15/06/2022
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सेना में भर्ती की अग्निपथ योजना का विरोध शुरू हो गया है। इस योजना के विरोध में नाराज़ युवाओं ने बिहार में उपद्रव किया, आगज़नी हुई। चूंकि घटना बुद्धवार की है, इसलिए किसी ने इसे 'अग्निवार' भी नहीं कहा, किसी ने टोंट भी नहीं कसा, चैनल्स ने विलाप भी नही किया! ज़रा याद कीजिए 10 जून को मुसलमानों द्वारा फ्रिंज एलिमेंट्स की गिरफ्तारी के लिए किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन में हुई हिंसा के बाद मुसलमानो को क्या क्या नही कहा गया! कोई शुक्रवार को पत्थरवार बता रहा था, किसी को शुक्रवार को 'डर' लग रहा था। जितने मुंह उतनी बात, लेकिन अब सब खामोश हैं।
ऐसी सलेक्टिव 'संवेदना' पर तरस आता है, जिसे देश का नुकसान सिर्फ उसी वक्त नज़र आता है जब मुस्लिमो द्वारा किए गए किसी विरोध प्रदर्शन में हिंसा हो जाए। दरअस्ल ऐसे लोग मुस्लिमो को भारतीय समाज का हिस्सा ही नहीं मानते, उन्हें लगता है कि मुस्लिम 'अलग' है, उन्हे प्रदर्शन का अधिकार ही नही। हालांकि सभ्या समाज मे हिंसा के लिए कोई गुंजाइश नही है। लेकिन सभ्य समाज मे कितनी सभ्यता है इसका 'टेस्ट' ऐसे मौको पर अक्सर हो जाता है जब वे किसी संप्रदाय द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन को 'शुक्रवार' को 'पत्थरवार' तो कहते हैं लेकिन 'दूसरे' संप्रदाय की हिंसा पर चुप्पी साध लेते हैं।