Himalaya Kii Baat

Himalaya Kii Baat Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Himalaya Kii Baat, Magazine, Delhi.

हिमालय क्षेत्र के समाचारों, विचारों, साहित्य, कला, फिल्म और संस्कृति को मंच प्रदान करने का एक सार्थक प्रयास

A meaningful effort to provide a platform for news, ideas, literature, art, film, and culture from the Himalayan region.

02/09/2026

बालेन शाह सतर्क रहें, कहीं आपदा कुर्सी न छीन ले...

दुनिया के बहुत से ऐसे देश हैं,अतीत में जहाँ के प्रधानमंत्रियों को आपदा के चलते कुर्सियां गंवानी पड़ी। भारत के उत्तराखण्ड और ओडिशा जैसे राज्यों में भी मुख्यमंत्रियों की कुर्सियां गई। बालेन शाह सुलझे हुए राजनेता हैं। यदि वे थोड़ा सा सतर्क रहें, तो आपदा राहत और पुनर्वास में घोटाले नहीं हो पाएंगे। विस्तार से पढ़ें...
https://khabarindiatv.in/nepal-disaster-balen-shah-should-stay-alert/

28/08/2026

हिमालय में अभी और डराएंगी आपदाएं

नेपाल की बाढ़ चेतावनी दे गई है कि हिमालयी क्षेत्रों में विकास के नाम पर अनावश्यक छेड़छाड़ की गई, तो भविष्य में और त्रासदियां झेलने को विवश होना पड़ेगा।
https://khabarindiatv.in/natural-disaster-devastation-in-nepal-serves-as-a-warning/

जसपाल राणा का असमय जाना मशहूर अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का असमय जाना भारत के लिए बहुत बड़ी क्षति है। राण...
13/06/2026

जसपाल राणा का असमय जाना

मशहूर अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का असमय जाना भारत के लिए बहुत बड़ी क्षति है। राणा जी से मेरा कोई खास परिचय तो नहीं था, लेकिन मुलाकातें अक्सर होती रही। उनसे पहली मुलाकात 1994 के करीब तब हुई जब मैं दैनिक जागरण नई दिल्ली में हुआ करता था। एक शाम मैं हर दिन की तरह थका-मांदा ऑफिस पहुंचा। वरिष्ठ खेल पत्रकार राजेन्द्र सजवान जो कि उन दिनों देश के तमाम अखबारों में छपते थे और शाम को दैनिक जागरण में आया करते थे, उन्होंने मुझसे पूछा 'दाता आज कख बिटिन छै तू औणु?', इस पर मैंने भी कहा कि 'बस, पूछा न भैजि, भौत जादा भटकि तैं छौं औणू, पता नि किलै भटकणा छां हम इथा? अपनी भाषा में हो रहे इस वार्तालाप को उस वक्त वहां राजेन्द्र भाई के पास बैठा एक नौजवान बड़ी तल्लीनता से सुन रहा था और उसके चेहरे पर मुस्कान थी।

मैं समझ गया कि यह युवा अपने यहां का है और हमारे वार्तालाप पर प्रसन्न है। मैंने उस युवा की पीठ पर स्नेहवश हाथ रखकर पूछा 'यु भुला कु च?' इस पर राजेन्द्र भाई ने कहा 'दाता नि छै तु पछाणु, जसपाल राणा च वु।' तब तक मैंने जसपाल राणा के बारे में पढ़ा एवं सुना ही था, लेकिन अब पहली मुलाकात भी हो गई। यह मुलाकात मुझे बहुत अच्छी लगी।

इसके बाद भी अक्सर उनसे कार्यक्रमों में मुलाकातें हो जाया करती थी। आज उनके निधन का समाचार मिला तो बहुत दुख हुआ। दुख इस बात का है कि वे महज 49 साल की उम्र में ही देश-दुनिया को अलविदा कह गए। ईश्वर ने मशहूर निशानेबाज जसपाल राणा को उम्र कम दी, लेकिन फिर भी शुक्र है कि ऊंचाइयां काफी अच्छी दी।

जसपाल भारत के ऐसे शूटर थे जिन्होंने एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में देश के लिए कई मेडल जीते और विश्व में विशेष पहचान बनाई। उन्होंने अपने शानदार करियर के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कई गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीते।

एक कोच के तौर पर भी उन्होंने देश के लिए अहम भूमिका निभाई। ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर की सफलता में भी उनका अहम योगदान रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, जसपाल म्यूनिख में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप के बाद जर्मनी से लौट रहे थे और इस दौरान उनकी अचानक से तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका इलाज चल रहा था, लेकिन काल के क्रूर हाथों ने उन्हें समय से पहले ही देश से छीन लिया। जसपाल राणा को सादर श्रद्धा सुमन।

~ दाताराम चमोली

जाना जनता के जनरल कासर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पी. एन. भगवती को जनता का न्यायाधीश कहा जाता था। हालांकि जनता के...
19/05/2026

जाना जनता के जनरल का

सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पी. एन. भगवती को जनता का न्यायाधीश कहा जाता था। हालांकि जनता के न्यायाधीश तो सभी हैं, लेकिन न्यायमूर्ति भगवती को यह सम्मान दिये जाने के खास मायने हैं। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय को आम जनता के करीब लाने का श्रेय जाता है। ठीक इसी तरह सभी जनरल जनता की सेवा करते हैं, लेकिन खण्डूड़ी इसलिए खास सम्मान के हकदार हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद वे जनसेवा में जी-जीन से जुटे रहे और उन्होंने आम लोगों का हमेशा ध्यान रखा।

खंडूड़ी जी का एक शानदार राजनीतिक जीवन रहा। उन्होंने कई बार गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक और प्रखर सांसद की भूमिका में रहे।

केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनकी यादगार भूमिका रहेगी। वे एक ऐसे कुशल शिल्पी थे जिन्होंने देश में न सिर्फ सड़कों और राजमार्गों का जाल बिछाया, बल्कि एडीए ने उनकी स्वर्णिम चतुर्भुज योजना को अपने घोषणा पत्र का हिस्सा भी बनाया था।

केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने उत्तराखंड में स्वास्थ्य, शिक्षा आदि उल्लेखनीय कार्यों पर विशेष फोकस रखा। केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं एम्स को बनाने का श्रेय उन्हें ही जाता है। वे चाहते थे कि राज्य में डॉक्टरों की कमी न रहे, इसके लिए उन्होंने सरकारी खर्च पर डॉक्टर भी तैयार किये। यह अलग बात है कि उन डॉक्टरों में से कई ने पहाड़ में सेवाएं नहीं दी। पहाड़ों पर डॉक्टर कैसे पहुंचें, वहां शिक्षक कैसे टिके रहें, वहाँ पलायन कैसे रुके, जैसे तमाम मुद्दों पर मेरी अक्सर उनसे बातें होती रहती थी। वे खुलकर बातें करते थे और गंभीरता से दूसरे को सुनते भी थे, लेकिन इसके लिए समय निर्धारित करना पड़ता था।

वे समय के बड़े पाबंद थे, बिना समय लिये कभी मिलने जाते थे, तो बड़ी आत्मीयता से कहते थे कि आज तो लंबी बातचीत नहीं होगी, जो कहना हो जल्दी कह डालिए। राज्य आंदोलन के दौर में मेरी उनसे बराबर मुलाकातें होती रहती थी। वे बड़े कॉपरेटिव इंसान थे। एक बार मुझे दैनिक जागरण के लिए रक्षा विशेषज्ञों से महत्वपूर्ण बात करनी थी। मेरी समस्या यह थी कि किससे बात करूँ। शाम को कॉपी फाइल करनी जरूरी थी। काफी सोचकर मैंने उन्हें फोन लगाया, तो उन्होंने खुद भी विषय पर मुझसे बात की और विशेषज्ञों के फोन नंबर भी उपलब्ध करा दिये। इससे मेरा काम बहुत ही आसान हो गया।

दरअसल, खंडूड़ी जी को जनसेवा के संस्कार विरासत में मिले। वे एक ऐसे परिवार से संबंध रखते थे, जिस परिवार ने जनहित में उदारता से दान दिया। उनके स्वर्गीय दादा पंडित घनानंद जी ने मसूरी डिग्री कॉलेज के लिए भूमि दान दी थी। खंडूड़ी जी को न सिर्फ पिता के परिवार से बल्कि माता के परिवार यानी ननिहाल से भी समाज सेवा के संस्कार मिले। उनके मामा स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा एक लोकप्रिय नेता थे। बहुगुणा जी की तरह खंडूड़ी जी भी जनहित की योजनाओं के लिए हमेशा प्रयासरत रहे। खंडूड़ी जी का जाना समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति है। उन्हें सादर श्रद्धा सुमन।

DATA RAM CHAMOLI

बालेन शाह जल्दबाजी में फैसले लेने की भूल न करें, लंबी पारी खेलने की सोचें...नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को चाहिए कि ...
23/04/2026

बालेन शाह जल्दबाजी में फैसले लेने की भूल न करें, लंबी पारी खेलने की सोचें...

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को चाहिए कि फैसले लेने से पहले जमीनी हकीकतों से वाकिफ हो जाएं। यदि वे100 रुपए के सामान के बजाय एक लाख के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाते तो बात कुछ सझ आती। विस्तार से पढें-

New Delhi: नेपाल में जनता का आक्रोश एक बार फिर आग उगल रहा है। नए प्रधानमंत्री बालेन शाह को सोचना होगा कि जिस जनता ने वर्षो.....

Address

Delhi

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Himalaya Kii Baat posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share