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पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है।    के मौके पर एक बार फिर से जानना चाहिए कि आजाद भारत के इतिहास ...
09/05/2026

पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। के मौके पर एक बार फिर से जानना चाहिए कि आजाद भारत के इतिहास में यह चुनाव ऐतिहासिक क्यों रहा! अमन गुप्ता की कलम से बंगाल चुनाव की कथा

https://followupstories.com/politics/why-west-bengal-election-result-is-a-product-of-politics-of-fear/

पश्चिम बंगाल की राजनीति में डर एक ऐसा महीन तत्त्व है जो इस चुनाव में अपने शबाब पर दोनों पक्षों की ओर से खेला गया और अ....

पश्चिम बंगाल का बहुचर्चित चुनाव 4 मई को आए परिणामों के साथ तकनीकी रूप से समाप्‍त हो गया है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह परिण...
06/05/2026

पश्चिम बंगाल का बहुचर्चित चुनाव 4 मई को आए परिणामों के साथ तकनीकी रूप से समाप्‍त हो गया है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह परिणाम लंबी चलने वाली एक फिल्‍म का केवल ट्रेलर था। चुनाव नतीजे के दो दिनों के भीतर जो भयावह और हिंसक घटनाक्रम देखने में आया है, वह बंगाल की धरती पर कायम सियासी ध्रुवीकरण का स्‍वाभाविक विस्‍तार लगता है। इस चुनावी फिल्‍म का मुख्‍य प्‍लॉट था डर, जिसे हारने और जीतने वाले दोनों दलों ने बराबर पैदा किया, पाला-पोसा और लगातार आगे बढ़ाया। पिछले एक साल से पश्चिम बंगाल घूम रहे अमन गुप्‍ता की यह कहानी समझाती है कि आजाद भारत में यह चुनाव ऐतिहासिक क्‍यों था

पश्चिम बंगाल का बहुचर्चित चुनाव 4 मई को आए परिणामों के साथ तकनीकी रूप से समाप्‍त हो गया है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह परिण...
06/05/2026

पश्चिम बंगाल का बहुचर्चित चुनाव 4 मई को आए परिणामों के साथ तकनीकी रूप से समाप्‍त हो गया है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह परिणाम लंबी चलने वाली एक फिल्‍म का केवल ट्रेलर था। चुनाव नतीजे के दो दिनों के भीतर जो भयावह और हिंसक घटनाक्रम देखने में आया है, वह बंगाल की धरती पर कायम सियासी ध्रुवीकरण का स्‍वाभाविक विस्‍तार लगता है। इस चुनावी फिल्‍म का मुख्‍य प्‍लॉट था डर, जिसे हारने और जीतने वाले दोनों दलों ने बराबर पैदा किया, पाला-पोसा और लगातार आगे बढ़ाया। पिछले एक साल से पश्चिम बंगाल घूम रहे अमन गुप्‍ता की यह कहानी समझाती है कि आजाद भारत में यह चुनाव ऐतिहासिक क्‍यों था

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किसी भी जगह की संस्‍कृति का सवाल बहुत जटिल होता है। उसमें हाथ डालने से पहले उसका मर्म समझना बहुत अहम है। इस संदर्भ में प...
27/04/2026

किसी भी जगह की संस्‍कृति का सवाल बहुत जटिल होता है। उसमें हाथ डालने से पहले उसका मर्म समझना बहुत अहम है। इस संदर्भ में पश्चिम बंगाल और भाजपा का रिश्‍ता इसलिए दिलचस्‍प हो जाता है क्‍योंकि यह दक्षिणपंथी राजनीतिक दल अपनी सत्ता के मद में तंत्र-साधना का वामाचारी बन गया है। भारत के इतिहास और बंगभंग पर अंग्रेजों के पलटान से सबक लिए बगैर वह मछली पकड़ने के चक्‍कर में खूब मछली खाये जा रहा है। बनारस से वरिष्‍ठ पत्रकार अजय राय की टिप्‍पणी

किसी भी जगह की संस्‍कृति का सवाल बहुत जटिल होता है। उसमें हाथ डालने से पहले उसका मर्म समझना बहुत अहम है। इस संदर्भ में प...
27/04/2026

किसी भी जगह की संस्‍कृति का सवाल बहुत जटिल होता है। उसमें हाथ डालने से पहले उसका मर्म समझना बहुत अहम है। इस संदर्भ में पश्चिम बंगाल और भाजपा का रिश्‍ता इसलिए दिलचस्‍प हो जाता है क्‍योंकि यह दक्षिणपंथी राजनीतिक दल अपनी सत्ता के मद में तंत्र-साधना का वामाचारी बन गया है। भारत के इतिहास और बंगभंग पर अंग्रेजों के पलटान से सबक लिए बगैर वह मछली पकड़ने के चक्‍कर में खूब मछली खाये जा रहा है। बनारस से वरिष्‍ठ पत्रकार अजय राय की टिप्‍पणी

तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव को लोगों के अस्तित्व की लड़ाई और बांग्ला पहचान से जोड़ दिया है। यह मछली खाने और दिखाने से तो ...

पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे और आखिरी चरण का मतदान होना है। वोटिंग कलकत्ते में भी है, जो उत्तर-भारतीय प्रवासियों ...
26/04/2026

पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे और आखिरी चरण का मतदान होना है। वोटिंग कलकत्ते में भी है, जो उत्तर-भारतीय प्रवासियों का सबसे बड़ा केंद्र है। इसी वोटबैंक के दम पर भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल की सत्ता में आने का दावा कर रही है। चुनाव के सबसे बड़े सवाल हार-जीत से इतर, असल कहानी यह है कि हिंदी बोलने वाले उत्तर भारत के प्रवासी बंगाल की राजनीति को देखने-समझने के तरीकों को कैसे बुनियादी ढंग से बदल रहे हैं। अमन गुप्‍ता पिछले साल भर से बंगाल जाकर वहां की बदलती हुई जमीन का जायजा लेते रहे हैं। अब भी वे कोलकाता में ही हैं। बंगाल में राजनीतिक धारणा-निर्माण और प्रवासियों के बीच रिश्‍ते पर अमन गुप्‍ता के अनुभवों का निचोड़ बताती उनकी ही कहानी

पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे और आखिरी चरण का मतदान होना है। वोटिंग कलकत्ते में भी है, जो उत्तर-भारतीय प्रवासियों ...
26/04/2026

पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे और आखिरी चरण का मतदान होना है। वोटिंग कलकत्ते में भी है, जो उत्तर-भारतीय प्रवासियों का सबसे बड़ा केंद्र है। इसी वोटबैंक के दम पर भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल की सत्ता में आने का दावा कर रही है। चुनाव के सबसे बड़े सवाल हार-जीत से इतर, असल कहानी यह है कि हिंदी बोलने वाले उत्तर भारत के प्रवासी बंगाल की राजनीति को देखने-समझने के तरीकों को कैसे बुनियादी ढंग से बदल रहे हैं। अमन गुप्‍ता पिछले साल भर से बंगाल जाकर वहां की बदलती हुई जमीन का जायजा लेते रहे हैं। अब भी वे कोलकाता में ही हैं। बंगाल में राजनीतिक धारणा-निर्माण और प्रवासियों के बीच रिश्‍ते पर अमन गुप्‍ता के अनुभवों का निचोड़ बताती उनकी ही कहानी

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बनारस या काशी पर अतीत से लेकर अब तक जितनी किताबें लिखी गई हैं, भारत में उसका कोई जोड़ नहीं है। तकरीबन हर मशहूर किताब काश...
05/04/2026

बनारस या काशी पर अतीत से लेकर अब तक जितनी किताबें लिखी गई हैं, भारत में उसका कोई जोड़ नहीं है। तकरीबन हर मशहूर किताब काशी की शाश्‍वत और पवित्र छवि को ही उभारती है। काल प्रवाह में जम चुकी बनारस की इस छवि पर आलोचनात्‍मक शब्‍द कम लिखे गए हैं। फ्रंटपेज प्रकाशन से शीघ्र प्रकाशित होने वाली लेनिन रघुवंशी, चंद्र मिश्रा और श्रुति नागवंशी द्वारा सह-लिखित ‘काशी’ इस मायने में पुरानी लीक को न सिर्फ तोड़ती है, बल्कि बन और बिगड़ रहे बनारस पर एक बार फिर से सोचने को मजबूर करती है। कुल 12 अध्‍यायों में बंटी अंग्रेजी में लिखी यह पुस्‍तक धर्म और मिथक से लेकर सामान्‍य जीवन में छुपे प्रतिरोध के दर्शन, जाति-वर्ग-लिंग से लेकर बाजार तक बंटवारे की राजनीति और उम्‍मीद के संभावित तत्त्वों पर एक जटिल सूत्रीकरण है। प्रकाशक और लेखकों की अनुमति से पुस्‍तक के सातवें अध्‍याय से चुने हुए कुछ अनूदित अंश

अक्‍टूबर, 2023 में हमने पहली बार कालाहांडी के सिजिमाली और खंडुआलमाली गांवों से वेदांता और अदाणी के खिलाफ खुल रहे आंदोलन ...
31/03/2026

अक्‍टूबर, 2023 में हमने पहली बार कालाहांडी के सिजिमाली और खंडुआलमाली गांवों से वेदांता और अदाणी के खिलाफ खुल रहे आंदोलन के एक मोर्चे को यहां रिपोर्ट किया था। ढाई साल के भीतर इलाके में आग लग चुकी है। पूरा इलाका छावनी बना हुआ है। मनमानी गिरफ्तारियां जारी हैं। फर्जी मुकदमे लादे जा रहे हैं और आदिवासियों का घर से निकलना मुहाल हो चुका है। रंजना पाढ़ी और रैन्‍डल सेक्‍वेरा के भेजे अपडेट के आधार पर खनन प्रभावित गांवों के एकदम ताजा हाल पर फॉलो अप

अक्‍टूबर, 2023 में हमने पहली बार कालाहांडी के सिजिमाली और खंडुआलमाली गांवों से वेदांता और अदाणी के खिलाफ खुल रहे आंदोलन ...
31/03/2026

अक्‍टूबर, 2023 में हमने पहली बार कालाहांडी के सिजिमाली और खंडुआलमाली गांवों से वेदांता और अदाणी के खिलाफ खुल रहे आंदोलन के एक मोर्चे को यहां रिपोर्ट किया था। ढाई साल के भीतर इलाके में आग लग चुकी है। पूरा इलाका छावनी बना हुआ है। मनमानी गिरफ्तारियां जारी हैं। फर्जी मुकदमे लादे जा रहे हैं और आदिवासियों का घर से निकलना मुहाल हो चुका है। रंजना पाढ़ी और रैन्‍डल सेक्‍वेरा के भेजे अपडेट के आधार पर खनन प्रभावित गांवों के एकदम ताजा हाल पर फॉलो अप

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