19/06/2020
गृह वाटिका (भाग 1) अच्छे स्वास्थ्य के साथ समय का सदुपयोग
हमारे शरीर की शक्ति, स्फूर्ति, वृद्धि तथा अनेक रोगों से बचाने की ताकत के लिये महत्वपूर्ण तत्व जैसे कार्बोहाईड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज लवणों की आवश्यकता होती है। भोजन को पौष्टिक, संतुलित तथा सस्ता बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की सब्जियों का खाने में उपयोग बहुत आवश्यक है। पौष्टिक एवं संतुलित भोजन के अभाव में हम कुपोषण से होने वाली बीमारियों जैसे शरीर में खून की कमी, दाँत व हडिडयों का कमजोर बनना, अंधापन, मुँह व जीभ में छाले, शारीरिक भागों की असन्तुलित बनावट, त्वचा का फटना, हाथ-पैरों की सूजन आदि के शिकार हो जाते हैं।
एक व्यक्ति को अपना भोजन पौष्टिक व संतुलित रखने के लिए कम से कम प्रतिदिन 125 ग्राम पत्तेदार सब्जियाँ, 100 ग्राम जड़ वाली सब्जियाँ तथा 75 ग्राम अन्य प्रकार की सब्जियां खानी चाहिएं परन्तु अभी तक भी सब्जी का प्रति व्यक्ति औसत उपभोग बहुत कम है। इस समस्या का समाधान यह है कि हम अपने घरों में या घरों के आस-पास खाली जगह में शाक-वाटिका अर्थात् किचन गार्डन बनाकर सब्जियाँ उगाएं। अगर घर में जगह उपलब्ध नहीं है तो कुछ सब्जियों को गमलों, डिब्बों आदि में छतों, बालकनियों, सीढियों आदि पर रखकर पैदा करें। ऐसा करने से आप मनपसंद पौष्टिक सब्जियाँ जो अधिक ताजी, स्वादिष्ट तथा विषैली दवाओं के असर से मुक्त होंगी, अपने भोजन में प्रयोग कर सकेगें। गृह वाटिका से आपके आस-पास का वातावरण भी प्रदूषण से बचेगा तथा आप सब्जियों पर आने वाले खर्च में भी कुछ कमी कर सकेंगे।
गृह वाटिका के लिये स्थान चयन - घर में अथवा घर के आस-पास उपलब्ध जगह में गृह-वाटिका बनाई जा सकती है परन्तु यह योजना बनाये जाने से पूर्व यह देख लें कि इस जगह में धूप आती हो। जल निकास अच्छा हो, पानी देने की सुविधा हो तथा यह स्थान आपकी रसोई तथा स्नानघर के निकट हो, जिससे इनका पानी गृह वाटिका में काम में लाया जा सके।
गृह वाटिका का आकार - यह परिवार तथा उपलब्ध क्षेत्र पर निर्भर करता है। 5-6 सदस्यों के औसत परिवार को वर्षभर सब्जियाँ प्रदान करने के लिये लगभग 200 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में गृह वाटिका पर्याप्त है। उपलब्ध जगह एवं परिवार की आवश्यकता को ध्यान में रखकर बड़े, मध्यम, छोटे एवं बहुत छोटे आकार की गृह वाटिका बनाई जा सकती है।
बड़े आकार की गृह वाटिका में सभी प्रकार की सब्जियाँ उगाई जा सकती हैं। कुछ फल वाले वृक्ष जैसे आम की आम्रपाली किस्म, अमरुद - इलाहबाद सफेदा, एल-49, पपीता - पूसा नन्ना, अंगूर - पूसा सीड लैस, ब्यूटी सीड लैस व नींबू तथा अनार भी उगाये जा सकते हैं।
मध्यम आकार की गृह वाटिका में शकरकन्द, आलू, प्याज, कद्दू, तरबूज, खरबूज आदि को छोड़कर सभी सब्जियाँ तथा जगह की उपलब्धता के अनुसार अंगूर, नींबू, तथा केला भी उगाया जा सकता है।
छोटे आकार वाली गृह वाटिका जहाँ 2 मी. x 3 मी. क्षेत्र के 4-5 प्लॉट ही उपलबध हों, कम समय में उपज देने वाली सब्जियाँ जैसे टमाटर, बैंगन, मूली, गाजर, पालक, मेथी, धनिया, मिर्च, भिन्डी आदि ही उगायी जानी चाहियें।
बहुत छोटे आकार की गृह वाटिकाओं में जहाँ एक या दो प्लॉट (2 मी. x 3 मी.) ही उपलब्ध हों बहुत चुनी हुई सब्जियाँ लेकिन अत्यन्त पोषक जैसे अमरेन्थस, पालक, मेथी, मूली, गाजर, टमाटर, फ्रैंचबीन, पुदीना, मिर्च, शलजम, धनिया ही उगाया जाना चाहिए।
डिब्बे या गमलों में उगाये जाने के लिये टमाटर, बैंगन, मिर्च, शिमला मिर्च, मूली, गाजर, मेथी, पालक, भिन्डी, ग्वार, ब्रोकली, आदि सब्जियाँ उपयुक्त हैं।
इन डिब्बों तथा गमलों की तली में छेद होना आवश्यक है। जिससे आवश्यकता से अधिक पानी निकल जाए। इन डिब्बों को टैरेस, विन्डोसिल, बालकनी, बरामदा तथा छत पर रखा जा सकता है।
गृह वाटिका का रेखांकन - आमतौर पर घर का पिछवाड़ा जहाँ सारे दिन धूप रहती है तथा घर के सभी सदस्य सुबह-शाम गृह वाटिका में काम कर सकें, ऐसे स्थान का चयन किया जाता है। गृह वाटिका, स्थान उपलब्धता के अनुसार वर्गाकार, आयताकार हो सकती है। फिर भी आयताकार वाटिका अच्छी मानी जाती है। गृह वाटिका के किसी छायादार कोने में कम्पोस्ट के लिए गड्ढा रखा जाता है। जिसमें पौधों की जड़ें, तना, पत्तियाँ एकत्रित की जा सकें जो बाद में सड़कर अच्छा उर्वरक खाद बन जाती है। वाटिका के बीच से रास्ता तथा सिंचाई की नाली रखते हैं। सब्जियों के प्लॉट से जुड़ता हुआ जल निकास का प्रावधान भी रखा जाता है। जिससे वर्षा ऋतु में अनावश्यक पानी गृह वाटिका से बाहर निकाला जा सके। बेल वाली सब्जियों को दीवार पर चढ़ा दिया जाता है। यदि गृह वाटिका का आकार बड़ा है तो फल वाले वृक्ष भी लगाये जा सकते हैं। जिन्हें उत्तर की तरफ लगाना चाहिए। जिससे उनकी छाया सब्जियों को प्रभावित न कर सके।
गृह वाटिका के लिये आवश्यक सामग्री
बीज - उन्नत किस्मों के अच्छे बीज सफल वाटिका बनाने में पहली महत्वपूर्ण आवश्यकता है। अच्छे बीज राष्ट्रीय बीज निगम, राज्य बीज निगम, कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि विश्वविद्यालय या उद्यान विभाग से प्राप्त किये जा सकते हैं।
खाद एवं उर्वरक - गोबर या कम्पोस्ट खाद, केंचुए की खाद, यूरिया, सुपर फास्फेट तथा म्यूरेट ऑफ पोटाश।
यंत्र - फावड़ा, खुर्पी, फव्वारा, ओकरी, बाल्टी, सुतली, सिकेटियर, छोटा स्प्रेयर आदि।
दवाएं - कीटनाशी एवं फफूंदीनाशक दवाओं की आवश्यकता कीड़े व बीमारियों का प्रकोप खत्म करने के लिए कई बार होती है। कीटनाशक दवा, एमपी डस्ट, राख, इमिडाक्लोरोप्रिड, साफ, रोगोर तथा फफूंदीनाशक बावस्टीन के साथ जैविक खाद का प्रयोग प्रभावी रहता है।
सब्जियों से प्राप्त पोषक तत्व
कार्बोहाईड्रेट - आलू, शकरकंद, अरबी, चुकन्दर आदि।
प्रोटीन - मटर, सेम, फ्रेन्च बीन, लोबिया, ग्वार, चौलाई, बांकला आदि।
विटामिन ए - गाजर, पालक, शलजम, चौलाई, टमाटर, शकरकंद, पीला कद्दू, पत्तागोभी, मेथी, धनिया आदि।
विटामिन बी - मटर, सेम, लहसुन, अरबी आदि।
विटामिन सी - टमाटर, शलजम, हरी मिर्च, फूलगोभी, गाँठ गोभी, करेला, मूली का पत्तियाँ, चौलाई साग आदि।
कैल्शियम - चुकन्दर, चौलाई, मेथी, शलजम की पत्तियाँ, धनिया, सीताफल, कददु, प्याज, टमाटर आदि।
पोटेशियम - शकरकंद, आलू, करेला, मूली, सेम आदि।
फॉस्फोरस - लहसुन, मटर, करेला, आदि।
आयरन - कोला, चौलाई, मेथी, पुदीना, पालक, मटर आदि।
गृह वाटिका में सफलतापूर्वक सब्जियों को उगाने के लिये यह जानना भी आवश्यक है कि कौन से मौसम में कौन-कौन सी सब्जियाँ उगायी जा सकती हैं। उत्तरी भारत के मैदानी भागांे में सब्जियाँ उगाने के तीन प्रमुख मौसम हैं तथा इसमें उगाई जाने वाली सब्जियां इस प्रकार हैं -
1. जाड़े या रबी का मौसम (अक्टूबर से फरवरी तक) - आलू, फूल गोभी तथा पत्ता गोभी, ब्रोकली, ब्रुसल्स-स्प्राउट, शलजम, गाजर चुकन्दर, प्याज, लहसुन, बांकला, सेलरी, पारस्ले, मटर, पालक, मैथी, सरसों टमाटर आदि।
2. गर्मी का मौसम (मार्च से जून) - भिन्डी, लोबिया, ग्वार, टमाटर, बैंगन, मिर्च, मीठी मिर्च, सेम, फ्रैंचबीन, कद्दु, लौकी, करेला, तोरी, खीरा, खरबूज, तरबूज, पेठा, ककड़ी, परवल, चिचिड़ा, चौलाई, अरबी, कुल्फा, गरमी की मूली, पालक, एस्पेरेगस, आदि।
3. वर्षा या खरीफ का मौसम (जुलाई से अक्टूबर तक) - भिन्डी, लोबिया, ग्वार, मिर्च, सेम, कददु, तोरी, करेला, खीरा, टिन्डा, परवल, बरसाती मूली, बैंगन, टमाटर, शकरकंद, अरबी, चौलाई, कुल्फा, आदि।