08/06/2026
भोजपुर जिले के बिहिया में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले 48 घंटों में महज 8 घंटे ही बिजली आपूर्ति हुई है। भीषण गर्मी और उमस के बीच हालात ऐसे हैं कि छोटे बच्चे रातभर रो रहे हैं, बुजुर्गों का घरों में बैठना मुश्किल हो गया है और महिलाओं को रोजमर्रा के कामकाज में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि बिजली कब आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई निश्चित समय नहीं है। सबसे बड़ी शिकायत यह है कि बिजली विभाग के अधिकारियों को फोन करने पर कई बार कॉल तक नहीं उठाया जाता। ऐसे में जनता खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रही है।
बिहिया की बदहाल बिजली व्यवस्था को लेकर अब राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का वह पुराना तंज एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “जब बिजली रहेगी ही नहीं, तब बिल कैसा?” यह बयान दरअसल मुफ्त बिजली की सरकारी योजना पर कटाक्ष था। उनका आशय यह था कि यदि लोगों के घरों तक नियमित बिजली पहुंचेगी ही नहीं, तो सरकार का मुफ्त बिजली देने का वादा अपने आप पूरा माना जाएगा। बिहिया के मौजूदा हालात को देखकर कई लोग इसी तंज को याद कर रहे हैं।
वहीं, गर्मी का मौसम आते ही भोजपुर के लोगों को पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और आरा के पूर्व सांसद आर.के. सिंह की भी याद आने लगती है। विडंबना यह है कि जिन आर.के. सिंह को जनता ने चुनाव में हार का सामना कराया, उन्हीं को लोग बिजली संकट के दिनों में याद करते नजर आते हैं। कारण साफ है—वे देश के ऊर्जा मंत्री भी रहे और आरा के सांसद भी। लोगों का मानना है कि उनके कार्यकाल में बिजली व्यवस्था को लेकर जवाबदेही अधिक थी और शिकायतों पर कार्रवाई भी अपेक्षाकृत तेज होती थी।
आज हालात यह हैं कि भोजपुर की जनता भीषण गर्मी, अनियमित बिजली आपूर्ति और प्रशासनिक उदासीनता के बीच पिस रही है। सवाल यह है कि आखिर जनता कब तक अंधेरे और उमस में रातें गुजारने को मजबूर रहेगी, और कब तक बिजली विभाग शिकायतों से मुंह मोड़ता रहेगा?