05/06/2026
🚨 क्या विकास के नाम पर हमारी साँसें भी छीनी जा सकती हैं?
हसदेव के जंगल सिर्फ पेड़ नहीं थे, लाखों लोगों की जिंदगी, जल-जंगल-ज़मीन और आने वाली पीढ़ियों की उम्मीद थे।
लेकिन आज उन घने जंगलों की जगह कटे हुए पेड़ों और उजड़ी हुई धरती की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं।
आदिवासियों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ किया गया, जंगलों को साफ किया गया और कोयला खनन का रास्ता खोला गया।
सवाल सिर्फ हसदेव का नहीं है।
सवाल यह है कि अगर देश के सबसे समृद्ध जंगल भी सुरक्षित नहीं हैं, तो प्रकृति और पर्यावरण का भविष्य किसके भरोसे है?
🌳 जंगल बचेंगे तो जीवन बचेगा। 🌍 चुनना सिर्फ एक विकल्प नहीं, ज़िम्मेदारी है।