हम सभी राष्ट्र को जीवंत और जागृत बनाए रखेंगे।

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