Ajit Pandey Vichaar Manch

Ajit Pandey Vichaar Manch राजनीति, समाज और ज्ञान पर निष्पक्ष विचार

I think this is not good INC because of this summit is world level. Why u want to opposed this type of things ...  | Wor...
22/02/2026

I think this is not good INC because of this summit is world level. Why u want to opposed this type of things ...

| Workers of the Bharatiya Janata Party stage a protest outside the Indian National Congress headquarters on Akbar Road in New Delhi, condemning the disruption at the AI Impact Summit.

कर्म प्रधान विश्व रचि‌ राखा जो जस करहि सो तसि फल चाखाआपके वाणी विचार कर्म अच्छे होने से आपके साथ साथ हम सभी देशवासीयों क...
22/02/2026

कर्म प्रधान विश्व रचि‌ राखा
जो जस करहि सो तसि फल चाखा

आपके वाणी विचार कर्म अच्छे होने से आपके साथ साथ हम सभी देशवासीयों का भी भला होगा!

    Kripya es tarah ki post se bache kyoki ye fraud hi hote hai बैंक से तीसरी किस्त में नीलामी द्वारा खींची स्कॉर्पियो N...
22/02/2026



Kripya es tarah ki post se bache kyoki ye fraud hi hote hai

बैंक से तीसरी किस्त में नीलामी द्वारा खींची स्कॉर्पियो N फर्स्ट ओनर 2025 मॉडल 429 किलोमीटर चली हुई बेचना है मात्र 7 लाख 38 हजार से फाइनेंस भी हो जाएगा

महागठबंधन के दफ़्तरों में बैठके हो रही हैं, पर नतीजा वही “खींचतान और हल्ला। सीएम कौन बनेगा, डिप्टी सीएम किसे बनाया जाएगा...
08/10/2025

महागठबंधन के दफ़्तरों में बैठके हो रही हैं, पर नतीजा वही “खींचतान और हल्ला। सीएम कौन बनेगा, डिप्टी सीएम किसे बनाया जाएगा बस इसी पर बहस जारी है। लगता है बिहार की तक़दीर से ज़्यादा, कुर्सी की तक़दीर की फिक्र है सबको। कांग्रेस और आरजेडी में सीट बंटवारा अब भी उलझा हुआ है। कौन लड़ेगा कहाँ से? कौन टिकट पाएगा? बस यही “काग़ज़ी लड़ाई” चल रही है।जमीनी लड़ाई की किसी को परवाह नहीं। हक़ीक़त तो ये है, कि ये सब मीडिया में बने रहने की सियासत है ना कोई विज़न है, ना कोई मिशन। बस “ड्रॉइंग रूम मीटिंग” और “टीवी इंटरव्यू” से चल रही है बिहार की सियासत!
तेजस्वी यादव को कुछ लोग “भावी मुख्यमंत्री” कहकर पेश कर रहे हैं, मगर सवाल ये है क्या मुख्यमंत्री बनने के लिए सिर्फ़ चेहरा होना काफी है? या फिर जज़्बा, क्रेज़ और अवाम से लगाव भी चाहिए? यहाँ तो मामला उल्टा है ना जनता से राब्ता है, ना गाँव-कस्बों में पैठ, बस एयर-कंडीशंड कमरों में "पॉलिटिक्स की क्लास" चल रही है। कांग्रेस भी अब “टाइमपास पार्टी” लगती है जो हर बार चुनाव से पहले “बड़े इरादे” लेकर आती है, और नतीजों में तीसरे या चौथे नंबर पर लौट जाती है। सुनने में आ रहा है कि इस बार भी वही होगा आरजेडी तीसरे नंबर पर, कांग्रेस चौथे नंबर पर, और फिर तेजस्वी जी विपक्ष के लीडर बनकर बैठ जाएंगे।
कहने को सब बिहार को बदलने की बात करते हैं,

01/10/2025

🌾 "बिहारी बोलता है तो सीना चौड़ा हो जाता है!" 🌾

आजकल राजनीति में लोग अपनी कुर्सी और फायदे की सोचते हैं, लेकिन कभी–कभी कोई ऐसा चेहरा सामने आता है जो बिहार और बिहारियों की असल तकलीफ़ों को खुलकर सामने रख देता है।

वीडियो में जिस अंदाज़ से प्रशांत किशोर ने बात रखी, उसमें साफ़ झलकता है कि कोई अगर सचमुच बिहार के भविष्य के बारे में सोच रहा है – तो वो सिर्फ़ नेता नहीं, बल्कि समाज का बेटा है।

👉 ये बात हमें बताती है कि बिहार का नौजवान चाहे जहाँ जाए, उसकी जड़ें बिहार की मिट्टी से जुड़ी रहती हैं।

👉 और जब भी कोई बिहारी अपने हक़ और अस्मिता की आवाज़ उठाता है, तो वो सिर्फ़ राजनीति नहीं बल्कि समाज की ताक़त बन जाता है।

मैं किसी प्रचार में नहीं हूँ, बस इतना कहना चाहता हूँ – ऐसी सोच और हिम्मत रखने वाले लोग ही बिहार का असली चेहरा दुनिया के सामने दिखा सकते हैं। ❤️

Unity Over Division — यही असली राजनीति हैभारत की ताक़त उसकी विविधता में है। हमारे देश में अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं, ...
27/09/2025

Unity Over Division — यही असली राजनीति है

भारत की ताक़त उसकी विविधता में है। हमारे देश में अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग धर्म और जातियाँ हैं, हर प्रदेश की अपनी संस्कृति और पहचान है। लेकिन इन सब भिन्नताओं के बावजूद भारत एक है। यही हमारी असली पहचान है।

राजनीति का मक़सद जनता को जोड़ना होना चाहिए, न कि तोड़ना। दुर्भाग्य से पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि कई बार नेता और दल जानबूझकर जाति, धर्म या क्षेत्र के नाम पर जनता को बाँटने की कोशिश करते हैं। इससे समाज में तनाव पैदा होता है, आपसी विश्वास कमज़ोर पड़ता है और असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।

👉 उदाहरण समझिए:
अमेरिका में राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने गृहयुद्ध के समय कहा था — “A house divided against itself cannot stand” (एक घर जो आपस में बँटा हो, कभी टिक नहीं सकता)। यह बात भारत पर भी पूरी तरह लागू होती है। अगर हम एक-दूसरे से लड़ते रहेंगे, तो कभी शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य या विकास की तरफ़ ध्यान नहीं दे पाएँगे।

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने भी हाल ही में कहा था कि “लोकतंत्र तभी मज़बूत है जब नागरिक एक-दूसरे के साथ खड़े हों, चाहे उनकी पहचान कितनी भी अलग क्यों न हो।” यही सच्चाई भारत में भी है।

👉 आज के भारत की ज़रूरत:

जब छात्र विश्वविद्यालय में बेहतर हॉस्टल, सस्ती फीस और रोजगार की माँग कर रहे हैं, तब उन्हें जाति और धर्म के आधार पर मत बाँटना।

जब किसान सड़कों पर MSP और न्यायसंगत दाम की माँग कर रहे हैं, तब उन्हें क्षेत्रीय पहचान में मत उलझाना।

जब नौजवान नौकरी और सुरक्षित भविष्य चाहते हैं, तब उन्हें भाषाई या धार्मिक बहस में मत धकेलना।

राजनीति का असली मक़सद जनता के मुद्दों का समाधान होना चाहिए — महँगाई घटाना, शिक्षा व स्वास्थ्य को मज़बूत करना, रोज़गार के अवसर पैदा करना और न्यायपूर्ण समाज बनाना।

👉 एकता का लाभ:
जब भारत एकजुट होकर खड़ा होता है तो पूरी दुनिया प्रभावित होती है। चाहे स्वतंत्रता संग्राम का दौर हो या हाल का चंद्रयान मिशन — हर बड़ी उपलब्धि तभी संभव हुई जब हम सबने मिलकर काम किया।

आज ज़रूरत है कि हम “Unity Over Division” के इस सिद्धांत को राजनीति में उतारें। नेता और दल तभी सफल होंगे जब वे जनता को जोड़ेंगे, असली मुद्दों पर बात करेंगे और युवाओं को उम्मीद देंगे।

हैदराबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2025इस बार का चुनाव कई मामलों में अलग रहा।📌 ABVP की बड़ी जीतलंबे समय से हार के बा...
26/09/2025

हैदराबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2025
इस बार का चुनाव कई मामलों में अलग रहा।

📌 ABVP की बड़ी जीत

लंबे समय से हार के बाद ABVP ने इस बार सेंट्रल पैनल की सभी सीटें जीत लीं।

पिछली बार ABVP को 2018 में जीत मिली थी।

📌 जीत के मुख्य कारण

लैंड मूवमेंट: 400 एकड़ ज़मीन और पेड़ों की कटाई का विरोध, जिसमें कांग्रेस सरकार को पीछे हटना पड़ा। इसका सीधा नुक़सान NSUI को हुआ।

गठबंधन टूटना: SFI और ASA के अलग होने से वाम + अंबेडकरवादी संगठनों को बड़ा झटका।

CUET का असर: अब उत्तर भारत से ज़्यादा छात्र आने लगे, जिससे ABVP का वोट बैंक मज़बूत हुआ।

Unions की नाकामी: कैंपस की समस्याओं (मेस, हेल्थ सेंटर, फेलोशिप, वाई-फाई, साफ़-सफ़ाई) का समाधान न होना।

राष्ट्रवाद का असर: वामपंथी राजनीति से असंतोष और बहुजन-पिछड़े वर्ग के छात्र भी ABVP की ओर झुके।

Internal Unity: ABVP ने इस बार नार्थ-साउथ के विवाद खत्म करके एकजुट होकर चुनाव लड़ा।

📌 नतीजा
ABVP ने एक मज़बूत वापसी की है। अब देखना होगा कि वे उठाए गए मुद्दों का समाधान कर पाते हैं या नहीं।

अमरीका सहित यूरोप के कई शहरों में ग़ज़ा पर इज़राइली हमले और फलस्तीन की मांग को लेकर प्रदर्शन रहे हैं। इन प्रदर्शनों का भ...
25/10/2023

अमरीका सहित यूरोप के कई शहरों में ग़ज़ा पर इज़राइली हमले और फलस्तीन की मांग को लेकर प्रदर्शन रहे हैं। इन प्रदर्शनों का भले ही इज़राइल पर असर नहीं हो रहा है मगर क्या अमरीका की सत्ता के गलियारों पर दिखने लगा है? पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने बयान में कहा है कि इज़राइली सरकार जिस तरह से ग़ज़ा पर हमला कर रही है, उस से पीढ़िओं तक फलस्तीनियों के मन में दरार पड़ जाएगी और इज़राइल के लिए ग्लोबल समर्थन कम होता जाएगा। क्या इसका असर अभी से दिखना शुरू हो चुका है? पश्चिम के देशों ने शुरू में हमास की निंदा की थी, फिर फलस्तीन की मांग पर ज़ोर दिया और अब बहुत तेज़ी से यूरोप और अमरीका का नेतृत्व ग़ज़ा के आम नागरिकों पर हमले को रोकने की बात करने लगा है। क्या ये बदलाव इन देशों में हो रहे जनप्रदर्शनों के कारण हो रहा है? इज़राइल के दोस्त अपने देशों में फलस्तीन के लिए होने वाले प्रदर्शनों को रोक नहीं सके, न कुचल सके हैं। पुलिस और गिरफ़्तारी के पहरे के बावजूद लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। इसलिए हमें लगता है कि अब इन प्रदर्शनों का सरकारों पर गंभीर असर पड़ने लगा है। आज की हमारी इस रिपोर्ट में आप दुनियाभर के शहरों में हो रहे इन प्रदर्शनों को देखेंगे।

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