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शादी समारोह में महिला से दुष्कर्म का प्रयास, आक्रोशित भीड़ ने आरोपी को पीटा
05/05/2026

शादी समारोह में महिला से दुष्कर्म का प्रयास, आक्रोशित भीड़ ने आरोपी को पीटा

Saharsa News: शादी समारोह में महिला से दुष्कर्म का प्रयास, आक्रोशित भीड़ ने आरोपी को पीटा |

रायगढ़ा में Vedanta Mining पर विवाद, नियमों की धज्जियां और Tribal Rights पर बड़ा सवाल रायगढ़ा: ओडिशा के रायगढ़ा और कालाह...
28/04/2026

रायगढ़ा में Vedanta Mining पर विवाद, नियमों की धज्जियां और Tribal Rights पर बड़ा सवाल

रायगढ़ा: ओडिशा के रायगढ़ा और कालाहांडी जिलों की सीमा पर स्थित सिजीमाली पर्वत श्रृंखला आज एक सुलगते हुए संघर्ष का मैदान बन चुकी है। अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और हरी-भरी वादियों के कारण ‘ओडिशा का न्यूज़ीलैंड’ कहे जाने वाले इस क्षेत्र को अब कॉर्पोरेट मुनाफे की नजर लग गई है। आरोप है कि सरकार और प्रशासन की मिलीभगत से धोखाधड़ी करके, पीढ़ियों से यहां रह रहे आदिवासियों की जमीनें छीनकर बॉक्साइट खनन के लिए वेदांता समूह (Vedanta Group) को दी जा रही हैं। इस सौदे ने न सिर्फ आदिवासियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है, बल्कि दो राज्यों की कृषि व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा पारिस्थितिक (Ecological) खतरा पैदा कर दिया है।

स्थानीय आदिवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का सबसे गंभीर आरोप यह है कि वेदांता इस परियोजना के लिए नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। लगभग 1,549 हेक्टेयर में फैले और 311 मिलियन टन बॉक्साइट रिज़र्व वाले इस प्रोजेक्ट के लिए जिस तरह से अनुमतियां ली गई हैं, वे गहरे सवालों के घेरे में हैं। प्रशासन ने दिसंबर 2023 में आठ ग्राम सभाओं से खनन के लिए सहमति मिलने का दावा किया था, लेकिन आरटीआई (RTI) से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये सभी आठ बैठकें एक ही दिन और एक ही समय पर आयोजित दिखाई गईं, जो व्यावहारिक और भौगोलिक रूप से पूरी तरह असंभव है। इसके अलावा, ग्रामीणों का आरोप है कि सहमति पत्रों में नाबालिग बच्चों, मृत लोगों और बाहरी व्यक्तियों के नाम शामिल किए गए हैं। सच्चाई सामने आने के बाद गांवों ने दोबारा बैठक कर खनन के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किया है।

नियमों की अनदेखी यहीं नहीं रुकती। फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी ने 708 हेक्टेयर वन भूमि के लिए 'स्टेज-I' (सैद्धांतिक) मंजूरी की सिफारिश जरूर की है, लेकिन अब तक 'स्टेज-II' की अंतिम और अनिवार्य मंजूरी नहीं मिली है। यहां तक कि खनन क्षेत्र तक जाने वाली सड़क निर्माण की वन अनुमति भी पेंडिंग है। पर्यावरण कानूनों के मुताबिक, अंतिम मंजूरी के बिना किसी भी तरह की खनन गतिविधियां शुरू नहीं की जा सकतीं, फिर भी जमीन पर काम शुरू करने और आदिवासियों को बेदखल करने का दबाव बनाया जा रहा है।

सत्ता और कॉर्पोरेट के इस गठजोड़ का सबसे खौफनाक रूप सिजीमाली के 18 से अधिक प्रभावित गांवों में देखने को मिल रहा है। जो प्रशासन स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए जवाबदेह है, वह अब वेदांता के लिए 'एजेंट' की तरह काम करता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें खुलेआम धमकाया जा रहा है और पुश्तैनी जमीनें छोड़ने की हिदायत दी जा रही है। संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिले अधिकारों को दरकिनार कर एक निजी कंपनी को बेजा फायदा पहुंचाया जा रहा है।

सिजीमाली में खनन का सबसे भयानक असर यहां के संवेदनशील पर्यावरण और जल स्रोतों पर पड़ेगा। सिजीमाली पहाड़ सिर्फ मिट्टी और पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि एक विशाल प्राकृतिक 'वॉटर टैंक' है। बॉक्साइट खनिज की छिद्रपूर्ण (Porous) प्रकृति के कारण ये पहाड़ बारिश के पानी को स्पंज की तरह सोख लेते हैं और फिर उसे धीरे-धीरे छोड़ते हैं। इसी प्राकृतिक स्पंज प्रणाली से 200 से अधिक बारहमासी जलधाराएं निकलती हैं, जो आगे चलकर नागावली और वंशधारा जैसी विशाल नदियों का निर्माण करती हैं। ये नदियां न केवल ओडिशा बल्कि पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के लाखों किसानों के लिए जीवनरेखा हैं। यदि यहां खनन हुआ, तो पहाड़ों का यह 'स्पंज' नष्ट हो जाएगा और ये नदियां हमेशा के लिए सूख जाएंगी।

यह पूरा मुद्दा सिर्फ पर्यावरण या अर्थव्यवस्था का नहीं, बल्कि स्थानीय कोंध, परजा आदिवासियों और डोम दलित समुदाय की आस्था का भी है। यह पहाड़ उनके आराध्य देव ‘तिज राजा’ का पवित्र निवास है। आदिवासी पीढ़ियों से प्रकृति को बिना नुकसान पहुंचाए यहां रह रहे हैं। आज चंद मुनाफे के लिए लाखों पेड़ों की बलि चढ़ाकर उन्हें शहरों में दिहाड़ी मजदूर बनने पर विवश किया जा रहा है। साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद ग्राम सभाओं की सहमति न मिलने पर वेदांता का नियामगिरि प्रोजेक्ट रोक दिया गया था। आज सिजीमाली के आदिवासी भी उसी तरह की न्यायपूर्ण जीत की उम्मीद कर रहे हैं और शासन-प्रशासन से यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या 'ओडिशा के न्यूज़ीलैंड' को उजाड़ कर ही विकास की इमारत खड़ी की जाएगी?

Sijimali Hills में Vedanta Mining पर विवाद, नियमों की धज्जियां और Tribal Rights पर बड़ा सवाल |

व्यापार और परिवार को 'नजर दोष' से बचाएगा Dr. Anjan Kumar का 'दिव्य स्प्रे'कारोबार और परिवार पर मंडराते 'नजर दोष' का अचूक...
27/04/2026

व्यापार और परिवार को 'नजर दोष' से बचाएगा Dr. Anjan Kumar का 'दिव्य स्प्रे'

कारोबार और परिवार पर मंडराते 'नजर दोष' का अचूक समाधान: डॉ. अंजन कुमार साबत का सिद्ध 'दिव्य स्प्रे'

नई दिल्ली। आज के इस आधुनिक युग में जहां एक ओर तरक्की के नए रास्ते खुल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ती प्रतिस्पर्धा, ईर्ष्या और नकारात्मक ऊर्जा लोगों के जीवन में अप्रत्याशित बाधाएं भी खड़ी कर रही हैं। अक्सर देखा जाता है कि आपका फलता-फूलता व्यापार, आपकी नई गाड़ी या आपका सुखी परिवार अचानक किसी की बुरी नजर का शिकार हो जाता है। चलते हुए कारोबार में अचानक ठहराव आना, घर में बिना कारण क्लेश रहना या परिवार के सदस्यों, विशेषकर छोटे बच्चों का बार-बार बीमार पड़ना—ये सभी लक्षण स्पष्ट रूप से 'नजर दोष' और 'बंधन दोष' की ओर इशारा करते हैं।

इस गंभीर और आम होती जा रही समस्या के निवारण के लिए, प्रख्यात वास्तु और ज्योतिष विशेषज्ञ तथा मां बगलामुखी सेवक डॉ. अंजन कुमार साबत ने एक अत्यंत प्रभावशाली और अचूक समाधान प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपनी लंबी और अत्यंत कठिन तपस्या, महासाधना और अभिमंत्रित मंत्रों की शक्ति से एक विशेष 'दिव्य तेल' (स्प्रे) तैयार किया है, जो नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकारात्मकता का संचार करने में सक्षम है।

कैसे काम करता है यह सिद्ध 'दिव्य स्प्रे'?
डॉ. अंजन कुमार साबत द्वारा निर्मित यह दिव्य तेल केवल एक सामान्य उत्पाद नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा विज्ञान और प्राचीन तंत्र-मंत्र का एक सिद्ध संगम है। इस तेल को स्प्रे के रूप में इस्तेमाल करना बेहद आसान है:

व्यापारिक स्थलों पर: अपनी दुकान, ऑफिस या फैक्ट्री में इसका नियमित छिड़काव करने से व्यापार को बांधने वाले 'बंधन दोष' तुरंत कटते हैं। यह कार्यस्थल के 'ऑरा' (Aura) को शुद्ध करता है, जिससे ग्राहकों का आकर्षण बढ़ता है और रुके हुए कार्य तेजी से पूरे होने लगते हैं।

घर और परिवार की सुरक्षा: घर के मुख्य द्वार और कमरों में इसका प्रयोग करने से एक सुरक्षा चक्र (Protective Shield) का निर्माण होता है। डॉ. साबत के अनुसार, छोटे बच्चे नकारात्मक ऊर्जा के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। इस स्प्रे के प्रभाव से बच्चों पर लगने वाली बुरी नजर का असर खत्म होता है और परिवार का स्वास्थ्य एवं सुख-शांति बनी रहती है।

दुर्लभ जड़ी-बूटियों और महासाधना का अद्भुत संगम
इस चमत्कारिक स्प्रे की प्रभावशीलता का मुख्य कारण इसके निर्माण की जटिल और पवित्र प्रक्रिया है। डॉ. अंजन कुमार साबत ने बताया कि इस दिव्य तेल को बनाने में अत्यंत दुर्लभ और महंगी जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है। केवल सामग्री ही नहीं, बल्कि इसे जागृत करने के लिए विशेष मुहूर्तों में मां बगलामुखी की कठोर महासाधनाएं और अनुष्ठान संपन्न करने पड़ते हैं। यह एक ऐसी आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसे हर समय या हर किसी के द्वारा नहीं किया जा सकता।

देशभर में भारी मांग, 'आउट ऑफ स्टॉक' रहता है उत्पाद
चूंकि इस दिव्य तेल के निर्माण में विशिष्ट समय और साधना की आवश्यकता होती है, इसलिए यह बहुत ही कम और सीमित मात्रा में तैयार हो पाता है। इसके चमत्कारिक परिणामों को देखते हुए इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे देशभर से इसकी भारी मांग आ रही है। जो लोग इसके प्रभाव को एक बार अनुभव कर लेते हैं, वे इसे नियमित रूप से मंगवाते हैं। यही कारण है कि यह दिव्य तेल बनते ही बहुत जल्द 'आउट ऑफ स्टॉक' हो जाता है।

कैसे करें प्राप्त?
डॉ. अंजन साबत ने स्पष्ट किया है कि यह एक सिद्ध और अभिमंत्रित सामग्री है, जो सीमित मात्रा में ही उपलब्ध होती है। इसलिए, जो भी व्यक्ति अपने व्यापार, घर या बच्चों को नजर दोष और बंधन दोष से सुरक्षित रखना चाहते हैं, उन्हें इस दिव्य स्प्रे की आवश्यकता के लिए पहले से संपर्क करके इसकी उपलब्धता की जानकारी अवश्य ले लेनी चाहिए। यह एक छोटा सा उपाय आपके जीवन और व्यवसाय में आ रही बड़ी से बड़ी रुकावटों को हमेशा के लिए दूर कर सकता है।

व्यापार और परिवार को 'नजर दोष' से बचाएगा Dr. Anjan Kumar का 'दिव्य स्प्रे' | The Divine Lotus |

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