The Laffaz

The Laffaz ज्ञान गहरा मगर हल्के फुल्के अंदाज में.. हम हैं "दी लफ्फाज"

18/12/2022

आज जबकि एक अदाकारा के कपड़ो के रंग को लेकर विवाद फैला हुआ है... वह इस बात बात पर बात करना जरूरी हो जाता है कि किसी के कपड़.....

16/12/2022

इस विडियो मे हम बात करेंगे देश की राजधानी दिल्ली मे 16 दिसम्बर 2012 को घटित जघन्य अपराध के बाद उससे सीख लेकर सरकार और समाज ने अपने अंदर क्या क्या बदलाव किए॥

13/12/2022

एक मैदान, विशाल जनसभा एक नए बने राजा ने एलान किया की एक दूसरे देश की राजधानी को हज़ार मील दूर खिसकाया जाएगा।किसी और देश न...
12/12/2022

एक मैदान, विशाल जनसभा एक नए बने राजा ने एलान किया की एक दूसरे देश की राजधानी को हज़ार मील दूर खिसकाया जाएगा।
किसी और देश नही भारत की ही बात हो रही है जब नए नए राजा बने जॉर्ज पंचम ने आज ही के दिन 12 दिसम्बर 1911 को संयुक्त भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले आने की घोसड़ा की थी जिसके बाद अडविन लुटिएन्स हर्बर्ट बेकर जैसे सिविल इंजीनियर ने अगले 20 सालों मे नयी दिल्ली को तैयार किया।
जहां क्राउन का तर्क था कि प्रशासनिक सुलभता था वही बंगाल विभाजन के के बाद बंगाल मे रही राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता राजधानी स्थानांतरण के मुख्य कारणो मे से एक रही।
संयुक्त भारत के सापेक्ष मे दिल्ली की भौगोलिक स्थिति और शताब्दियों से राजधानी होने का अनुभव भी दिल्ली को राजधानी चुने जाने के कारण बने।
बताते चले की इस कैपिटल शिफ्टिंग मे कुल लगभग 40 लाख पाउंड यानी लगभग ४० करोड़ रुपये (करीब १०० साल पहले) खर्च हुए थे जिसे अगर 6% महंगाई दर से एडजस्ट करके आज से तुलना करे तो यह राशि 16 हज़ार करोड़ के आसपास आती है।
The Laffaz Prajjwal Singh # new_delhi

सिद्धू मुसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी लेने वाला गोल्डी ब्रार यूएस के कैलीफोर्निया प्रांत से धर दबोचा गया...लाइव मिंट न्...
02/12/2022

सिद्धू मुसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी लेने वाला गोल्डी ब्रार यूएस के कैलीफोर्निया प्रांत से धर दबोचा गया...
लाइव मिंट न्यूज वेबसाइट के हवाले से खबर है कि बीते 29 मई को हुई पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू (सिद्धू मुसेवला) की हत्या की जिम्मेदारी लेना वाला कनाडाई गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी ब्रार को यूएस के कैलिफोर्नीया से गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं भारतीय जांच एजेंसियां और अधिक जानकारी जुटा रही हैं और उनकी तरफ से खबर की पुष्टि अभी बाकी है।
बताते चलें कि सिद्धू हत्या कांड में गोल्डी ने यह दावा किया था की उसने ही लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरफ से इस हत्याकांड की पूरी साजिश रची और अंजाम दिया, जिसके बाद इंटरपोल ने गोल्डी के खिलाफ रेड नोटिस जारी कर रखा था।,
गोल्डी मूलतः पंजाब के मुख्तसर का रहने वाला है और इस हत्याकांड के अलावा हत्या,हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश और अवैध हथियारों की तस्करी जैसे कई अन्य मामलों में भी वांछित है।
नेशन इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने कहा है की वे आधिकारिक माध्यमों से अमेरिका से बात करेंगे और गोल्डी का भारत प्रत्यर्पण कराने की कोशिश करेंगे।

बीते 20 नवंबर को ही गोल्डी कनाडा से यूएस गया था और वहां जाकर जांच एजेंसियो के रडार से गायब हो गया था।
गोल्डी के गिरफ्तारी की खबर देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा की जल्द की पंजाब से गैंगस्टर कल्चर का सफाया होगा।
गुजरात के अहमदाबाद में प्रेस को संबोधित करते हुए मान ने कहा
"आज सुबह की कन्फर्म न्यूज है, कनाडा में बैठे बहुत बड़े गैंगस्टर गोल्डी ब्रार को अमेरिका में डिटेन कर लिया गया है।"
भगवंत मान ने आगे कहा " पंजाब से गैंगस्टर कल्चर जल्द खत्म होगा चूंकि ये (गैंजेस्टर) विदेशों में बैठे है इसीलिए हम आधिकारिक माध्यमों से जाने को मजबूर हैं, हाल ही में हमने होम मिनिस्ट्री के माध्यम
से इंटरपोल से गोल्डी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया था, अब हमे जानकारी मिली है कि उसे अमेरिका में डिटेन कर लिया गया है तो उसे प्रत्यर्पण कर भारत लाया जाएगा और कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी."


Pic:- DNA India Hindi
SOURCE:- Mint

आज किसी भी सोशल मीडिया प्लैटफ़ार्म पर अगर किसी बात की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वो है रॉय दंपत्ती की प्रोमोटर पद से और रविश...
01/12/2022

आज किसी भी सोशल मीडिया प्लैटफ़ार्म पर अगर किसी बात की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वो है रॉय दंपत्ती की प्रोमोटर पद से और रविश कुमार का एंकर पद से स्तीफ़ा देना, मुझे नही लगता इसकी इतनी चर्चा होनी चाहिए अब मई इन सब मे नही जाना चाहूँगा कि ये सब कैसे हुआ, अदानी ग्रुप कि मंशा क्या है या मौजूदा सरकार का इसमे क्या रोल है, ये सब जानने के लिए आपके पास संसाधनो से परिपूर्ण "संसाधन" हैं | खैर रविश के स्तीफ़े कि आशंका तो तभी से थी जब से रविश कुमार ने अगस्त मे अदानी ग्रुप के द्वारा एनडीटीवी का 29.18% भागीदारी अधिग्रहण के बाद आपना यूट्यूब चैनल शुरू किया था। जो कि एक बहुत सही फैसला होता दिख रहा है, आखिरकार बाबा तुलसी दास जी कह ज्ञे हैं-

आवत हिय हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।

‘तुलसी’ तहाँ न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

इतने सालों तक जिस पुजींवाद का रविश कुमार एनडीटीवी मे रहते हुए लानत मलानत करते रहे उसी पुजींवाद के हाथों मे चैनल कि कमान जाने के बाद वही वक्तव्य कि आज़ादी रह जाने कि संभावना कम ही दिखाई देती है। रविश का अपने श्रोताओं के लिए ज़िम्मेदारी दिखाते हुए यूट्यूब के माध्यम से जुड़े रहना एक सकारात्मक कदम है, पर देखने वाली बात है कि बिना संस्थागत संसाधनो ( संवाददाताओं कि शृंखला ) कि सुविधा के बिना किन खबरों और कितनी गहराई से विवेचना कर पाते हैं।

30/11/2022

The Adani Group had lost a bid for the project in January 2019. Here's what the project entails, and why it has been delayed for so long.

29/11/2022
आपने ज़ोंबी वाली वाली हॉलीवुड की फिल्में तो बहुत देखी होंगी पर क्या ज़ोंबी आग यानी ज़ोंबी फायर के बारे में सुना है..?ज़ो...
08/09/2022

आपने ज़ोंबी वाली वाली हॉलीवुड की फिल्में तो बहुत देखी होंगी पर क्या ज़ोंबी आग यानी ज़ोंबी फायर के बारे में सुना है..?


ज़ोंबी आग का नाम सुनने में भले अजीब है पर है यह भी साधारण आग जैसी बस इसकी हरकते थोड़ी ज़ोंबी जैसी है, अब सवाल है ज़ोंबी जैसी हरकते कैसी होती हैं ?
जवाब है.. हां वही जो हमने हॉलीवुड की फिक्शन ज़ोंबी फिल्मों में देखा है... मर के फिर से जी उठना। ये आग भी बुझ के फिर से अपने आप जल उठती है.. अरे अरे घबराइए नहीं ये कोई हॉरर फिल्म की कहानी नहीं जिसमे बातें बिना सिर पैर की होंगी.. इस आग के बुझ के फिर से जल उठने के पीछे वैज्ञानिक कारण है।

दरअसल ये आग रूस, कनाडा जैसे आर्कटिक क्षेत्रों में ही देखने को मिलती है जहां साल के ज्यादातर समय मैदान की सतह बर्फ की कई फुट मोटी परत से ढके रहते हैं। गर्मियों में थोड़े समय के लिए बर्फ पिघलती है तो जमीन पर घास और छोटी झाड़ियां उगती हैं इनसे गिरी हुई टहनियों और पत्तियों की एक कार्बन से भरपूर मोटी परत बन जाती है जो साल दर साल बढ़ती रहती है फिर अगर गर्मियों में इनमे एक बात आग लग जाती है तो लंबे समय तक ये परत जलती रहती है फिर सर्दियों में बर्फबारी से ये सतह तो बर्फ से ढक जाती है लेकिन आग भीतर ही भीतर सुलगती रहती है अगले गर्मियों में जब बर्फ पिघलती है तो ये आग एक बार फिर से धधक उठती है और यही सिलसिला साल दर साल चलता रहता है.. इसके इसी बर्ताव की वजह से इसे ज़ोंबी फायर नाम मिला है... कई बार तो आग भीतर ही भीतर सुलगती हुई मीलों दूर जाकर सतह पर दिखाई देती है...

आजकल बढ़ती हुई ग्लोबल वार्मिंग से ये घटनाएं आम होती जा रही हैं
इसके सीधे तौर पर दो नुकसान है....
पहला तो किसी तरह का इग्निशन (आग) ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाता है
और दूसरा जो सबसे बड़ी चिंता की वजह है वो कार्बन से भरपूर मोटी परत एक प्राकृतिक कार्बन सिंक की तरह काम करती है जो वायुमंडल से कार्बन को कम करती है पर उसके जलने से उसका सोखा हुआ सारा कार्बन CO2 के रूप में वायुमंडल में रिलीज होगी जिससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा और बढ़ जाता है ( multiplying reaction, you know).
बीते सालों में अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में देखी गई भीषण हीटवेव्स के कारणों में से ये भी एक कारण है।।

एक ऐसा व्यक्ति जिसने ताज महल को लेकर सबसे मार्के की बात कही...आज कल पुरातात्विक इमारतों पर अपना अधिकार बताने का जो ट्रें...
07/09/2022

एक ऐसा व्यक्ति जिसने ताज महल को लेकर सबसे मार्के की बात कही...

आज कल पुरातात्विक इमारतों पर अपना अधिकार बताने का जो ट्रेंड चल रहा है अगर कोई आ कर भीमबेटका की गुफाओं को अपने पूर्वजों की रिहायस बता कर दावा ठोक दे तो हैरानी की बात नही है...
इसी क्रम में एक और इमारत है जो अपने पहचान को लेके शंसय में है की वह ताज महल है या तेजोमहालय !!
खैर अब वह इमारत ताज महल हो या तेजोमहालय इससे हमे क्या हम तो उस शख्स के बारे में बात करेंगे जिसने ताज महल को लेकर सबसे मारके की बात की है। जी हां अगर आप समझ चुके हैं हम किसकी बात कर रहे हैं तो आप पक्के तौर पर शायरी के शौकीन है..। हम बात कर रहे हैं साहिर लुधियानवी की या सीधे तौर पर कहे तो साहिर लुधियानवी के उस नज़्म की जिसमे उन्होंने ताज महल की खूब और ठीक लानत मलानत की है।
इस नज़्म में साहिर अपने प्रेमिका से कहते हैं मुझसे मिलना हो तो कही और मिला कर ताज महल के पास नही और इसका कारण भी विस्तार से बताते हैं
साहिर लिखते हैं...

१)ताज तेरे लिए इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सही
तुझ को इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही

२)मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझ से
बज़्म-ए-शाही में ग़रीबों का गुज़र क्या मअ'नी

३)सब्त जिस राह में हों सतवत-ए-शाही के निशाँ
उस पे उल्फ़त भरी रूहों का सफ़र क्या मअ'नी

४)मेरी महबूब पस-ए-पर्दा-ए-तश्हीर-ए-वफ़ा
तू ने सतवत के निशानों को तो देखा होता

५)मुर्दा-शाहों के मक़ाबिर से बहलने वाली
अपने तारीक मकानों को तो देखा होता

६)अन-गिनत लोगों ने दुनिया में मोहब्बत की है
कौन कहता है कि सादिक़ न थे जज़्बे उन के

७)लेकिन उन के लिए तश्हीर का सामान नहीं
क्यूँकि वो लोग भी अपनी ही तरह मुफ़्लिस थे

८)ये इमारात ओ मक़ाबिर ये फ़सीलें ये हिसार
मुतलक़-उल-हुक्म शहंशाहों की अज़्मत के सुतूँ

९)सीना-ए-दहर के नासूर हैं कोहना नासूर
जज़्ब है उन में तिरे और मिरे अज्दाद का ख़ूँ

१०)मेरी महबूब उन्हें भी तो मोहब्बत होगी
जिन की सन्नाई ने बख़्शी है उसे शक्ल-ए-जमील

११)उन के प्यारों के मक़ाबिर रहे बेनाम-ओ-नुमूद
आज तक उन पे जलाई न किसी ने क़िंदील

१२)ये चमन-ज़ार ये जमुना का किनारा ये महल
ये मुनक़्क़श दर ओ दीवार ये मेहराब ये ताक़

१३)इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़

मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझ से

जिसका आसान भाषा में तर्जुमा है है..

१) भले ही ताज तेरे लिए मुहब्बत को निशानी हो, भले ही तुझे इन रंगीन वादियों से बहुत लगाव हो लेकिन मुझसे कहीं और मिला कर यहां शाही लोगों की महफिल में हम गरीबों के होने का क्या मतलब, ताज महल को लेकर साहिर के तेवर बड़े तल्ख थे इसी नज़्म में अपनी प्रेमिका से कहते हैं जहां तुझे मुहब्बत की निशानी दिख रही है वहा मुझे तानाशाही के निशान दिख रहे हैं। बादशाहों के अलावा भी अनगिनत लोगों ने भी मुहब्बत की होगी और कौन कहता है को उनकी मुहब्बत सच्ची नही थी लेकिन उनमें से किसी के मुहब्बत की निशानी नही है क्योंकि वो भी हमारी तरह गरीब थे। ये जो इमारतें तुझे यहां खड़ी दिख रही हैं ये हमारे पूर्वजों से खून से सनी हैं। साहिर आगे कहते हैं को इस इमारत को बनाने वालो ने भी तो मुहब्बत की होगी, उनकी कब्रों पर जाके दिया कौन जलाता है.? बल्कि उनकी कब्रे तो गुमनामी में ही को गईं... आखिर में साहिर कहते हैं ये बाग, ये यमुना का किनारा, ये महल ये नक्काशीदार दीवारें ये सब और कुछ नही बस के शहंशाह ने दौलत का सहारा लेकर हम गरीबों की मुहब्बत का मजाक उड़ाया है..

खैर ये इमारत ताज महल हो या तेजोमहालय ये तो बाद का विषय है पर प्रत्यक्ष ये है की ये इमारत दुनिया के सात अजूबों में से एक और दुनियां के सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक हैं... और जहां तक साहिर की बात है अब चाहे ताज महल हो या सेंट्रल विष्टा अपनी धाक जमाने के लिए सत्ता संसाधनों का दुरुपयोग करती आई है...

बाकी आप साहिर के इस नज़्म का शब्दशः अनुवाद चाहते हैं तो रेख्ता की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं हमने भी यह नज़्म वहीं से लिया है..

📍महिलाएं और विरोध: भारतीय महिलाओं के नेतृत्व में 5 प्रतिष्ठित आंदोलन जी. डी एंडरसन, एक ऑस्ट्रेलियन नारीवादी लेखिका, कहती...
10/08/2022

📍महिलाएं और विरोध: भारतीय महिलाओं के नेतृत्व में 5 प्रतिष्ठित आंदोलन

जी. डी एंडरसन, एक ऑस्ट्रेलियन नारीवादी लेखिका, कहती हैं - "नारीवाद महिलाओं को मजबूत बनाने के बारे में नहीं है। महिलाएं पहले से ही मजबूत हैं, यह दुनिया को उस ताकत को समझने के तरीके को बदलने के बारे में है।"

नमस्कार दोस्तों। हमारी स्पेशल सीरीज #मेमसाब के आज के भाग में आपका स्वागत है।

भारत में, जहाँ महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है और साथ ही साथ उनसे दुर्व्यवहार भी किया जाता है, महिलाएं जीने के लिए रोज़ संघर्ष करती हैं।

सदियों से, महिलाओं ने 'कमजोर सेक्स' कहलाने का बोझ उठाया है। लेकिन दोस्तों, ज़रा अतीत के महिला आंदोलनों को जानने की कोशिश कीजिए। इतिहास दर्शाता है कि यह टैग ("कमजोर सेक्स") महिलाओं को सार्वजनिक क्षेत्र से बाहर करने के बहाने के अलावा और कुछ नहीं है - यह एक ऐसा टैग है जो ऐतिहासिक रूप से पुरुष द्वारा दावा किया गया है। युगों और कल्पों से, महिलाओं को बताया जा रहा है कि वे पुरुषों से असमान हैं, खासकर जब राजनीति, युद्ध या यहां तक ​​​​कि करियर की बात आती है।

लेकिन बार-बार, महिलाएं पितृसत्तात्मक उदासीनता की गहराई से उठकर यह दावा करने के लिए आगे बढ़ती हैं कि उनका अधिकार क्या है या उन गलत प्रथाओं के खिलाफ जो उन्हें स्वतंत्रता और समानता के साथ जीने और बढ़ने के अधिकार से वंचित करती हैं। जबकि सारी दुनिया में 'महिला अधिकार आंदोलनों' का नेतृत्व महिलाओं द्वारा किया गया है, नारीवादी विचारकों, कार्यकर्ताओं और यहाँ तक ​​​​कि सामान्य महिलाओं ने भी विरोध का दंश उठाने से नहीं कतराया है चाहे वह दमनकारी सरकारी नीतियों, यौन हिंसा, कुशासन या चाहे पर्यावरणीय गिरावट के खिलाफ हो।

आपका बहुत धन्यवाद इस लेख को पढ़ने के लिए। अगले भाग में हम बात करेंगे हाल के दशकों में भारत में महिलाओं के नेतृत्व में सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली आंदोलनों के बारे में। तबतक के लिए जुड़े रहें हमारे साथ और फॉलो करें हमारे पेज को और हमारी स्पेशल सीरीज #मेमसाब को।

~ मेमसाब (Mem Saab)

#मेमसाब

बात चीत...ऐसे ही जोश जोश में खुद से वादा कर लिया कि हर सुबह 10 बजे आपके सामने कुछ कहानी कुछ विचार लेकर के प्रस्तुत होऊंग...
19/07/2022

बात चीत...
ऐसे ही जोश जोश में खुद से वादा कर लिया कि हर सुबह 10 बजे आपके सामने कुछ कहानी कुछ विचार लेकर के प्रस्तुत होऊंगा लेकिन ये एक अनिच्छा से की जा रही कॉरपोरेट नौकरी के साथ जारी रख पाने के विषय में नायक फिल्म के शिवाजी राव का बलराज चौहान को बोला वो डायलॉग याद दिला देता है कि "आप जो कह रहे हैं वो कहने के लिए अच्छा है सुनने के लिए अच्छा है पर प्रैक्टिकल नही है" l फिर नायक फिल्म का डायलॉग ही जहन में आने का एक कारण ये भी हो सकता है कि शिवाजी राव के कैरेक्टर से मैं काफी हद तक रिलेट कर पाता हूं। हां बस एक विचार उसके बिल्कुल उलट है, शिवाजी राव पत्रकार रहते हुए सरकारी नौकरी की चाहत रखता है पर मैं नौकरी में रहते हुए पत्रकार होने की चाहत रखता हूं। ये पेज शुरू करने के पीछे भी कहीं ना कहीं यही विचार था की इसको कभी भविष्य में बढ़ाकर एक विश्वसनीय न्यूज एजेंसी का रूप देना है। पर अब इसे किस्मत कहें या कुछ और कि सारा वक्त ये दो टकिया की नौकरी खा जाती है और सारा सावन धरा रह जा रहा। वैसे इस पोस्ट में थोड़ी निराशा जरूर झलक सकती है पर मेरा दो टकिया की नौकरी से सावन तक का सफर जारी रहेगा ये नौकरी अपनी तरफ चाहे जितना खींच ले पर मेरा आकर्षण तो सावन की तरफ ही रहेगा। आज ये पोस्ट लिखने की वजह भी यही है की मैं कितनी भी रिसर्च करके कहानी लिख लूं पर उसे पढ़ने वाले लोग इक्का दुक्का ही हैं और सच बात तो ये है कि ये पोस्ट भी उन्ही इक्का दुक्का लोगों के लिए जो स्टोरी को पढ़ते हैं।
तो आज दफ्तर की थकान के बाद कुछ लिखने का मुद्दा मुझे मिला नही तो सोचा आप लोग भी तो अपने ही हो तो थोड़ा पर्सनल बातें हो जाए। अब शिवाजी राव ने मुख्यमंत्री बलराज चौहान से पंगा ले लिया तो बाकी बातें जनता जनार्दन पर है देखना ये है की जनता शिवाजी राव को मुख्यमंत्री बनाती है या शिवाजी बलराज की ही नौकरी करेगा।
तो बस आप भी अगर चाहते हैं शिवाजी जीते तो सफर में शामिल हो जाइए अपने बच्चे The Laffaz को लाइक करके और अगर आपको भरोसा हो तो इस पोस्ट को शेयर करके ताकि दूसरे भी शिवाजी के इस सफर में शामिल हो सकें...
बाकी स्क्रॉल करने को तो पूरा दिन है ही...

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