30/05/2026
यह कहानी सिर्फ एक इंसान की रिहाई की नहीं है, बल्कि यह कहानी है दुनिया भर में फैले #कौमी_नेटवर्क की बेमिसाल एकजुटता की, जिसने मौत के मुंह में जा चुके एक केरल के भाई जॉन को नया जीवन दे दिया।
20 साल तक सऊदी अरब की जेल में रहने के बाद केरल का अब्दुल रहीम आखिरकार अपने घर लौट आया हैं। साल 2006 में केरल का कोझिकोड के रहने वाले अब्दुल रहीम जो उस समय महज 24 साल का था, ड्राइवर की नौकरी करने सऊदी अरब गया था। वहाँ उसे अपने मालिक के 17 वर्षीय दिव्यांग बेटे अनास की देखभाल का जिम्मा भी मिला।
अनास अपने गले में लगी एक लाइफ-सपोर्ट मशीन (Surgical Tube) के सहारे सांस लेता था। दिसंबर 2006 में कार चलाते समय अनास ने पीछे से कुछ विवाद किया। उसे शांत करने की कोशिश में रहीम का हाथ गलती से अनास के गले में लगी उस मशीन से टकरा गया और वह निकल गई। कुछ ही देर में अनास बेहोश हो गया और उसकी मौत हो गई। ऐसा अब्दुल का कहना था।
सऊदी कानून के तहत रहीम पर हत्या का मामला चला। साल 2011 में सऊदी की एक अदालत ने उसे फांसी सुनाई। अपीलीय अदालतों ने भी इस सजा को बरकरार रखा, जिससे रहीम की जान पर बन आई।
सऊदी अरब के कानून में एक प्रावधान है कि अगर पीड़ित का परिवार 'ब्लड मनी' यानी मुआवजा ya दियत लेकर माफ करने को तैयार हो जाए, तो मौत की सजा टल सकती है। सालों की कोशिशों के बाद, पीड़ित परिवार 34 करोड़ रुपये यंक मिलियन सऊदी रियाल लेकर रहीम को माफ करने पर सहमत हुआ।
इतनी बड़ी रकम एक आम परिवार के लिए नामुमकिन थी। इसके बाद इतिहास का सबसे बड़ा क्राउडफंडिंग अभियान शुरू हुआ। पैसे जुटाने के लिए एक खास मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया। केरल के नेताओं, प्रवासियों, आम नागरिकों और दुनिया भर के मलयाली और मोम्बीज समुदाय ने मिलकर महज कुछ दिनों में ₹34 करोड़ की भारी-भरकम राशि जुटा ली।
अप्रैल 2024 में यह रकम सऊदी अदालत में जमा कराई गई, जिसके बाद उसकी फांसी की सजा आधिकारिक रूप से रद्द कर दी गई। फांसी की सजा टलने के बाद भी रहीम को अपनी निर्धारित जेल की अवधि पूरी करनी थी। अरबी कैलेंडर (हिजरी) की गणना के अनुसार, उनकी 20 साल की कैद की सजा 20 मई 2026 को पूरी हुई। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसे जेल से रिहा कर दिया गया।
गुरुवार को जब अब्दुल रहीम केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट पर उतरा तो 20 साल बाद उन्होंने अपनी बूढ़ी मां फातिमा और अपने परिवार को गले लगाया। कौमी नेटवर्क की मेहनत रंग लाई और अब्दुल अब आजाद है और मजे में है।
ऐसी घटनाएं दिखाती है कि अगर आपकी कौम आपके साथ हो तो आप अपराध करके (या बिना अपराध किसी मुद्दे में फंसने के बाद) भी बच सकते है।
#लक्ष्य_केंद्रित_कौम
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