Saturday Poetry

Saturday Poetry I am a pond. you can catch fishes here. here fishes are visible in words and poems. in transitions, Saturday can be a peace,
It can be a hell.

It's a day on Earth,
That's it worth...........Simon Clark

07/01/2026

Remebring

कहीं जाने का मन होता हैतो पक्षी की तरहकि संध्या तक लौट आएँ।एक पक्षी की तरह जाने की दूरी!सांध्य दिनों में कहीं नहीं जाताप...
23/12/2025

कहीं जाने का मन होता है
तो पक्षी की तरह
कि संध्या तक लौट आएँ।
एक पक्षी की तरह जाने की दूरी!
सांध्य दिनों में कहीं नहीं जाता
परन्तु प्राण-पखेरू?

/विनोद कुमार शुक्ल

सुरों की दुनिया की एक नाज़ुक पर छू जाने वाली आवाज़ अब ख़ामोश हो गई…🎙️भारतीय सिनेमा की जानी-मानी गायिका और अभिनेत्री सुलक...
08/11/2025

सुरों की दुनिया की एक नाज़ुक पर छू जाने वाली आवाज़ अब ख़ामोश हो गई…🎙️
भारतीय सिनेमा की जानी-मानी गायिका और अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित अब हमारे बीच नहीं रहीं। फ़िल्म 'संकल्प' से लेकर 'उलझन' तक — उनकी आवाज़ ने एक पूरे दौर को अपनी मिठास से भर दी थी।

SSaturday Poetryउन्हें याद करते हुए, उस सुनहरे ज़माने को भी याद करते हैं जब सुर, सादगी और संवेदना एक साथ सांस लेते थे। 🎶

सुलक्षणा पंडित जी को भावभीनी श्रधांजलि!

https://youtu.be/a1VNPMGCyVI

सुरों की दुनिया की एक नाज़ुक पर छू जाने वाली आवाज़ अब ख़ामोश हो गई…🎙️भारतीय सिनेमा की जानी-मानी गायिका और अभिनेत्.....

21/10/2025

गाँव गाँव से उठो
बस्ती बस्ती से उठो
देश की सूरत
बदलने के लिए उठो
Saturday Poetry

प्रविष्टियाँ आमंत्रित हैं------रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार -2026रविशंकर उपाध्याय स्मृति संस्थान द्वारा, ...
17/09/2025

प्रविष्टियाँ आमंत्रित हैं------

रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार -2026

रविशंकर उपाध्याय स्मृति संस्थान द्वारा, युवा कवि रविशंकर उपाध्याय की स्मृति में प्रत्येक वर्ष दिए जाने वाले पुरस्कार के क्रम में 'रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार 2026’ प्रदान करने हेतु निम्नलिखित शर्तों के साथ प्रविष्टियाँ आमंत्रित हैं-

1-प्रविष्टि भेजने वाले कवि की उम्र 01 जनवरी 2026 को 35 वर्ष से अधिक न हो अर्थात उसकी जन्मतिथि 01 जनवरी 1991के बाद की होनी चाहिए।

2- प्रविष्टि के रूप में अपने संक्षिप्त लेखकीय परिचय के साथ पत्र-पत्रिकाओं में अगस्त, 2025 तक प्रकाशित अपनी कम से कम पांच कविताएँ भेजना अनिवार्य है।यह प्रविष्टि स्वयं कवि अथवा उससे जुड़े किसी भी व्यक्ति द्वारा भेजी जा सकती है।

3- इस पुरस्कार के लिए वे ही कवि मान्य होंगे जिनका कोई कविता संग्रह प्रकाशित न हों। यह पुरस्कार सम्बंधित युवा कवि की समग्र रचनाशीलता के आलोक में उसकी काव्य संभावनाओं पर दिया जायेगा।

4- इस पुरस्कार के अंतर्गत सम्मान स्वरुप दस हजार रुपए की राशि व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जायेगा।

5- - प्रविष्टियाँ 31 अक्टूबर 2025 तक दिए गए मेल पर भेजी जा सकती हैं।

6- इस पुरस्कार की घोषणा 15 नवम्बर 2026 तक कर दी जाएगी|

7- पुरस्कार हेतु गठित निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम व् मान्य होगा।

8-यह पुरस्कार 12 जनवरी 2026 को रविशंकर उपाध्याय के जन्मदिन पर प्रदान किया जाएगा |

9- अब तक पुरस्कार पाने वाले कवियों के नाम इस प्रकार हैं--जसिंता केरकेट्टा,अमृत सागर,निखिल आनंद गिरि, अदनान कफील दरवेश, शैलेंद्र शुक्ल, संदीप तिवारी, गौरव भारती, गोलेंद्र पटेल, अरबाज़ खान , तापस शुक्ल और अपूर्वा श्रीवास्तव।

अगले पांच वर्ष के लिए गठित निर्णायक मंडल के सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं---
अखिलेश (प्रसिद्ध कथाकार व सम्पादक)
अरुण कमल (प्रसिद्ध कवि)
अरुण होता (प्रसिद्ध आलोचक)
मदन कश्यप (प्रसिद्ध कवि)
राजेश जोशी (प्रसिद्ध कवि)

प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल डॉ.वंशीधर उपाध्याय
अध्यक्ष सचिव

ई मेल[email protected]
मो0-08448771785

23/06/2025

मेरे तन के ज़ख़्म न गिन अभी,
मेरी आँख में अभी नूर है
मेरी बाज़ुओं पे निगाह कर,
जो ग़ुरूर था वो ग़ुरूर है

-अहमद फ़राज़

कवि अम्बिका दत्त जी के जन्मदिन के अवसर पर उनकी एक कविता : काहे के कवि हैंहुए नहीं खिलाफ खड़े जुल्म के डटे नहीं  डर  के आग...
20/06/2025

कवि अम्बिका दत्त जी के जन्मदिन के अवसर पर उनकी एक कविता :

काहे के कवि हैं

हुए नहीं खिलाफ खड़े जुल्म के
डटे नहीं डर के आगे
भागे भागे जीवन से जीव चुराके
फिर काहै के कवि हैं

दौडे सीधी और सपाट सड़क पर
आंखें मींचे
चुना नहीं कोई रस्ता विपरीत
फिर काहे के कवि हैं

सब कुछ जैसे ठहर गया हो
कोई नहीं कहीं पर हलचल
सब तरफ निराशा घोर निराशा
कहीं नहीं कोई कण आशा का
सबने सोचा जैसा
हमने भी वैसा ही सोच लिया
फिर बोलो
हम काहे के कवि हैं

गिरे टूटकर पेड़ से पत्तों जैसे
बहते रहते साथ हवा के
हिलते ? करवट तक नहीँ लेते अपने आप
पड़े हुए हैं यूंही यहाँ वहां

काहे के कवि हैं
उतरे नहीं पेड़ के अन्दर
पहुँचे नहीं कभी भी जड़ मेँ गहरे
विकसे नहीं जीवन के फूलों में
फूटे नहीं
कठिन तने में छिपी गठानों से
फूटे हरबार जहां से पत्ते नए नए

बचे नहीं गर बीजों मे

तो काहे के कवि हैं ।

• अंबिका दत्त

18/05/2025
18/05/2025

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