National Adda

National Adda News and ground reporting

12/08/2026

सुनिए अधिवक्ता शेखर साहब को।

#आजकीखबर #ब्रेकिंगन्यूज

डीएम ने सीएचसी मिठवल का किया आकस्मिक निरीक्षण, दो कर्मचारी अनुपस्थित मिलेगुरूजी की कलम सेसिद्धार्थनगर, 12 अगस्त 2026। जि...
12/08/2026

डीएम ने सीएचसी मिठवल का किया आकस्मिक निरीक्षण, दो कर्मचारी अनुपस्थित मिले
गुरूजी की कलम से

सिद्धार्थनगर, 12 अगस्त 2026। जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जीएन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल, तिलौली का आकस्मिक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने उपस्थिति पंजिका की जांच की। कुल 32 कर्मचारियों के सापेक्ष दो कर्मचारी विक्रम सिंह एवं मनीष पाण्डेय अनुपस्थित पाए गए। जिलाधिकारी ने दोनों अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने अस्पताल के आकस्मिक कक्ष, एक्स-रे कक्ष, महिला वार्ड, औषधि वितरण कक्ष, प्रसव कक्ष एवं लैब का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक (एमओआईसी) को निर्देश दिया कि सभी चिकित्सक निर्धारित समय पर स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थित होकर मरीजों का समुचित उपचार सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी मरीज को बाहर से दवा खरीदने के लिए न लिखा जाए। अस्पताल में उपलब्ध आवश्यक दवाओं का मरीजों को नियमानुसार वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र परिसर में साफ-सफाई व्यवस्था को और बेहतर कराने तथा मरीजों को स्वच्छ एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी और मरीजों को समय से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।

12/08/2026

जगदम्बिका पाल जी का भाग है लोक सभा डुमरियागंज का इलेक्शन जीत जाते है...काजी सुहेल जी जिला अध्यक्ष (कांग्रेस)

शिवपाल यादव का रामपुर दौरा, आजम खान से मुलाकात के बाद 2027 चुनाव पर दिया जोरसमाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ब...
12/08/2026

शिवपाल यादव का रामपुर दौरा, आजम खान से मुलाकात के बाद 2027 चुनाव पर दिया जोर

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव बुधवार, 12 अगस्त को एक दिवसीय दौरे पर रामपुर पहुंचे। रामपुर पहुंचने पर सपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इसके बाद शिवपाल यादव जिला कारागार पहुंचे, जहां उन्होंने पूर्व मंत्री आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से मुलाकात की। दोनों से करीब 30 से 60 मिनट तक बातचीत हुई।

जेल से निकलने के बाद शिवपाल यादव सपा कार्यालय पहुंचे और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उन्हें संबोधित किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से पूरी ताकत के साथ तैयारी में जुटने और संगठन को मजबूत करने की अपील की।

शिवपाल यादव ने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर समाजवादी पार्टी को सत्ता में लाने के लिए मेहनत करनी होगी। उन्होंने बीजेपी सरकार को हराने का आह्वान करते हुए कहा कि 2027 में प्रदेश में सपा की सरकार बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को पूरी मजबूती से चुनावी मैदान में उतरना होगा।

इसी दौरान उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को गृहमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी जाएगी।

12/08/2026

FCRA BILL 2026 refered to JPC .

अमेरिकी कोर्ट ने अदाणी के खिलाफ आपराधिक केस किया खारिजअदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी को अमेरिकी अदालत से बड़ी कानूनी ...
12/08/2026

अमेरिकी कोर्ट ने अदाणी के खिलाफ आपराधिक केस किया खारिज

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी को अमेरिकी अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिका की संघीय अदालत ने उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को स्थायी रूप से खारिज कर दिया है। यह मामला कथित रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ा था, जिसे अदाणी ग्रुप ने लगातार खारिज किया था।

अदाणी ने अमेरिकी कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस फैसले के बाद अदाणी ग्रुप के लिए यह एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत मानी जा रही है। हालांकि, मामले की कार्यवाही को लेकर अमेरिकी जज ने अभियोजन पक्ष के फैसले और प्रक्रिया पर कुछ गंभीर टिप्पणियां भी की हैं।

12/08/2026

वरिष्ठ पत्रकार यशोदा श्रीवास्तव जी को सुनिए।
#आजकीखबर #ताजा_खबर #ब्रेकिंग_न्यूज

डिफेंस सेक्टर में यूपी की बढ़ी हिस्सेदारी, कानपुर बना रक्षा विनिर्माण का हबकानपुर, 11 अगस्त। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्...
12/08/2026

डिफेंस सेक्टर में यूपी की बढ़ी हिस्सेदारी, कानपुर बना रक्षा विनिर्माण का हब
कानपुर, 11 अगस्त। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत कानपुर तेजी से देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की यूनिट में गोला-बारूद, छोटे हथियारों और आर्टिलरी सिस्टम से जुड़े उत्पादों का निर्माण हो रहा है।
कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी के अनुसार हाथीपुर क्षेत्र में करीब 250 एकड़ में यूनिट के विस्तार की तैयारी है, जिसमें लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। कंपनी कानपुर में पहले ही करीब 4,000 करोड़ रुपये निवेश कर चुकी है।
वर्तमान में यहां सालाना करीब 15 करोड़ राउंड एम्युनिशन का उत्पादन हो रहा है, जिसे 30 करोड़ राउंड तक बढ़ाने का लक्ष्य है। 2027 तक 40 लाख ग्रेनेड सालाना उत्पादन क्षमता विकसित करने की भी योजना है।
अभय राइफल और प्रहार एलएमजी जैसे स्वदेशी हथियारों के साथ एआई आधारित गुणवत्ता जांच तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक उत्पादन नाटो मानकों के अनुरूप है।

तिरंगे के रंग में आत्मनिर्भरता की नई तस्वीरराष्ट्रभक्ति जब रोजगार से जुड़ती है, तो आजादी का उत्सव और अधिक सार्थक हो जाता...
12/08/2026

तिरंगे के रंग में आत्मनिर्भरता की नई तस्वीर
राष्ट्रभक्ति जब रोजगार से जुड़ती है, तो आजादी का उत्सव और अधिक सार्थक हो जाता है
संपादकीय |

परमात्मा प्रसाद उपाध्याय

स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि देश की आजादी के लिए किए गए संघर्ष, बलिदान और उन मूल्यों को याद करने का अवसर है, जिनके आधार पर भारत ने लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। ऐसे में उत्तर प्रदेश में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को ग्रामीण महिलाओं की आजीविका से जोड़ने की पहल महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और आर्थिक आत्मनिर्भरता के संगम की महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करती है।

इस बार प्रदेश की करीब 30 हजार ग्रामीण महिलाएं दो करोड़ तिरंगे तैयार करने के अभियान से जुड़ी हैं। इनमें लगभग 1.90 करोड़ राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जा चुके हैं। आंकड़ा अपने आप में बड़ा है, लेकिन इसकी वास्तविक अहमियत उन हजारों परिवारों की जिंदगी में दिखाई देती है, जिनके घरों की महिलाओं को काम, आय और अपनी मेहनत की पहचान मिल रही है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तिरंगा यहां केवल एक उत्पाद नहीं है। यह उन महिलाओं के श्रम, सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक भी है। जिन हाथों में वर्षों तक घर-परिवार की जिम्मेदारियां सीमित थीं, वही हाथ अब देश के राष्ट्रीय पर्व के लिए तिरंगे तैयार कर रहे हैं। यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का संकेत है।

‘हर घर तिरंगा’ जैसे अभियान तभी अधिक प्रभावी बनते हैं, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यदि राष्ट्रीय पर्व के लिए आवश्यक वस्तुओं का निर्माण स्थानीय स्तर पर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से होता है, तो इससे एक ओर स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलता है और दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार का अवसर मिलता है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश की पहल दूसरे राज्यों के लिए भी एक उपयोगी मॉडल बन सकती है।

हालांकि, इस पहल की सफलता केवल दो करोड़ तिरंगे तैयार करने के आंकड़े से नहीं मापी जानी चाहिए। असली कसौटी यह होगी कि अभियान समाप्त होने के बाद इन महिलाओं की आय और रोजगार का सिलसिला कितना आगे बढ़ता है। यदि तिरंगा निर्माण के बाद यही समूह सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, हस्तशिल्प, मसाला निर्माण, मधुमक्खी पालन और अन्य उद्यमों से स्थायी रूप से जुड़ते हैं, तभी यह अभियान वास्तविक आर्थिक सशक्तीकरण में बदल सकेगा।

सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि स्वयं सहायता समूहों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिले, भुगतान समय पर हो और बाजार तक उनकी पहुंच मजबूत बने। केवल सरकारी आदेश के आधार पर काम उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। महिलाओं को बाजार, प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल बिक्री से जोड़ना भी जरूरी है। इससे ग्रामीण महिलाएं केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की उद्यमी बन सकेंगी।

तिरंगे का सम्मान केवल उसे फहराने में नहीं, बल्कि उसके पीछे लगे श्रम और भावना का सम्मान करने में भी है। जब कोई परिवार अपने घर पर ऐसा तिरंगा फहराएगा, जिसे देश की किसी ग्रामीण महिला ने अपनी मेहनत से तैयार किया है, तो उस ध्वज के साथ एक परिवार की उम्मीद, एक महिला का आत्मविश्वास और एक गांव की अर्थव्यवस्था भी ऊपर उठेगी।

आजादी का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं था। आजादी का सपना गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और आर्थिक निर्भरता से मुक्ति का भी था। इसलिए यदि राष्ट्रीय पर्व के बहाने हजारों महिलाओं को रोजगार और सम्मान मिलता है, तो यह स्वतंत्रता दिवस की भावना को जमीन पर उतारने का सार्थक प्रयास है।

उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहे ये तिरंगे केवल घरों की छतों पर नहीं लहराएंगे, बल्कि यह संदेश भी देंगे कि राष्ट्रभक्ति और आत्मनिर्भरता एक-दूसरे की पूरक हैं। जरूरत इस बात की है कि तिरंगे की यह पहल 15 अगस्त के बाद भी जारी रहे और ग्रामीण महिलाओं के हाथों में पूरे वर्ष रोजगार का अवसर बना रहे। तभी आजादी के रंग में आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक तस्वीर दिखाई देगी।

स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि देश की आजादी के लिए किए गए संघर्ष, बलिदान और उन मूल्यों को याद करने का अवसर है, जिनके आधार पर भारत ने लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। यह दिन हमें यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि क्या आजादी का सपना केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित था या इसका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता भी था। ऐसे में उत्तर प्रदेश में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को ग्रामीण महिलाओं की आजीविका से जोड़ने की पहल महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और आर्थिक आत्मनिर्भरता के संगम की महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करती है।

इस बार प्रदेश की करीब 30 हजार ग्रामीण महिलाएं दो करोड़ तिरंगे तैयार करने के अभियान से जुड़ी हैं। इनमें लगभग 1.90 करोड़ राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जा चुके हैं। आंकड़ा अपने आप में बड़ा है, लेकिन इसकी वास्तविक अहमियत उन हजारों परिवारों की जिंदगी में दिखाई देती है, जिनके घरों की महिलाओं को काम, आय और अपनी मेहनत की पहचान मिल रही है। कई गांवों में पहली बार महिलाओं के हाथों में नियमित काम आया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ आत्मसम्मान भी बढ़ा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तिरंगा यहां केवल एक उत्पाद नहीं है। यह उन महिलाओं के श्रम, सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक भी है। जिन हाथों में वर्षों तक घर-परिवार की जिम्मेदारियां सीमित थीं, वही हाथ अब देश के राष्ट्रीय पर्व के लिए तिरंगे तैयार कर रहे हैं। यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है, क्योंकि इससे ग्रामीण समाज में महिलाओं की भूमिका को नई पहचान मिल रही है। अब वे केवल घर की देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि आय अर्जित करने वाली और निर्णय प्रक्रिया में भाग लेने वाली सदस्य बन रही हैं।

‘हर घर तिरंगा’ जैसे अभियान तभी अधिक प्रभावी बनते हैं, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यदि राष्ट्रीय पर्व के लिए आवश्यक वस्तुओं का निर्माण स्थानीय स्तर पर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से होता है, तो इससे एक ओर स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलता है और दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार का अवसर मिलता है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश की पहल दूसरे राज्यों के लिए भी एक उपयोगी मॉडल बन सकती है। यह मॉडल यह दिखाता है कि सरकारी योजनाएं यदि सही दिशा में लागू हों तो वे केवल खर्च नहीं, बल्कि निवेश बन जाती हैं।

हालांकि, इस पहल की सफलता केवल दो करोड़ तिरंगे तैयार करने के आंकड़े से नहीं मापी जानी चाहिए। असली कसौटी यह होगी कि अभियान समाप्त होने के बाद इन महिलाओं की आय और रोजगार का सिलसिला कितना आगे बढ़ता है। यदि तिरंगा निर्माण के बाद यही समूह सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, हस्तशिल्प, मसाला निर्माण, मधुमक्खी पालन और अन्य उद्यमों से स्थायी रूप से जुड़ते हैं, तभी यह अभियान वास्तविक आर्थिक सशक्तीकरण में बदल सकेगा। अन्यथा यह केवल एक मौसमी गतिविधि बनकर रह जाएगा।

सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि स्वयं सहायता समूहों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिले, भुगतान समय पर हो और बाजार तक उनकी पहुंच मजबूत बने। केवल सरकारी आदेश के आधार पर काम उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। महिलाओं को बाजार, प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल बिक्री से जोड़ना भी जरूरी है। इससे ग्रामीण महिलाएं केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की उद्यमी बन सकेंगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स के माध्यम से उनके उत्पाद देशभर में पहुंच सकते हैं, जिससे उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है।

तिरंगे का सम्मान केवल उसे फहराने में नहीं, बल्कि उसके पीछे लगे श्रम और भावना का सम्मान करने में भी है। जब कोई परिवार अपने घर पर ऐसा तिरंगा फहराएगा, जिसे देश की किसी ग्रामीण महिला ने अपनी मेहनत से तैयार किया है, तो उस ध्वज के साथ एक परिवार की उम्मीद, एक महिला का आत्मविश्वास और एक गांव की अर्थव्यवस्था भी ऊपर उठेगी। यह भावनात्मक जुड़ाव राष्ट्रभक्ति को और गहरा बनाता है।

आजादी का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं था। आजादी का सपना गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और आर्थिक निर्भरता से मुक्ति का भी था। इसलिए यदि राष्ट्रीय पर्व के बहाने हजारों महिलाओं को रोजगार और सम्मान मिलता है, तो यह स्वतंत्रता दिवस की भावना को जमीन पर उतारने का सार्थक प्रयास है। यह हमें याद दिलाता है कि असली आजादी तब पूरी होती है जब समाज का हर वर्ग आत्मनिर्भर हो।

उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहे ये तिरंगे केवल घरों की छतों पर नहीं लहराएंगे, बल्कि यह संदेश भी देंगे कि राष्ट्रभक्ति और आत्मनिर्भरता एक-दूसरे की पूरक हैं। जरूरत इस बात की है कि तिरंगे की यह पहल 15 अगस्त के बाद भी जारी रहे और ग्रामीण महिलाओं के हाथों में पूरे वर्ष रोजगार का अवसर बना रहे। तभी आजादी के रंग में आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक तस्वीर दिखाई देगी और स्वतंत्रता दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि सतत विकास की प्रेरणा बन सकेगा।

11/08/2026

आज के खास पैनल डिस्कशन में सुनिए भारत-नेपाल संबंधों पर लंबे समय से लेखन और विश्लेषण करने वाले वरिष्ठ पत्रकार यशोदा श्रीवास्तव जी एवं सिद्धार्थनगर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष काज़ी सुहेल जी को।

भारत-नेपाल के रिश्तों, बदलते राजनीतिक समीकरणों और दोनों देशों के बीच बढ़ती चुनौतियों पर होगी खास और महत्वपूर्ण चर्चा।

#भारतनेपालसंबंध #भारतनेपाल #सिद्धार्थनगर #यशोदाश्रीवास्तव #काजीसुहेल #पैनलडिस्कशन #भारतनेपालरिश्ते #आजकीखबर

Address

Okhla
Delhi
110020

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when National Adda posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share