Sachan HORI Publication

Sachan HORI Publication Books,Magazines, Study Materials Publication and distribution

13/09/2020

https://www.facebook.com/Acharyashrihori/

बुद्धि,ज्ञान,विज्ञान,धर्म ,दर्शन का आश्रम

बुद्धि,कर्म,ज्ञान,विज्ञान मार्ग चलें?

30/08/2020

https://www.facebook.com/Acharya.ShriHori/

Please like #आचार्यश्रीहोरी dharm aur Darshan ke liye

बुद्धि,कर्म,ज्ञान,विज्ञान मार्ग चलें?

23/08/2020
22/08/2020

https://www.facebook.com/Acharya.ShriHori/

लाइक कर सम्पर्क में रहें |
धर्म,दर्शन समाज

बुद्धि,कर्म,ज्ञान,विज्ञान मार्ग चलें?

19/08/2020

वानप्रस्थ और संन्यास।आप क्यों नहीं ???
*****************
विश्व में जीवन की आश्रम व्यवस्था भारत में स्पष्ट रूप से मिलती है। जीवन को चार भागों में विभक्त कर ब्रह्मचर्य, गृहस्थ,वानप्रस्थ और संन्यास में बांट दिया गया । 100 वर्ष के जीवन में 25-25 वर्ष चारों के लिए।
ब्रह्मचर्य और गृहस्थ तो आप जी लिए ,उत्तरदायित्व भी निभा लिए लेकिन अब 50 की उम्र के ऊपर तो गृहस्थ ही रहोगे या वानप्रस्थ में जाओगे ? 50-75 मतलब था कि घर और समाज के काम साथ साथ करें । घर भी और बाहर भी ।दोनों जीवन । आप से परिवार को भी मिले और समाज को भी।
फिर 75 के बाद संन्यास ।घर से बाहर केवल समाज ,और जगत के कार्य । यह सोचा गया था कि इस दुनिया से जाने के पहले आप परिवार के साथ दुनिया को भी कुछ दे कर जाएं।
अब एक नया अध्याय जुड़ गया है 60 वर्ष का अवकाश (रिटायर्ड) का। सरकारें और प्राइवेट संस्थान इस उम्र के बाद आगे कुछ और समय देकर आपको सेवा मुक्त कर देते हैं।
लेकिन वाह रे मनुष्य तेरी तो इच्छा मरती ही नहीं । तू तो घर छोड़ना दूर और कस कर ,चिपक कर घर को पकड़ता हैं। शरीर को बोझ बना कर परिवार में काबिज । बच्चे कब तक देख भाल करें । अपने ही अपने माता पिता की कितनी देखभाल की थी ? लेकिन दोष आप देंगे नई पीढ़ी को ही । अपनी कहानियां जो भी बता दें आपके बच्चे असलियत जानते ही नहीं।
यह घर घर की कहानी है। आप वानप्रस्थ और संन्यास के फर्ज तो भूल गए ,नई पीढ़ी को उनके कर्तव्य जरूर बताएंगे । अभी समय है ।परमात्मा ने आपको या उस परमपिता ने आपको केवल परिवार के ही काम करने के लिए नहीं भेजा था । केवल परिवार के लिए जीवन तो पशु जीवन है ।फिर आप मनुष्य कैसे हुए ? पशु से श्रेष्ठ कैसे ?
अभी देर नहीं हुई निकलिए घर से ,चलिए समाज के बीच और कुछ यादें छोड़ जाइए मानवता के लिए । क्षेत्र,समाज,जगत के लिए । ताकि आपकी अंतिम यात्रा खुशनुमा बने । लोग आपके जीवन के कसीदे पढ़ें । आप का जाना पूरे समाज को रुला भी दे और इस बात के लिए हंसा दे,गुदगुदा दे कि आप अपना योगदान समाज को दे कर जा रहे हैं ।
आयें बौद्धिक आश्रम ,इसमें अपने जीवन में झाकें और अभी भी समय है निकालें अंदर से मोती। आप ब्रह्म हो,असीम ऊर्जा है। आप निरीह नहीं है । उठिए,चलिए,दौड़िए मेरे साथ कि शरीर और जमाना साथ है।
आचार्य श्री होरी


#आचार्यश्रीहोरी

17/08/2020

साकार उपासना या निराकार उपासना??????
***************
निराकार मन चक्रत धावै
कहते हैं समर्थक साकार उपासना के |
लेकिन निराकार में ध्यान
तो अत्यंत आसान |
मन और इंद्रियां होती हैं संयमित
होता है ध्यान अपरिमित |

एक साधै सब सधै, सब साधै सब जाय
यह है प्रकृति का ध्रुव सत्य
नही कुछ भी असत्य |
साकार उपासना में साधते हैं सबको
कभी इस आराध्य को,कभी उस आराध्य को|
कभी इसकी परिक्रमा कभी उसकी |
कभी रात में तो कभी दिन में |
कभी प्रातः कभी शाम
कभी आठो याम |

सबकी आराधना,पूजा,उपासना की रीतियां भी प्रथक
भक्ति में रत अनवरत,अथक |
मन कभी ठहरा एक स्थल ????
चक्रत रहा हर क्षण, हर पल |

अब आप पर ही निर्णय छोड़ता हूँ|
निराकार मन चक्रत धावै ?
या
साकार मन चक्रत धावै ??

अब आप चलिये अपने निर्णय अनुसार
साकार या निराकार ?????
अपना निर्णय मुझे बताइयेगा
निराकार हो तो आश्रम आइयेगा|

आचार्य श्री होरी
#आचार्यश्रीहोरी

12/08/2020

https://www.facebook.com/Acharya.ShriHori/ मेरे पेज से लगातार जुड़े रहें | लाइक और शेयर करके |

बुद्धि,कर्म,ज्ञान,विज्ञान मार्ग चलें?

Address

Delhi
110057

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm

Telephone

+911145009222

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Sachan HORI Publication posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category