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⚖️ NEET-UG Exam Case: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला— 21 जून की दोबारा परीक्षा 'पेन-पेपर मोड' में ही होगी; पुणे के शिक्षक स...
02/06/2026

⚖️ NEET-UG Exam Case: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला— 21 जून की दोबारा परीक्षा 'पेन-पेपर मोड' में ही होगी; पुणे के शिक्षक समेत 3 आरोपी जेल भेजे गए

नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट और विशेष सीबीआई अदालत से दो बेहद बड़े अपडेट सामने आए हैं।

एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट ने आगामी 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा (Re-exam) के मोड को बदलने से साफ इनकार कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने पेपर लीक साजिश में शामिल पुणे के शिक्षक और डॉक्टर समेत तीन मुख्य आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया है।

💻 'कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट' (CBT) की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई

आरजेडी (RJD) सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दाखिल याचिका पर सोमवार को न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की।

याचिकाकर्ता के वकील सत्यम सिंह राजपूत ने दलील दी थी कि पेपर लीक रोकने के लिए 21 जून की परीक्षा पेन-पेपर (OMR) के बजाय कंप्यूटर बेस्ड मोड (CBT) में कराई जानी चाहिए।

व्यावहारिक दिक्कतें समझें: सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा, "परीक्षा आयोजित करने वाली अथॉरिटीज (NTA) की व्यावहारिक दिक्कतों को समझिए।

वे पहले से ही व्यवस्था में कई तरह के बदलाव कर रहे हैं। इतने कम समय में मोड बदलना संभव नहीं है।"

जुलाई तक टली सुनवाई: कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मुख्य याचिका पर अगली सुनवाई गर्मियों की छुट्टियों के बाद जुलाई 2026 में तय की है।

केंद्र सरकार को पहले ही हलफनामा देकर यह बताने का निर्देश दिया जा चुका है कि भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए क्या कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

याद दिला दें: 3 मई 2026 को हुई नीट-यूजी की मूल परीक्षा पेपर लीक के कारण 12 मई को निरस्त कर दी गई थी, जो अब 21 जून 2026 को दोबारा होने जा रही है।

👮 पुणे के शिक्षक और लातूर के डॉक्टर समेत 3 आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में
इधर, दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित सीबीआई विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय गुप्ता ने पेपर लीक मामले के तीन हाई-प्रोफाइल आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया है:

तेजस हर्षद कुमार शाह: पुणे के रहने वाले भौतिकी (Physics) के शिक्षक, जिन पर छात्रों को लीक पेपर मुहैया कराने का आरोप है।

डॉ. मनोज शिरुरे: महाराष्ट्र के लातूर के रहने वाले बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician)।

मनीषा संजय हवलदार: एनटीए (NTA) से संबद्ध भौतिकी की लेक्चरर।

📄 सीबीआई का संगीन आरोप: सीबीआई के अनुसार, लेक्चरर मनीषा हवलदार ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची थी।

उन्होंने बिना किसी अधिकृत अनुमति के गोपनीय नीट-यूजी प्रश्नपत्र को अपने पास रखा और फिर मोटी रकम (धन) के बदले इसे अन्य आरोपियों और पुणे के शिक्षक तेजस शाह के साथ साझा किया।

इस राष्ट्रीय परीक्षा धांधली मामले में सीबीआई अब तक 13 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, और जेल भेजे गए इन तीनों आरोपियों से आगे की पूछताछ के लिए कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

LPG Price Hike: बिहार में कमर्शियल गैस सिलिंडर महंगा, 5 किलो वाले Cylinder के भी बढ़े दामबिहार और देश के अन्य राज्यों के...
02/06/2026

LPG Price Hike: बिहार में कमर्शियल गैस सिलिंडर महंगा, 5 किलो वाले Cylinder के भी बढ़े दाम

बिहार और देश के अन्य राज्यों के व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर है। जून महीने की शुरुआत के साथ ही कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर (Commercial LPG Cylinder) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे होटल, रेस्तरां और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों को महंगाई का नया झटका लगा है।

राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस सिलिंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

📈 पटना और दिल्ली में कमर्शियल LPG के नए रेट (19 KG)

तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी की गई नई दरों के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलिंडर के दाम इस प्रकार हैं:

पटना में बढ़ोतरी: बिहार की राजधानी पटना में कमर्शियल सिलिंडर ₹53.50 महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद अब पटना में इसकी कीमत ₹3,414.50 पर पहुंच गई है।

दिल्ली में बढ़ोतरी: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस सिलिंडर के दाम में ₹42 का इजाफा हुआ है, जिसके बाद यहां नया रेट ₹3,113.50 हो गया है।

🍼 छोटे 'छोटू' (5 KG) सिलिंडर के भी बढ़े दाम

प्रवासी मजदूरों, छात्रों और छोटे दुकानदारों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलिंडर पर भी महंगाई की मार पड़ी है:

इस छोटे सिलिंडर की कीमत में ₹11 की बढ़ोतरी की गई है।

अब बाजार में इसकी नई कीमत ₹821.50 हो गई है, जिससे कम बजट वाले उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

🍽️ आम जनता पर क्या होगा असर?

शादी-विवाह के इस सीजन में कैटरिंग, हलवाई और मिठाई कारोबारियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

व्यवसायियों का कहना है कि खाद्य सामग्री और बिजली के बढ़ते दामों के बीच गैस का महंगा होना उनकी संचालन लागत (Operating Cost) को और बढ़ा देगा।

यदि कीमतें इसी तरह बनी रहीं, तो रेस्तरां, ढाबों और शादियों में बाहर खाना-पीना महंगा हो सकता है।

✈️ एविएशन सेक्टर के लिए राहत: ATF हुआ सस्ता

एक तरफ जहां कमर्शियल गैस के दाम बढ़े हैं, वहीं दूसरी तरफ विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) के लिए बड़ी राहत की खबर है:

अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में 27% की भारी कटौती की गई है।

इस कटौती के बाद अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को एटीएफ 1,100 डॉलर प्रति किलोलीटर की दर से मिलेगा, जिससे हवाई किराये में स्थिरता आने की उम्मीद है।

📊 नई कीमतें: एक नजर में

कमर्शियल LPG (19 किग्रा), पटना: ₹3,414.50 (₹53.50 महंगा)

कमर्शियल LPG (19 किग्रा), दिल्ली: ₹3,113.50 (₹42 महंगा)

FTL/छोटू सिलिंडर (5 किग्रा): ₹821.50 (₹11 महंगा)

घरेलू LPG (14.2 किग्रा): कोई बदलाव नहीं (मार्च 2026 से कीमतें स्थिर)

अंतरराष्ट्रीय ATF: 27% की भारी कटौती

📝 NEET-UG विवाद: "जब CBT मोड का सुझाव था, तो अमल क्यों नहीं हुआ?" — संसदीय समिति ने NTA को घेरा, 2027 से कंप्यूटर बेस्ड ...
02/06/2026

📝 NEET-UG विवाद: "जब CBT मोड का सुझाव था, तो अमल क्यों नहीं हुआ?" — संसदीय समिति ने NTA को घेरा, 2027 से कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट की तैयारी

नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक मामले को लेकर बनी शिक्षा मंत्रालय की संसदीय स्थाई समिति ने सोमवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर तीखे सवाल दागे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुवाई वाली इस समिति ने एनटीए से पूछा कि वर्ष 2024 के विवाद के बाद जब हाई-पावर कमेटी ने परीक्षा को CBT (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) मोड में कराने की सिफारिश की थी, तो उस पर अब तक अमल क्यों नहीं किया गया?

इस सवाल पर एनटीए के अधिकारियों ने कोई सीधा स्पष्टीकरण तो नहीं दिया, लेकिन एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि वे वर्ष 2027 (अगले साल) से नीट-यूजी परीक्षा को पूरी तरह सीबीटी (CBT) मोड में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे हैं।

📄 "पेपर लीक नहीं, सिस्टम कॉम्प्रोमाइज हुआ" — NTA की दलील पर आपत्ति

सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान पेपर लीक के आरोपों पर एनटीए ने एक बार फिर अपना पुराना रुख दोहराया, जिस पर सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई:

एनटीए का दावा: अधिकारियों ने कहा कि मूल प्रश्नपत्र (Original Paper) बाहर नहीं आया था, बल्कि 'सिस्टम कॉम्प्रोमाइज' हुआ था जिसके कारण परीक्षा के कुछ प्रश्न लीक हुए। चूंकि मामला अभी सीबीआई (CBI) के पास है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले इसे 'पेपर लीक' मानना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा।

विपक्ष का पलटवार: समिति के सदस्यों ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि जिसे एजेंसी 'सिस्टम कॉम्प्रोमाइज' कह रही है, उसका सीधा असर भी छात्रों के भविष्य पर पेपर लीक जैसा ही हुआ है। कई कड़े सवालों पर एनटीए के अधिकारियों की चुप्पी भी देखने को मिली।

📅 21 जून की दोबारा परीक्षा पर टिकी नजरें

एनटीए ने संसदीय समिति को आश्वस्त किया कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान 21 जून 2026 को होने वाली नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा (Re-exam) को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने पर है।

मोड में बदलाव नहीं: आगामी 21 जून की यह परीक्षा पुराने ढर्रे यानी पेन-पेपर (OMR) मोड में ही आयोजित की जाएगी, क्योंकि इतनी जल्दी सीबीटी मोड के लिए देशव्यापी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना व्यावहारिक नहीं था।

पीएम की सीधी नजर: बैठक के दौरान दिग्विजय सिंह ने सॉलिसिटर जनरल के हवाले से बताया कि छात्रों के व्यापक हितों को देखते हुए प्रधानमंत्री स्वयं व्यक्तिगत रूप से 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा की तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं।

🏛️ बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक

सेंसिटिव मुद्दे को लेकर समिति के भीतर भी राजनीतिक गरमाहट देखने को मिली:

बीजेपी सांसदों की आपत्ति: सत्ता पक्ष के सदस्यों ने महज 15 दिनों के भीतर दोबारा बैठक बुलाए जाने पर सवाल खड़े किए।

उनका आरोप था कि यह छात्रों और अभिभावकों से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय है, इसलिए इस पर बार-बार बैठकें बुलाकर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।

अध्यक्ष का जवाब: समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि यहां कोई राजनीति नहीं हो रही है, बल्कि समिति का एकमात्र उद्देश्य देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की व्यवस्था को पूरी तरह त्रुटिहीन (Error-free) बनाना है।

🔍 आज 'CBSE' की बारी: ओएसएम (OSM) और डेटा ब्रीच पर होगी खिंचाई

शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी यह संसदीय समिति आज यानी मंगलवार (2 जून 2026) को एक और बड़ी बैठक करने जा रही है, जिसमें सीबीएसई (CBSE) के अध्यक्ष और शिक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया गया है:

OSM पर सवाल: 12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए लागू की गई नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में आई गड़बड़ियों पर सीबीएसई से जवाब मांगा जाएगा।

डेटा लीक पर घेरा: 'ऑन-मार्क' पोर्टल और एडब्ल्यूएस (AWS) क्लाउड स्टोरेज में हुई सुरक्षा चूक (Data Breach), जिसके कारण लाखों छात्रों की कॉपियां पब्लिक डोमेन में आ गईं, उस पर बोर्ड की जवाबदेही तय की जाएगी।

त्रिभाषा फॉर्मूला: इसके अतिरिक्त, समिति अपने तय एजेंडे के तहत नौवीं और दसवीं कक्षा में लागू किए गए त्रिभाषा फॉर्मूले (Three-Language Formula) की प्रगति को लेकर भी शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से पूछताछ करेगी।

🍎 बिहार के सरकारी शिक्षकों को बड़ी राहत: ट्रेनिंग से छूटे शिक्षकों को SCERT ने दिया दूसरा मौका, मिलेगा 5 दिन का 'Comp Of...
02/06/2026

🍎 बिहार के सरकारी शिक्षकों को बड़ी राहत: ट्रेनिंग से छूटे शिक्षकों को SCERT ने दिया दूसरा मौका, मिलेगा 5 दिन का 'Comp Off' (क्षतिपूर्ति अवकाश)

बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग से राहत भरी खबर आई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में अनिवार्य ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) से वंचित रह गए शिक्षकों को विभाग ने एक और मौका देने का फैसला किया है।

राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने सोमवार को इस संबंध में एक संशोधित आधिकारिक आदेश जारी किया है, जिससे राज्य के हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है।

📝 किन शिक्षकों को मिलेगा दूसरा मौका?

SCERT द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार, सत्र 2025-26 में जो शिक्षक निम्नलिखित वास्तविक और अपरिहार्य कारणों से अपनी ट्रेनिंग पूरी नहीं कर पाए थे, उन्हें अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 में दोबारा प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर दिया जाएगा:

चुनावी ड्यूटी: विधानसभा चुनाव संबंधी दायित्वों और कार्यों में व्यस्त रहने वाले शिक्षक।

विभागीय कार्य: एसआईआर (SIR) कार्य या अन्य आधिकारिक सरकारी प्रतिनियुक्ति के कारण छूटे शिक्षक।

स्वास्थ्य कारण: गंभीर बीमारी या चिकित्सीय आधार (Medical Grounds) पर शामिल न हो पाने वाले शिक्षक।

📅 ग्रीष्मावकाश (Summer Vacation) को लेकर बड़ी घोषणा

विभाग ने जून महीने में होने वाली छुट्टियों को लेकर भी शिक्षकों के पक्ष में एक व्यावहारिक निर्णय लिया है:

कोई विभागीय कार्रवाई नहीं: यदि कोई शिक्षक पूर्व निर्धारित योजना या पारिवारिक कारणों से ग्रीष्मावकाश अवधि (जो 20 जून तक निर्धारित है) के दौरान अपने मुख्यालय से बाहर रहता है और इस बीच उसकी ट्रेनिंग शेड्यूल होती है, तो ट्रेनिंग में भाग न लेने पर उसके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या विभागीय कार्रवाई (Disciplinary Action) नहीं की जाएगी।

🛌 5 दिवसीय आवासीय ट्रेनिंग और 'Comp Off' का गणित

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस फैसले को लेकर सरकार का रुख साफ करते हुए कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ शिक्षकों के हितों और उनकी सुविधाओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है।

सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को मानसिक या प्रशासनिक तनाव देना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर शैक्षणिक माहौल देना है।

इस नई ट्रेनिंग की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

आवासीय प्रशिक्षण: यह आगामी प्रशिक्षण पूरी तरह से 5 दिवसीय और आवासीय (Residential) होगा, यानी शिक्षकों को ट्रेनिंग सेंटर में ही रुकना होगा।

क्षतिपूर्ति अवकाश (Compensation Leave): छुट्टियों के दिनों या अतिरिक्त समय में ट्रेनिंग करने के बदले शिक्षकों को 5 दिनों का क्षतिपूर्ति अवकाश (Comp Off) दिया जाएगा।

डेडलाइन: शिक्षक इस अर्जित किए गए 5 दिनों के 'Comp Off' का उपयोग इसी साल 31 दिसंबर 2026 तक कभी भी अपनी सुविधानुसार छुट्टी लेने के लिए कर सकेंगे।

🔥 कमर्शियल LPG सिलिंडर के दाम बढ़े: दिल्ली में ₹42 तो कोलकाता में ₹53.50 की बढ़ोतरी, जानें प्रमुख शहरों के नए रेटघरेलू त...
02/06/2026

🔥 कमर्शियल LPG सिलिंडर के दाम बढ़े: दिल्ली में ₹42 तो कोलकाता में ₹53.50 की बढ़ोतरी, जानें प्रमुख शहरों के नए रेट

घरेलू तेल कंपनियों ने 1 जून 2026 से कमर्शियल रसोई गैस सिलिंडर (Commercial LPG Cylinder) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है।

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर के दाम में ₹42 से लेकर ₹53.50 तक का इजाफा किया गया है।

हालांकि, राहत की बात यह है कि घरों में इस्तेमाल होने वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर (14.2 किलोग्राम) के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलिंडर ₹913 पर ही स्थिर है।

📈 देश के प्रमुख महानगरों में कमर्शियल LPG के नए रेट (19 KG)

तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, देश के बड़े शहरों में 19 किलो वाले सिलिंडर की कीमतें इस प्रकार हैं:

शहर पुराना रेट (₹) नया रेट (₹) कुल बढ़ोतरी (₹)
दिल्ली 3,071.50 3,113.50 +42.00
कोलकाता 3,202.00 3,255.50 +53.50
मुंबई 3,024.00 3,067.50 +43.50
चेन्नई 3,237.00 3,283.00 +46.00
पटना 3,346.50 3,400.00 +53.50

🍼 छोटा FTL सिलिंडर भी हुआ महंगा

प्रवासी मजदूरों और छोटे दुकानदारों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 5 किलोग्राम वाले FTL (Free Trade LPG) सिलिंडर की कीमतों में भी ₹11 की बढ़ोतरी की गई है।

इस बदलाव के बाद दिल्ली में 5 किलो वाले इस सिलिंडर की कीमत बढ़कर ₹821.50 हो गई है।

🍽️ आम जनता की जेब पर क्या होगा असर?

कमर्शियल गैस सिलिंडर के दाम बढ़ने का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर परोक्ष (Indirect) रूप से पड़ता है।

होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग व्यवसाय और शादियों में इन्हीं सिलिंडरों का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इन प्रतिष्ठानों की इनपुट कॉस्ट (लागत) बढ़ने से आने वाले दिनों में बाहर खाना-पीना और फास्ट फूड महंगा हो सकता है।

📑 सरकार का रुख: ईंधन सुरक्षा के लिए 30 दिनों का रिजर्व अनिवार्य

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, सरकार देश में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है:

30 दिनों का स्टॉक: तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) को निर्देश दिया गया है कि वे देश में कम से कम 30 दिनों की खपत के बराबर एलपीजी का बैकअप रिजर्व बनाए रखें।

कालाबाजारी पर एक्शन: ईंधन की जमाखोरी और अवैध डायवर्जन को रोकने के लिए पिछले कुछ दिनों में देश भर में 6,500 से अधिक औचक छापे (Raids) मारे गए हैं, जिनमें कई एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारियां की गई हैं।

📉 पेट्रोल-डीजल निर्यात पर राहत: जहां एक तरफ कमर्शियल एलपीजी महंगी हुई है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने 1 जून से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (हवाई ईंधन) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स (एक्सपोर्ट ड्यूटी) को घटा दिया है।

पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी को आधा कर ₹1.50 प्रति लीटर कर दिया गया है, हालांकि इसका असर भी केवल विदेशी निर्यात पर होगा, घरेलू बाजार की कीमतों पर नहीं।

🏛️ 'धर्मेंद्र प्रधान दें तुरंत इस्तीफा': CBSE की OSM और डेटा ब्रीच विवाद पर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमलासीबीएसई (CBSE)...
02/06/2026

🏛️ 'धर्मेंद्र प्रधान दें तुरंत इस्तीफा': CBSE की OSM और डेटा ब्रीच विवाद पर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला

सीबीएसई (CBSE) 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में आ रही गड़बड़ियों और 'ऑन-मार्क' पोर्टल में डेटा ब्रीच का मामला अब पूरी तरह से एक बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है।

सीबीएसई द्वारा सुरक्षा खामियों को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किए जाने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि वे देश के शिक्षा इतिहास की सबसे बड़ी 'संस्थागत विफलताओं' (Institutional Failures) के प्रतीक बन गए हैं।

🎯 "राजधर्म का पालन करें और इस्तीफा दें शिक्षा मंत्री" — कांग्रेस

कांग्रेस ने नीट (NEET) पेपर लीक से लेकर सीबीएसई की मौजूदा प्रशासनिक चूकों को जोड़कर सरकार को आड़े हाथों लिया है:

नैतिकता का पैमाना: कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही अपने सहयोगियों के लिए ईमानदारी या नैतिकता का कोई पैमाना तय न करते हों, लेकिन देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ के मद्देनजर शिक्षा मंत्री को 'राजधर्म' निभाते हुए तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

संस्थागत साख पर हमला: कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों के कुशासन और दुष्प्रचार ने देश की मजबूत शिक्षा व्यवस्था की नींव को खोखला कर दिया है, जिससे सीबीएसई जैसी विश्वसनीय संस्था की साख पर गहरा दाग लगा है।

🔍 टेंडर प्रक्रिया और 'कोएम्प्ट' (COEMPT) कंपनी को बचाने के आरोप

कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सिलसिलेवार पोस्ट कर सीबीएसई की निविदा (Tender) प्रक्रिया में हुए बड़े बदलावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं:

ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार हटाया: जयराम रमेश के मुताबिक, अगस्त 2025 में जारी मूल आरएफपी (Request for Proposal) में सीबीएसई के पास यह अधिकार सुरक्षित था कि वह काम में विफल रहने वाले वेंडर्स को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) कर सकती थी। लेकिन सितंबर 2025 में अचानक एक संशोधन (Amendment) जारी कर बोर्ड ने अपना यह अधिकार ही खत्म कर दिया।

जानबूझकर नियमों में ढील: विपक्ष का सीधा आरोप है कि टेंडर मिलने से पहले ही निजी कंपनी 'कोएम्प्ट' को अनुचित लाभ और सुरक्षा कवच देने के लिए तकनीकी मानकों और नियमों को जानबूझकर कमजोर किया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि मंत्रालय में बैठे कुछ लोगों को पहले से पता था कि यह कंपनी इस बड़े काम के योग्य साबित नहीं होगी।

📉 लगातार हो रही परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर घेरा

पवन खेड़ा ने छात्रों की चिंताओं को उठाते हुए कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब देश का युवा ठगा महसूस कर रहा है। पिछले दो वर्षों के दौरान देश की कई प्रतिष्ठित और बड़ी परीक्षाओं में लगातार गंभीर खामियां देखने को मिली हैं:

नीट (NEET)

यूजीसी-नेट (UGC-NET)

सीयूईटी (CUET)

विभिन्न राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाएं

कांग्रेस का कहना है कि इन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुई धांधलियों और अब सीबीएसई की नई मूल्यांकन प्रणाली (OSM) की इस भारी विफलता ने देश के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया है।

🪔 भक्ति के रंग में रंगीं डिंपल यादव: भागवत कथा में सिर पर पल्लू लिए साड़ी में दिखी सादगी, महिलाओं के लिए बने फैशन टिप्सस...
01/06/2026

🪔 भक्ति के रंग में रंगीं डिंपल यादव: भागवत कथा में सिर पर पल्लू लिए साड़ी में दिखी सादगी, महिलाओं के लिए बने फैशन टिप्स

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी और सांसद डिंपल यादव अक्सर अपने सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में अपनी सादगी के लिए जानी जाती हैं।

हाल ही में वह अपने क्षेत्र में आयोजित एक भागवत कथा में शामिल होने पहुंचीं, जहां उनका बेहद संस्कारी, सौम्य और पारंपरिक रूप देखने को मिला।

सिर पर पल्लू लिए ऑफ-व्हाइट साड़ी में डिंपल की इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है।

48 वर्ष की उम्र में भी उनका यह क्लासिक और ग्रेसफुल अंदाज महिलाओं के लिए एक परफेक्ट स्टाइल स्टेटमेंट बना हुआ है।

🥻 डिंपल यादव के 'सॉफ्ट-सिंपल' लुक की खास बातें

धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के माहौल के अनुकूल डिंपल ने अपने पहनावे को बेहद शांत और एलीगेंट रखा:

कलर कॉम्बिनेशन (रंग संयोजन): डिंपल बेहद सौम्य ऑफ-व्हाइट (Off-White) साड़ी पहने नजर आईं, जिस पर लैवेंडर (Lavender) रंग का बॉर्डर लगा हुआ था।

यह लाइट और सटल रंगों का कंट्रास्ट धार्मिक आयोजनों के लिहाज से बेहद शांत और प्रभावशाली लुक दे रहा था।

मिनिमल डिजाइनिंग: साड़ी पर कोई भारी कढ़ाई, चमकीले सितारे या बड़े प्रिंट्स नहीं थे। पूरी साड़ी पर बेहद छोटे और बारीक पारंपरिक मोटिफ्स (बूटे) बने हुए थे, जो इसे फीका दिखने से बचा रहे थे।

मैचिंग ब्लाउज व ड्रेपिंग: साड़ी के लुक को बैलेंस करने के लिए उन्होंने बॉर्डर से मैच करता हुआ लैवेंडर रंग का सिंपल ब्लाउज पेयर किया था।

उन्होंने साड़ी को 'ओपन पल्लू' स्टाइल में ड्रेप किया था और कथा के दौरान सिर पर पल्लू लिया हुआ था।

नो-मेकअप और मिनिमल ज्वेलरी लुक: डिंपल ने अपने लुक को भारी-भरकम गहनों से नहीं लादा था।

हाथों में सादे कंगन, एक हाथ में पूजा का धागा, माथे पर छोटी सी बिंदी, मिडिल पार्टीशन (बीच से मांग) के साथ खुले बाल और पैरों में सादी सैंडल उनके लुक को पूरी तरह नेचुरल और क्लासी बना रहे थे।

📝 डिंपल यादव के लुक से महिलाएं ले सकती हैं ये 6 बेहतरीन टिप्स

यदि आप किसी धार्मिक अनुष्ठान, पारिवारिक पूजा या डे-इवेंट (दिन के कार्यक्रम) में शामिल होने जा रही हैं, तो डिंपल यादव के इस लुक से इंस्पिरेशन ले सकती हैं:

🎨 लाइट कलर्स विद कंट्रास्ट बॉर्डर: हमेशा बहुत डार्क या लाउड रंग चुनने के बजाय ऑफ-व्हाइट, क्रीम या पेस्टल रंगों की साड़ियों के साथ एक सटल कंट्रास्ट बॉर्डर चुनें।

🧵 को-ऑर्डिनेटेड ब्लाउज: साड़ी के बॉर्डर के रंग से मिलता-जुलता ब्लाउज पहनने से आपका पूरा लुक संतुलित और व्यवस्थित (Coordinated) नजर आता है।

✨ सटल मोटिफ्स का चयन: भारी और बड़े प्रिंट्स की जगह हल्के और बारीक पारंपरिक डिजाइन वाली साड़ियां चुनें, जो कभी आउट-ऑफ-फैशन नहीं होतीं।

💎 कम से कम ज्वेलरी: धार्मिक या सादगी भरे कार्यक्रमों में भारी चोकर या नेकलेस के बजाय सिर्फ एक साधारण चेन, झुमके या सादे कंगन पहनें। इससे आपकी पर्सनैलिटी निखर कर आती है।

💄 नेचुरल हेयर और मेकअप: बहुत हैवी फाउंडेशन या लाउड लिपस्टिक के बजाय सटल/न्यूड मेकअप रखें। बालों को सिंपल मिडिल पार्टीशन या हल्के क्लच के साथ नेचुरल छोड़ें।

🕊️ कंफर्टेबल फैब्रिक: हमेशा सॉफ्ट और आरामदायक फैब्रिक (जैसे कॉटन, लिनेन या चंदेरी सिल्क) की साड़ी चुनें, ताकि लंबे समय तक बैठने में आपको ग्रेस और कंफर्ट दोनों मिल सके।

🤮 दो रुपये का नशा, करोड़ों की कीमत: सिगरेट से 3 गुना ज्यादा खतरनाक है गुटखा, भारत को अंदर से खोखला कर रहा धुआं रहित तंबा...
01/06/2026

🤮 दो रुपये का नशा, करोड़ों की कीमत: सिगरेट से 3 गुना ज्यादा खतरनाक है गुटखा, भारत को अंदर से खोखला कर रहा धुआं रहित तंबाकू

भारत में तंबाकू नियंत्रण को लेकर सिनेमाघरों से लेकर टीवी स्क्रीन तक विज्ञापनों की भरमार है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट बेहद खौफनाक है।

एडिनबर्ग विश्वविद्यालय की शोधकर्ता डॉ. मधुरिमा नंदी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में तंबाकू की समस्या केवल सिगरेट या बीड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि 'धुआं रहित तंबाकू' (Smokeless To***co) जैसे गुटखा, खैनी और जर्दा देश की आबादी को घुन की तरह खा रहे हैं।

दुनिया के 80 प्रतिशत से अधिक धुआं रहित तंबाकू उपभोक्ता अकेले भारत में रहते हैं और प्रतिदिन लगभग 20 करोड़ लोग इसका सेवन करते हैं।

⚠️ सिगरेट से 3 गुना ज्यादा खतरनाक क्यों है गुटखा?

कैंसर का गढ़: शोध के मुताबिक धुआं रहित तंबाकू उत्पादों में 28 से अधिक प्रकार के कैंसर पैदा करने वाले (Carcinogenic) तत्व पाए जाते हैं।

तेज लत: गुटखा में मौजूद निकोटिन सिगरेट की तुलना में शरीर में बहुत तेजी से घुलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गुटखे की लत सिगरेट की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक घातक और मजबूत होती है।

सस्ता और सुलभ: जहां सिगरेट पर भारी टैक्स और सख्त नियम हैं, वहीं 2 से 5 रुपये में मिलने वाला गुटखा देश की हर छोटी-बड़ी दुकान पर आसानी से उपलब्ध है।

📉 गरीबी और तंबाकू का दुष्चक्र: भूख मिटाने के लिए 'जहर' का सहारा

रिपोर्ट में तंबाकू के सेवन और भारत के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बीच एक बेहद परेशान करने वाला संबंध उजागर किया गया है:

भोजन का विकल्प: दैनिक मजदूरी करने वाले गरीब और बच्चे गुटखे का इस्तेमाल भूख दबाने के लिए कर रहे हैं।

निकोटिन भूख के अहसास को कुछ समय के लिए सुन्न कर देता है। सर्वे में दिल्ली के एक बच्चे ने यहां तक कहा, "बिस्कुट से पेट नहीं भरता, गुटखा खाने से भूख मर जाती है।"

गलत प्राथमिकताएं: ग्रामीण भारत के सबसे गरीब परिवार अपनी गाढ़ी कमाई का 4 प्रतिशत हिस्सा तंबाकू पर फूंक देते हैं, जबकि बच्चों की शिक्षा पर मात्र 2.5 प्रतिशत ही खर्च करते हैं।

सालाना 1.84 करोड़ लोग हो रहे कंगाल: तंबाकू के कारण होने वाले कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के खर्च और घर के मुख्य कमाने वाले की मृत्यु के चलते हर साल लगभग 1.84 करोड़ भारतीय अत्यधिक गरीबी (Absolute Poverty) के दलदल में धकेल दिए जाते हैं।

🤮 थूकने की समस्या: रेलवे फूंक रहा सालाना ₹1200 करोड़

गुटखा-खैनी खाकर सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की भारतीयों की आदत न सिर्फ गंदगी फैलाती है बल्कि देश की तिजोरी पर भी भारी बोझ है:

211 ओलंपिक पूल: एक अनुमान के मुताबिक भारतीय हर साल सड़कों और स्टेशनों पर इतना थूक फैलाते हैं जिससे 211 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं।

सफाई का भारी खर्च: भारतीय रेलवे को ट्रेनों और स्टेशनों से पान-गुटखे के दाग छुड़ाने और सफाई करने के लिए हर साल ₹1200 करोड़ की भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है।

🛠️ क्या है समाधान? केवल विज्ञापनों से नहीं बदलेगी तस्वीर

2011 में सरकार ने गुटखा पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन कंपनियों ने कानून की खामी का फायदा उठाते हुए 'तंबाकू और पान मसाला' को अलग-अलग दो पैकेटों में बेचना शुरू कर दिया, जिसे उपभोक्ता मिलाकर खा लेते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार केवल पूर्ण प्रतिबंध से अवैध बाजार (Black Market) बढ़ेगा, इसलिए व्यावहारिक समाधान की जरूरत है:

🚫 कानूनी लूपहोल बंद हों: तंबाकू और फ्लेवरिंग सामग्री को अलग-अलग पैकेट में बेचने की चालाकी पर रोक लगे और प्लास्टिक पैकेजिंग के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।

💰 न्यूनतम कीमत ₹20-30 हो: गुटखे के पैकेट की न्यूनतम कीमत बढ़ाकर 20 से 30 रुपये कर दी जाए ताकि यह बच्चों और गरीबों की पहुंच से दूर हो सके।

🪪 लाइसेंस और उम्र सीमा: तंबाकू बेचने के लिए विशेष वेंडर लाइसेंस अनिवार्य हो और इसे खरीदने की न्यूनतम कानूनी उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष की जाए।

📉 सख्त कर नीति: सिगरेट की तरह खैनी और गुटखे पर भी भारी टैक्स लगाया जाए ताकि इसकी आसान उपलब्धता को नियंत्रित किया जा सके।

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🎒 विजय सरकार का प्राइवेट स्कूलों पर बड़ा एक्शन: फीस पर नहीं चलेगी मनमानी, नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी पूरी लिस्टतमिलनाडु क...
01/06/2026

🎒 विजय सरकार का प्राइवेट स्कूलों पर बड़ा एक्शन: फीस पर नहीं चलेगी मनमानी, नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी पूरी लिस्ट

तमिलनाडु की नवगठित विजय सरकार ने राज्य के निजी स्कूलों (Private Schools) की मनमानी और अत्यधिक फीस वसूली पर लगाम लगाने के लिए एक बहुत बड़ा और कड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है।

स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित की गई ट्यूशन फीस का पूरा विवरण (Fee Structure) अपने मुख्य नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया है।

अभिभावकों से मिल रही लगातार शिकायतों के बाद सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया है ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जा सके।

📅 4 जून से खुल रहे हैं स्कूल, नियम तोड़ने पर रद्द होगी मान्यता

स्कूल शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को इस नए आदेश की जानकारी देते हुए निजी स्कूलों को आखिरी चेतावनी दी है:

डेडलाइन: तमिलनाडु के सभी सरकारी और निजी स्कूल ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद 4 जून 2026 से दोबारा खुलने जा रहे हैं। स्कूल खुलने के पहले दिन से ही यह नियम लागू माना जाएगा।

सख्त कार्रवाई: यदि कोई भी निजी स्कूल कमेटी द्वारा निर्धारित की गई राशि से एक रुपया भी अधिक वसूलते हुए पाया जाता है, तो शिक्षा विभाग बिना कोई ढील दिए सीधे उस स्कूल की मान्यता (Recognition) रद्द कर देगा।

📊 तमिलनाडु के 13,000 से अधिक स्कूल आएंगे इस दायरे में

यह कानून राज्य के किसी एक हिस्से नहीं, बल्कि पूरे तमिलनाडु में समान रूप से लागू होगा:

कानूनी बैकअप: तमिलनाडु में इस समय 13,000 से अधिक मान्यता प्राप्त निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। यह नया नियम 'तमिलनाडु स्कूल (शुल्क संग्रह विनियमन) संशोधन अधिनियम' के तहत जारी किया गया है।

कैसे तय होती है फीस: इस अधिनियम के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति, जिसमें वरिष्ठ शिक्षाविद और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होते हैं, हर स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर और मानकों को देखकर फीस का निर्धारण करती है।

⚖️ अभिभावकों को मिला 'शिकायत' का सीधा अधिकार

🎯 अभिभावक सीधे कर सकेंगे शिकायत: सरकार ने साफ किया है कि इस आदेश का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को निजी स्कूलों के शोषण से बचाना है।

यदि किसी भी अभिभावक को यह पता चलता है कि उनके बच्चे का स्कूल नोटिस बोर्ड पर फीस की लिस्ट नहीं लगा रहा है, या फिर चोरी-छिपे तय मानदंडों से अधिक फीस वसूल रहा है, तो वे सीधे जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) या संबंधित उच्च अधिकारियों के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिस पर त्वरित (Instant) एक्शन लिया जाएगा।

🪳 'सकारात्मक खबरें नहीं दिखेंगी तो युवा कॉकरोच के पीछे चल पड़ेंगे': सोशल मीडिया ट्रेंड CJP पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्...
01/06/2026

🪳 'सकारात्मक खबरें नहीं दिखेंगी तो युवा कॉकरोच के पीछे चल पड़ेंगे': सोशल मीडिया ट्रेंड CJP पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का बड़ा बयान

देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को मीडिया की भूमिका और सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच बढ़ते एक खास ट्रेंड को लेकर बेहद तीखा और बड़ा बयान दिया है।

उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि यदि मुख्यधारा के समाज और मीडिया में हो रहे सकारात्मक कार्यों व देश की उपलब्धियों को पर्याप्त जगह नहीं दी गई, तो देश का युवा भ्रमित होकर भटक सकता है और 'कॉकरोच' जैसी क्षणिक व नकारात्मक प्रवृत्तियों के पीछे भागने लगेगा।

उपराष्ट्रपति का यह बयान सीधे तौर पर इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे एक नए व्यंग्यात्मक (Sarcastic) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संदर्भ में देखा जा रहा है।

📰 "सकारात्मक खबरों की रिपोर्टिंग जरूरी, वरना युवा खो देंगे रुचि"

एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने मीडिया और कंटेंट क्रिएटर्स को उनकी जिम्मेदारी की याद दिलाई:

सही संदेश देना जरूरी: उपराष्ट्रपति ने कहा, "देश में हो रही सकारात्मक गतिविधियों की अच्छी तरह से रिपोर्टिंग होनी चाहिए।

तभी देश की युवा पीढ़ी को सही और रचनात्मक जानकारी मिलेगी। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वे मुख्यधारा से अपनी रुचि खो देंगे और ‘कॉकरोच’ के पीछे चल पड़ेंगे।"

अभिव्यक्ति की आजादी बनाम सनसनीखेज खबरें: उन्होंने साफ किया कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) का पूरा समर्थन करते हैं।

लेकिन उन्होंने उन गैर-जरूरी मुद्दों को मीडिया में जरूरत से ज्यादा टीआरपी और महत्व दिए जाने पर गंभीर सवाल उठाया, जिनका समाज और युवाओं के भविष्य पर कोई स्थायी या सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।

क्षणिक लोकप्रियता पर तंज: उपराष्ट्रपति ने कहा कि अगर कोई चीज वाकई अच्छी और वैचारिक रूप से मजबूत है, तो लोग उसकी अहमियत हफ्तों और महीनों बाद भी समझेंगे।

सोशल मीडिया के दौर में अचानक किसी चीज का हर जगह ट्रेंड होने लगना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह लंबे समय तक टिकेगी।

🔍 क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और क्यों हुआ यह विवाद?

यह पूरा मामला पिछले सप्ताह सोशल मीडिया पर शुरू हुए एक बड़े कानूनी और सामाजिक विवाद से जुड़ा है:

CJI सूर्यकांत की कथित टिप्पणी पर बहस: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अदालत में वकीलों को 'सीनियर' का दर्जा देने से जुड़ी एक अहम सुनवाई चल रही थी।

इस दौरान सीजेआई द्वारा की गई कुछ कथित टिप्पणियों को लेकर इंटरनेट पर तीखी बहस छिड़ गई।

युवाओं का गुस्सा और मीम ट्रेंड: इस अदालती टिप्पणी के बाद देश के युवाओं ने बेरोजगारी, लगातार हो रहे पेपर लीक (जैसे NEET/SSC) और लचर शिक्षा व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों को जोड़कर सोशल मीडिया पर एक काल्पनिक और व्यंग्यात्मक दल बनाया, जिसे 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का नाम दिया गया। देखते ही देखते इस हैशटैग के साथ लाखों मीम्स और तीखे कटाक्ष वायरल हो गए।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) की सफाई: हालांकि, बाद में विवाद बढ़ता देख सीजेआई सूर्यकांत ने स्वयं स्थिति स्पष्ट की थी।

उन्होंने कहा था कि उनकी टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर पूरी तरह तोड़-मरोड़ कर और गलत संदर्भ (Context) में पेश किया गया है।

उनका वह बयान दरअसल उन लोगों के खिलाफ था जो फर्जी और बोगस डिग्रियों के सहारे कानूनी पेशे (वकालत) में घुसने की कोशिश कर रहे हैं।

🏗️ राष्ट्र निर्माण के लिए 'रचनात्मक पत्रकारिता' की अपील

🎯 भरोसा जगाती हैं अच्छी खबरें: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अंत में मीडिया घरानों से अपील की कि वे देश में करुणा, वैज्ञानिक खोजों, इसरो/डीआरडीओ की उपलब्धियों, सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सफलताओं से जुड़ी कहानियों को प्राइम टाइम में जगह दें।

इस तरह की रचनात्मक रिपोर्टिंग से युवाओं में निराशा की भावना खत्म होती है, समाज में आपसी भरोसा पैदा होता है और वे राष्ट्र निर्माण में अपना सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित होते हैं।

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