14/09/2026
राजनीति में हार और जीत एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन कोई राष्ट्रीय पार्टी का उम्मीदवार चुनाव लड़े और उसे पूरे इलाके में सिर्फ एक ही वोट मिले, तो यह किसी सियासी मज़ाक से कम नहीं है। राजस्थान के डीडवाना कुचामन जिले से निकाय चुनाव का एक ऐसा ही हैरान करने वाला नतीजा सामने आया है। यहां परबतसर नगर पालिका में बीजेपी प्रत्याशी को जनता ने तो नकारा ही, खुद उनके परिवार वालों ने भी वोट नहीं दिया। यह मामला अब पूरे प्रदेश में सियासी चर्चा और सोशल मीडिया पर मीम्स का केंद्र बन गया है।
वार्ड नंबर 13 का चुनावी गणित: 573 वोटों में से BJP के खाते में सिर्फ 1 वोट
परबतसर नगर पालिका के वार्ड नंबर 13 का चुनाव परिणाम इस बार इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। यहां से बीजेपी ने कैलाश चंद्र को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। पार्टी को उम्मीद थी कि कमल के सिंबल पर प्रत्याशी एक सम्मानजनक प्रदर्शन करेगा। लेकिन जब ईवीएम या बैलेट के नतीजे खुले, तो आंकड़े चौंकाने वाले थे।
इस वार्ड में कुल 573 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इसमें से कांग्रेस प्रत्याशी हिना खानम को 376 वोट मिले और उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार रसीद खां भी 195 वोट हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन सबसे बड़ा झटका बीजेपी के कैलाश चंद्र को लगा, जिनकी झोली में पूरी काउंटिंग के बाद सिर्फ 1 वोट गिरा।
अपनों ने ही दिया धोखा: पत्नी और माता पिता ने कांग्रेस को क्यों दिया वोट?
एक वोट मिलने का सीधा मतलब यह है कि कैलाश चंद्र ने खुद को जो वोट दिया, वही उनका इकलौता आंकड़ा रहा। इस नतीजे ने चुनाव से ज्यादा उनके पारिवारिक समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर प्रत्याशी को सिर्फ एक वोट मिला है, तो जाहिर है कि उनकी पत्नी, माता पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने कमल के बजाय किसी और निशान पर बटन दबाया है। स्थानीय रिपोर्ट्स और वोटिंग पैटर्न के मुताबिक, प्रत्याशी के परिजनों ने भी कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान किया। यह अपने आप में एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक संदेश है कि जब प्रत्याशी अपने ही घर में विश्वास नहीं जगा पाया, तो जनता से क्या उम्मीद करता।
पार्टी को मिला बहुमत लेकिन प्रत्याशी का हुआ सूपड़ा साफ: जानें परबतसर का पूरा रिजल्ट
कैलाश चंद्र की यह हार इसलिए भी ज्यादा चुभने वाली है क्योंकि पूरे परबतसर शहर का मिजाज बीजेपी के पक्ष में था। वार्ड 13 की इस ऐतिहासिक हार के बावजूद परबतसर नगर पालिका में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है। यहां कुल 25 वार्डों में से 13 पर बीजेपी ने जीत का परचम लहराया है। वहीं कांग्रेस को 12 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।
दूसरी तरफ, जिले की डीडवाना नगर परिषद में कांग्रेस ने बाजी मारी है। यहां 40 वार्डों में से 16 पर कांग्रेस, 14 पर निर्दलीय और महज 9 सीटों पर बीजेपी सिमट गई। इसी तरह कुचामन नगर परिषद में भी निर्दलीयों का बड़ा दबदबा देखने को मिला। कुचामन में कांग्रेस को 17, बीजेपी को 15 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 13 वार्डों में जीत मिली है।
परबतसर के वार्ड 13 का यह नतीजा इस बात का क्लासिक उदाहरण है कि स्थानीय चुनावों में सिर्फ पार्टी का सिंबल काम नहीं आता। ग्राउंड कनेक्टिविटी, स्थानीय समीकरण और सबसे जरूरी पारिवारिक समर्थन चुनाव जीतने की पहली सीढ़ी होते हैं। यह नतीजा उन सभी राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा सबक है जो टिकट बांटते समय उम्मीदवार की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर देते हैं।