Punjabi by roots

Punjabi by roots An effort to collect all Punjabis. Either belongs to any faith or cast. If your roots were in Punjab, you are a proud Punjabi. Proud of Punjabiyat .

ਵੀਕਐਂਡ ਦੀ ਖਬਰਸਾਰ ********ਨਸਲਵਾਦੀ ਹਮਲਾਟਰਾਂਟੋ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਇੱਕ ਅਜਿਹੇ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਪਛਾਣ ਕਰਨ ਲਈ ਲੋਕਾਂ ਤੋਂ ਮਦਦ ਮੰਗੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ, ਜਿ...
31/08/2026

ਵੀਕਐਂਡ ਦੀ ਖਬਰਸਾਰ

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ਨਸਲਵਾਦੀ ਹਮਲਾ

ਟਰਾਂਟੋ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਇੱਕ ਅਜਿਹੇ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਪਛਾਣ ਕਰਨ ਲਈ ਲੋਕਾਂ ਤੋਂ ਮਦਦ ਮੰਗੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨੇ ਕਥਿਤ ਤੌਰ ’ਤੇ ਇੱਕ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਲੱਤ ’ਤੇ ਚਾਕੂ ਨਾਲ ਹਮਲਾ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸਿੱਖ ਵਿਰੋਧੀ ਟਿੱਪਣੀਆਂ ਅਤੇ ਨਸਲੀ ਗਾਲ੍ਹਾਂ ਕੱਢੀਆਂ।

ਇਹ ਘਟਨਾ ਸ਼ਨੀਵਾਰ ਨੂੰ ਕਵੀਨਜ਼ ਕਵੇਅ ਅਤੇ ਲੋਅਰ ਸਪੈਡੀਨਾ ਐਵੇਨਿਊ ਨੇੜੇ ਵਾਪਰੀ।

ਜਾਂਚਕਰਤਾਵਾਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਇੱਕ ਸ਼ੱਕੀ ਵਿਅਕਤੀ ਨੇ ਬਿਨਾਂ ਕਿਸੇ ਉਕਸਾਵੇ ਦੇ ਪੀੜਤ ਅਤੇ ਇੱਕ ਗਵਾਹ ਕੋਲ ਪਹੁੰਚ ਕੀਤੀ। ਉਸ ਨੇ ਕਥਿਤ ਤੌਰ ’ਤੇ ਸਿੱਖ ਵਿਰੋਧੀ ਟਿੱਪਣੀਆਂ ਅਤੇ ਨਸਲੀ ਗਾਲ੍ਹਾਂ ਕੱਢੀਆਂ ਅਤੇ ਫਿਰ ਚਾਕੂ ਨਾਲ ਪੀੜਤ ’ਤੇ ਹਮਲਾ ਕਰ ਦਿੱਤਾ।

ਪੁਲਿਸ ਮੁਤਾਬਕ, ਪੀੜਤ ਦੇ ਜ਼ਖ਼ਮ ਜਾਨਲੇਵਾ ਨਹੀਂ ਹਨ।

ਕੈਨੇਡਾ ਵਿੱਚ ਨਸਲਵਾਦੀਆਂ ਅਤੇ ਭਾਰਤੀ ਹਿੰਦੂਤਵੀ ਬੌਟਸ (ਨਕਲੀ ਖਾਤੇ) ਵੱਲੋਂ ਚਲਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਸਿੱਖ ਵਿਰੋਧੀ ਮੁਹਿੰਮ ਕਾਰਨ ਕਈ ਥਾਂ ਸਿੱਖਾਂ ‘ਤੇ ਅਜਿਹੇ ਹਮਲੇ ਹੋ ਚੁੱਕੇ ਹਨ।

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ਕੈਲਗਰੀ ਪੁਲਿਸ ਦੀ ਹੋਮੀਸਾਈਡ ਯੂਨਿਟ ਵੱਲੋਂ ਐਤਵਾਰ ਤੜਕੇ ਉੱਤਰ-ਪੂਰਬੀ ਇਲਾਕੇ ਕੋਰਨਰਸਟੋਨ ਵਿੱਚ ਹੋਈ ਇੱਕ ਜਾਨਲੇਵਾ ਗੋਲੀਬਾਰੀ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ।

ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਜਾਰੀ ਕੀਤੇ ਇੱਕ ਬਿਆਨ ਵਿੱਚ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਰਾਤ ਕਰੀਬ 1 ਵਜੇ ਤੋਂ ਥੋੜ੍ਹਾ ਚਿਰ ਪਹਿਲਾਂ ਕੋਰਨਰਸਟੋਨ ਬੁਲੇਵਾਰਡ ਨੌਰਥਈਸਟ ਦੇ 1100 ਬਲਾਕ ਵਿੱਚ ਗੋਲੀਆਂ ਚੱਲਣ ਦੀ ਸੂਚਨਾ ਮਿਲੀ ਸੀ। ਜਦੋਂ ਪੁਲਿਸ ਅਧਿਕਾਰੀ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਪਹੁੰਚੇ ਤਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਵਿਅਕਤੀ ਮ੍ਰਿਤਕ ਮਿਲਿਆ।

ਪੁਲਿਸ ਮੁਤਾਬਕ, ਇਹ ਗੋਲੀਬਾਰੀ ਨਿਸ਼ਾਨਾ ਬਣਾ ਕੇ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੋਣ ਦਾ ਸ਼ੱਕ ਹੈ, ਪਰ ਘਟਨਾ ਲਈ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੀ ਭਾਲ ਅਜੇ ਵੀ ਜਾਰੀ ਹੈ।

ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਅਜੇ ਤੱਕ ਕਿਸੇ ਦੀ ਗ੍ਰਿਫ਼ਤਾਰੀ ਨਹੀਂ ਹੋਈ।

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ਸ਼ਨੀਵਾਰ ਰਾਤ ਸਰੀ ਦੇ ਨਾਲ ਲੱਗਦੇ ਸ਼ਹਿਰ ਕੁਕਿਟਲਮ ਵਿਖੇ ਲੋਹਹੀਡ ਹਾਈਵੇਅ ਅਤੇ ਸਕੂਲਹਾਊਸ ਸਟਰੀਟ ਲਾਗੇ ਇੱਕ ਰੈਸਟੋਰੈਂਟ ‘ਚੋਂ ਖਾਣਾ ਖਾ ਕੇ ਨਿਕਲੇ ਪੰਜਾਬੀ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਇੱਕ ਜੀਅ ‘ਤੇ ਉਦੋਂ ਗੋਲੀਆਂ ਚਲਾ ਦਿੱਤੀਆਂ ਗਈਆਂ ਜਦ ਉਹ ਇਕੱਲਾ ਅੱਡ ਆਪਣੀ ਕਾਰ ਵਿੱਚ ਬਹਿ ਰਿਹਾ ਸੀ।

ਇੱਕ ਗੋਲੀ ਚੱਲਣ ਬਾਅਦ ਗੰਨ ਜਾਮ ਹੋ ਗਈ, ਮੁੰਡੇ ਦਾ ਬਚਾਅ ਹੋ ਗਿਆ। ਹਮਲਾਵਰ ਇੱਕ ਪਿਕਅੱਪ ਟਰੱਕ ‘ਚ ਬਹਿ ਕੇ ਫ਼ਰਾਰ ਹੋ ਗਏ।

-ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਸਹੋਤਾ | ਸਰੀ | ਚੜ੍ਹਦੀ ਕਲਾ

18/08/2026
18/08/2026

ਲਹਿੰਦੇ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਅਸੈਂਬਲੀ ਵਿੱਚ ਪੀਟੀਆਈ ਦੇ ਐਮਪੀਏ (ਵਿਧਾਇਕ ) ਅਹਮਰ ਰਸ਼ੀਦ ਭੱਟੀ ਨੇ ਜ਼ੋਰਦਾਰ ਦਲੀਲਾਂ ਦਿੰਦਿਆਂ ਪੰਜਾਬੀ ਬੋਲਣ ਦੀ ਵਕਾਲਤ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸਨੇ ਆਪਣੀ ਤਕਰੀਰ ਵਿੱਚ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੰਜਾਬੀ ਨੇ ਮੁਨੀਰ ਨਿਆਜ਼ੀ ਵਰਗੇ ਕਵੀ ਅਤੇ ਡਾ. ਅਬਦੁਲ ਸਲਾਮ ਵਰਗੇ ਵਿਗਿਆਨੀ ਪੈਦਾ ਕੀਤੇ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਦੁਨੀਆ - ਯੂਰਪ ਸਮੇਤ - ਆਪਣੀ ਮਾਤ ਭਾਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਪੜ੍ਹਾਉਂਦੀ ਹੈ।

ਜਦਕਿ ਲਹਿੰਦੇ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਅਸੈਂਬਲੀ ਦਾ ਸਪੀਕਰ ਮਲਿਕ ਅਹਿਮਦ ਖਾਨਬੇ ਤੁਕੀਆਂ ਦਲੀਲਾਂ ਨਾਲ ਉਸਦੀ ਗੱਲ ਕੱਟ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਪਾਣੀ ਦੇ ਫਾਰਮੂਲੇ ਨੂੰ H2O ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਵਿਚ ਹੀ ਲਿਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ, ਉਸ ਖੂਹ ਦੇ ਡੱਡੂ ਨੂੰ ਵਿਧਾਇਕ ਵੱਲੋਂ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਹੀਂ ਨਹੀਂ ਸਮਝਾਇਆ ਗਿਆ ਬਲਕਿ ਠੋਕਵੀਂ ਉਦਾਹਰਣਾਂ ਦਿੰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਸਾਇੰਸ ਦੀ ਚੀਨ ਨੇ ਆਪਣੀ ਭਾਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਧੁੱਕੀ ਕੱਢੀ ਹੋਈ ਹੈ ਤੇ ਰੂਸ ਨੇ ਆਪਣੀ ਭਾਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਸਾਇੰਸ ਦੀਆਂ ਖੋਜਾਂ ਕਰਕੇ ਪੁਲਾੜ ਵਿੱਚ ਸਟੇਸ਼ਨ ਖੋਲ੍ਹੇ ਹੋਏ ਹਨ !!!

ਖੈਰ ਵਿਧਾਇਕ ਨੇ ਆਪਣੀ ਚੜ੍ਹਦੇ ਪੰਜਾਬ ਵਾਲਿਆਂ ਦੀ ਵੀ ਸਿਫ਼ਤ ਕੀਤੀ ਹੈ ਕਿ ਪੰਜਾਬੀ ਸਿੱਖਾਂ ਕਰਕੇ ਜਿਊਂਦੀ ਹੈ, ਸਾਰੀ ਦੁਨੀਆਂ ਵਿੱਚ ਸਾਡੇ ਚੜ੍ਹਦੇ ਪੰਜਾਬ ਵਾਲਿਆਂ ਕਰਕੇ ਹੀ ਪੰਜਾਬੀ ਦਾ ਰੁਤਬਾ ਹੈ ਤੇ ਸਾਡੀ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਠੋਕ ਕੇ ਪੰਜਾਬੀ ਬੋਲੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।

ਬਾਕੀ ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਦੇ ਕੱਟੜ ਅਤੇ ਅੰਨੇ ਬੋਲੇ ਹਾਕਮਾਂ ਨੂੰ ਅਜੇ ਵੀ ਇਹ ਸਮਝ ਨਹੀਂ ਆਈ ਕਿ ਬੰਗਲਾਦੇਸ਼ ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਨਾਲੋਂ ਟੁੱਟਣ ਦਾ ਦੂਜਾ ਵੱਡਾ ਕਾਰਨ ਭਾਸ਼ਾ ਹੀ ਸੀ ਬੰਗਲਾਦੇਸ਼ੀਆਂ ਤੇ ਉਰਦੂ ਧੱਕੇ ਨਾਲ ਥੋਪੀ ਗਈ ਸੀ।

#ਮਿਸਲ_ਰਾਮਗੜ੍ਹੀਆ #ਮਿਸਲ_ਰਾਮਗੜ੍ਹੀਆ #𝐏𝐮𝐧𝐣𝐚𝐛𝐢𝐥𝐢𝐭𝐞𝐫𝐚𝐭𝐮𝐫𝐞

05/08/2026

बूढ़ी हुयीं बुआ पर हर,
सावन में मैके आ जाती हैं!

बापू के सँग विदा हो गये
सब अधिकार दुआरे के
आँगन चौखट और कोठरी
चली गयीं अम्मा ले के

सूखे हुये ताल से जाकर
जाने क्या क्या बतियाती हैं !

आँखों में मोतियाबिंद है
जाने कैसा धुआँ मचा
बचपन में जो नीम खड़ा था
अब बस केवल ठूँठ बचा

उसी ठूँठ के नीचे रुककर
कुछ भूला बिसरा गाती हैं

हर पीपल बरगद गलियारे
से बचपन का नाता है
खुद ही चलकर आ जाती हैं
कोई नहीं बुलाता है

जाते समय ज़रा से चावल
घर में बिखरा आती हैं

#लड़कियों से मायका कभी नहीं छूटता❤️

कितनी हैरानी की बात है कि दुनियां भर में बेहतरीन खाना बांटने वाली क़ौम का जत्थेदार सबसे बुरा खाना खाता हैं !बाबा नानक ने...
02/08/2026

कितनी हैरानी की बात है कि
दुनियां भर में बेहतरीन खाना बांटने वाली क़ौम का जत्थेदार सबसे बुरा खाना खाता हैं !

बाबा नानक ने अगर लंगर ना लगाया होता तो न जाने कितने इंसान भूख से मर गए होते क्योंकि उन्हीं की बरकत से आज तक सिख समाज आसाम से लेकर अफ्रीका तक लंगर सेवा लेकर पहुंच जाता हैं।

चंडीगढ़ प्रवास के दौरान मोहाली में परम प्रिय मित्र सिंह साहब, निहंग बाबा कुलविंदर सिंह जी ( जत्थेदार 96 करोड़ी जी के मोर...
02/08/2026

चंडीगढ़ प्रवास के दौरान मोहाली में परम प्रिय मित्र सिंह साहब, निहंग बाबा कुलविंदर सिंह जी ( जत्थेदार 96 करोड़ी जी के मोर्चे) के प्रेम भरे सम्मानित आमंत्रण पर उनसे मिलने का सौभाग्य मिला।

उनका आत्मीय स्वागत केवल एक मुलाकात नहीं था, बल्कि विचारों की एक नई यात्रा की शुरुआत थी।

लंबी चर्चा के दौरान पहली बार एक शब्द मेरे सामने आया
“बंदी सिंह”

यह शब्द मेरे लिए नया था। सहज जिज्ञासा से मैंने बाबा जी से पूछा यदि कोई “सिंह” है तो “बंदी” क्यों? और यदि “बंदी” है तो “सिंह” कैसे?

इन दोनों शब्दों के पीछे अवश्य कोई गहरी ऐतिहासिक, धार्मिक और वैचारिक सोच होगी, क्योंकि पहली नज़र में इनके अर्थ मेरे मन में अनेक सवाल खड़े करते हैं।

स्वीकार करता हूँ कि यह केवल एक शब्द भर नहीं रहा। इसने मेरी आत्मा को झकझोर दिया है।

शायद इसलिए कि शब्द कभी केवल शब्द नहीं होते वे इतिहास, पीड़ा, संघर्ष और चेतना भी अपने साथ लेकर चलते हैं।

आज मेरी चिंता केवल इस शब्द को समझने की नहीं, बल्कि “बंदी सिंह” की संपूर्ण अवधारणा और उसके मानवीय, ऐतिहासिक तथा सामाजिक आयामों को समझने की भी है।

मैं इस विषय पर गंभीर अध्ययन कर रहा हूँ और शीघ्र ही विस्तार से लिखूँगा। तब तक मैं उन सभी मित्रों, विद्वानों, इतिहासकारों, सिख समाज के सम्मानित सदस्यों और जागरूक नागरिकों को इस विमर्श में आमंत्रित करता हूँ ।

जो मानते हैं कि प्रश्न पूछना विभाजन नहीं, बल्कि सत्य की खोज का प्रारंभ है।

यदि आपके पास इस विषय से जुड़े प्रामाणिक तथ्य, ऐतिहासिक संदर्भ या विचार हों, तो कृपया अवश्य साझा करें।

कभी-कभी एक शब्द भीतर ऐसी आग जला देता है, जो उत्तर मिलने तक शांत नहीं होती। मैं उसी उत्तर की खोज में हूँ।

भारत का नेल्सन मंडेला !ये उपाधि प्रकाश सिंह बादल को महा मानर ने दी थी।उसी प्रकाश सिंह बादल को जिसने जंतर मंतर पर भारतीय ...
07/07/2026

भारत का नेल्सन मंडेला !
ये उपाधि प्रकाश सिंह बादल को महा मानर ने दी थी।

उसी प्रकाश सिंह बादल को जिसने जंतर मंतर पर भारतीय संविधान की प्रतियां जलाई थी।

एक फिल्म बनती हैं जिसमें निर्दोष बच्चों को एनकाउंटर के नाम पर गायब कर दिया जाता हैं या हत्या करके लावारिस जला दिया जाता हैं।

मानवाधिकार एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालडा इस पर शोध करते हैं और 25 हजार युवकों का रिकॉर्ड सामने लाते है लेकिन बाद में उन्हें भी गायब कर दिया जाता हैं।

फिल्म को तीन साल रोक कर रखा जाता है जिससे चुनावों से पहले रिलीज़ करके कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाए जाए।

सिख समुदाय में अनपढ़ और जाहिलों की संख्या कम होने के कारण या उनके द्वारा अन्न खाने और लस्सी पीने के कारण सच्चाई सामने आ गई और तीर उल्टा पड़ गया ।

बूचर ऑफ पंजाब के पी एस गिल और डी एस पी के संबंध बादल बीजेपी से निकले ( इंटरव्यू कमेंट में ) और कम से कम कांग्रेस सरकार का यह सकारात्मक पहलू रहा कि सीबीआई जांच में दोषी पुलिस कर्मियों को उम्र कैद की सजा मिली।

( आज तो टोले में शामिल कर लिया जाता )
एक डी एस पी अजीत सिंह को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा। के पी एस जब मरा तो उसके भोग में कोई नहीं आया ( सिर्फ दो नेताओं के )

कुत्ता राज बहालिए, मुड चक्की चट्टे।
अपनी जड़ आप ही पट्टे।।

( अर्थात यदि कुत्ते को राजा भी बना दोगे तब भी वो चक्की चाटेगा, या चढ़ावा खायेगा। इस प्रकार अपनी जड़ खुद ही उखाड़ेगा )

दिलजीत दोसांझ को कुछ दिन पहले कोकरोच जनता पार्टी ने अप्रोच किया, दिलजीत ने ये कहते हुए इंकार कर दिया कि मै राजनेता नहीं ...
06/07/2026

दिलजीत दोसांझ को कुछ दिन पहले कोकरोच जनता पार्टी ने अप्रोच किया, दिलजीत ने ये कहते हुए इंकार कर दिया कि मै राजनेता नहीं हू।

इस बात से बहुत लोगों को लगा कि,दिलजीत डरपोक है,पर दिलजीत जिस कौम से आते है,दिलजीत जिस मिट्टी की उपज है,वो बंजर हो जाएगी लेकिन डरपोक पैदा नहीं करती।

पंजाब के बदन पर इतने घाव है, पंजाब की पीठ पर इतने खंजर है, कि तरीके से देखा जाए तो पंजाब या पंजाबियों का अस्तित्व बहुत पहले खत्म हो जाना चाहिए,आखिर किस वक्त की कौनसी ताकत में इन्हें गिराने या मिटाने,या तोड़ने की कोशिश नहीं की है।

पर न पंजाब मिटा न पंजाबियत,आखिर क्यू? क्योंकि पंजाब की हर पीढ़ी में कोई न कोई,जसवंत सिंह खालरा,कोई दिलजीत पैदा होता है, जिसके लिए दुनिया की हर कामयाबी से ज्यादा जरूरी उसका पंजाब है,वहा के लोग वहां की मिट्टी है।

पंजाब की मिट्टी से निकला हर कामयाब और मशहूर शख्स खुद को उम्र भर अपनी मिट्टी का कर्जदार मानता है, पंजाबी दुनिया के किसी भी कोने में चले जाए,कामयाबी और शोहरत की कितनी भी ऊंचाई पर क्यू न पहुंच जाए,उन्हें हमेशा अपनी मिट्टी,उसके घाव और उसका कर्ज याद रहता है।

आप दिलजीत की फिल्मोग्राफी देखिए, आपको ऐसा लगेगा जैसे दिलजीत किसी मिशन में निकले है। मानो वो अपने सर से अपनी मिट्टी के कर्ज चुकाने के लिए बहुत बेचैन है।

सोचिए चमकीला बनाते वक्त, और जसवंत सिंह खालरा पर बनी फिल्म के दौरान,दोनों ही बार इसे बनाने वाले जब दिलजीत के पास पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि दिलजीत तो पहले से ही इन दोनों के बारे में जानते है,और खुद भी फिल्म बनाने की कोशिश कर रहे है।

सोचिए कितने स्टार आज ऐसे है? जो अपनी कौम या अपनी मिट्टी पर हुए जुल्म ओ सितम को न सिर्फ याद रखते हो, बल्कि अपनी आर्ट के जरिए से उस जख्म को दुनिया के सामने भी रखने की हिम्मत रखते हो,वो भी एक बार नहीं, बार बार।

दिलजीत शायद कभी सड़क पर लाठी नहीं खाएंगे, शायद कभी धरने पर नहीं बैठेंगे,उन्हें ये सब करना भी नहीं चाहिए क्योंकि वो राजनेता नहीं है। वो कलाकार है, उन्हें जो कहना होगा वो गाकर कह देंगे,या फिर पर्दे पर निभाकर कह जाएंगे।

चाहे वो जोगी की कहानी हो, चाहे वो पंजाब 85 हो,या फिर चमकीला की कहानी हो या फिर आज शहीद जसवंत सिंह खालरा पर बनी फिल्म हो।

दिलजीत ने पंजाब के गांव से जुड़ी कभी किसी फिल्म को काम की तरह लिया ही नहीं,ये उनके लिए फर्ज जैसा था,मानो वो सेवा कर रहे हो,और शुरू में मुझे भी लगा कि ये सब दिलजीत की पीआर के चोंचले होंगे।

पर जिस तरह के रिस्क दिलजीत ने अपने छोटे से करियर में,पंजाब की खातिर लिए है और लगातार लेते जा रहे है,वैसे रिस्क तो दुनिया की कोई भी पीआर एजेंसी अपने क्लाइंट को लेने नहीं देंगी।

सोचिए कौनसा एक्टर ऐसी कंट्रोवर्शियल फिल्म के साथ 5 साल खड़ा रहता है, जिस फिल्म के लिए उसने एक रुपया भी न लिया हो।

जब किसी और क्षेत्र में कोई स्टार बनता है तो वो अपने घर परिवार का नाम लेकर चलता है, और वही जब पंजाबी मशहूर होते है, तो वो अपने पिंड अपने गांव का नाम किसी तमगे की तरह अपने सीने से लगा लेते है।

दिलजीत अपने कंसर्ट में पंजाब और पंजाबियत को किसी प्रोप की तरह इस्तेमाल नहीं करते है, ये उनकी आइडेंटिटी है,ये उनके वजूद से ऐसे ही चिपका है जैसे उंगलियों से नाखून।

कहते है कि किसी कलाकार की कलाकारी कैसी है, ये इस बात से भी तय होती है कि वो कलाकार काबिल होने के साथ साथ, कितना बहादुर है, या कितना डरपोक,डरपोक कलाकार कितना भी काबिल या कामयाब क्यू न हो, कलाकार कहलाने लायक नहीं रहता।

दिलजीत ने बीते सालों में, जिस तरह के सब्जेक्ट पर जिस तरह की परफॉर्मेंस दी है, ये एक तरह की नाइंसाफी होगी अगर आप इस बात से इनकार करेंगे,कि इस वक्त, पूरी भारतीय इंडस्ट्री में,कोई भी एक्टर दिलजीत जितनी हिम्मत काबिलियत नहीं रखता है।

पर मुझे लगता है कि पंजाब की हर गली हर मुहल्ले में दिलजीत जैसे बहादुर बच्चे रहते होंगे, जो अपने अपने तरीके से अपनी अपनी लड़ाई लड़ रहे है, पंजाब का वजूद ही ऐसे बहादुर बच्चों की जद्दोजहद और जिद से टिका हुआ है।

और एक बार फिर, बड़ी बड़ी ताकते पंजाब के दोसांझ पिंड के एक लड़के की अपनी मिट्टी का का कर्ज चुकाने की जिद के आगे हार गई है। तारीख दिलजीत की परफॉर्मेंस को जितना याद रखेगी,उतना याद रखेगी दिलजीत की बहादुरी को,और बहादुरी ही पंजाब की पहचान है।

जुल्म लाखों की भीड़ भी करे तो एक अकेले का उस जुल्म के खिलाफ खड़े हो जाना पंजाबियत है, और दिलजीत इस पंजाबियत को,बहुत ऊंचाई पर ले जाने वाले है,इतना कि पंजाब की माए बच्चों को एक दिन दिलजीत की बहादुरी की कहानियां सुनाएंगी।

और शायद ऐस बहादुरों की कहानियां ही है, कि पंजाब बंजर हो जाएगा,पर कायर पैदा नहीं करेगा, क्युकी पंजाबियत का मायने ही बहादुरी है,रेजिस्टसेंस है, जिद और जज्बा है।

ਡਾ. ਗੁਨੀਸ਼ਾ ਕੌਰ (DR Gunisha Kaur )USCIRF (Commission on International Religious Freedom )ਦੀ ਫੈਡਰਲ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਨਿਯੁਕਤ, ਇਹ ਵੀ ...
23/05/2026

ਡਾ. ਗੁਨੀਸ਼ਾ ਕੌਰ (DR Gunisha Kaur )USCIRF (Commission on International Religious Freedom )ਦੀ ਫੈਡਰਲ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਨਿਯੁਕਤ, ਇਹ ਵੀ ਬੱਡੀ ਜਿੱਤ ਹੈ ਜੋ ਕੌਮ ਦੇ ਹਕ਼ ਬਿਚ ਹੈ

ਅਮਰੀਕਾ ਨੇ ਧਾਰਮਿਕ ਅਜ਼ਾਦੀ ਦੀ ਨਿਗਰਾਨੀ ਕਰਨ ਵਾਲੀ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਫੈਡਰਲ ਸੰਸਥਾ USCIRF (U.S. Commission on International Religious Freedom) ਵਿੱਚ ਇਤਿਹਾਸਕ ਨਿਯੁਕਤੀ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਡਾ. ਗੁਨੀਸ਼ਾ ਕੌਰ ਨੂੰ ਇਸ ਦੇ ਫੈਡਰਲ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਵਜੋਂ ਨਿਯੁਕਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ।
ਡਾ. ਗੁਨੀਸ਼ਾ ਕੌਰ ਇਸ ਅਹੁਦੇ ਉੱਤੇ ਬੈਠਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪਹਿਲੀਆਂ ਸਿੱਖ ਔਰਤਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਇੱਕ ਹਨ। ਉਹ ਇੱਕ ਮਸ਼ਹੂਰ ਐਨੈਸਥੀਸੀਓਲੋਜਿਸਟ ਹਨ ਅਤੇ ਵੈਲ ਕਾਰਨੈਲ ਮੈਡੀਸਨ (Weill Cornell Medicine) ਵਿਖੇ Human Rights Impact Lab ਦੀ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਵਜੋਂ ਸੇਵਾਵਾਂ ਨਿਭਾ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਧਾਰਮਿਕ ਘੱਟ ਗਿਣਤੀਆਂ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖੀ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਨਾਲ ਜੁੜੀਆਂ ਮੁੱਦਿਆਂ ਉੱਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਖੋਜ ਅਤੇ ਐਡਵੋਕੇਸੀ ਕੀਤੀ ਹੈ।

ਡਾ. ਗੁਨੀਸ਼ਾ ਕੌਰ ਦੇ ਮਾਤਾ-ਪਿਤਾ:
• ਪਿਤਾ: ਡਾ. ਸਤਪਾਲ ਸਿੰਘ (Dr. Satpal Singh)�ਉਹ ਇੱਕ ਮਸ਼ਹੂਰ ਵਿਗਿਆਨੀ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ SUNY Buffalo (State University of New York at Buffalo) ਵਿਖੇ Neuroscience/Pharmacology ਅਤੇ Toxicology ਵਿਭਾਗ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਫੈਸਰ ਐਮੀਰਿਟਸ ਵਜੋਂ ਸੇਵਾ ਨਿਭਾਈ ਹੈ। ਉਹ ਭਾਰਤ ਤੋਂ ਆਏ ਸਨ ਅਤੇ 1980ਵਿਆਂ ਵਿੱਚ ਧਾਰਮਿਕ ਹਿੰਸਾ ਤੋਂ ਬਚ ਕੇ ਪਰਿਵਾਰ ਨਾਲ ਅਮਰੀਕਾ ਆਏ ਸਨ।.
ਪਰਿਵਾਰ ਪੰਜਾਬ ਤੋਂ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਸਿੱਖ ਭਾਈਚਾਰੇ ਨਾਲ ਡੂੰਘੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜੁੜਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਡਾ. ਗੁਨੀਸ਼ਾ ਕੌਰ ਆਪਣੇ ਪਿਤਾ ਨਾਲ ਇੱਕਠੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਧਾਰਮਿਕ ਅਤੇ ਕਮਿਊਨਿਟੀ ਇਵੈਂਟਾਂ ਵਿੱਚ ਹਿੱਸਾ ਲੈਂਦੀ ਰਹੀ ਹੈ।

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