Rajkamal Urdu

Rajkamal Urdu दो ज़ुबानें एक रास्ता

ہمیں آپ کو یہ بتاتے ہوئے خوشی ہو رہی ہے کہ اردو رسم الخط میں کتابیں شائع کرنے کا راجکمل پرکاشن کا سلسلہ جلد ہی نئے مقام ...
03/03/2026

ہمیں آپ کو یہ بتاتے ہوئے خوشی ہو رہی ہے کہ اردو رسم الخط میں کتابیں شائع کرنے کا راجکمل پرکاشن کا سلسلہ جلد ہی نئے مقام پر ہوگا۔ ادارہ اس پر مسلسل کام کر رہا ہے۔ راجکمل اردو ابتدائی مرحلہ طے کرتے ہوئے قریب دس کتابوں کے ساتھ آپ کے سامنے ہوگا۔ ہم اس ادارے سے نہ صرف اردو کے مشہور و معروف لکھنے والوں کی معیاری کتابیں شائع کریں گے بلکہ ہندوستان میں نصاب کی ضرورت سے تعلق رکھنے والی اہم ادبی کتابوں کے ساتھ ساتھ غیر مطبوعہ ناول اور عالمی اور ہندوستانی زبانوں کے ادب کے تراجم بھی شائع کریں گے۔ یہ بات ہمارے لیے خوشی اور فخر کی ہے کہ اردو کے اہم ادیبوں اور مترجمین نے ہمیں اپنی کتابوں کی اشاعت کی اجازت دی ہے۔ ان ادیبوں اور مترجمین میں ذکیہ مشہدی، صدیق عالم، ارجمند آرا، اختر رضا سلیمی، نینا عادل، عاصم بٹ، اظہر حسین، اقبال خورشید اور ایسے ہی کئی نام شامل ہیں۔ ہم ان کی کتابوں کو جلد ہی خوبصورت شکل میں مناسب قیمتوں کے ساتھ دستیاب کرا سکیں گے۔ راجکمل اردو کے اجرا کے تعلق سے بھی جلد آپ کو اطلاع دی جائے گی۔ اس کے علاوہ اردو کی مشہور معیاری کتابیں بھی نئی سجاوٹ کے ساتھ منظرِ عام پر لائی جائیں گی۔ شکریہ

हमें आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि उर्दू रस्मुल-ख़त में किताबें शाया करने का राजकमल प्रकाशन का सिलसिला जल्द ही नए मक़ाम पर होगा. इदारा इस पर मुसलसल काम कर रहा है। राजकमल उर्दू इब्तिदाई मरहला तय करते हुए क़रीब दस किताबों के साथ आपके सामने होगा। हम इस इदारे से न सिर्फ उर्दू के मशहूर-ओ-मारूफ़ लेखकों की मेयारी किताबें शाया करेंगे बल्कि हिंदुस्तान में पाठ्यक्रम की ज़रूरत से तअल्लुक़ रखने वाली अहम अदबी किताबों के साथ-साथ अप्रकाशित उपन्यास और आलमी और हिंदुस्तानी ज़बानों के अदब के तर्जुमे भी शाया करेंगे। यह बात हमारे लिए ख़ुशी और फ़ख़्र की है कि उर्दू के अहम अदीबों और अनुवादकों ने हमें अपनी किताबों के प्रकाशन की इजाज़त दी है. इन अदीबों और अनुवादकों में ज़किया मशहदी, सिद्दीक़ आलम, अरजुमंद आरा, अख़्तर रज़ा सलीमी, नैना आदिल, आसिम बट, अज़हर हुसैन, इक़बाल ख़ुर्शीद और ऐसे ही कई नाम शामिल हैं। हम इनकी किताबों को जल्द ही ख़ूबसूरत शक्ल में मुनासिब क़ीमतों के साथ दस्तयाब करा सकेंगे। राजकमल उर्दू के इजरा के तअल्लुक़ से भी जल्द आपको इत्तेला दी जाएगी। इसके अलावा उर्दू की मशहूर मेयारी किताबें भी नई साज-सज्जा के साथ मंज़र-ए-आम पर लाई जाएँगी। शुक्रिया।

16/01/2026

राजकमल उर्दू की सिलसिला-ए-शायरी सीरीज़

राजकमल से मुनसलिक होने के बाद ये उन छह किताबों का पहला सेट है जो कि हमारी शुरू की हुई ‘सिलसिला-ए-शायरी सीरीज़’ की शुरूआती किताबें हैं। आगे इन में और इज़ाफ़ा होगा। इसके ज़रिये हमारी कोशिश है कि उर्दू के ऐसे अहम शायरों का कलाम आप तक पहुँचाया जाए, जो कि अपने वक़्त की मोतबर आवाज़ बन चुके हैं। अगर आप किताबों के मेले में आ रहे हैं और शायरी को पसंद करते हों तो इन्हें ज़रूर ख़रीदें। उसकी वजहें ये हैं कि अव्वल तो इनके सर-वरक़ बेहद ख़ूबसूरत हैं, अपने पास महफ़ूज़ कर लेने लायक़। दूसरे इस सीरीज़ के इब्तिदाई सेट में फ़हमीदा रियाज़ और ज़ेहरा निगाह जैसी दो शायर हैं, जिनको पढ़े बग़ैर, जिनकी आवाज़ को समझे और जाने बग़ैर आप उर्दू अदब में औरत के समाज के उसूलों और सियासत की चालों पर उठाए जाने वाले सवाल से ठीक तौर पर आशना नहीं हो सकते।ये इंटरनेट पर पढ़ी जाने वाली शायरी नहीं है, इसे तो वरक़ दर वरक़ आहिस्ता आहिस्ता पढ़ना ज़रूरी है, ताकि किताब अपने रम्ज़ आपके भीतर उतारती चली जाए।

विश्व पुस्तक मेले में यहाँ मिलेंगे हम–
स्टॉल P-01 हॉल 2-3
स्टॉल D-13 हॉल 05
भारत मंडपम, नई दिल्ली
10 से 18 जनवरी, 2026

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13/01/2026

पाठसुख में मुईद रशीदी से सुनिए अहमद फ़राज़ की किताब ‘दर्द आशोब’ से कुछ शेर

विश्व पुस्तक मेले में यहाँ मिलेंगे हम–
स्टॉल P-01 हॉल 2-3
भारत मंडपम, नई दिल्ली
10 से 18 जनवरी, 2026

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12/01/2026

पाठसुख में फैज़ान अंजुम से सुनिए फ़हमीदा रियाज़ की किताब “पत्थर की ज़बान” से कुछ शेर

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08/01/2026

इस बार विश्व पुस्तक मेले में एंट्री है फ्री 📚🎉

यहाँ मिलेंगे हम—
स्टॉल P-01 हॉल 2-3
स्टॉल D-13 हॉल 05
भारत मंडपम, नई ​दिल्ली
10 से 18 जनवरी, 2026

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07/01/2026

विश्व पुस्तक मेला-2026 में राजकमल उर्दू की ख़ास किताबें

विश्व पुस्तक मेले में यहाँ मिलेंगे हम—
स्टॉल P-01 हॉल 2-3
स्टॉल D-13 हॉल 05
भारत मंडपम, नई ​दिल्ली
10 से 18 जनवरी, 2026

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 #मेलेकीकिताबअहमद फ़राज़ का आदमजी लिटरेरी अवार्ड से सम्मानित शेरी मजमूआ 'दर्द आशोब' अहमद फ़राज़ की शायरी का वो मजमूआ जिसने...
06/01/2026

#मेलेकीकिताब

अहमद फ़राज़ का आदमजी लिटरेरी अवार्ड से सम्मानित शेरी मजमूआ 'दर्द आशोब'

अहमद फ़राज़ की शायरी का वो मजमूआ जिसने अदब की दुनिया को चौंकाया और फ़राज़ को पहचान दिलाई।

यहाँ मिलेंगे हम—
हॉल 2-3 स्टॉल नम्बर P-01
भारत मंडपम, नई ​दिल्ली
10 से 18 जनवरी, 2026

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06/01/2026
28/10/2025

किताब उत्सव भोपाल में आयोजित मुशायरे में ख़ुशबू श्रीवास्तव

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मंटो और दूसरों में सबसे बड़ा फ़र्क़ यही था कि मंटो कड़वी सच्चाई को मीठे फ़रेबों के कैप्सूल में बंद नहीं करता।—बलराज मेनरा...
27/10/2025

मंटो और दूसरों में सबसे बड़ा फ़र्क़ यही था कि मंटो कड़वी सच्चाई को मीठे फ़रेबों के कैप्सूल में बंद नहीं करता।

—बलराज मेनरा

‘मंटो दस्तावेज़’ ऑनलाइन ऑर्डर करने के लिए हमारी वेबसाइट
www.rajkamalprakashan.com
पर जाएं या +91 93113 97733 पर हमें व्हाट्सएप करें।

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बाज़ार, बहुत रौशन और चमक-दमक भरा बाज़ार। हुस्न इस बाज़ार का क्या बयान करूँ। जवान हसीनाएँ, ख़ूबसूरत, हसीन और सुन्दर, हर तर...
24/10/2025

बाज़ार, बहुत रौशन और चमक-दमक भरा बाज़ार। हुस्न इस बाज़ार का क्या बयान करूँ। जवान हसीनाएँ, ख़ूबसूरत, हसीन और सुन्दर, हर तरफ़ ऐंठती फिरती हैं। चादरों में से जिनके हुस्न की रौशनी फूटती है ऐसी ख़ूबसूरत औरतें, पालकियों और डोलियों के झरोखों से लगी हुई बड़ी-बड़ी काली, शरबती, जामुनी आँखें, कभी-कभी झलक मार देती हैं तो दिल-दिमाग़ में ठंडक दौड़ जाती है।

क़ब्ज़े ज़माँ • शम्सूर्रहमान फ़ारूक़ी

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