29/09/2026
🚩 जय श्री राम 🙏 | श्री गुरु चरन सरोज रज… | हनुमान चालीसा का प्रथम दोहा और उसका सुंदर अर्थ 🔱
🌺 ॥ जय श्री राम ॥
॥ जय बजरंगबली ॥ 🙏
श्री हनुमान चालीसा का प्रथम दोहा हमें सबसे पहले गुरु के चरणों में श्रद्धा रखकर अपने मन को निर्मल करने का संदेश देता है। 🙏
“श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥”
इसका भावार्थ है कि तुलसीदास जी गुरु के चरण-कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करके भगवान श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करते हैं, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चार पुरुषार्थों को देने वाला है।
🌺 कैसे पढ़ें?
श्रद्धा, स्वच्छ मन और एकाग्रता के साथ पढ़ें। मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की भक्ति में इसका पाठ विशेष रूप से किया जाता है। सुबह या शाम शांत स्थान पर बैठकर पाठ कर सकते हैं।
🧡 वस्त्र: पूजा के लिए स्वच्छ वस्त्र पहनें। हनुमान जी की पूजा में लाल या केसरिया रंग के वस्त्र श्रद्धा से पहने जाते हैं; मुख्य बात स्वच्छता और श्रद्धा है।
🙏 श्री हनुमान जी की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे।
मन रूपी दर्पण को भक्ति से स्वच्छ करें और श्रीराम के निर्मल यश का स्मरण करें। 🙏
हनुमान चालीसा का यह पहला दोहा केवल पाठ नहीं, बल्कि गुरु-भक्ति और मन की शुद्धि का सुंदर संदेश देता है। 🚩
जय श्री राम ❤️
जय बजरंगबली 🙏