01/11/2021
आई है एक बार फिर दीवाली,, परेशान थी फ़ौजी की घरवाली
घर पर कोई न अपना था
दीवाली संग मनाना उसका सपना था
शादी के हुए थे अभी चार साल
सूखा न पाई थी मेहँदी वाले बाल
बालों का ग़ज़रा अब तक ना सूखा था
आँखो का इंतज़ार अब भी भूखा था
करवाचौथ भी ना मना पाई थी संग
ड्यूटी के भी थे अपने रंग,, रंगों की होली भी उसे याद आई थी
पिया संग रंग भी ना खेल पाई थी
अश्कों को आँख में छुपा के रखती थी
अपने दिल के हालात, खुद को बता के रखती थी
बताया था उसे भी फोन और चिट्ठी पर कई बार
पर हालात ठीक ना थे सीमा के पार
कश्मीर के हालात पर वो भी रोती थी
रात में वो भी सही से ना सोती थी
मंगलसूत्र की वो चैन उसकी शान थी
फौजी की बीवी सबका अभिमान थी
पर इस दीवाली हुआ था चमत्कार
फौजी की छुट्टी के लिये मान गई थी सरकार
फौजी जैसे ही सलामती से घर आया था
पूरे मुहल्ले को उसने खीर खिलाया था।
छोटी छोटी खुशियों मैं ही खुश हो जाते है फ़ौजी और फ़ौजी के परिवार 🇮🇳❤️🌹❤️