Zenith Zing

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जय हिंद जय भारत ❤️❤️💛

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः ॥

Zenith Zing could mean "peak energy" or "top-level excitement."

03/04/2026

माननीय मुख्यमंत्री बिहार एवं सम्राट चौधरी जी,
आपके द्वारा बहाई गई “विकास की गंगा” का असली नज़ारा अब साफ दिखाई दे रहा है। आज बिहार का मजदूर दर-दर भटकने को मजबूर है। न पेट भरने के लिए खाना मिल रहा है, और न ही अपने घर लौटने के लिए ट्रेन में एक सीट।

यह वही विकास है, जिसके बड़े-बड़े दावे किए गए थे। ज़मीनी हकीकत तो यह है कि बिहार का आम आदमी आज भी संघर्ष और बेबसी के बीच जी रहा है।

आशा है आप लोग इसी तरह “विकास” करते रहेंगे और बिहार के लोग यूँ ही परेशानी, भूख और मार झेलते रहेंगे।

पिछले दो दशकों में Nitish Kumar के नेतृत्व में बिहार की राजनीति और प्रशासन में कई बदलाव देखने को मिले। शुरुआती वर्षों मे...
01/04/2026

पिछले दो दशकों में Nitish Kumar के नेतृत्व में बिहार की राजनीति और प्रशासन में कई बदलाव देखने को मिले। शुरुआती वर्षों में कानून-व्यवस्था और बुनियादी सेवाओं में सुधार ने उम्मीद जगाई, लेकिन आज जब हम समग्र विकास के पैमानों पर बिहार का मूल्यांकन करते हैं, तो कई गंभीर चुनौतियाँ अब भी स्पष्ट रूप से सामने आती हैं।

1. बुनियादी ढांचे की सीमाएँ (Infrastructure Gap)
कनेक्टिविटी:
इतने लंबे शासनकाल के बावजूद बिहार में अब तक कोई पूर्ण विकसित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा या आधुनिक एक्सप्रेस-वे चालू स्थिति में नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार जरूर हुआ है, लेकिन कई क्षेत्रों में अब भी सिंगल लेन और खराब सड़कें विकास की रफ्तार को सीमित करती हैं।
खेल और तकनीकी ढांचा:
राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम, बड़े IT पार्क या टेक्सटाइल हब का अभाव है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और प्रतिभा विकास के अवसर काफी सीमित रह जाते हैं।

2. सामाजिक और आर्थिक सूचकांक (Social & Economic Indicators)
शिक्षा और स्वास्थ्य:
नीति आयोग और अन्य संस्थाओं की रिपोर्ट्स में बिहार अक्सर शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में निचले पायदान पर रहता है। स्कूलों की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा की पहुंच और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्रति व्यक्ति आय:
बिहार की प्रति व्यक्ति आय देश में सबसे कम में गिनी जाती है, जो राज्य की आर्थिक स्थिति और निवेश की कमी को दर्शाती है।
शहरीकरण:
देश के प्रमुख विकसित शहरों की सूची में बिहार का कोई भी शहर शामिल नहीं हो पाया है, जिससे यह साफ होता है कि शहरी विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है।

3. पलायन और औद्योगिक पिछड़ापन (Migration & Industrial Backwardness)
मजदूर पलायन:
बिहार आज भी बड़े पैमाने पर श्रमिकों का स्रोत बना हुआ है। रोजगार के पर्याप्त अवसर न होने के कारण युवाओं को अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता है।
औद्योगिक विकास:
टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग और IT जैसे क्षेत्रों में अपेक्षित निवेश नहीं आ पाया। इंडस्ट्रियल ज़ोन और बड़े उद्योगों की कमी ने रोजगार सृजन को प्रभावित किया है।

4. उपलब्धियां बनाम जमीनी हकीकत
सरकार की उपलब्धियों में बिजली आपूर्ति, सड़क निर्माण, और साइकिल व पोशाक जैसी योजनाएं शामिल हैं, जिन्होंने सामाजिक स्तर पर कुछ सकारात्मक बदलाव जरूर किए।

लेकिन—
अन्य राज्यों (विशेषकर दक्षिण और पश्चिम भारत) की तुलना में विकास की गति धीमी रही।
महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक भागीदारी के क्षेत्र में अभी भी सुधार की आवश्यकता है।

दरभंगा में बनने वाला  अब इलाज का नहीं, बल्कि “इंतज़ार का स्मारक” बनता जा रहा है।घोषणाएँ बड़ी-बड़ी, वादे उससे भी बड़े… ले...
30/03/2026

दरभंगा में बनने वाला अब इलाज का नहीं, बल्कि “इंतज़ार का स्मारक” बनता जा रहा है।

घोषणाएँ बड़ी-बड़ी, वादे उससे भी बड़े… लेकिन ज़मीन पर काम लगभग शून्य है।
कभी ज़मीन का मुद्दा, कभी बाढ़ का बहाना, तो कभी फाइलों का चक्कर—ऐसा लगता है जैसे AIIMS नहीं, कोई अंतहीन कहानी चल रही हो।

हर चुनाव में नेता आते हैं, भाषण देते हैं और जनता को सपने दिखाते हैं…
लेकिन चुनाव खत्म होते ही वही AIIMS फिर से फाइलों में “वेंटिलेटर” पर चला जाता है।

हकीकत यह है कि दरभंगा और मिथिला की जनता आज भी बेहतर इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई की ओर जाने को मजबूर है।

सोचिए, जब नाम AIIMS का है और स्थिति ऐसी है, तो बाकी स्वास्थ्य व्यवस्था का क्या हाल होगा?

AIIMS दरभंगा अभी “अस्पताल” कम,
और “राजनीतिक जुमलों का ICU” ज़्यादा बन चुका है।

#दरभंगा Gopal Jee Thakur Sanjay Kumar Jha Mangal Pandey Nitish Kumar Ministry of Ayush, Government of India

भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh के एक बयान ने सियासी हलकों में तीखी हलचल पैदा...
29/03/2026

भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh के एक बयान ने सियासी हलकों में तीखी हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने अपने संबोधन में मुसलमानों और सवर्णों को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

दरअसल, Brij Bhushan Sharan Singh ने कहा कि “देश में आज दो ही खलनायक बना दिए गए हैं—पहला मुसलमान और दूसरा सवर्ण।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी यह बात कई लोगों को भीतर तक आहत कर सकती है। अपने बयान में उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि मुसलमानों के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी के अलावा लगभग सभी राजनीतिक दल खड़े नजर आते हैं, लेकिन सवर्ण समाज के पक्ष में खुलकर कौन सी पार्टी खड़ी है, यह स्पष्ट नहीं है।

यह बयान उन्होंने बिहार के बाढ़ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित Ram Navami के कार्यक्रम के दौरान मंच से संबोधित करते हुए दिया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है और विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

आपलोग भा अपना विचार जरूर कमेंट करें!!

#कांग्रेस Brij Bhushan Sharan Singh

इनका काम अब सिर्फ पाकिस्तान से तुलना करने तक सीमित रह गया है, और हैरानी की बात यह है कि भारतीय मीडिया भी उसी राग को बढ़ा...
29/03/2026

इनका काम अब सिर्फ पाकिस्तान से तुलना करने तक सीमित रह गया है, और हैरानी की बात यह है कि भारतीय मीडिया भी उसी राग को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने में लगा रहता है। अपने देश की असली समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय, बहस का मुद्दा बार-बार वहीं घुमा दिया जाता है।

जनता महंगाई से परेशान है, एलपीजी के दाम 300–400 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई या गंभीर चर्चा देखने को नहीं मिलती।

मीडिया का एक बड़ा हिस्सा भी मुद्दों की गहराई में जाने के बजाय टीआरपी के खेल में उलझा हुआ है—जहां असली सवालों की जगह तुलना और बहस का शोर ज्यादा दिखता है। नतीजा यह है कि आम आदमी महंगाई के बोझ तले दबता जा रहा है, और उसकी आवाज कहीं खोती जा रही है।

#कांग्रेस Ministry of Petroleum and Natural Gas, Government of India

Shambhavi Chaudhary आजकल बिहार की राजनीति में “नई सोच” की पहचान बनकर सामने आ रही हैं—हालांकि यह नई सोच किस दिशा में जा र...
28/03/2026

Shambhavi Chaudhary आजकल बिहार की राजनीति में “नई सोच” की पहचान बनकर सामने आ रही हैं—हालांकि यह नई सोच किस दिशा में जा रही है, यह जनता खुद समझ रही है।

ये Lok Janshakti Party (Ram Vilas) से जुड़ी हैं और Chirag Paswan की टीम का हिस्सा हैं। ऊपर से पारिवारिक बैकग्राउंड भी मजबूत है, क्योंकि उनके पिता Ashok Choudhary खुद एक बड़े नेता हैं—यानी राजनीति में एंट्री का रास्ता पहले से ही साफ था।

अब बात करते हैं काम की… या यूं कहें “काम की कमी” की। आरोप है कि सांसद निधि का पैसा अभी तक खर्च नहीं हुआ। जब मीडिया ने पूछा, तो जवाब मिला—“यह मेरा फंड है, मैं अपने हिसाब से खर्च करूंगी।”
वाह! जनता के पैसे को “अपना फंड” समझने वाली सोच सच में नई है। शायद विकास भी अब इंतजार की लिस्ट में डाल दिया गया है।

सबसे मजेदार बात यह है कि National Democratic Alliance (NDA) परिवारवाद के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें करता है, लेकिन जब अपनी पार्टी की बारी आती है, तो परिवार ही सबसे बड़ा “क्वालिफिकेशन” बन जाता है। यहां विरोध भी है और प्रयोग भी—वो भी एक साथ!

बिहार की जनता अब समझदार हो रही है। उन्हें अब ऐसे नेताओं की जरूरत है जो सच में पढ़े-लिखे हों, जमीन पर काम करें और राज्य के विकास के बारे में सोचें—न कि सिर्फ अपने परिवार और राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में लगे रहें।

#कांग्रेस Chirag Paswan Shambhavi Choudhary - शाम्भवी चौधरी

बिहार से आने वाले सांसद पप्पू यादव अपने बयानों को लेकर अक्सर मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा में रहते हैं। उनके बयान कई ...
28/03/2026

बिहार से आने वाले सांसद पप्पू यादव अपने बयानों को लेकर अक्सर मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा में रहते हैं। उनके बयान कई बार इतने अलग और सीधे होते हैं कि लोग उन्हें “बयानवीर” भी कहने लगते हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान वे कई बार यह कहते नजर आते हैं कि वे रोज़ लगभग 10 लाख रुपये जनता में बांट देते हैं। जब उनसे इस पैसे के स्रोत के बारे में पूछा जाता है, तो उनका कहना होता है कि उन्होंने अपनी जमीन बेचकर यह काम किया है—उनके अनुसार कभी उनके पास करीब 9000 बीघा जमीन थी, जो अब घटकर बहुत कम रह गई है।

हालांकि, यह भी सच है कि सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता देखने को मिलती है। चाहे बिहार में बाढ़ की स्थिति हो या COVID-19 के समय की कठिनाइयाँ—वे लोगों की मदद करते हुए नजर आए हैं। उनकी बातों और बयानों से यह भी प्रतीत होता है कि वे खुद को बिहार के मुद्दों के लिए लड़ने वाला नेता मानते हैं।
दूसरी ओर, उनके ऊपर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं, जिनमें रंगदारी जैसे गंभीर आरोप शामिल बताए जाते हैं। यही वजह है कि उनकी छवि को लेकर लोगों के बीच मिश्रित राय बनी रहती है।

इसके बावजूद, बिहार के मुद्दों को उठाने के लिए उन्हें सराहना दी जा सकती है। साथ ही, उनसे यह अपेक्षा भी की जाती है कि वे अपने सांसद निधि का सही उपयोग विकास कार्यों में करें और खुद मौके पर जाकर यह सुनिश्चित करें कि काम सही तरीके से हो रहा ।।

#कांग्रेस Zenith Zing Baat Bihar Ki PK for CM Manoj Tiwari 'Mridul' Jan Suraaj Jan Jan Ki Sena Jan Suraaj Yuva Bihar Abhiyaan

बिहार से आने वाले माननीय केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को अक्सर उनके बयानों को लेकर चर्चा में देखा जाता है। ऐसा महसूस होता है...
28/03/2026

बिहार से आने वाले माननीय केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को अक्सर उनके बयानों को लेकर चर्चा में देखा जाता है। ऐसा महसूस होता है कि उनके काम की तुलना में उनके बयान ज्यादा सुर्खियों में रहते हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री होने के बावजूद बिहार के विकास के लिए उनके ठोस प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते।

जब वे भारतीय जनता पार्टी के विरोध में थे, तब वे बिहार के लिए विशेष राज्य का दर्जा और विशेष पैकेज की मांग जोर-शोर से उठाते थे। लेकिन अब, जब वे बीजेपी के साथ हैं, तो इन मुद्दों पर उनकी आवाज पहले जैसी मुखर नहीं दिखती। साथ ही, यह भी कहा जाता है कि बिहार की राजनीतिक परिस्थितियों, खासकर मुख्यमंत्री बदलने में उनकी अहम भूमिका रही है।

ऐसे में उनसे विनम्र निवेदन है कि वे बिहार की जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरें। राज्य के विकास के लिए उद्योग, फैक्ट्री, कॉरपोरेट ऑफिस और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। बिहार के लोग अब सिर्फ बयानों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले कामों की उम्मीद कर रहे हैं।

#कांग्रेस Rajiv Ranjan Singh Lalan Singh PK for CM Baat Bihar Ki Manoj Tiwari 'Mridul' Jan panchayat TV

भारत का स्वदेशी रीजनल नेविगेशन सिस्टम NavIC (Navigation with Indian Constellation) इस समय एक गंभीर तकनीकी संकट का सामना ...
27/03/2026

भारत का स्वदेशी रीजनल नेविगेशन सिस्टम NavIC (Navigation with Indian Constellation) इस समय एक गंभीर तकनीकी संकट का सामना कर रहा है। यह प्रणाली, जो देश की सामरिक और रक्षा क्षमताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, अब अपनी विश्वसनीयता को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है।

समस्या की मुख्य वजह सैटेलाइट्स में लगी परमाणु घड़ियों (Atomic Clocks) में आई खराबी है। ये घड़ियाँ किसी भी नेविगेशन सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा होती हैं, क्योंकि इन्हीं के जरिए सटीक लोकेशन और टाइमिंग डेटा प्राप्त होता है।

हाल ही में स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब IRNSS-1F सैटेलाइट में लगी अंतिम सक्रिय परमाणु घड़ी भी 10 मार्च को अचानक काम करना बंद कर गई। इसके साथ ही NavIC सिस्टम को एक बड़ा झटका लगा।

इस खराबी के बाद अब पूरे सिस्टम में सिर्फ तीन ही सैटेलाइट्स ऐसे बचे हैं, जो पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग (PNT) सेवाएं देने में पूरी तरह सक्षम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी कम संख्या में सक्रिय सैटेलाइट्स होने से सिस्टम की सटीकता और भरोसेमंदता पर असर पड़ सकता है।

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय है, खासकर तब जब NavIC को सैन्य ऑपरेशन, मिसाइल गाइडेंस, समुद्री निगरानी और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसे में अब जरूरत है कि इस तकनीकी समस्या का जल्द समाधान निकाला जाए और नए, अधिक विश्वसनीय सैटेलाइट्स को तैनात कर NavIC सिस्टम को फिर से मजबूत बनाया जाए, ताकि भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता और सुरक्षा पर कोई असर न पड़े।

#कांग्रेस

Chirag Paswan एक ऐसे नेता हैं जो राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर और स्पष्ट तरीके से अपनी बात रखते हैं, इसलिए उनके बयानों को प...
27/03/2026

Chirag Paswan एक ऐसे नेता हैं जो राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर और स्पष्ट तरीके से अपनी बात रखते हैं, इसलिए उनके बयानों को पूरी तरह गलत कहना सही नहीं होगा।

लेकिन बिहार में उनके काम की बात करें, तो अब तक कोई बड़ा विकास कार्य, उद्योग या रोज़गार देने वाला ठोस काम दिखाई नहीं देता। ज़मीन पर असर दिखाने के मामले में उनकी भूमिका अभी भी कमजोर मानी जाती है।

सीधी बात—बयान मजबूत हैं, लेकिन बिहार में काम अभी तक नज़र नहीं आता।

#कांग्रेस Chirag Paswan Zenith Zing

एक ऐसे केंद्रीय मंत्री हैं जिनका काम कभी भी ज़मीन पर दिखाई नहीं देता। ये सिर्फ बयानवीर हैं—जब भी देखो, उल्टे-सीधे बयान द...
26/03/2026

एक ऐसे केंद्रीय मंत्री हैं जिनका काम कभी भी ज़मीन पर दिखाई नहीं देता। ये सिर्फ बयानवीर हैं—जब भी देखो, उल्टे-सीधे बयान देते रहते हैं।

लगभग 5 साल से ज़्यादा समय से मंत्री होने के बावजूद इन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र में एक भी बड़ा उद्योग नहीं लगाया। न ही कोई ऐसा काम दिखता है जिससे लोगों को रोज़गार या विकास मिला हो।

इनका ज़्यादातर ध्यान हिंदू-मुस्लिम, जाति-पाति और भड़काऊ मुद्दों पर बयान देने में ही रहता है। असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति अब आम हो चुकी है।
यह जिस समाज से आते हैं, उसके पक्ष में भी खुलकर नहीं बोल पाते—क्योंकि अगर बोल दिया, तो मंत्री पद और पार्टी दोनों से हाथ धोना पड़ सकता है।

बाकी सब जनता के ऊपर है। अगर जनता को यही पसंद है, तो फिर कोई दूसरा क्या ही कर सकता है।

#कांग्रेस Giriraj Singh

भारत में हाल के समय में एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आ रही है, जहाँ कुछ लोग देश में रहकर अन्य देशों के लिए धन एकत्र कर रह...
26/03/2026

भारत में हाल के समय में एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आ रही है, जहाँ कुछ लोग देश में रहकर अन्य देशों के लिए धन एकत्र कर रहे हैं। यह स्थिति स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े करती है। जो लोग भारत में रहते हैं, यहाँ की सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, सरकारी योजनाओं का फायदा लेते हैं—उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि उनकी प्राथमिक निष्ठा भारत के प्रति हो।

ऐसे में जब कुछ लोग ईरान जैसे देशों के लिए धन इकट्ठा करते हैं, तो यह चिंता और भी बढ़ जाती है। आज यदि यह गतिविधि ईरान के लिए हो रही है, तो भविष्य में यही लोग पाकिस्तान, बांग्लादेश या नेपाल जैसे अन्य देशों के लिए भी ऐसा कर सकते हैं। विशेष रूप से तब, जब इन देशों के साथ भारत के संबंध कई बार संवेदनशील या तनावपूर्ण रहे हैं, यह विषय राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के दृष्टिकोण से गंभीर बन जाता है।

हालांकि, मानवीय आधार पर किसी भी देश की सहायता करना गलत नहीं है, लेकिन यह कार्य पूरी पारदर्शिता, कानूनी प्रक्रिया और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए।

इस परिस्थिति में भारत सरकार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार को चाहिए कि वह ऐसे मामलों पर नजर रखे, आवश्यक जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि कोई भी गतिविधि देश के कानून या सुरक्षा के खिलाफ न हो। साथ ही, किसी भी देश को सहायता देने का निर्णय व्यक्तिगत नहीं होना चाहिए।

#कांग्रेस Manoj Tiwari 'Mridul' Mahant Balaknath Yogi

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