21/02/2026
ओ ब्राह्मण ही तो है जिसने सनातन के ध्वजा को थाम रखा है वर्ना तलवार की नोक पर तब करोड़ो लोगो ने अपना धर्म बदला है....
आप जानते है ? जब कोई पूछता है कि महाभारत के युद्ध में अभिमन्यु कैसे मारा गया तो अधिकांश लोगो के पास सिर्फ दो ही उत्तर होते है।
1) अर्जुन जब चक्र व्यूह को तोडने का भेद बता रहे थे तो उसकी गर्भवती माँ सो गई थी और गर्भ में पल रहे अभिमन्यू को चक्र व्यूह तोडने का पूरा भेद नही पता चल सका!
2) अभिमन्यु चक्र व्यूह के सात में से छः द्वार तोड चुका था लेकिन पांडव समय पर नही पहुंच पाये और निहत्थे अभिमन्यु को घेर कर कौरवों ने मार दिया।
लेकिन क्या आप अभिमन्यु की वीर गति का असली कारण जानते है ? महाभारत के युद्ध में कौरवों की वह कुटिल चाल जिसमें उन्होने अर्जुन को युद्ध भूमि से बहुत दूर ले गये,जिसकी वजह से अर्जुन के वापस लौटने में बहुत देर हो गई।
कल्पना किजिए कि अगर युद्ध भूमि में अर्जुन होता तो क्या अभिमन्यु को चक्र व्यूह भेदने की जरूरत पडती? अभिमन्यु चक्र व्यूह भेदने के दौरान वीर गति को प्राप्त होता ? महाभारत में अर्जुन अकेला योद्धा था,जो चक्र व्यूह को भेदना जानता था।
सनातन धर्म की सभी वर्णो में हमेशा सिर्फ ब्राह्मणों पर ही क्यों हमला होता आया है ? सनातन धर्म के दुश्मनों द्वारा सनातन धर्म से ब्राह्मणों को ही हमेशा पृथक करने का प्रयास क्यों होता है ? क्यों कि यही ब्राह्मण हमारे सनातन धर्म के अर्जुन है।
अर्जुन के नही होने पर महाभारत के युद्ध को आसानी से जीता जा सकता था। उसी तरह सनातन से ब्राह्मणों को अलग करके सनातन धर्म को आसानी से खत्म किया जा सकता है। ये ब्राह्मण ही है तो अर्जुन की तरह हमारे अस्तित्व के युद्ध में सनातन और सनातन के हर वर्ग की रक्षा करते आ रहे है।
आज इन्हे आरक्षण का कोई लाभ नही मिला है और ना मिलता है। संख्या में भी ये बस मुट्ठी भर है लेकिन सत्ता के शीर्ष पर आज ये बहुसंख्यक है। सरकार,संस्कार, प्रशासन,सेवा के साथ मिडिया,हर क्षेत्र में आगे है। इसका एक ही कारण है,इन्होने शिक्षा को अपना हथियार बनाया, सबसे ज्यादा शिक्षित वर्ग ब्राह्मण ही है।
ये चाणक्य बने,सदगुरू शंकराचार्य बने,ये बाजीराव बने लेकिन इन्होने कभी सत्ता को नही हथियाया,ना सत्ता का लालच दिखाया। सदैव सत्ता पर किसी और को बैठाकर सनातन और देश की सेवा ही करते रहे। देश और समाज को हमेशा सही मार्गदर्शन ही देते रहे।
बाहरी आक्रांताओ ने जब भारत माता को लज्जित करने का प्रयास किया तो यही ब्राह्मण देवता थे जो अपमान सह कर भी सनातन को जीवित रखा। जब तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय को जलाया जा रहा था तो यही ब्राह्मण थे,जिन्होने सभी ग्रंथो के ज्ञान को कंठस्थ कर अपने मस्तिष्क में सहेज और संजो कर रखा था।
यही ब्राह्मण थे तो पंडित बन कर तब भी और आज भी पूजा पाठ हवन करके आप के घरों को पवित्र करते रहे है। पंचांग से भविष्य संवारते और यही पंडित समाज को जागरूक करने की अलख जगाये रखते थे। यही ब्राह्मण पंडित बन कर विद्यार्थियो को शिक्षित कर सनातन समाज की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते रहे। यही वैध बनकर गाँव घरों में अलग अलग रोगों का इलाज करते और मनुष्यता को जीवन देते। दार्शनिक बन समाज को जागरूक और एकजुट कर मार्गदर्शन करते थे।
ब्राह्मणों ने बुद्ध के नास्तिक विचारों को नेस्तनाबूद किया। अशोक जैसे कुकर्मी आततायी बौद्धों का आतंक झेला और अंत में उसके वंश को समाप्त किया। गयासुद्दीन बलबन से लेकर औरंगजेब और अंग्रेज तक को झेला। किन्तु तिलक, चोटी, जनेउ, गायत्री, गौ, गङ्गा सुरक्षित किए रखे। उन्ही ब्राह्मण देवताओ ने एक से एक बलवान राजाओं, विचारधाराओ को ब्राह्मणवाद के अंत का स्वप्न लेकर मरते देखा है पर ब्राह्मणवाद अजर, अमर, शास्वत की तरह रहा। ब्राह्मण सनातन धर्म की धुरी है।
दुनियाभर को विज्ञान का आधार देने वाले यही ब्राह्मण थे। विज्ञान की मूल व प्रथम सीख इन्होने दी। चिकित्सा शास्त्र के जन्म दाता यही ब्राह्मण है। ये सनातन का आधार है। आधार पर प्रहार कर हिलाने पर इमारत गिर जाती है। इसलिए भी सनातन के दुश्मन ब्राह्मणों पर प्रहार करते रहते है। याद रखों, महाभारत को जीतना है तो अर्जुन रूपी ब्राह्मण को युद्ध भूमि से दूर मत जाने दिजिए !
😊 जय हिंद 🇮🇳