30/04/2018
लालू जी के राज में बिहार की जो भी दुर्दशा रही हो, लेकिन उनके ओज और तेज यानि तेजस्वी और तेज प्रताप अपने महान पिता की रक्षा के प्रति पूरे बिहार वासियों का प्रतिनिधित्व करते नज़र आते हैं। 90 के दशक में बिहार की दुर्दशा कभी किसी खबरिया चैनल या अख़बार के जरिए दिखने की मोहताज नहीं रही। बिहार के विकास की गति रोकने में बड़ा हाथ रखने का दंभ न भरने वाले लालू परिवार की वर्तमान स्थिति अचरज का विषय नहीं है। यदुवंशी भगवान श्री कृष्ण ने खुद कर्म फलों के रहस्य से क्षत्रिय वीर अर्जुन को परिचित कराया। अब इनका सियासी पलड़ा हल्का हुआ तो सारे कर्म एक साथ फलित होने लगे।
भारतीय दण्ड संहिता के अनुसार वैसे तो सारे लोग एक समान हैं, लेकिन राजनीतिज्ञों के प्रति अपनी अभूतपूर्व और चिरपरिचित सहृदयता दिखाते संविधान रक्षकों ने इस महान नेता को रोगी के रूप में देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थान में जगह दी है। एक आदमी की कारिस्तानियों के लिए अतिसख्त सज़ा का प्रावधान है लेकिन ख़ास लोगों के प्रति हमारे उद्धारकों की उदारवादी विचारधारा देश की न्याय व्यवस्था की कार्यशैली की ओर एक बार फिर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता दिखता है। 🤔