24/06/2026
कभी-कभी किसी बच्चे को खेलते हुए देखती हूँ तो मन में एक प्रश्न उठता है; क्या हम भी कभी ऐसे ही थे? हाँ, हम भी ऐसे ही तो थे!
हम भी बिना किसी झिझक के हँसते थे .... मासूमियत में रो लेते थे .... जो अच्छा लगता था, कह देते थे ..... जो बुरा लगता था, उससे दूर हो जाते थे ..... हमें यह चिंता नहीं होती थी कि लोग क्या सोचेंगे ...... हमारी छवि कैसी बनेगी .....या हमारी बात का क्या अर्थ निकाला जाएगा।
बचपन में हम सहज थे। फिर धीरे-धीरे जीवन ने हमें "समझदार" बनाना शुरू किया। हमें सिखाया गया कि हर बात मन की नहीं कहनी चाहिए ..... हर भावना दिखानी नहीं चाहिए ..... आँसू बहाना कमज़ोरी है।
फिर हमने लोगों को ख़ुश रखना सीखा .....अपनी भावनाओं को छिपाना सीखा ..... और कई बार तो स्वयं से भी दूर होना सीख लिया। उम्र बढ़ती गई और परतें चढ़ती गईं! एक परत सामाजिक अपेक्षाओं की, एक परत सफल दिखने की, एक परत दूसरों को निराश न करने की, और एक परत स्वयं को मजबूत साबित करने की, और इन सब परतों के नीचे कहीं वह सहज व्यक्ति आज भी मौजूद है, जो बिना किसी दिखावे के जीना चाहता है। पर क्या सचमुच हम फिर से वैसे हो सकते हैं?
शायद बिल्कुल वैसे नहीं क्योंकि बचपन की सहजता अज्ञान की सहजता थी। हमें दुनिया की जटिलताओं का पता नहीं था। आज अनुभव हैं, जिम्मेदारियाँ हैं, रिश्तों की पेचीदगियाँ हैं; लेकिन एक दूसरी तरह की सहजता संभव है; वह सहजता जो समझ के बाद आती है; जहाँ हम हर किसी को खुश करने का बोझ छोड़ देते हैं .... जहाँ "नहीं" कहने पर अपराधबोध नहीं होता ..... जहाँ अपनी कमियों को छिपाने के बजाय स्वीकार कर लेते हैं ..... जहाँ हर समय मजबूत दिखने की मजबूरी नहीं रहती ..... और जहाँ हम अपने आँसू, अपनी हँसी और अपनी संवेदनाओं से शर्मिंदा नहीं होते।
बचपन में सहज होना स्वाभाविक था। परिपक्वता में सहज होना एक साधना है। और शायद जीवन का सबसे सुंदर पड़ाव वही होता है, जब हम अनुभवों की लंबी यात्रा के बाद फिर से अपने भीतर लौट आते हैं।
सहजता कोई खोई हुई चीज़ नहीं है, जिसे ढूँढ़कर वापस लाना हो। वह तो हमारे भीतर ही रहती है, पर शोर, भय, अपेक्षाओं और दिखावे की परतों के नीचे दब जाती है। जीवन का सौंदर्य इसी में है कि धीरे-धीरे हम उन परतों को हटाते जाएँ और एक दिन फिर स्वयं से मिल सकें; बिना अभिनय के, बिना प्रमाणपत्र के, बिना किसी भूमिका के; बस एक मनुष्य की तरह।
✍️भावना चोपड़ा आरोही
Poet : Bhawana Chopra Arohi ©️®️