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तुम अब भी पूछती हो मेरा जन्मदिनलिख लो इसे,जान लो ठीक-ठीकजिस दिन क़ुबूल किया तुमने मेरा प्यारउसी दिन हुआ मेरा जन्म।~ निज़...
06/07/2026

तुम अब भी पूछती हो मेरा जन्मदिन
लिख लो इसे,
जान लो ठीक-ठीक
जिस दिन क़ुबूल किया तुमने मेरा प्यार
उसी दिन हुआ मेरा जन्म।

~ निज़ार कब्बानी
अनुवाद- मनोज पटेल

तुम बंजर हो जाओगे यदि इतने व्यवस्थित ढंग से रहोगे यदि इतने सोच समझकर बोलोगे चलोगे,कभी मन की नहीं कहोगेसच को दबाकर झूठे प...
24/06/2026

तुम बंजर हो जाओगे
यदि इतने व्यवस्थित ढंग से रहोगे
यदि इतने सोच समझकर
बोलोगे चलोगे,
कभी मन की नहीं कहोगे
सच को दबाकर
झूठे प्रेम के गाने गाओगे तो मैं तुमसे कहता हूँ,
तुम बंजर हो जाओगे!

— भवानी प्रसाद मिश्र

खुली हवा में चरित्र के भ्रष्ट होने की उससे कम संभावना है, जितना बन्द कमरे में।- मुंशी प्रेमचंद[ स्रोत : 'निर्मला' उपन्या...
23/06/2026

खुली हवा में चरित्र के भ्रष्ट होने की उससे कम संभावना है, जितना बन्द कमरे में।

- मुंशी प्रेमचंद

[ स्रोत : 'निर्मला' उपन्यास से ]

इनकमटैक्स-विभाग के ईमानदार और शिक्षा-विभाग के ईमानदार में फ़र्क़ होता है—वैसे ईमानदार दोनों है। — हरिशंकर परसाई
22/06/2026

इनकमटैक्स-विभाग के ईमानदार और शिक्षा-विभाग के ईमानदार में फ़र्क़ होता है—वैसे ईमानदार दोनों है। — हरिशंकर परसाई

आम के फले हुएपेड़ों के बाग़ मेंकब जाऊँगा?मुझे पता है किअवध, दीघा और मालदह मेंघने बाग़ हैं आम केलेकिन अब कितने औरकहाँ-कहा...
21/06/2026

आम के फले हुए
पेड़ों के बाग़ में

कब जाऊँगा?
मुझे पता है कि

अवध, दीघा और मालदह में
घने बाग़ हैं आम के

लेकिन अब कितने और
कहाँ-कहाँ

अक़्सर तो उनके उजड़ने की
ख़बरें आती रहती हैं।

बचपने की रेल-यात्रा में
जगह-जगह दिखाई देते थे

आम के बाग़
बीसवीं सदी में

भागलपुर से नाथनगर के
बीच रेल उन दिनों जाती थी

आम के बाग़ों के बीच
दिन में गुज़रो

तब भी
रेल के डब्बे भर जाते

उनके अँधेरी हरियाली
और ख़ुशबू से

हरा और दूधिया मालदह
दिशहरी, सफेदा

बाग़पत का रटौल
डंटी के पास लाली वाले

कपूर की गंध के बीजू आम
गूदेदार आम अलग

खाने के लिए
और रस से भरे चूसने के लिए

अलग
ठंडे पानी में भिगोकर

आम खाने और चूसने के
स्वाद से भरे हैं

मेरे भी मन प्राण
हरी धरती से अभिन्न होने में

हज़ार-हज़ार चीज़ें
हाथ से तोड़कर खाने की सीधे

और आग पर पका कर भी
यह जो धरती है

मिट्टी की
जिसके ज़रा नीचे नमी

शुरू होने लगती है खोदते ही!
यह जो धरती

मेढक और झींगुर
के घर जिसके भीतर

मेढक और झींगुर की
आवाज़ों से रात में गूँजने वाली

यह जो धारण किए हुए है
सुदूर जन्म से ही मुझे

हम ने भी इसे सँवारा है!
यह भी उतनी ही असुरक्षित

जितना हम मनुष्य इन दिनों
आम जैसे रसीले फल के लिए

भाषा कम पड़ रही है
मेरे पास

भारतवासी होने का सौभाग्य
तो आम से भी बनता है!

— आलोकधन्वा

— Agyeya 🌼
21/06/2026

— Agyeya 🌼

यहाँ साड़ी माँगती, फ़ीस माँगती बहन हैघड़ी माँगता, रोज़गार ढूँढ़ता भाई हैयहाँ कुछ भी नहीं माँगती माँ हैऔर कुछ न कहता, सिर...
21/06/2026

यहाँ साड़ी माँगती, फ़ीस माँगती बहन है
घड़ी माँगता, रोज़गार ढूँढ़ता भाई है
यहाँ कुछ भी नहीं माँगती माँ है
और कुछ न कहता, सिर्फ़ देखता हुआ
पिता है।

- इब्बार रब्बी

स्त्रियों के बारे में सभी झगड़ों के पीछे असली कारण पुरुष का ख़ुद के प्रति वचनबद्ध न हो पाना है।— शुलामिथ फ़ायरस्टोन       ...
20/06/2026

स्त्रियों के बारे में सभी झगड़ों के पीछे असली कारण पुरुष का ख़ुद के प्रति वचनबद्ध न हो पाना है।

— शुलामिथ फ़ायरस्टोन

जीवन की शुरुआत और अंत तो स्पष्ट थे, मुझे बस बीच के हिस्से पर क़ाबू पाना था— ओउज़ अताय
19/06/2026

जीवन की शुरुआत और अंत तो स्पष्ट थे, मुझे बस बीच के हिस्से पर क़ाबू पाना था

— ओउज़ अताय

मुझे लगता है कि एक लड़की के लिए किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करना आसान होगा जिसे वह नहीं जानती, क्योंकि जितना अधिक आप पुरुषो...
18/06/2026

मुझे लगता है कि एक लड़की के लिए किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करना आसान होगा जिसे वह नहीं जानती, क्योंकि जितना अधिक आप पुरुषों को जानोगे; उनसे प्यार करना उतना ही कठिन होगा।

— ओरहान पामुक ; अनुवाद : सरिता शर्मा

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