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अफजल खान पुत्र अब्दुल कय्यूम गांव _दुधवानीया बुजुर्ग,पोस्ट_बढ़नी,जिला सिद्धार्थ नगर का बच्चा 8/06/2026 सुबह से  गायब होग...
09/06/2026

अफजल खान पुत्र अब्दुल कय्यूम गांव _दुधवानीया बुजुर्ग,पोस्ट_बढ़नी,जिला सिद्धार्थ नगर का बच्चा 8/06/2026 सुबह से गायब होगया है जो काफी गाँव रिश्तेदार कहीं भी खोजने के बाद नहीं मिल रहा है ।
अतः आप से निवेदन है कि इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि बच्चा मिल जाए ।
ढेबरुआ थाना जल्द से जल्द संज्ञान में लेकर तलाशने में मदद करे।

08/06/2026

जेन जी के बाद बनी नेपाल सरकार पर्यटन को लेकर क्या कर रही है ।

https://nationaladda1.blogspot.com/2026/06/blog-post_07.html
08/06/2026

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लखनऊ, 7 जून। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (केएमसी) के कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा ने आगरा विश्वविद्य....

07/06/2026

काकरोच जनता पार्टी ने प्रोटेस्ट किया,और वह शांति पूर्ण रहा , समझिए अलग अलग लाइन से उठ रही आवाजों को ।

05/06/2026

नेपाल की राजनीत को समझिए वहां के राष्ट्रीय नेता मिर्जा राशिद बेग से।

विश्व पर्यावरण दिवस5 जून के अवसर परएक खासरिपोर्ट.. परमात्मा उपाध्याय पर्यावरण कोसाफ  स्वच्छसुरक्षितएवं सुंदर रखने के उद्...
05/06/2026

विश्व पर्यावरण दिवस5 जून के अवसर परएक खासरिपोर्ट..

परमात्मा उपाध्याय

पर्यावरण कोसाफ स्वच्छसुरक्षितएवं सुंदर रखने के उद्देश्यहिंदू धर्म शास्त्रों मेंपर्यावरण को साफ स्वच्छ सुरक्षित एवं सुंदर रखने के उद्देश्यको ध्यान में रखते हुए प्रकृति पूजा का प्राविधान रखा गया हैपर्यावरण में भूमिहवाजल कोमुख्य माना गया हैहमारे हिंदू धर्म शास्त्रों में
पर्यावरणसे संबंधितभूमि वायु संबंधित वृक्ष जल से संबंधित नदियों कोही नहींपशुओं तक को भीपूज्य माना गया है

हम उनकी पूजा करते हैं उन्हें जीवित रखने के लिएवातावरण तैयार करते हैं हिंदू धर्म शास्त्रों मेंइन्हें धरती वायु जल वृक्ष एवं पहाडोसमुद्रो को देवताओं के रूप में पूजा जाता है इन्हें पूजे जाने का एकमात्र कारण यहबताया जाता है किऐसा करने सेकोई भी व्यक्तिइनको नुकसान नहीं पहुंचाएगाऔर यह सभी प्रकृति प्रदत्तमानव जीवन के लिए उपयोगी हमेशा सुरक्षित रहेगीइससेहमारा पर्यावरणसाफ स्वच्छ सुरक्षित एवं सुंदर रहेगा

हिंदू शास्त्र में वृक्ष को ईश्‍वर का प्रतिनिनिधि माना गया है। हिंदू शास्त्रों मेंप्रत्येक वृक्ष एक देवता का प्रतिनिधित्व करता है। जैसे पीपल विष्णु और लक्ष्‍मी का, शमी शनिदेव का, तुलसी वृंदा का और बिल्वपत्र शिवजी का। यहां पर वृक्ष के नाम पर व्रत भी रखे जाते हैं। जैसे आंवला नवमी, वट सावित्री व्रत, अश्वत्थोपनयन व्रत आदि। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति एक पीपल, एक नीम, दस इमली, तीन कैथ, तीन बेल, तीन आँवला और पाँच आम के वृक्ष लगाता है, वह पुण्यात्मा होता है और कभी नरक के दर्शन नहीं करता और इन वृक्षों को काटना है वह घोर पाप कर्म करता है। किसी भी कारण से वृक्ष के काटने पर दूसरे 10 वृक्षों का रोपण और पालन करने वाला उसके पाप से मुक्त हो सकता है।

अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम्
न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।
कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।।
अर्थात्- जो कोई इन वृक्षों के पौधों का रोपण करेगा, उनकी देखभाल करेगा उसे नरक के दर्शन नहीं करना पड़ेंगे।

अश्वत्थः = पीपल (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
पिचुमन्दः = नीम (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
न्यग्रोधः = वटवृक्ष(80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
चिञ्चिणी = इमली (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
कपित्थः = कविट (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
बिल्वः = बेल(85% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
आमलकः = आवला(74% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
आम्रः = आम (70% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है
हिंदू धर्म में नदियों को देवी कहा गया है। गंगा, यमुना, नर्मदा, सरस्वती, ताप्ती, कावेरी आदि कई नदियों के महत्व का पुराणों में उल्लेख मिलता है। नदियों को गंदा करना, उनमें थूकना, नदी किनारे पेशाब करना, उनका जल नहरों के रूप में अन्य जगर विस्तारित करना और उन पर बांध बनाना पाप माना गया है। नदियों की हिंदू धर्म में पूजा और आरती होती है। देव और देवियां की पूजा : इस प्रकृति को मुख्‍य रूप से पांच देवियां संचालित करती हैं। 1.देवी दुर्गा, 2.महालक्ष्मी, 3.सरस्वती, 5.सावित्री और 5.राधा। इनके बारे में सभी जानते ही हैं। षठप्रहरिणी असुरमर्दिनी माता दुर्गा का एक रूप है वनदुर्गा। वनों की पीड़ा सुनकर उनमें आश्रय लेने वाले दानवोंका वध करने और वनों की रक्षा करने वनदुर्गा के रूपमें अवतरित हुई एक शक्ति है। वनों की पुत्री देवी मारिषा के पोषण हेतु वनदुर्गाका यह अवतार सभी मातृकाओंमे श्रेष्ठ माना जाता है। देवी तुलसी का नाम वृंदा है। देवी आर्याणि जंगल की रक्षा करने वाली देवी हैं। विश्‍वदेवों से से एक वनस्पति देव हैं जो वनस्पति की रक्षा करते हैं। आरण्यिका नागदेव भी वनों की रक्षा करते हैं
ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक पेड़, पौधा और वस्तु किसी ना किसी ग्रह, नक्षत्र और राशियों से जुड़े हुए हैं। यह सभी हमारे जीवन को संचालित करते हैं। ज्योतिष मानता है कि हम प्रकृति के प्रभाव से मुक्त नहीं हो सकते क्योंकि हम प्रकृति का हिस्सा ही हैं। यदि हम उक्त ग्रहों के अनुसार नगर, ग्राम और घर के आसपास वैसे ही वृक्ष लगाएं तो इससे एक ओर जहां पर्यावरण में सुधार होगा वहीं ग्रह नक्षत्रों का बुरा प्रभाव भी नहीं रहता है।

ज्योतिष मानता है कि शमी को जल चढ़ाने से शनि की बाधा, पीपल को जल चढ़ाने से बृहस्पति की बाधा, नीम को जल चढ़ाने से मंगल की बाधा, मंदार, तेजफल या सूर्यमुखी को जल चढ़ाने या सूर्य को अर्ध्य देने से सूर्य की बाधा, पोस्त, पलाश या दूध वाले पेड़ पोधों को सिंचित करने से चंद्र की बाधा, केला और चौड़े पत्ते वाले पेड़ को जल देने से बुध की बाधा, मनी प्लांट, कपास, गुलर, लताएं या फलदार वृक्ष की सेवा करने से शुक्र की बाधा, नारियल पेड़ में जल देने से राहु की बाधा और इमली के पेड़ में जल देने से केतु की बाधा दूर होती है।
इसी तरह ज्योतिष अनुसार पशु, पक्षी और कई तरह की वस्तुएं भी किसी न किसी ग्रह नक्षत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। जैसे हाथी और जंगली चूहा राहु का, कुत्ता, गधा, सूअर और छिपकली केतु का, भैंस या भैंसा शनि का, बंदर या कपिला गाय सूर्य का, घोड़ा चंद्र का, शेर, ऊंट और हिरण मंगल का, बकरा, बकरी और चमगादढ़ बुध का, बब्बर शेर गुरु का और अश्व, गाय और बैल शुक्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

हिंदू और जैन धर्म के कई तीर्थ पहाड़ों पर भी स्थित है। हिंदू धर्म में अधिकतर पहाड़ों पर देवियों के मंदिर स्थित है जो जैन धर्म में मुनियों के तपोस्थल। भारतीय संस्कृति और धर्म में पहाड़ों को बहुत महत्व दिया गया है।

04/06/2026
https://nationaladda1.blogspot.com/2026/06/blog-post_370.html
03/06/2026

https://nationaladda1.blogspot.com/2026/06/blog-post_370.html

सद्दाम खान बढ़नी/सिद्धार्थनगर। ढेबरुआ थाना क्षेत्र के मधवापुर स्थित निर्माणाधीन मत्स्य मंडी में बुधवार को हुए द....

03/06/2026

नेपाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय लीडर मिरजा राशिद बेग के साथ खास इंटरव्यू, समझिए कि जेन जी आंदोलन के बाद नेपाल के राजनीति में क्या बदला और अभी के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह का क्या विजन है नेपाल के डेविपलमेंट को लेकर।
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