Tobacco Plus India

Tobacco Plus India Magazine dedicated to smokeless to***co and perfume industry This trade magazine is promoted by Mr.

Arif Farooqui, who is the promoter Editor of the trade journal “To***co Plus” he has more than 12 years of experience in editing the to***co plus magazine and has a very good understanding of the to***co trade and the problems faced by this Industry.

30/05/2026

भद्रवाह में 6 जून से शुरू होगा ‘लैवेंडर फेस्टिवल 2026’
“Lavender Goes Global” थीम के साथ होगी पर्पल रिवोल्यूशन की सफलता का उत्सव
केंद्रीय प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री एवं सीएसआईआर के उपाध्यक्ष Dr Jitendra Singh 6 और 7 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भद्रवाह स्थित गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज (GDC) में आयोजित होने वाले चौथे “लैवेंडर फेस्टिवल 2026” का उद्घाटन करेंगे। इस महोत्सव का आयोजन CSIR-Indian Institute of Integrative Medicine द्वारा किया जा रहा है।
Dr Zabeer Ahmed ने संस्थान परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष फेस्टिवल की थीम “Lavender Goes Global” रखी गई है, जिसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में “पर्पल रिवोल्यूशन” और लैवेंडर आधारित ग्रामीण उद्यमिता की निरंतर सफलता का उत्सव मनाना है।
उन्होंने बताया कि CSIR के “अरोमा मिशन” के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया गया है। यह मिशन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत संचालित किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से 5,000 से अधिक किसानों और युवा उद्यमियों को लैवेंडर की खेती, गुणवत्ता युक्त पौध सामग्री, प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग में सहायता प्रदान की गई है।
डॉ. अहमद ने बताया कि मिशन के तीन चरणों के दौरान जम्मू-कश्मीर में 50 से अधिक स्थायी और मोबाइल डिस्टिलेशन यूनिट्स स्थापित की गईं, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर लैवेंडर प्रोसेसिंग की सुविधा मिली और उनकी आय में वृद्धि हुई।
उन्होंने कहा कि भद्रवाह आज “पर्पल रिवोल्यूशन” का प्रमुख केंद्र बन चुका है और लैवेंडर फेस्टिवल राष्ट्रीय स्तर का ऐसा मंच बन गया है, जहां हिमालयी क्षेत्रों में विज्ञान आधारित कृषि और ग्रामीण उद्यमिता के सफल मॉडल को प्रस्तुत किया जाता है।
फेस्टिवल में देशभर से वैज्ञानिक, स्टार्टअप्स, अरोमा एवं फ्रेगरेंस उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि, उद्यमी, नीति-निर्माता, कृषि व्यवसाय विशेषज्ञ, विद्यार्थी और प्रगतिशील किसान भाग लेंगे। कार्यक्रम में स्टार्टअप प्रदर्शनी, लाइव डेमो, बायर-सेलर मीट, तकनीकी सत्र, किसान-उद्योग नेटवर्किंग और लैवेंडर आधारित वैल्यू एडेड उत्पादों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी।
डॉ. अहमद ने बताया कि CSIR-IIIM ने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में भी लैवेंडर खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके परिणामस्वरूप हजारों किसान और युवा उद्यमी लाभान्वित हुए हैं, जबकि महिलाओं द्वारा संचालित कई नए स्टार्टअप भी सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में मुंबई स्थित सीएसआईआर इनोवेशन कॉम्प्लेक्स में आयोजित अरोमा बायर-सेलर मीट में देश की प्रमुख परफ्यूम और अरोमा कंपनियों ने जम्मू-कश्मीर के किसानों और उद्यमियों से सीधे संवाद किया। इससे क्षेत्र में अरोमा आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में मदद मिली है।
लैवेंडर फेस्टिवल 2026 के दौरान आवश्यक तेल, हर्बल वेलनेस, फ्लोरीकल्चर, ऑर्गेनिक उत्पाद, कॉस्मेटिक्स और अरोमा टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही लैवेंडर खेती, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, एसेंशियल ऑयल एक्सट्रैक्शन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात संभावनाओं पर विशेष तकनीकी चर्चाएं भी आयोजित होंगी।
डॉ. ज़बीर अहमद ने किसानों, छात्रों, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और मीडिया से बड़ी संख्या में फेस्टिवल में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल लैवेंडर खेती का उत्सव नहीं, बल्कि हिमालयी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विज्ञान आधारित कृषि और उद्यमिता के माध्यम से बदलने का एक बड़ा आंदोलन है।

29/05/2026

डीएस ग्रुप और बेन्स कुकीज़ की साझेदारी: भारत में प्रीमियम बेकरी अनुभव को मिलेगा नया आयाम
भारत के प्रतिष्ठित एफएमसीजी समूह डीएस ग्रुप ने वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय ब्रिटिश ब्रांड “Ben’s Cookies” के साथ साझेदारी की घोषणा की है। इस साझेदारी के तहत भारत में बेन्स कुकीज़ के प्रीमियम, ताज़ा और हस्तनिर्मित कुकीज़ अनुभव को “बेकरी-फर्स्ट रिटेल फॉर्मेट” के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
डीएस ग्रुप ने कहा कि कंपनी हमेशा से यह मानती रही है कि मजबूत ब्रांड केवल उत्पाद नहीं, बल्कि गुणवत्ता, शिल्पकला और उपभोक्ताओं के दीर्घकालिक विश्वास पर निर्मित होते हैं। इसी सोच के साथ समूह ने Ben’s Cookies के साथ हाथ मिलाया है, जो अपनी प्रामाणिकता, ताज़गी और हस्तनिर्मित कुकीज़ के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
Ben’s Cookies की स्थापना वर्ष 1983 में इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड स्थित Covered Market में हुई थी। ब्रांड अपनी “chunky” और “gooey” कुकीज़ के लिए जाना जाता है, जिन्हें उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री के साथ ताज़ा तैयार किया जाता है। वर्षों से यह ब्रांड दुनिया भर के ग्राहकों के बीच एक प्रीमियम और भरोसेमंद पहचान बना चुका है।
डीएस ग्रुप और Ben’s Cookies की इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बेकरी अनुभव प्रदान करना है, जिसमें इन-स्टोर फ्रेशनेस और वास्तविक स्वाद को प्राथमिकता दी जाएगी। कंपनी की योजना भारत में शुरुआती चरण में दिल्ली और मुंबई से शुरुआत करते हुए 8 से 10 स्टोर्स खोलने की है।

29/05/2026

केरल हाईकोर्ट ने 380 बोरी सुपारी छोड़ने की याचिका खारिज की, सेक्शन 130
नोटिस में हस्तक्षेप से इनकार

केरल हाईकोर्ट ने 380 बोरी जब्त सुपारी (अरेका नट्स) को रिलीज करने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि जब विवाद केवल शो-कॉज नोटिस के स्तर पर हो, तब हाईकोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपने सभी तर्क और आपत्तियां संबंधित वैधानिक प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करनी चाहिए।
मामला जीएसटी अधिनियम की धारा 130 के तहत जारी नोटिस से जुड़ा था। विभाग ने माल की जब्ती के बाद जांच प्रक्रिया शुरू की थी। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से जब्त माल को तत्काल छोड़ने और विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि विभाग द्वारा जारी नोटिस केवल जांच और जवाब मांगने के उद्देश्य से जारी किया गया है, न कि अंतिम आदेश। ऐसे में अदालत ने कहा कि इस चरण पर न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी कारोबारी या व्यापारी को विभागीय नोटिस पर आपत्ति है, तो उसे पहले संबंधित अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहिए। केवल नोटिस जारी होने के आधार पर सीधे हाईकोर्ट आना उचित प्रक्रिया नहीं मानी जा सकती।
यह फैसला सुपारी, पान मसाला, तंबाकू एवं कृषि उत्पादों के व्यापार से जुड़े कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि परिवहन और दस्तावेजी अनुपालन को लेकर जीएसटी विभाग लगातार सख्ती बरत रहा है। ऐसे मामलों में वैध ई-वे बिल, टैक्स इनवॉइस और माल की स्पष्ट ट्रेसबिलिटी बेहद अहम हो गई है।

ITAT दिल्ली ने AY 2015-16 के लिए री-असेसमेंट रद्द किया, सेक्शन 148 नोटिस को माना समय-सीमा से बाहर
इनकम टैक्स अपीलीय अधिकरण (ITAT), दिल्ली ने एक महत्वपूर्ण फैसले में असेसमेंट ईयर 2015-16 के लिए जारी री-असेसमेंट कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा है कि 1 अप्रैल 2021 के बाद जारी सेक्शन 148 नोटिस समय-सीमा से बाहर हैं और कानूनन टिकाऊ नहीं माने जा सकते।
मामला Inckah Infrastructure Technologies Pvt. Ltd. से जुड़ा था, जिसने 31 मार्च 2022 को जारी सेक्शन 148 नोटिस को चुनौती दी थी। कंपनी का तर्क था कि कोविड काल के दौरान लागू TOLA (Taxation and Other Laws Relaxation Act) के तहत AY 2015-16 के लिए नोटिस जारी करने की समय-सीमा नहीं बढ़ाई गई थी।
असेसी ने ITAT के समक्ष “Deepak Agarwal vs DCIT” मामले का हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के “Union of India vs Rajiv Bansal” आदेश का संदर्भ लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में स्वयं राजस्व विभाग ने यह स्वीकार किया था कि AY 2015-16 के लिए 1 अप्रैल 2021 के बाद जारी सभी नोटिस अमान्य माने जाएंगे।
विभाग की ओर से री-असेसमेंट को वैध ठहराने की कोशिश की गई, लेकिन ITAT की बेंच—न्यायिक सदस्य सतबीर सिंह गोदारा और अकाउंटेंट सदस्य एम. बालागणेश—ने माना कि यह मुद्दा पहले ही स्पष्ट हो चुका है।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि चूंकि संबंधित नोटिस 31 मार्च 2022 को जारी किया गया था, इसलिए यह निर्धारित सीमा अवधि से बाहर है। परिणामस्वरूप, ITAT ने री-असेसमेंट आदेश को “void ab initio” यानी प्रारंभ से ही अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया।
कर विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन हजारों मामलों पर प्रभाव डाल सकता है, जहां पुराने असेसमेंट वर्षों के लिए 1 अप्रैल 2021 के बाद सेक्शन 148 नोटिस जारी किए गए थे। विशेष रूप से पान मसाला, तंबाकू, FMCG और ट्रेड सेक्टर से जुड़े कारोबारी, जिनके खिलाफ पुराने मामलों में रीओपनिंग नोटिस जारी हुए हैं, इस फैसले को राहत के रूप में देख रहे हैं।

27/05/2026
20/05/2026

इंट्रा-SEZ सप्लाई पर AAR का बड़ा फैसला: GST जीरो-रेटिंग और इनवॉइस एंडोर्समेंट विवाद उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर
गुजरात की एडवांस रूलिंग अथॉरिटी (AAR) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) के भीतर एक SEZ इकाई से दूसरी SEZ इकाई को की जाने वाली सप्लाई पर जीरो-रेटेड GST और इनवॉइस एंडोर्समेंट से जुड़े विवाद उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।
यह मामला Waystar Properties LLP द्वारा दायर आवेदन से जुड़ा था। कंपनी गुजरात के Gujarat International Finance Tec-City Special Economic Zone (GIFT SEZ) की सह-विकासक (Co-developer) है और SEZ क्षेत्र में स्थित व्यावसायिक परिसरों को अन्य SEZ इकाइयों को अधिकृत गतिविधियों (Authorized Operations) के लिए लीज पर देती है।
आवेदक का तर्क था कि IGST Act की धारा 7(5)(b) के अनुसार SEZ से SEZ के बीच की सप्लाई इंटर-स्टेट सप्लाई मानी जाती है और धारा 16(1)(b) के तहत यह जीरो-रेटेड सप्लाई के दायरे में आती है।
विवाद तब उत्पन्न हुआ जब कंपनी ने आरोप लगाया कि SEZ अधिकारी एक SEZ इकाई से दूसरी SEZ इकाई को की गई सप्लाई के इनवॉइस पर एंडोर्समेंट करने से इनकार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना था कि SEZ Rules, 2006 के Rule 30 के अंतर्गत एंडोर्समेंट प्रक्रिया केवल Domestic Tariff Area (DTA) से SEZ सप्लाई पर लागू होती है, न कि इंट्रा-SEZ लेन-देन पर।
कंपनी ने AAR से यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि क्या Letter of Approval (LOA), पात्रता प्रमाणपत्र, अनुबंध और घोषणाएं यह साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज हैं कि सप्लाई "Authorized Operations" के लिए की गई थी, या फिर प्रत्येक इनवॉइस पर Specified Officer का एंडोर्समेंट अनिवार्य है।
इसके अलावा, कंपनी ने यह भी पूछा कि क्या इंट्रा-SEZ सप्लाई वास्तव में GST कानून के तहत जीरो-रेटेड सप्लाई मानी जाएगी।
सुनवाई के दौरान चार्टर्ड अकाउंटेंट Meet Jadawala ने आवेदक की ओर से पक्ष रखा।
AAR की पीठ, जिसमें Sushma Vyas और Vishal Malani शामिल थे, ने पहले यह जांचा कि क्या आवेदन CGST Act की धारा 97(2) के दायरे में आता है।
पीठ ने पाया कि आवेदन मुख्य रूप से दस्तावेजी और साक्ष्य संबंधी आवश्यकताओं से जुड़ा था तथा यह कर देयता, वर्गीकरण, इनपुट टैक्स क्रेडिट या अधिसूचना की व्याख्या जैसे उन विषयों में शामिल नहीं था जिन पर एडवांस रूलिंग दी जा सकती है।
इस आधार पर AAR ने सभी प्रश्नों पर निर्णय देने से इनकार कर दिया और कहा कि ये मामले उसके वैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।
यह फैसला SEZ उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह इंट्रा-SEZ सप्लाई और जीरो-रेटिंग से जुड़े प्रक्रियात्मक विवादों पर भविष्य में स्पष्टता की आवश्यकता को दर्शाता है।

19/05/2026

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फिरोज़ा की बिक्री में निरंतर ग्रोथजीटीसी नेवला समूह दिल्ली का पान मसाला उत्पाद फिरोज़ा चौतरफा डिमांड में है । इसको बढ़िया ...
18/05/2026

फिरोज़ा की बिक्री में निरंतर ग्रोथ

जीटीसी नेवला समूह दिल्ली का पान
मसाला उत्पाद फिरोज़ा चौतरफा डिमांड में है ।
इसको बढ़िया कटिंग मिल रही है । यह क्वालिटी प्रोडक्ट है । यही कारण है कि फिरोज़ा उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब
व दिल्ली एनसीआर समेत कई राज्यों
में लगातार बढ़त पर है । साउथ कोलकाता में भी इसे अच्छा रिस्पांस मिला है । कुल मिलाकर फिरोज़ा की बिक्रीमें निरंतर ग्रोथ है । विशेष बात यह कि इसकी कोई भी डीएनडी नही है। टोबैको प्लस को मार्केट सर्वे के दौरान पता चला कि कंज्यूमर्स को फिरोज़ा की क्वालिटी व स्वाद तथा रिटेलर्स को शानदार स्कीमआकर्षित कर रही है । फिरोज़ा का रिटेल प्राइस 130 रुपये है । इसके
प्रत्येक पैकेट में 36 पाउच हैं जिसमें 6 पाउच फ्री है । साथ ही पांच लाइटर भी फ्री हैं । फिरोज़ा की बढ़ती डिमांड को देखते हुए कं पनी ने नार्थ ईस्ट और मध्य प्रदेश में इसे 20 रुपये के बड़े पाउच में भी डाला है । 20 रुपये के पाउच में मसाले की क्वांटिटी 14 ग्राम है जिससे कंज्यूमर इसकी ओर तेज़ी से आकर्षित हो रहे हैं । कंपनी फिरोज़ा को लेकर कितनी गंभीर है इसे इसी से
जाना जा सकता है कि यूपी में 5-6 सौ की बड़ी मार्केटिंग टीम लगी
हुई है ।

18/05/2026

सुगंधित तंबाकू की रसीदें गुटखा के अवैध निर्माण का प्रमाण नहीं: CESTAT ने अपील मंजूर की
नई दिल्ली: एक महत्वपूर्ण फैसले में कस्टम्स, एक्साइज एंड सर्विस टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (CESTAT), नई दिल्ली पीठ ने स्पष्ट किया है कि केवल सुगंधित तंबाकू (Scented To***co) की प्राप्ति संबंधी दस्तावेजों के आधार पर गुटखा के अवैध निर्माण और निकासी (Clandestine Manufacture and Removal) का आरोप साबित नहीं किया जा सकता। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में अपील स्वीकार करते हुए विभाग के दावों को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया।
मामले की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई थी, जब डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलिजेंस (DGCEI) ने कथित तौर पर सुगंधित तंबाकू के अवैध निर्माण और निकासी को लेकर जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी का आरोप था कि संबंधित पक्ष द्वारा सुगंधित तंबाकू की आड़ में गुटखा का गुप्त रूप से निर्माण और बाजार में निकासी की जा रही थी।
हालांकि, अपीलकर्ता ने सुनवाई के दौरान मूल लोरी रसीदों (Lorry Receipts) के निरीक्षण की मांग की थी, लेकिन आयुक्त (Commissioner) ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि बिना मूल दस्तावेजों के निरीक्षण के उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
CESTAT ने अपने आदेश में कहा कि केवल परिवहन दस्तावेज या सुगंधित तंबाकू की प्राप्ति से यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि गुटखा का अवैध निर्माण किया गया। ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि किसी भी क्लैंडेस्टाइन निर्माण के आरोप को सिद्ध करने के लिए ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य आवश्यक हैं।
इस फैसले को तंबाकू और गुटखा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि केवल अनुमान या सीमित दस्तावेजी आधार पर गंभीर आरोप नहीं लगाए जा सकते।

रिचमैन के साथ शानदार स्कीम प्रीमियम मार्के ट में अपने हिस्से की सफलता पाने के लिए मार्के ट में उतरे के पी ग्रुप के रिचमै...
17/05/2026

रिचमैन के साथ शानदार स्कीम प्रीमियम मार्के ट में अपने हिस्से की सफलता पाने के लिए मार्के ट में उतरे के पी ग्रुप के रिचमैन बेहद आकर्षक स्कीम
के साथ रिटेलरो को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है ।
बेहद आकर्षक पाउच
में
प्रस्तुत रिचमैन की क्वांटिटी 4
ग्राम के साथ 0.5 ग्राम ज़र्दा है । जोड़ी
में गोल्ड लेबल
ज़र्दा के साथ इसकी एमआरपी 15 रुपये है । रिचमैन के
एक पैकेट
में 32 पाउच हैं जिनका रिटेल प्राइस 380 रुपये
है । कं पनी न के वल
मसाले पर बल्कि ज़र्दा पर भी स्कीम
दे रही है ।
प्रत्येक पैके ट पर 130 रुपये से 300 रुपये तक
का कै श कू पन की स्कीम है । कं पनी की इस आकर्षक स्कीम ने पूरे मार्के ट में हलचल मचा रखा है । टोबैको
प्लस को सर्वे के दौरान लोगो ने बताया कि रिचमैन को मार्के ट व कंज्यूमर दोनो का शानदार सपोर्ट मिल रहा है ।
जहां रिटेलर स्कीम से खुश हैं वही कंज्यूमर को इसकी
क्वालिटी और स्वाद भा रहा है । रिचमैन को मिल रहे ।

तुलसी इम्पीरियल 1979 की धमाकेदार एंट्री, प्रीमियम बाजार में बढ़ी हलचल राजस्थान के पान मसाला बाजार, विशेषकर जयपुर से, डीए...
16/05/2026

तुलसी इम्पीरियल 1979 की धमाकेदार एंट्री, प्रीमियम बाजार में बढ़ी हलचल

राजस्थान के पान मसाला बाजार, विशेषकर जयपुर से, डीएस ग्रुप ने अपने नए प्रीमियम उत्पाद “तुलसी इम्पीरियल 1979” की शानदार लॉन्चिंग कर बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। प्रीमियम श्रेणी में उतारे गए इस पान मसाले को 10 रुपये की जोड़ी के रूप में पेश किया गया है। लंबे शोध और बाजार की गहरी समझ के बाद समूह ने इस उत्पाद को लॉन्च किया है। जहां तक गुणवत्ता का सवाल है, डीएस ग्रुप लंबे समय से क्वालिटी का पर्याय माना जाता है और यही भरोसा इस नए उत्पाद के साथ भी जुड़ा हुआ है।
तुलसी इम्पीरियल 1979 को वर्तमान बाजार की जरूरतों और उपभोक्ताओं की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें गुणवत्ता के साथ मात्रा और मूल्य निर्धारण का संतुलन देखने को मिलता है, जो इसे एक बेहतरीन मार्केट-ड्रिवन प्रोडक्ट साबित कर सकता है। इसके एक पैकेट में 32 सैशे दिए गए हैं, जिनमें प्रत्येक की मात्रा 2.4 ग्राम है। एक पैकेट की एमआरपी 8 रुपये तथा रिटेल मूल्य 256 रुपये रखा गया है, जबकि जोड़ी के रूप में उपभोक्ता को यह 10 रुपये में उपलब्ध होगी।
गौरतलब है कि तुलसी जर्दा पान मसाला उद्योग का एक बड़ा और प्रतिष्ठित नाम है। विशेष रूप से तुलसी 00 की जोड़ी पहले से ही बाजार में बेहद लोकप्रिय मानी जाती है और किसी भी पान मसाला की सफलता में मजबूत जोड़ी की अहम भूमिका होती है। उपभोक्ताओं की जेब का विशेष ध्यान रखते हुए कंपनी ने इसके साथ तुलसी मोनार्क प्रीमियम जर्दा भी 2 रुपये में 0.5 ग्राम की मात्रा में उपलब्ध कराया है, जो इसे प्रीमियम बाजार का एक मजबूत और डिमांड-ड्रिवन उत्पाद बना सकता है।
हालांकि इस उत्पाद की लॉन्चिंग को अभी महज एक-दो दिन ही हुए हैं, लेकिन शुरुआती स्तर पर उपभोक्ताओं से इसे बेहद शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। बाजार सूत्रों की मानें तो इसकी एंट्री से प्रीमियम सेगमेंट में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है और आने वाले समय में यह बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाने की क्षमता रखता है।

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