05/09/2025
दिल ऐसे मुब्तला हुआ तेरे मलाल में
ज़ुल्फ़ें सफ़ेद हो गईं उन्नीस साल में
वो ऐसे रो रहा था मेरा हाल देखकर
आया हुआ हो जैसे किसी इंतेक़ाल में
इक बार मुझको अपनी निगेहबानी सौंप दे
उम्रें गुज़ार दूंगी तेरी देखभाल में
ये बात जानती हूं मगर मानती नहीं
दिन कट रहा है आज भी तेरे ख़याल में
वो तो सवाल पूछ के आगे निकल गया
अटकी हुई हूं मैं मगर उसके सवाल में
✍️हिमांशी बाबरा