18/02/2026
यथार्थ में प्रेम जिसने भी किया उसके लिए जीवन में फिर कुछ और नहीं रहा ....
स्त्री हो या पुरुष दोनों ने ही प्रेम को प्रथम अभिव्यक्ति से अंतिम पड़ाव तक निभाने का प्रयत्न किया है ...
स्त्री हो या पुरुष दोनों के लिए प्रेम को स्वीकार करना बहुत ही कठिन कार्य है ..
लेकिन जब भी किसी स्त्री या पुरुष ने प्रेम को चुना तो फिर अपने जीवन की प्राथमिकता सिर्फ प्रेम को ही रखा ...
बाकी सब प्रेम के बाद रखा ...
ये अलग बात है ऐसा प्रेम सबके हिस्से में नहीं आया ...
Sanju Sanwar✍️