09/07/2020
आज की खबरों में चर्चित किस्सा गैंगस्टर विकास दुबे गिरप्तारी -
रहस्य रोमांच -
उज्जैन भोपाल दिल्ली( अलर्ट आपतक ब्यूरो )कानपुर - 2-3 जुलाई को दिलों को हिला देने वाला जिसमे 8 पुलिस वाले इस हिस्टीशीटर गैंगस्टर विकास दुबे के कारण शहीद हुए पुलिस वालों का बदला उसकी गिरप्तारी को लेकर खाक छानती फिर रही थी वांछित अचानक उज्जैन महाकाल मंदिर परिषर में प्रकट होकर नाटकीय अंदाज में प्रेस वालों मौजूदगी में गिरप्तारी दिखाता है और पूरा देश खबरों की सन सनी में जुटा है।
आश्चर्य से भरा कम नहीं रहस्य रोमांच -
बीते कलतक जिसके होने का अंदेशा पहले दिल्ली और फिर नोएडा में जताया जा रहा था। नोएडा कि हर गाड़ी की चेकिंग हो रही थी। लेकिन कानपुर से करीब 751 किलोमीटर दूर वो अचानक उज्जैन पहुंच जाता है। जब विकास दुबे के लिए हर बार्डर पर निगरानी रखी जा रही थी, हर चेहरे से मास्क हटाकर देखा जा रहा था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती का दावा फिर भी विकास दुबे उज्जैन कैसे पहुंचता है?
पटकथा अभिनय बनाम विकास -
गुरुवार सुबह ही विकास दुबे महाकालेश्वर मंदिर पहुंचा और सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर विकास दुबे ने मंदिर के सामने अपना नाम चिल्लाया. मौके पर स्थानीय मीडिया को भी बुला लिया गया था.
बताया ये भी जा रहा है कि उसने मंदिर के बाहर खड़े होकर अपना नाम चिल्लाया, फिर मंदिर प्रशासन के लोगों ने महाकाल थाना पुलिस को सूचित किया-
जब पुलिस विकास दुबे को पकड़कर महाकाल थाने में ले जा रही थी, तब विकास दुबे लगातार मीडिया से बात कर रहा था. इसी दौरान वो चिल्लाया, '...मैं विकास दुबे हूं...कानपुर वाला'. इस दौरान साथ में पुलिसवालों ने उसे चुप कराया और तुरंत गाड़ी में बैठा दिया।
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News उज्जैन। आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार उत्तर प्रदेश के मोस्ट वाटेंड गैंगस्टर विकास दुबे को उज्जैन पुलिस ने गुरुवार सुबह ज्योर्तिलिंग महाकाल मंदिर परिसर से गिरफ्तार कर लिया है लेकिन उसकी गिरफ्तारी ने कई अहम सवालों को भी जन्म दे दिया है।
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मोस्ट वाटेंड विकास जब मंदिर परिसर में पहुंचा तब तीन-चार लोग साथ थे लेकिन जब पकड़ा गया तो अकेला ही था। सवाल- मंदिर के सुरक्षाकर्मियों ने भी बातचीत में कबूला कि विकास दुबे के साथ तीन-चार लोग और थे लेकिन वे कौन थे और गिरफ्तारी के ठीक पहले कहां चले गए किसी को पता नहीं। पुलिस दो वकीलों सहित कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
महाकाल मंदिर परिसर के गार्ड और पुलिसकर्मियों की कहानी के अनुसार, एक गार्ड को विकास पर शक हुआ, उसने अपने को सुपरवाइजर बताया। दो घंटे तक सीसीटीवी फुटेज में उसे पहचाने का प्रयास होता रहा। इस दौरान विकास दुबे मंदिर परिसर में ही मौजूद रहा। बाद में गार्ड जब उसे लेकर पूछताछ कक्ष में लाए तो पहले उसने अपना नाम गलत बताया, लेकिन वहां मौजूद गार्ड ने जब उससे उसका मोबाइल नंबर पूछकर डायल किया तो उसमें दुबे नाम लिखा आया। इससे उसकी पहचान हुई।
सवाल- दो घंटे तक गार्ड उसकी पहचान में जुटे थे तब तक वह मंदिर परिसर में क्या करता रहा। जिस विकास दुबे के पीछे उप्र की पूरी पुलिस, इंटेलीजेंस लगी हो उसका मोबाइल चल रहा हो और पुलिस सहित अन्य ऐजेंसियों को पता तक नहीं चले यह कैसे संभव है।
हमारी सुरक्षा व्यवस्था हाइवे चौकसी -? एक मोस्ट वांटेड पर नजर
मोस्ट वाटेंड विकास दुबे को उत्तर प्रदेश के नंबर प्लेट लगे एक वाहन से उज्जैन पहुंचना बताया गया है। नंबर प्लेट पर हाईकोर्ट भी लिखा था।
सवाल- सड़क मार्ग से वह चार राज्यों, उप्र, हरियाणा, राजस्थान, मप्र के दर्जनों जिलों की सीमाओं को पार कर उज्जैन पहुंच गया फिर भी कहीं की भी पुलिस ने उसे रोका कैसे नहीं।
उज्जैन के एक शराब कारोबारी और उसके मैनेजर के माध्यम से विकास के उज्जैन आने की जानकारी सामने आ रही है। शराब कारोबारी और मैनेजर मित्र के साथ पहले भी विकास के महाकाल दर्शनों के लिए आता रहा है।
सवाल- जब मध्य प्रदेश पुलिस उसके ग्वालियर-मुरैना संपर्कों के आधार पर पड़ताल कर रही थी तब मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पास यह जानकारी कैसे नहीं थी ?
ऐसा शातिर अपराधी, जिसके लिए पूरे भारतभर में अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती राज्य तो हाई अलर्ट पर थे, बावजूद वह मंदिर के भीतर तक आराम से कैसे पहुंच गया?
दूसरी कहानी- विकास साबरमती एक्सप्रेस से गुरुवार अल सुबह इंदौर पहुंचा।
सवाल- यदि विकास बुधवार को हरियाणा के फरीदाबाद में मौजूद था फिर साबरमती एक्सप्रेस से इंदौर उज्जैन कैसे पहुंच सकता है?