23/07/2026
मैंने पहले भी कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने का कोई तुक ही नहीं। बीजेपी के पास काबिल विकल्प ही नहीं कि वो किसी दूसरे को शिक्षा मंत्री बना सके। और शिक्षा मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद खाली रखना भी सही नहीं होगा।
अब मान लीजिए कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सरकार ले लेती है, तो वो शिक्षा मंत्री किसे बनाएगी। उसके पास रवि किशन जैसे होनकार सांसद और रिमोट से लहंगा उठाने वाले वैज्ञानिक हैं। अभी रिपोर्टर ने उनसे NEET पेपर लीक पर सवाल पूछा।
उन्होंने कहा कि जो भी अपराधी पकड़े गए हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। ताकि भविष्य में कोई 'नीट अखबार' लीक करने की जुर्रत न करे। मतलब इनके लिए पेपर का मतलब अखबार ही होता है। और इनके हाथों में गोरखपुर की जनता ने अपना भविष्य सौंप रखा है।
अब मुझे धर्मेंद्र प्रधान और बाकी सरकार की समझ पर शक हो रहा है। कहीं उन्हें भी तो नहीं लग रहा कि नीट कोई अखबार है और अखबार के लीक होने पर क्या ही इस्तीफा देना। कुछ लोग तो नीट को दारू भी समझ रहे होंगे कि अगर दो-चार बूंद लीक भी हो गया, तो उसके लिए शिक्षा मंत्री क्यों इस्तीफा दें।
एक पढ़ा लिखा विकल्प था, जो बीजेपी झटककर लाई थी... चड्ढा साहब। लेकिन, उधर समोसे के बढ़ते दाम ने भी चिंता बढ़ा दी। ऊपर से समोसे में मीठे और कच्चे आलू डालने की भी शिकायत है। कहीं-कहीं समोसे के साथ चटनी भी नहीं दे रहे।
तो चड्ढा साहब ने सरकार से गुजारिश की है कि उन्हें शिक्षा मंत्री की जगह समोसा मंत्री बना दिया जाए। ताकि वो जनता को सस्ते और अच्छे समोसे उपलब्ध कराने की दिशा में सराहनीय कार्य कर सकें।
तो ऐसे में सरकार के पास चड्ढा साहब वाला विकल्प भी खत्म हो गया। अब उसे मजबूरी में धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री बनाए रखना पड़ रहा है।