Prabhakar Prakashan

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हिंदी साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय समाज, संस्कृति, इतिहास और मानवीय संवेदनाओं की जीवंत यात्रा है."हि...
15/06/2026

हिंदी साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय समाज, संस्कृति, इतिहास और मानवीय संवेदनाओं की जीवंत यात्रा है."हिंदी साहित्य का परिचय" ऐसी ही एक पुस्तक है जो पाठकों को हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा, उसके विकास और प्रमुख रचनाकारों से सरल भाषा में परिचित कराती है.
यह पुस्तक आचार्य चतुरसेन द्वारा लिखित एक महत्त्वपूर्ण कृति है, जो हिंदी साहित्य की शुरुआत से लेकर उसके विकास का संपूर्ण विवरण प्रदान करती है। इस पुस्तक के माध्यम से पाठक हिंदी साहित्य के महत्त्वपूर्ण रचनाकारों और उनकी उनकी कृतियों के बारे में एक गहन जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
पुस्तक- हिंदी साहित्य का परिचय
लेखक- आचार्य चतुरसेन
प्रकाशन- प्रभाकर प्रकाशन

यह पुस्तक अमेज़न और फ्लिप्कार्ट पर उपलब्ध है.
आज ही पुस्तक पुस्तक प्राप्त करने के लिए कमेंट करें “interested”
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13/06/2026

कविता किताब के पन्नों से निकलकर आवाज़ बन जाए तो उसका असर और भी गहरा हो जाता है। जब कवि स्वयं अपनी कविता पढ़े, तो शब्द केवल सुने नहीं जाते, महसूस भी किए जाते हैं।✨️🌸
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चिंतामणि (प्रथम भाग) — आचार्य रामचंद्र शुक्लहिंदी साहित्य में आलोचना की परंपरा को नई दिशा देने वाले आचार्य रामचंद्र शुक्...
12/06/2026

चिंतामणि (प्रथम भाग) — आचार्य रामचंद्र शुक्ल
हिंदी साहित्य में आलोचना की परंपरा को नई दिशा देने वाले आचार्य रामचंद्र शुक्ल के कालजयी निबंधों का यह महत्त्वपूर्ण संकलन केवल साहित्य नहीं, बल्कि मानव मन, समाज और संस्कृति की गहन पड़ताल भी है।
भाव, उत्साह, करुणा, लज्जा, प्रेम, घृणा, ईर्ष्या, भय और क्रोध जैसे मनोविकारों का सूक्ष्म विश्लेषण हो या कविता, भक्ति और लोकमंगल पर गंभीर चिंतन— 'चिंतामणि' पाठक को विचारों की एक नई दुनिया से परिचित कराती है।
संपादक गोपाल प्रधान की विवेचनात्मक टिप्पणियाँ इस कृति को समकालीन संदर्भों में समझने का अवसर देती हैं, जिससे यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों और साहित्य-प्रेमियों के लिए और भी उपयोगी बन जाती है।
यदि आप हिंदी साहित्य की आलोचनात्मक परंपरा, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक चिंतन को समझना चाहते हैं, तो "चिंतामणि" आपके पुस्तक-संग्रह का अनिवार्य हिस्सा है।
यह पुस्तक अमेज़न और फ्लिप्कार्ट दोनो पर उपलब्ध है लिंक के लिए कमेंट करे.
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संकट में संवाद — गोपाल प्रधानकोरोना महामारी ने केवल स्वास्थ्य संबंधी संकट ही पैदा नहीं किया, बल्कि समाज, राजनीति, अर्थव्...
11/06/2026

संकट में संवाद — गोपाल प्रधान

कोरोना महामारी ने केवल स्वास्थ्य संबंधी संकट ही पैदा नहीं किया, बल्कि समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र से जुड़े अनेक गहरे प्रश्नों को भी हमारे सामने ला खड़ा किया। गोपाल प्रधान की पुस्तक ‘संकट में संवाद’, जिसे प्रभाकर प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है, इसी अभूतपूर्व दौर के अनुभवों, चुनौतियों और वैचारिक बहसों का गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत करती है। पुस्तक में महामारी के दौरान उत्पन्न सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों, किसानों के आंदोलन, कामगारों के विस्थापन, लोकतांत्रिक मूल्यों पर आए संकट तथा सामाजिक न्याय से जुड़े प्रश्नों पर गहन चिंतन किया गया है।

इस पुस्तक में प्रेमचंद, गांधी, मार्क्स, अंबेडकर, लेनिन, किसान संकट, जालियाँवाला बाग और आधुनिक समाज जैसे विषयों पर लिखे गए लेख और व्याख्यान संकलित हैं। लेखक महामारी को केवल एक स्वास्थ्य संकट के रूप में नहीं देखते, बल्कि उसे भारतीय समाज, लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और संस्कृति की अंतर्निहित समस्याओं को उजागर करने वाली ऐतिहासिक घटना के रूप में समझने का प्रयास करते हैं। संवाद, लोकतांत्रिक चेतना और सामाजिक न्याय की आवश्यकता को रेखांकित करती यह पुस्तक हमारे समय की जटिल चुनौतियों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण वैचारिक दृष्टि प्रदान करती है।

यदि आप समकालीन भारतीय समाज, राजनीति और वैचारिक विमर्शों में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए अवश्य पठनीय है।

📖 पुस्तक: संकट में संवाद
✍️ लेखक: गोपाल प्रधान
🏢 प्रकाशन: प्रभाकर प्रकाशन

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और इन सब के बीच- नेहल शाह नेहल शाह की लेखनी जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों में छिपे बड़े अर्थों को बेहद सहजता और संवेदनशीलता ...
10/06/2026

और इन सब के बीच- नेहल शाह

नेहल शाह की लेखनी जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों में छिपे बड़े अर्थों को बेहद सहजता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है। इस संग्रह की कवितायें पाठक को अपने आसपास के समाज, बदलते संबंधों और मनुष्य के आंतरिक संसार से रूबरू कराती है।

"और इन सब के बीच" ऐसा ही एक कविता-संग्रह है, जो रोज़मर्रा के जीवन, रिश्तों, अकेलेपन, संवेदनाओं और मानवीय संघर्षों के उन पहलुओं को सामने लाता है जिन्हें हम अक्सर महसूस तो करते हैं, पर शब्द नहीं दे पाते।
पुस्तक- और इन सब के बीच
कवि-नेहल शाह
प्रकाशन- प्रभाकर प्रकाशन
यह पुस्तक अमेज़न/-फ्लिप्कार्ट दोनों पर उपलब्ध है लिंक प्राप्त करने के लिए कमेंट करें “पुस्तक”.
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त्रिवेणी — आचार्य रामचंद्र शुक्ल‘त्रिवेणी’ हिंदी साहित्य के तीन महान भक्तिकालीन कवियों—मलिक मुहम्मद जायसी, महाकवि सूरदास...
08/06/2026

त्रिवेणी — आचार्य रामचंद्र शुक्ल

‘त्रिवेणी’ हिंदी साहित्य के तीन महान भक्तिकालीन कवियों—मलिक मुहम्मद जायसी, महाकवि सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास—पर आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखे गए महत्वपूर्ण आलोचनात्मक निबंधों का संग्रह है। इस पुस्तक की भूमिका एवं संपादन सिद्धार्थ शंकर राय ने किया है तथा इसका प्रकाशन प्रभाकर प्रकाशन द्वारा किया गया है। जिस प्रकार प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती का त्रिवेणी संगम भारतीय संस्कृति का प्रतीक है, उसी प्रकार इस पुस्तक में भक्ति साहित्य की तीन महान धाराओं का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इन तीनों कवियों के जीवन, कृतित्व, काव्य-दृष्टि, भाषा-शैली और भारतीय समाज पर उनके प्रभाव का गहन एवं तर्कपूर्ण विश्लेषण किया है। पुस्तक में जायसी की सूफी प्रेम-परंपरा, सूरदास की कृष्ण-भक्ति और वात्सल्य-रस तथा तुलसीदास की लोकमंगल भावना और रामभक्ति को अत्यंत सूक्ष्मता और संवेदनशीलता के साथ समझाया गया है। शुक्ल जी की सरल, प्रभावशाली और विश्लेषणात्मक शैली पाठक को केवल इन कवियों की रचनाओं से ही परिचित नहीं कराती, बल्कि उस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वातावरण की भी गहरी समझ प्रदान करती है जिसने भारतीय समाज को सदियों तक प्रभावित किया।

हिंदी साहित्य, भारतीय संस्कृति और भक्तिकालीन काव्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए ‘त्रिवेणी’ एक अमूल्य धरोहर है, जो साहित्यिक विवेक और सौंदर्यबोध दोनों को समृद्ध करती है।

📖 पुस्तक: त्रिवेणी
📝 भूमिका एवं संपादन: सिद्धार्थ शंकर राय
🏢 प्रकाशन: प्रभाकर प्रकाशन

यह पुस्तक Amazon और Flipkart पर उपलब्ध है।

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DARK WATER: A NOVEL BY HIMANSHU JOSHIDark Water is a deeply moving novel that explores the complexities of human relatio...
07/06/2026

DARK WATER: A NOVEL BY HIMANSHU JOSHI

Dark Water is a deeply moving novel that explores the complexities of human relationships, loneliness, sacrifice, and the silent struggles that shape our lives.

Through powerful characters and evocative storytelling, himanshu Joshi takes readers on an emotional journey into the depths of the human spirit.
Dark water is a tragedy, ‘the tragedy of humanity, because within a person, there is dark water-the ocean of life values.’

Available on amazon/flipkart
To unlock the world of dark water, comment “BOOK” below and get the link

जीवन खेल — प्रेम रंजन अनिमेष"मुकाबला पूरा हो चुका, फैसला हार-जीत का, कोई विकेट लेकर गया, कोई गेंद..." — इसी भावभूमि से उ...
04/06/2026

जीवन खेल — प्रेम रंजन अनिमेष

"मुकाबला पूरा हो चुका, फैसला हार-जीत का, कोई विकेट लेकर गया, कोई गेंद..." — इसी भावभूमि से उपजा है प्रेम रंजन अनिमेष का काव्य-संग्रह ‘जीवन खेल’, जिसे प्रभाकर प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। खेल के बहाने लिखी गई ये कविताएँ जीवन के विविध रंगों, संघर्षों, सफलताओं, असफलताओं, उम्मीदों और जिजीविषा को अभिव्यक्त करती हैं। यह संग्रह देश के सभी जाने-माने और अनजाने खिलाड़ियों, विश्वमंच पर स्वर्णिम सफलताएँ अर्जित करने वाले भारतीय हॉकी दल, 1983, 1985, 2007, 2011, 2013, 2024 और 2025 की विश्वविजेता भारतीय क्रिकेट टीम तथा बैडमिंटन और शतरंज में भारत का गौरव बढ़ाने वाले जांबाज़ खिलाड़ियों को समर्पित है।

इन कविताओं में खेल केवल मैदान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जीवन का रूपक बनकर सामने आता है। जीत और हार के बीच मनुष्य के धैर्य, साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी इन रचनाओं में गहराई से व्यक्त हुई है। यह पुस्तक उन सभी खिलाड़ियों को एक सुंदर श्रद्धांजलि है, जिन्होंने अपने परिश्रम और समर्पण से देश का मान बढ़ाया है।

📖 पुस्तक: जीवन खेल
✍️ लेखक: प्रेम रंजन अनिमेष
🏢 प्रकाशन: प्रभाकर प्रकाशन

यह पुस्तक Amazon और Flipkart पर उपलब्ध है।

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किन्नर देश में — राहुल सांकृत्यायनप्रसिद्ध साहित्यकार, इतिहासकार, यात्री और चिंतक राहुल सांकृत्यायन द्वारा रचित ‘किन्नर ...
03/06/2026

किन्नर देश में — राहुल सांकृत्यायन

प्रसिद्ध साहित्यकार, इतिहासकार, यात्री और चिंतक राहुल सांकृत्यायन द्वारा रचित ‘किन्नर देश में’ हिंदी यात्रा-साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण कृति है, जिसे प्रभाकर प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।

यह पुस्तक पाठकों को हिमालय के किन्नौर क्षेत्र की अद्भुत प्राकृतिक छटा, ऊँचे पर्वतों, कल-कल बहती नदियों, घाटियों और वहाँ के जनजीवन से परिचित कराती है। राहुल सांकृत्यायन ने अपनी यात्रा के अनुभवों के माध्यम से किन्नौर की लोकसंस्कृति, रीति-रिवाजों, बौद्ध परंपराओं, सामाजिक संरचना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अत्यंत जीवंत एवं प्रामाणिक चित्र प्रस्तुत किया है।

यह केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं, बल्कि हिमालयी समाज, संस्कृति और जीवन-दर्शन को समझने का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है। पुस्तक में किन्नौर के लोगों की सादगी, परिश्रम, संघर्ष और जीवन-पद्धति का संवेदनशील वर्णन पाठक को उस दुनिया के और निकट ले जाता है।

✨ “यात्रा केवल स्थानों की नहीं, बल्कि मन, समाज और विचारों की भी होती है।”

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सामयिक विमर्श (अप्रैल–जून 2026) : दूसरा अंकसाहित्य, समाज और समकालीन चिंतन को समर्पित त्रैमासिक पत्रिका ‘सामयिक विमर्श’ क...
02/06/2026

सामयिक विमर्श (अप्रैल–जून 2026) : दूसरा अंक

साहित्य, समाज और समकालीन चिंतन को समर्पित त्रैमासिक पत्रिका ‘सामयिक विमर्श’ का दूसरा अंक अब उपलब्ध है। इस अंक में कुछ नए स्तंभों और महत्त्वपूर्ण लेखों के माध्यम से साहित्य, आलोचना और वैचारिक विमर्श के विविध आयामों को सामने लाने का प्रयास किया गया है।

इस बार ‘आलोचना नई सदी’, ‘कथा नई सदी’ और ‘कविता नई सदी’ के साथ-साथ ‘दिगंत’ स्तंभ की शुरुआत की गई है। प्रथम कड़ी में रघुवीर सहाय की चर्चित कविता ‘रामदास’ पर केंद्रित विशेष विमर्श प्रकाशित है। इसके अतिरिक्त ज्ञानरंजन, राजेंद्र कुमार और वीरेंद्र यादव को समर्पित श्रद्धांजलि लेख, बलिजीत और आचार्य नरेंद्र देव पर महत्त्वपूर्ण आलेख तथा आचार्य नित्यानंद तिवारी का विस्तृत साक्षात्कार इस अंक को विशेष बनाते हैं।

गंभीर साहित्य, आलोचना, कविता और समकालीन विचार में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह अंक एक संग्रहणीय पाठ है।

इस अंक को प्राप्त करने के लिए पत्रिका में दिए गए ई-मेल पते पर संपर्क करें अथवा 8595687707 पर व्हाट्सऐप संदेश भेजें।

संपादक: मदन कश्यप
सह-संपादक: अंशु कुमार चौधरी

📖 अब उपलब्ध — प्रभाकर प्रकाशन

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