27/09/2025
Unity Over Division — यही असली राजनीति है
भारत की ताक़त उसकी विविधता में है। हमारे देश में अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग धर्म और जातियाँ हैं, हर प्रदेश की अपनी संस्कृति और पहचान है। लेकिन इन सब भिन्नताओं के बावजूद भारत एक है। यही हमारी असली पहचान है।
राजनीति का मक़सद जनता को जोड़ना होना चाहिए, न कि तोड़ना। दुर्भाग्य से पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि कई बार नेता और दल जानबूझकर जाति, धर्म या क्षेत्र के नाम पर जनता को बाँटने की कोशिश करते हैं। इससे समाज में तनाव पैदा होता है, आपसी विश्वास कमज़ोर पड़ता है और असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
👉 उदाहरण समझिए:
अमेरिका में राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने गृहयुद्ध के समय कहा था — “A house divided against itself cannot stand” (एक घर जो आपस में बँटा हो, कभी टिक नहीं सकता)। यह बात भारत पर भी पूरी तरह लागू होती है। अगर हम एक-दूसरे से लड़ते रहेंगे, तो कभी शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य या विकास की तरफ़ ध्यान नहीं दे पाएँगे।
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने भी हाल ही में कहा था कि “लोकतंत्र तभी मज़बूत है जब नागरिक एक-दूसरे के साथ खड़े हों, चाहे उनकी पहचान कितनी भी अलग क्यों न हो।” यही सच्चाई भारत में भी है।
👉 आज के भारत की ज़रूरत:
जब छात्र विश्वविद्यालय में बेहतर हॉस्टल, सस्ती फीस और रोजगार की माँग कर रहे हैं, तब उन्हें जाति और धर्म के आधार पर मत बाँटना।
जब किसान सड़कों पर MSP और न्यायसंगत दाम की माँग कर रहे हैं, तब उन्हें क्षेत्रीय पहचान में मत उलझाना।
जब नौजवान नौकरी और सुरक्षित भविष्य चाहते हैं, तब उन्हें भाषाई या धार्मिक बहस में मत धकेलना।
राजनीति का असली मक़सद जनता के मुद्दों का समाधान होना चाहिए — महँगाई घटाना, शिक्षा व स्वास्थ्य को मज़बूत करना, रोज़गार के अवसर पैदा करना और न्यायपूर्ण समाज बनाना।
👉 एकता का लाभ:
जब भारत एकजुट होकर खड़ा होता है तो पूरी दुनिया प्रभावित होती है। चाहे स्वतंत्रता संग्राम का दौर हो या हाल का चंद्रयान मिशन — हर बड़ी उपलब्धि तभी संभव हुई जब हम सबने मिलकर काम किया।
आज ज़रूरत है कि हम “Unity Over Division” के इस सिद्धांत को राजनीति में उतारें। नेता और दल तभी सफल होंगे जब वे जनता को जोड़ेंगे, असली मुद्दों पर बात करेंगे और युवाओं को उम्मीद देंगे।