08/01/2026
हर शाम वो खिड़की से बाहर देखती थी…
लोग समझते थे, वो बस समय काट रही है।
लेकिन सच ये था कि वो अपने अधूरे सपनों को देखती थी 💔
शादी, जिम्मेदारियाँ, घर—
सब निभाया उसने बिना शिकायत के।
पर कहीं न कहीं उसका सपना
उसी खिड़की के उस पार खड़ा उसका इंतज़ार कर रहा था ✨
एक दिन बेटी ने पूछा,
“माँ, आप रोज़ बाहर क्या देखती हो?”
माँ मुस्कुराई और बोली—
“अपनी वो ज़िंदगी, जो अब मैं फिर से जीने वाली हूँ।”
क्योंकि
औरत कभी देर नहीं करती,
बस सही वक़्त का इंतज़ार करती है। 🌸
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