12/08/2026
पान मसाला बाजार में पैकेजिंग रीसेट: FSSAI ने प्लास्टिक और एल्युमिनियम लेयर पर लगाई रोक
नई दिल्ली। पान मसाला उद्योग में पैकेजिंग को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक, निर्धारित सिंथेटिक सामग्री, एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर्स के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया है। FSSAI ने यह अंतिम संशोधन 7 अगस्त 2026 को अधिसूचित किया।
पेपर, सेलुलोज, टिन और ग्लास होंगे अनुमत विकल्प
नए प्रावधानों के तहत पान मसाला की पैकेजिंग के लिए पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोज और अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि इन सामग्रियों में किसी भी प्रकार का प्लास्टिक शामिल नहीं होना चाहिए।
पॉलीएथिलीन (PE), पॉलीप्रोपाइलीन (PP), पॉलीएस्टर, PVC, सिंथेटिक पॉलिमर, को-पॉलिमर और प्लास्टिक आधारित लैमिनेट्स को पैकेजिंग से बाहर रखा गया है। इसके अलावा एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर का उपयोग भी प्रतिबंधित रहेगा। टिन और ग्लास कंटेनर अनुमत पैकेजिंग विकल्पों में बने रहेंगे।
प्लास्टिक पाउच पर भी सख्ती
संशोधन में Plastic Waste Management Rules, 2016 के प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। इनके तहत गुटखा, तंबाकू और पान मसाला को रखने, पैक करने या बेचने के लिए प्लास्टिक सैशे के इस्तेमाल पर रोक है। यानी पान मसाला उद्योग में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे पारंपरिक प्लास्टिक आधारित पाउच को अब वैकल्पिक पैकेजिंग से बदलना होगा।
₹48,456 करोड़ का बाजार प्रभावित
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारतीय पान मसाला बाजार बड़े पैमाने पर पाउच पैकेजिंग पर निर्भर है। IMARC के अनुसार, 2025 में भारतीय पान मसाला बाजार का आकार लगभग ₹48,455.9 करोड़ था और कुल बाजार में पाउच पैकेजिंग की हिस्सेदारी करीब 72.4 प्रतिशत थी।
IMARC के अनुमान के मुताबिक भारतीय पान मसाला बाजार 2025 के ₹48,455.9 करोड़ से बढ़कर 2034 तक ₹67,034.8 करोड़ तक पहुंच सकता है।
पैकेजिंग उद्योग के लिए नई संभावनाएं
नई व्यवस्था से पान मसाला निर्माताओं को अपने मौजूदा पैकेजिंग फॉर्मेट की समीक्षा करनी होगी। वहीं पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोज, टिन और ग्लास आधारित पैकेजिंग के निर्माताओं के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि FSSAI के संशोधन में पैकेजिंग कंपनियों के लिए किसी विशेष बाजार हिस्सेदारी, खरीद या सोर्सिंग की अनिवार्यता तय नहीं की गई है। तत्काल प्रभाव से मुख्य जिम्मेदारी पान मसाला निर्माताओं और उनके पैकेजिंग फॉर्मेट को नए नियमों के अनुरूप बनाने की होगी।
अप्रैल में आया था ड्राफ्ट
FSSAI ने इस बदलाव की दिशा में 28 अप्रैल 2026 को ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। विचार-विमर्श के बाद अब अंतिम संशोधन अधिसूचित किया गया है।
पान मसाला उद्योग के लिए यह बदलाव केवल पैकेजिंग सामग्री बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पैकेजिंग डिजाइन, उत्पादन प्रक्रिया, मशीनरी, लागत और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ने की संभावना है। आने वाले समय में उद्योग में प्लास्टिक-मुक्त और प्राकृतिक सामग्री आधारित पैकेजिंग के नए विकल्पों की मांग तेजी से बढ़ सकती है।