30/09/2025
मेरी भव बाधा हरो राधा नागरा सोई ।
जा तन की झाई परे श्याम हरित द्विति होई ।।
गीध देह तजि धरि हरि रुपा।
भूषन बहु पट पीत अनूपा ।।
श्री राम भगवान ने गीधराज जटायू का उद्धार किया।
उसके बाद कवनध का उद्धार, बाद में भगवान माता सबरी के आश्रम में जाते हैं
ताहि देय गति राम उदारा।
सबरी के आश्रम पग धारा।।
मानस में वर्णन आया है।
कंद मूल फल सुरषि अति दिये राम कहुं आनि।
प्रेम सहित प्रभु खाएं बारम्बार बखानि ।।
बोलिए राजा रामचन्द्र भगवान की जय 🙏 🚩 🇮🇳