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छूटते किनारे के विमोचन की तस्वीरें! लेखक सुयश त्यागी तक मंगलकामना पहुँचे ।
30/03/2023

छूटते किनारे के विमोचन की तस्वीरें! लेखक सुयश त्यागी तक मंगलकामना पहुँचे ।



भोपाल‌ के साथियों से निवदेन है कि यहाँ पहुँचे! सादर
29/03/2023

भोपाल‌ के साथियों से निवदेन है कि यहाँ पहुँचे!

सादर



आज भाषा संस्थान जेएनयू  में व्यलोक की कितब बोहेमियन का लोकार्पण हुआ। आपने अगर नही पढ़ी है तो लिंक काॅमेन्ट में दिया जा र...
19/03/2023

आज भाषा संस्थान जेएनयू में व्यलोक की कितब बोहेमियन का लोकार्पण हुआ। आपने अगर नही पढ़ी है तो लिंक काॅमेन्ट में दिया जा रहा है!


लैम्डा लोगों के हाथों में पहुँचने लगी है और कमाल‌ की पाठकीय प्रतिक्रिया आनी शुरु हो गयी है। अगर अभी तक आपने नही ली है तो...
16/03/2023

लैम्डा लोगों के हाथों में पहुँचने लगी है और कमाल‌ की पाठकीय प्रतिक्रिया आनी शुरु हो गयी है। अगर अभी तक आपने नही ली है तो देखिए अमेजन का लिंक कमेन्ट में है!


आपने पढ़ा क्या ? नही पढ़ा तो‌ अपनी प्रति बुक कीजिए! अमेजन का लिंक कमेन्ट में है।
16/03/2023

आपने पढ़ा क्या ? नही पढ़ा तो‌ अपनी प्रति बुक कीजिए! अमेजन का लिंक कमेन्ट में है।



'नाचती कहानियाँ' रेखा वशिष्ठ मल्होत्रा के कर्तव्यबोध व मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता एक उम्दा कहानी संकलन है। रेखा वशिष्ठ ...
10/03/2023

'नाचती कहानियाँ' रेखा वशिष्ठ मल्होत्रा के कर्तव्यबोध व मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता एक उम्दा कहानी संकलन है।
रेखा वशिष्ठ मल्होत्रा कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में एम.फिल करने के पश्चात अध्यापन के क्षेत्र से जुड़ गईं। अध्यापन कार्य ने इन्हें हर घटना को एक अलग दृष्टिकोण से देखने की दृष्टि प्रदान की। यही अनोखा दृष्टिकोण इनकी लिखी कहानियों में भी झलकता है। इनकी लिखी अनेक कहानियाँ व लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं व ऑनलाइन पोर्टल्स पर प्रकाशित हो चुके हैं। "नाचती कहानियाँ" से पहले इनका कहानी संग्रह "लॉकडाउन, बस एक दिन और" सन 2022 में प्रकाशित हुआ था, जिसने पाठकों की खूब प्रशंसा बटोरी थी, व बेस्टसेलर का सम्मान प्राप्त किया था।

किताब के विमोचन की प्रक्रिया पुस्तक मेले में पुरी कर ली गयी थी। आप सभी के लिए अमेजन पर यह अब उपलब्ध है।

किताब का लिंक काॅमेन्ट बॉक्स में है।



07/03/2023
हर्फ से स्टाॅल से लेखकों के संग की झलकियाँ....
03/03/2023

हर्फ से स्टाॅल से लेखकों के संग की झलकियाँ....

अभिषेक श्रीवास्तव लिखते हैं कि 'बोहेमियन’ को उपन्‍यास कहना इसके साथ अल्‍प-न्‍याय होगा। यह आत्‍मवृत्‍त भी नहीं है। यह संस...
03/03/2023

अभिषेक श्रीवास्तव लिखते हैं कि 'बोहेमियन’ को उपन्‍यास कहना इसके साथ अल्‍प-न्‍याय होगा। यह आत्‍मवृत्‍त भी नहीं है। यह संस्‍मरण भी नहीं है। यह डायरी भी नहीं है। कार्य-कारण की तार्किक श्रृंखलाओं के भीतर और बाहर दोनों ही स्‍पेस-टाइम में एक साथ आकार ले रहे एक विराट अबूझ कोलाहल के बीच यह एक जबरदस्‍त ढंग से खंडित व्‍यक्तित्‍व का बयान है। कैथेरीन मालिबू से उधार लेकर कहें, तो यह अनार्को-कैपिटलिज्‍म के एक प्रतिनिधि नागरिक की डायरी है। यहां जो दायें खड़ा है वह दायें नहीं है और जो बायें खड़ा है वह बायें नहीं है। वह बीच की जमीन, जो आज पूरी तरह नजर से ओझल है, उस पर खड़े होकर अंतहीन संवाद करते- वास्‍तव में मोनोलॉग करते और बीच-बीच में अपने-अपने ट्रांस में खो जाते- दो किरदार ऐसे तिलचट्टे हैं जो किसी भी तरह के विस्‍फोट को शराब के प्‍याले में डुबो कर उदरस्‍थ कर लेने की मूल प्रेरणा से संचालित हैं। इन्‍हें कोई नहीं मार सकता।

लेखक के बारे में बात करें तो व्यालोक प्रखर राष्ट्रवादी विचारों के पोषक और विचारक हैं। इनकी शिक्षा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान से हुयी है। भारत के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में काम करने का 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। इससे पहले भी एक किताब 'वे 47 दिन' लिख चुके हैं। घूमना, बतकही करना और लिखना-पढ़ना इनका शौक है।

किताब का लिंक काॅमेन्ट बाक्स में है।



लैम्डा उपन्यास सपनों को पाने के लिए जिंदगी के संघर्ष को दिखाता है। इस उपन्यास के पात्र आपको अपने भीतर या आस-पास महसूस हो...
03/03/2023

लैम्डा उपन्यास सपनों को पाने के लिए जिंदगी के संघर्ष को दिखाता है। इस उपन्यास के पात्र आपको अपने भीतर या आस-पास महसूस हो सकते है, यदि आप एक छात्र है, एक प्रेमी है, एक दोस्त या रिश्तों में बंधे, जिंदगी में झंझावतों से जूझते आम इंसान तो ये उपन्यास आपको जिंदगी की गहरी व्यावहारिकातों से रुबरु करायेगा। उपन्यास का कथानक सपनों की रेस हार चुके ऐसे पात्र पर है जो एक घटना से प्रेरणा प्राप्त कर अपने हालातों में बदलाव का प्रयास करता है और ऐसा करने में अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है। ये उपन्यास बताता है कि कोई भी जीत या कोई भी हार अंतिम नहीं होती। उपन्यास के प्रत्येक पात्र जिंदगी के अलग-अलग पक्ष का प्रतिनिधित्व करते है। जीत-हार, भय, असुरक्षा, आत्मसम्मान, मेहनत, अनुशासन, प्रतिस्पर्धा, प्रेम और किस्मत के बीच उलझा व्यक्ति जन्म से मृत्यु की ओर अपनी जिंदगी की कहानी को कैसे बढ़ाता है, इसी कथ्य की रोचक प्रस्तुति है लैम्डा। लेखक परिचय- कपिल आर शर्मा पत्रकारिता एवं जनसंचार में एम.ए, यूजीसी नेट हैं और पेशे से वर्तमान में बिहार में चुनाव अधिकारी है। विविध विषयों पर पर देश के विभिन्न समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में सामाजिक लेखों, लघु कहानियों, व्यंग लेखों का प्रकाशन होता रहा है।, पटकथा एवं गीत लेखन भी करते है।

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