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जिम कॉर्बेट पार्क का ढिकाला जोन पर्यटकों के लिए खुलारामनगर। जिमकॉर्बेट पार्कका ढिकाला जोन पर्यटकों के लिए खोल दिया गया ह...
15/11/2025

जिम कॉर्बेट पार्क का ढिकाला जोन पर्यटकों के लिए खुला

रामनगर। जिमकॉर्बेट पार्कका ढिकाला जोन पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। यहाँ रामगंगा नदी के किनारे बसे जंगल, हाथियों के बड़े झुंड, मगरमच्छ, घड़ियाल देखे जा सकतेहैं। यहां 500 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां रहती हैं। इसी कोर एरिया मेंलोग रात गुजारते हैं। यही कारण है कि ढिकाला को कॉर्बेट का हार्ट ऑफ द जंगल कहाजाता है। ढिकाला के खुलने से पर्यटक बहुत उत्साहित हैं।

पर्यटकों के उत्साह का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि पूर्व में एडवांस ऑनलाइन बुकिंग करा चुके पर्यटक शनिवार15नवंबर की सुबह पांच बजे अंधेरे में ही ढिकाला के धनगढ़ी गेट पर पहुंच गए थे।पर्यटक ढिकाला जाने के लिए बेसब्री से गेट पर कैंटर आने का इंतजार कर रहे थे। कईलोगों के लिए ढिकाला नया था तो कुछ पहले भी आ चुके थे। जैसे ही कैंटर गेट परपहुंचे सभी पर्यटक ढिकाला भ्रमण के लिए कैंटर में बैठ गए। पूना, नोयडा, बांबे, दिल्ली आदि जगहोंके पर्यटक यहां पहुंचे हैं।

गुलदार के आतंक से बेहद डरे हुए हैं लोगकोटद्वार। राज्य में जंगली जीवों का आतंक थम नहीं पा रहा है। कहीं भालू लोगों की जाने...
15/11/2025

गुलदार के आतंक से बेहद डरे हुए हैं लोग

कोटद्वार। राज्य में जंगली जीवों का आतंक थम नहीं पा रहा है। कहीं भालू लोगों की जानें ले रहा है, तो कहीं गुलदार। इस बीच 13 नवंबर को पौड़ी गढ़वाल के अंतर्गत पोखड़ा ब्लॉक के बगड़ी गांव में गुलदार रानी देवी को मौत के घाट उतार चुका है। अब इसी ब्लॉक के घंडियाल गांव में गुलदार ने एक महिला पर हमला कर दिया। हमले में महिला बुरी तरह घायल हो गई। इसके बाद से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

बताया जाता है कि प्रभा देवी गांव की अन्य महिलाओं के साथ घास काट रही थी। इसी दौरान अचानक गुलदार ने प्रभा देवी पर हमला कर दिया। हमले में वह बुरी तरह से घायल हो गई। इसी बीच महिलाओं ने शोर मचाया तो गुलदार भाग निकला। इससे पूर्व बगड़ी गांव में 13 नवंबर को गुलदार रानी देवी को मौत के घाट उतार चुका है।

छोटी दीपावली पर हर गाँव -घर में हुआ गो पूजनदेहरादून। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में दीपावली पर गो पूजन का विशेष महत्व है...
20/10/2025

छोटी दीपावली पर हर गाँव -घर में हुआ गो पूजन

देहरादून। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में दीपावली पर गो पूजन का विशेष महत्व है। यहाँ गाय को समृद्धि का प्रतीक मानते हुए लोग गो वंश पूजन करते हैं, अपनी और संपूर्ण जगत की समृद्धि की कामना करते हैं। रविवार 19 अक्टूबर को छोटी दिवाली के अवसर पर हर गाँव -घर में गो पूजन किया गया। लोगों ने समृद्धि की कामना की।

वास्तव में पहाड़ों में दीपावली का पर्व न केवल दीयों की रोशनी और पटाखों की धूम से तक सीमित है, बल्कि गो पूजन की अनूठी परंपरा प्रकाश पर्व को विशेष महत्व प्रदान करती है। गो पूजन धार्मिक आस्थाओं और पर्यावरण संरक्षण के साथ ही आर्थिकी से भी जुड़ा हुआ है। यह अनमोल परंपरा पर्वतीय समाज में सतत चली आ रही है।

खास है उत्तराखंड की दीपावलीउत्तराखंड में प्रकाश पर्व दीपावली का उल्लास कोई एक दिन का नहीं , बल्कि कई दिनों का होता है। ए...
19/10/2025

खास है उत्तराखंड की दीपावली

उत्तराखंड में प्रकाश पर्व दीपावली का उल्लास कोई एक दिन का नहीं , बल्कि कई दिनों का होता है। एक बहुत पुराने गढ़वाली लोक गीत "बर ऐन बगवाली गाजे सिंह, सोल ऐन सराध गाजे सिंह", से इस बात का पता चलता है कि यहाँ 12 दिवालियाँ मनाई जाती हैं। दिवालियों के अवसर पर कई जगहों पर भव्य मेलों का आयोजन भी होता है। दिवाली के दिन लोग भैलो खेलते हैं। भैलो देवदार या चीड़ की लकड़ी की मशाल होती है, जिसे जलाकर लोग गाँव के किसी चौक या खेत में इकट्ठा होते हैं और अपने चारों ओर घुमाते हैं। रात के समय गाँव-गाँव में छोल-दमाऊँ बजते हैं। लोकगीत और सामूहिक नृत्य चलते हैं। उससे पहले सुबह के समय लोगअपने मवेशियों को पूजते हैं और उन्हें अन्न का भोग लगाया जाता है। घरों में पारंपरिक पकवान बनते हैं। कार्तिक अमावस्या राज्य के सभी भागों में एक समान मनाई जाती है, लेकिन इसके बाद 11वें दिन पर्वतीय क्षेत्र में इगास बग्वाल मनाने की परंपरा चली आ रही है। यह दिवाली काफी धूमधाम से मनाई जाती है।

इगास बग्वाल उत्तराखंड की खास पहचान है। प्रवासी उत्तराखंडियों भी इसे देश-विदेश में मनाते हैं। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान राम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे थे, तो पहाड़ों तक इसकी खबर 11 दिन बाद पहुंची थी। इसी कारण यहाँ यह दीपावली कार्तिक अमावस्या के बाद 11वें दिन मनाने की परंपरा चली आ रही है।

मंगसीर बग्वाल आमावस्या के एक माह बाद मनाई जाने वाली दिवाली है। यह ऊँचे पहाड़ी इलाकों जैसे चंपावत, बागेश्वर, टिहरी और जौनसार बावर में मनाई जाती है। इसे मंगसीर बग्वाल या बूढ़ी दीपावली भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि गढ़वाल नरेश महिपत शाह के शासनकाल में तिब्बती लुटेरे गढ़वाल की सीमाओं में घुसकर लूटपाट करते थे, तो तब राजा ने माधो सिह भंडारी और लोदी रिखोला के नेतृत्व में चमोली के पैनखंडा और उत्तरकाशी के टकनौर क्षेत्र से गरतांग गली नेलांग के रास्ते सेना भेजी। भोट प्रान्त दावाघाट में तिब्बती आक्रमणकारियों को पराजित करने के बाद विजयी होकर जब वीर माधो सिंह अपने सैनिकों के साथ वापस टिहरी रियासत में पहुंचे, तो तत्कालीन समय से ही विजयोत्सव के रूप में टिहरी रियासत (संपूर्ण जौनपुर, रवांईं, सकलाना, धौंतरी, टकनौर, बाड़ाहाट, बाड़ागड्डी, धनारी, नगर क्षेत्र) में मंगसीर बग्वाल मनाने की परंपरा चली आई आ रही है। एक मान्यता यह भी है कि भगवान राम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने की खबर ऊँचे पहाड़ों तक एक माह बाद पहुंची थी। जो भी हो दीपावली के ये विविध रूप उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की अनोखी झलक हैं। (हिमालय की बात)

बदरी धाम में यम की पूजा से टल जाती है अल्प मृत्यु जोशीमठ। बदरीनाथ धाम में धनतेरस के अवसर पर  18 अक्टूबर को मृत्यु के देव...
19/10/2025

बदरी धाम में यम की पूजा से टल जाती है अल्प मृत्यु

जोशीमठ। बदरीनाथ धाम में धनतेरस के अवसर पर 18 अक्टूबर को मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की गई। सांय छ: बजे यमराज जी की पूजा के साथ ही बदरीनाथ मंदिर के सिंहद्वार पर दक्षिण दिशा में चतुर्मुख दिया जलाया गया।
देश के चारों धामों में प्रमुख भू-बैकुंठ बदरीनाथ धाम में दीपावली पूजा की विशेष परंपरा है। यहाँ पर नारायण के साथ धन के राजा कुबेर, माता लक्ष्मी ,गरुड और उद्धव जी विराजमान हैं। नारायण के साथ माँ लक्ष्मी, कुबेर सहित अन्य देवताओं की पूजाएं निरंतर चलती हैं, लेकिन दीपावली से पूर्व धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा-अर्चना के बाद लक्ष्मी व कुबेर जी की पूजा होती है, ताकि लोगों का मुत्यु योग टल सके तथा दीपोत्सव या दीपावली में सुख शांति रहे। माना जाता है कि यम की पूजा-अर्चना से अल्प मृत्यु का योग टल जाता है।

उल्लुओं पर रहेगा विशेष पहरा देहरादून। दीपावली पर  कुछ रूढ़िवादी लोग तंत्र-मंत्र और टोने-टोटकों के लिए उल्लुओं का शिकार क...
19/10/2025

उल्लुओं पर रहेगा विशेष पहरा

देहरादून। दीपावली पर कुछ रूढ़िवादी लोग तंत्र-मंत्र और टोने-टोटकों के लिए उल्लुओं का शिकार करते हैं। देश के कुछ राज्यों और उत्तराखंड से भी इस प्रकार की खबरें आती रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग सतर्क हो गया है। 19 अक्टूबर को देहरादून जू में उल्लुओं पर विशेष पहरा रहेगा। इसके लिए रातभर जू के आस-पास चार वनकर्मी जगे रहेंगे, जबकि जिलेभर में रात में वनकर्मी गश्त करेंगे।

बताया जाता है कि मसूरी-देहरादून रोड़ स्थित मालसी जू में तीन अलग-अलग प्रजाति के कुल 10 उल्लू हैं। ये उल्लू वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित हैं। वन विभाग ने लोगों से इसके शिकार के बारे में अंधविश्वास छोड़ने की अपील की है। विभाग उल्लू की सुरक्षा के लिए सक्रिय है।
वन विभाग ने वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जू और जंगल के आस-पास पटाखे जलाने पर भी रोक लगाई है। डिप्टी रेंजर विनोद लिंगवाल के मुताबिक जू के 100 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर पूरी तरह से रोक है। पटाखों की तेज आवाज और रोशनी वन्यजीवों में भय और संकट पैदा करती है। पक्षी डर के मारे अपने घोंसलों से उड़ जाते हैं और अंधेरे में भटक सकते हैं, जबकि अन्य वन्यजीवों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। चिड़ियाघर प्रशासन ने आसपास रह रहे लोगों से अपील की है कि वे ऊपर की तरफ जाने वाले पटाखे यानी की रॉकेट और आकाशदीप को न जलाएं। इससे आग लगने का खतरा बना रहता है।उल्लुओं पर रहेगा विशेष पहरा

बिहार में महागठबंधन के लिए अच्छी उम्मीदें देख रहे हैं हरीश रावतदेहरादून। बिहार में महागठबंधन में फूट की खबरें सुर्खियों ...
19/10/2025

बिहार में महागठबंधन के लिए अच्छी उम्मीदें देख रहे हैं हरीश रावत

देहरादून। बिहार में महागठबंधन में फूट की खबरें सुर्खियों में हैं। सीट बंटवारे को लेकर चली लंबी खींचतान के बावजूद महागठबंधन अपने घटक दलों को एकजुट नहीं रख पाया। ऐसे में प्रशांत किशोर कह रहे हैं कि मुख्य मुकाबला एनडीए और उनकी पार्टी के बीच है। उन्हें महागठबंधन की फूट में अपनी संभावनाएं मजबूत लगती हैं, लेकिन उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत आश्वस्त हैं कि बिहार में महागठबंधन बहुत मजबूत है। कुछ जगहों पर उम्मीदवारों को लेकर जो असमंजस है, उसे दूर कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनावी रणनीति के तहत कुछ जगहों पर गठबंधन के एक से ज्यादा उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन वोट गठबंधन के गढ़ में ही जाएगा।

हरीश रावत कहते हैं कि बिहार में हालात उतने खराब नहीं हैं, जितना एनडीए बता रहा है। अब देखना है कि बिहार में महागठबंधन के लिए जो अच्छी उम्मीदें रावत देख रहे हैं, वे किस हद तक सफल हो पाती हैं। बहरहाल उम्मीदें तो प्रशांत किशोर भी देख रहे हैं।

केदारनाथ क्षेत्र के रक्षक भुकुंट भैरव के कपाट बंद रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड की चारधाम यात्रा अब अंतिम पड़ाव पर है। ...
18/10/2025

केदारनाथ क्षेत्र के रक्षक भुकुंट भैरव के कपाट बंद

रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड की चारधाम यात्रा अब अंतिम पड़ाव पर है। शनिवार 18 अक्टूबर को केदारनाथ क्षेत्र के रक्षक भुकुंट भैरवनाथ के कपाट दोपहर एक बजकर 15 मिनट पर विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
केदारनाथ धाम के कपाट बंद करने की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। केदारनाथ धाम के कपाट 23 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।

झड़ियों में  युवती का जला हुआ शव मिलने से फैली सनसनी,  जांच में जुटी पुलिसहरिद्वार। श्यामपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक य...
18/10/2025

झड़ियों में युवती का जला हुआ शव मिलने से फैली सनसनी, जांच में जुटी पुलिस

हरिद्वार। श्यामपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक युवती का अधजला शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। युवती का शव गजीवाली गांव हाईवे के समीप झाड़ियाों में मिला। मृतक युवती की उम्र लगभग 25 वर्ष के करीब बताई जा रही है।
सूचना मिलते ही श्यामपुर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। मामले की गहनता से पड़ताल के लिए फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया। फिलहाल, पुलिस शव की शिनाख्त करने की कोशिश कर रही है।

राज्य की रजत जयंती के उपलक्ष में  होगा विधानसभा का विशेष सत्रदेहरादून। नौ नवंबर को उत्तराखंड राज्य की स्थापना के 25 साल ...
18/10/2025

राज्य की रजत जयंती के उपलक्ष में होगा विधानसभा का विशेष सत्र

देहरादून। नौ नवंबर को उत्तराखंड राज्य की स्थापना के 25 साल हो जाएंगे। राज्य की रजत जयंती के उपलक्ष में प्रदेश सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र कराने का निर्णय लिया है। दो दिवसीय इस सत्र की तिथि तय करने के लिए कैबिनेट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अधिकृत किया है। विधानसभा सचिवालय इसकी तैयारियों में जुट गया है।

बताया जाता है कि सत्र में विधायी कार्य नहीं होंगे। सदन में पक्ष व विपक्ष राज्य के विकासात्मक मुद्दों पर चर्चा करेगा। मुख्यमंत्री जल्दी ही सत्र की तिथि तय करेंगे। सत्र देहरादून में होगा। विधानसभा सचिवालय ने इसकी तैयारियां शुरू कर दीं हैं। इस माह के अंतिम सप्ताह में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्थाओं के लिए अधिकारियों की बैठक लेंगी। विशेष सत्र में आम सत्रों की तरह न प्रश्न काल होगा और न ही कोई विधायी कार्य होंगे। दो दिन तक चलने वाले सत्र में सिर्फ 25 साल में राज्य के विकास और भावी रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

जागेश्वर धाम के देवलीबगड़ में राफ्टिंग हब बनाने की योजना पर काम शुरूअल्मोड़ा। धार्मिक पर्यटन के लिए देश-दुनिया में प्रसि...
18/10/2025

जागेश्वर धाम के देवलीबगड़ में राफ्टिंग हब बनाने की योजना पर काम शुरू

अल्मोड़ा। धार्मिक पर्यटन के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में अब साहसिक पर्यटन की दिशा में भी नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। पर्यटन विभाग ने यहाँ सरयू नदी के किनारे बसे सुरम्य देवलीबगड़ क्षेत्र को राफ्टिंग हब के रूप में विकसित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। नवंबर में इस क्षेत्र में सर्वे टीम भेजी जाएगी।

जागेश्वर धाम से लगभग 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवलीबगड़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां राफ्टिंग करके पर्यटक न केवल रोमांचक अनुभव ले सकेंगे,बल्कि यह क्षेत्र पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण बन सकता है। सरकार इस योजना को जल्द लागू करे। राफ्टिंग केंद्र खुलने से जहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। जागेश्वर धाम में हर वर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। ऐसे में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देवलीबगड़ क्षेत्र में नवंबर माह में सर्वे कार्य कराया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।

बदरीनाथ  में 20 अक्टूबर  को मनाई जाएगी दीपावलीजोशीमठ। बदरीनाथ धाम में दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यहाँ हर...
18/10/2025

बदरीनाथ में 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी दीपावली

जोशीमठ। बदरीनाथ धाम में दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यहाँ हर साल दीपावली का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर माता लक्ष्मी और कुबेर की यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है। लक्ष्मी और कुबेर यहाँ विराजमान हैं।

इस बार भी बदरी-केदार मंदिर समिति ने दीपावली की तैयारियां शुरू कर दी हैं। बदरीनाथ मंदिर को फूलों से सजाया जा रहा है

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