10/08/2026
सिंदरी, धनबाद। आदिवासी सुसर गाँवता, सिंदरी, धनबाद (झारखंड) की ओर से सोमवार, 10 अगस्त 2026 को विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आदिवासी संस्कृति, परंपरा एवं प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के तहत बिरसा समिति, सिंदरी से जुलूस निकाला गया, जो आदिवासी संस्कृति एवं परंपरा से जुड़े विभिन्न स्थलों से होते हुए आगे बढ़ा। इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं संस्कृति की झलक देखने को मिली। बिरसा समिति, सिंदरी में जाहेर थान के नायके बाबा द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना की गई।
आदिवासी धर्म कोड की मांग हुई तेज
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस मनाने का उद्देश्य आदिवासी समुदाय के अधिकारों, सामाजिक स्थिति, संस्कृति, परंपराओं और पहचान के संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की पहल के बाद विश्व स्तर पर आदिवासी समुदायों के अधिकारों और हितों को लेकर इस दिवस को विशेष महत्व मिला।
वक्ताओं ने कहा कि भारत में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, जैन और बौद्ध सहित विभिन्न धर्मों की अलग-अलग पहचान है। आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा और जीवन-पद्धति है। आदिवासी समाज प्रकृति का पूजक है और जल, जंगल, जमीन तथा प्रकृति को अपनी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा मानता है। इसलिए आदिवासी समाज की अलग धार्मिक पहचान को मान्यता देते हुए आदिवासी धर्म कोड प्रदान किया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि देश की वर्तमान राष्ट्रपति आदिवासी समुदाय से आती हैं। ऐसे समय में आदिवासी समाज को उम्मीद है कि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। कार्यक्रम के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री से आदिवासी धर्म कोड लागू करने की मांग की गई।
वार्ड 54-55 एवं बालिचिरका के लोगों की रही सहभागिता
कार्यक्रम को सफल बनाने में वार्ड संख्या 54-55, पंचायत छाताटांड़ एवं ग्राम बालिचिरका के आदिवासी समाज के लोगों की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। बड़ी संख्या में समाज के लोग कार्यक्रम में शामिल हुए और आदिवासी एकता, संस्कृति एवं अधिकारों के संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में आदिवासी सुसर गाँवता के अध्यक्ष आसमान मारांडी, सचिव परीमल दड़, संगठन सचिव दीपक हांसदा, उपाध्यक्ष सानेलाल मारांडी, सह-सचिव महावीर बास्की सहित संरक्षक सोहन सोरेन एवं डॉ. हेन्द लाल टुडू प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इसके अलावा राजकुमार हेम्ब्रम, दशरथ किस्कू, सुनील मुर्मू, श्यामलाल हेम्ब्रम, लोबेस्वर मुर्मू, सुखदेव हांसदा, चांद हेम्ब्रम, सूरजु बास्की, अनिल टुडू, ईश्वर सोरेन, विजय बास्की, मोहन बास्की, नुनुलाल टुडू, लोगेन हेम्ब्रम, अभीलाल किस्कू एवं सुनील सोरेन समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की एकता, सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और प्रकृति आधारित जीवन-पद्धति को संरक्षित रखते हुए अपने संवैधानिक एवं सामाजिक अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाता रहेगा। प्रोग्राम देर रात तक चला इसलिए 10 तारीख को दिया जा रहा है