05/06/2026
विश्व पर्यावरण दिवस विशेष | कान 2026 से पर्यावरण और सिनेमा की पुकार
सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, आने वाले कल का आईना भी है। कान 2026 में शामिल हुई कुछ फिल्में बताती हैं कि पर्यावरण का मुद्दा जंगल, पानी और इंसान — तीनों से जुड़ा है। कान 2026 के निर्देशक थिएरी फ्रेमो (Thierry Fremaux) ने भी कहा कि इस साल कई फिल्में वैश्विक तनाव से बचने के लिए “कोमलता, गीतों और प्रकृति” पर केंद्रित हैं, जबकि कुछ अन्य फिल्में _“इतिहास को वर्तमान में ले आती हैं”
ये फिल्में सिनेमा की दुनिया में कंटेंट और सोच को लेकर सामयिक और सार्थक बदलाव हैं.. ज़रूरत हैं। हमें अपनी सोच में, सिनेमा में प्रकृति, पर्यावरण, सहअस्तित्व के मुद्दों को शामिल करना ही होगा, ये आज की ज़रूरत है।
ऊपर मेंशन हुई कान की ये 3 फिल्में हैं-
1. 𝐒𝐩𝐢𝐫𝐢𝐭 𝐎𝐟 𝐓𝐡𝐞 𝐖𝐢𝐥𝐝𝐟𝐥𝐨𝐰𝐞𝐫 — भारत
ये मध्य प्रदेश के जंगलों में बसी यह डॉक्यूमेंट्री दो आदिवासी भाई-बहनों की कहानी है। वे देश की पहली कानूनी तौर पर वैध महुआ डिस्टिलरी चलाते हैं — जहाँ जंगल को बचाकर ही रोज़ी-रोटी मिलती है, और पारंपरिक रास्ता ही विकास की राह बन जाता है।
2. 𝐄𝐥𝐞𝐩𝐡𝐚𝐧𝐭𝐬 𝐢𝐧 𝐭𝐡𝐞 𝐅𝐨𝐠 — नेपाल
ये जंगल के किनारे रहने वाले किन्नर समुदाय और जंगली हाथियों के सह-अस्तित्व की कहानी है। अन सर्टेन रिगार्ड में ज्यूरी प्राइज़ विजेता यह फिल्म सवाल करती है — क्या हम उन लोगों को भूल सकते हैं जो पर्यावरण की रक्षा की पहली पंक्ति में खड़े हैं.... यानी आदिवासी, पारंपरिक वनवासी और जंगलों से सटे इलाकों में रहने वाले लोग।
3. 𝐄𝐥 𝐫𝐚𝐬𝐭𝐫𝐞 𝐝𝐞𝐥 𝐥𝐥𝐨𝐩 / 𝐓𝐡𝐞 𝐓𝐫𝐚𝐢𝐥 𝐨𝐟 𝐭𝐡𝐞 𝐖𝐨𝐥𝐟— कैटालोनिया
ये फिल्म भाई की मौत के बाद अपने गाँव लौटी एक लड़की की कहानी है, जहां उसके पिता एक फासीवादी शासन की वैक्सीन से मर रहे हैं, जो बड़े परिवारों को निशाना बनाती थी। इधर गाँव सूख रहा है, उधर पिता की साँसें। पानी की कमी और सत्ता के ज़हर के बीच वह इलाज ढूँढती है — एक ऐसी दुनिया में जहाँ पर्यावरण और राजनीति, दोनों जानलेवा हैं। रानीतिक और डिस्टोपियन लगती ये फिल्म समाज, राजनीति और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों और सवालों से जूझती है।
कमोबेश ये तीनों फिल्में एक ही सच दिखाती हैं:
दरअसल पर्यावरण का संकट अकेला नहीं आता। वह आदिवासी की ज़मीन छीनता है, हाशिए के समुदाय को सबसे पहले डुबोता है, और सत्ता को इंसानों पर प्रयोग करने का मौका देता है। उड़ीसा का नियमगिरि हो, छत्तीसगढ़ का हसदेव अरण्य हो या फिर दिल्ली-गुड़गांव-हरियाणा से सटी अरावली.... खबरों के ज़रिए इस खतरनाक प्रवृत्ति के हम सब चश्मदीद बनते रहे हैं।
इस पर, सिनेमा हमें याद दिलाता है — धरती को बचाना मतलब इंसाफ को बचाना है।