19/05/2026
जाना जनता के जनरल का
सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पी. एन. भगवती को जनता का न्यायाधीश कहा जाता था। हालांकि जनता के न्यायाधीश तो सभी हैं, लेकिन न्यायमूर्ति भगवती को यह सम्मान दिये जाने के खास मायने हैं। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय को आम जनता के करीब लाने का श्रेय जाता है। ठीक इसी तरह सभी जनरल जनता की सेवा करते हैं, लेकिन खण्डूड़ी इसलिए खास सम्मान के हकदार हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद वे जनसेवा में जी-जीन से जुटे रहे और उन्होंने आम लोगों का हमेशा ध्यान रखा।
खंडूड़ी जी का एक शानदार राजनीतिक जीवन रहा। उन्होंने कई बार गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक और प्रखर सांसद की भूमिका में रहे।
केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनकी यादगार भूमिका रहेगी। वे एक ऐसे कुशल शिल्पी थे जिन्होंने देश में न सिर्फ सड़कों और राजमार्गों का जाल बिछाया, बल्कि एडीए ने उनकी स्वर्णिम चतुर्भुज योजना को अपने घोषणा पत्र का हिस्सा भी बनाया था।
केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने उत्तराखंड में स्वास्थ्य, शिक्षा आदि उल्लेखनीय कार्यों पर विशेष फोकस रखा। केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं एम्स को बनाने का श्रेय उन्हें ही जाता है। वे चाहते थे कि राज्य में डॉक्टरों की कमी न रहे, इसके लिए उन्होंने सरकारी खर्च पर डॉक्टर भी तैयार किये। यह अलग बात है कि उन डॉक्टरों में से कई ने पहाड़ में सेवाएं नहीं दी। पहाड़ों पर डॉक्टर कैसे पहुंचें, वहां शिक्षक कैसे टिके रहें, वहाँ पलायन कैसे रुके, जैसे तमाम मुद्दों पर मेरी अक्सर उनसे बातें होती रहती थी। वे खुलकर बातें करते थे और गंभीरता से दूसरे को सुनते भी थे, लेकिन इसके लिए समय निर्धारित करना पड़ता था।
वे समय के बड़े पाबंद थे, बिना समय लिये कभी मिलने जाते थे, तो बड़ी आत्मीयता से कहते थे कि आज तो लंबी बातचीत नहीं होगी, जो कहना हो जल्दी कह डालिए। राज्य आंदोलन के दौर में मेरी उनसे बराबर मुलाकातें होती रहती थी। वे बड़े कॉपरेटिव इंसान थे। एक बार मुझे दैनिक जागरण के लिए रक्षा विशेषज्ञों से महत्वपूर्ण बात करनी थी। मेरी समस्या यह थी कि किससे बात करूँ। शाम को कॉपी फाइल करनी जरूरी थी। काफी सोचकर मैंने उन्हें फोन लगाया, तो उन्होंने खुद भी विषय पर मुझसे बात की और विशेषज्ञों के फोन नंबर भी उपलब्ध करा दिये। इससे मेरा काम बहुत ही आसान हो गया।
दरअसल, खंडूड़ी जी को जनसेवा के संस्कार विरासत में मिले। वे एक ऐसे परिवार से संबंध रखते थे, जिस परिवार ने जनहित में उदारता से दान दिया। उनके स्वर्गीय दादा पंडित घनानंद जी ने मसूरी डिग्री कॉलेज के लिए भूमि दान दी थी। खंडूड़ी जी को न सिर्फ पिता के परिवार से बल्कि माता के परिवार यानी ननिहाल से भी समाज सेवा के संस्कार मिले। उनके मामा स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा एक लोकप्रिय नेता थे। बहुगुणा जी की तरह खंडूड़ी जी भी जनहित की योजनाओं के लिए हमेशा प्रयासरत रहे। खंडूड़ी जी का जाना समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति है। उन्हें सादर श्रद्धा सुमन।
DATA RAM CHAMOLI