07/06/2026
अगर किसी हादसे में किसी कुक या स्टाफ की लापरवाही हो तो उसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। लेकिन जब हम “विश्वगुरु” बनने की बात करते हैं, तो क्या हम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन भी कर रहे हैं?
दुनिया के कई विकसित देशों में अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर भी होटल में आग लगा दे, तब भी लोग सुरक्षित बाहर निकल सकते हैं, क्योंकि वहाँ इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, फायर ड्रिल और इवैक्यूएशन सिस्टम सख्ती से लागू होते हैं और उनकी नियमित जांच होती है।
असल सवाल यह है: क्या संबंधित अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है या उनका उल्लंघन? हर बार सिर्फ किसी छोटे कर्मचारी या जूनियर अधिकारी को ही दोषी क्यों ठहराया जाता है? होटल मालिक, मैनेजमेंट और निरीक्षण करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती?
भारत में लगभग हर बड़े हादसे के बाद यही देखने को मिलता है कि दोष किसी स्टाफ, ड्राइवर, गार्ड, कुक या निचले स्तर के कर्मचारी पर डाल दिया जाता है। किसी भी 10 बड़े हादसों को देख लीजिए, पैटर्न लगभग एक जैसा ही मिलेगा।
दुनिया के किसी भी होटल में आग लग सकती है। असली मुद्दा यह नहीं है कि आग कैसे लगी, बल्कि यह है कि क्या लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।
विडंबना यह है कि होटल के कमरे में बाहर वालों को रोकने के लिए दरवाजे पर चेन लगा दी जाती है, लेकिन बड़े संकट के समय लोगों की जान बचाने के लिए मजबूत तैयारी और सिस्टम अक्सर नहीं होते।
असल प्रगति सिर्फ नारों से नहीं आती। असली प्रगति तब होती है जब सिस्टम मजबूत हो, जवाबदेही तय हो, सुरक्षा मानकों का पालन हो और इंसानी जिंदगी को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाए।
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