28/05/2026
त्रेता युग में जब धरती पर अधर्म बढ़ गया, तब भगवान Rama ने राक्षसों का विनाश करने के लिए अवतार लिया। उसी समय माता अंजनी के घर एक दिव्य बालक ने जन्म लिया — वही थे महाबली हनुमान जी। बचपन से ही उनमें अद्भुत शक्ति और बुद्धि थी।
एक दिन बाल हनुमान ने उगते हुए सूर्य को फल समझकर निगलने के लिए आकाश में छलांग लगा दी। देवता उनकी शक्ति देखकर चकित रह गए। बाद में इंद्रदेव के वज्र से उन्हें चोट लगी, लेकिन देवताओं ने प्रसन्न होकर उन्हें अमरता, बल और ज्ञान का वरदान दिया।
जब माता Sita का रावण ने हरण कर लिया, तब हनुमान जी ने समुद्र पार करके लंका पहुंचकर माता सीता को भगवान राम का संदेश दिया। उन्होंने लंका में अपनी शक्ति का परिचय देते हुए अशोक वाटिका उजाड़ दी और पूरी लंका में आग लगा दी।
युद्ध के समय जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने हिमालय पहुंचे। बूटी पहचान न पाने पर वे पूरा पर्वत ही उठा लाए और लक्ष्मण जी के प्राण बचाए।
हनुमान जी की सबसे बड़ी शक्ति उनका बल नहीं, बल्कि उनकी भक्ति थी। वे हमेशा कहते थे —
“मेरे लिए प्रभु श्रीराम ही सब कुछ हैं।”
आज भी माना जाता है कि जहां राम नाम का जाप होता है, वहां हनुमान जी अवश्य उपस्थित रहते हैं। 🙏