Vishv Sanatan Dharm

Vishv Sanatan Dharm समस्त ब्रह्मांड सनातन में है। ईश्वर की शिक्षा का पालन करना ही परम कर्तव्य है यही जीवन का उद्देश्य है।जीयो और जीने दो।।

27/05/2026
सफला एकादशी व्रत कथा:-सफला एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। 'सफला' शब्द का अर्थ है 'सफलतादाय...
08/12/2025

सफला एकादशी व्रत कथा:-

सफला एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। 'सफला' शब्द का अर्थ है 'सफलतादायक' या 'फलदायी'। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के सभी कार्य सफल होते हैं, उसके पापों का नाश होता है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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महत्व और लाभ
* भगवान विष्णु की पूजा: यह एकादशी भगवान नारायण (विष्णु) को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा और व्रत करने का विशेष विधान है।
* सफलता की प्राप्ति: यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति कर कार्यों में सफलता दिलाता है।
* पापों का नाश: श्रद्धा और भक्तिपूर्वक यह व्रत करने से जाने-अनजाने में हुए समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
* मोक्षदायक: शास्त्रों के अनुसार, सफला एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को इस लोक में सुख भोगकर मरने के बाद वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
* पद्म पुराण: इस एकादशी के महत्व का वर्णन पद्म पुराण में धर्मराज युधिष्ठिर और भगवान श्रीकृष्ण के संवाद के रूप में मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि हजारों अश्वमेघ यज्ञ और राजसूय यज्ञों से भी उतना संतोष नहीं होता, जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है।

एकादशी हिंदुओं का विशेष व्रत है यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण बताया गया है

सफला एकादशी व्रत कथा -
सफला एकादशी के पीछे एक पौराणिक कथा है जो राजा महिष्मान के पुत्र लुम्पक से जुड़ी है।

लुम्पक का पतन: प्राचीन समय में चम्पावती नगरी में राजा महिष्मान राज करते थे। उनके चार पुत्रों में से सबसे बड़ा पुत्र लुम्पक बहुत पापी, दुष्ट और बुरी आदतों वाला था। वह जुए, पर-स्त्री गमन और अन्य बुरे कर्मों में लिप्त रहता था, जिससे दुखी होकर राजा ने उसे अपने राज्य से निकाल दिया।

जंगल में जीवन: राज्य से निकाले जाने के बाद लुम्पक जंगल में रहने लगा और चोरी तथा शिकार करके अपना जीवन व्यतीत करने लगा। वह जिस जंगल में रहता था, वहाँ एक प्राचीन पीपल का पेड़ था, जिसके नीचे एक पुराना विष्णु मंदिर था।

अनजाने में व्रत: पौष मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को, लुम्पक को खाने के लिए कोई फल नहीं मिला और वह रात भर ठंड के कारण सो नहीं पाया। अगले दिन, सफला एकादशी के दिन भी वह मूर्च्छित अवस्था में पड़ा रहा और भूख-प्यास से व्याकुल रहा।

प्रभु को अर्पण: जब उसे दोपहर को होश आया, तो वह कुछ फल एकत्र करके लाया। रात के समय, ठंड से बचने के लिए लुम्पक ने उन फलों को पीपल के पेड़ के नीचे रख दिया और दुखी मन से भगवान विष्णु को याद करते हुए बोला, "हे प्रभु! ये फल आपको अर्पण हैं, इन्हें स्वीकार करें।" इस प्रकार, अनजाने में ही लुम्पक से एकादशी का उपवास और रात्रि जागरण हो गया।

पापों का नाश: लुम्पक के इस अनजाने व्रत और जागरण से भगवान श्रीहरि अत्यंत प्रसन्न हुए और उसके समस्त पाप नष्ट हो गए। अगले दिन, लुम्पक को एक सुंदर घोड़ा मिला और आकाशवाणी हुई कि वह सभी पापों से मुक्त हो गया है और उसे राज्य वापस मिल गया है।

मोक्ष की प्राप्ति: लुम्पक का जीवन पूरी तरह बदल गया। वह अपने पिता के पास लौटा, उसने राज्य संभाला और धर्मानुसार राज किया। वृद्धावस्था में उसने अपने पुत्र को राज्य सौंपकर वन में जाकर भगवान का भजन किया और अंत में परम पद (मोक्ष) को प्राप्त किया।
यह कथा दर्शाती है कि भगवान विष्णु इतने दयालु हैं कि यदि कोई पापी व्यक्ति भी अनजाने में या सच्ची श्रद्धा से सफला एकादशी का व्रत कर लेता है, तो उसे भी सफलता और मुक्ति प्राप्त होती है।

🙏 सनातन धर्म: एक शाश्वत यात्रा,जीवन का अमृत 🙏सनातन धर्म केवल एक 'धर्म' या उपासना पद्धति नहीं है; यह जीवन जीने की एक शाश्...
08/12/2025

🙏 सनातन धर्म: एक शाश्वत यात्रा,जीवन का अमृत 🙏

सनातन धर्म केवल एक 'धर्म' या उपासना पद्धति नहीं है; यह जीवन जीने की एक शाश्वत कला है, एक ऐसा मार्ग जो अनादि काल से चला आ रहा है और अनंत भविष्य तक चलेगा। 'सनातन' का अर्थ ही है—जो न कभी शुरू हुआ, न कभी समाप्त होगा—जो हमेशा था, हमेशा रहेगा। यह कोई मानव निर्मित सिद्धांत नहीं है, बल्कि उस परम सत्य का उद्घाटन है जिसे हमारे ऋषि-मुनियों ने गहन तपस्या और आत्म-साक्षात्कार के माध्यम से अनुभव किया।

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यह धर्म हमें सिखाता है कि हम सब एक ही विराट चेतना, एक ही परम ब्रह्म के अंश हैं। इस सत्य को अनुभव करना ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है। जब हम मंदिरों की घंटियाँ सुनते हैं, मंत्रों का उच्चारण करते हैं, या सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तो हम वास्तव में उस विराट सत्ता से जुड़ने का प्रयास कर रहे होते हैं जो कण-कण में व्याप्त है।
सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अद्वितीय समावेशिता और उदारता है। यह कहता है: 'एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति' – सत्य एक है, विद्वान उसे कई नामों से पुकारते हैं। चाहे आप मूर्ति पूजा करें या निराकार की उपासना, भक्ति मार्ग चुनें या ज्ञान मार्ग, कर्म को प्रधानता दें या योग को—सनातन धर्म हर पथिक का स्वागत करता है। यह आपको अपनी व्यक्तिगत प्रकृति (स्वभाव) और क्षमता (अधिकार) के अनुसार अपना मार्ग चुनने की पूरी स्वतंत्रता देता है।

कर्म, धर्म, अर्थ और मोक्ष—ये चार पुरुषार्थ सनातन जीवन के आधार स्तंभ हैं। यह धर्म हमें पलायन नहीं सिखाता, बल्कि जीवन की सभी जिम्मेदारियों को पूर्ण करते हुए, नैतिकता (धर्म) का पालन करते हुए, धन (अर्थ) अर्जित करते हुए और अपने कर्मों (कर्म) को कुशलता से करते हुए अंततः मोक्ष (जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति) की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।

गीता का अमर संदेश: "तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में कभी नहीं।" यह निष्काम कर्मयोग का सिद्धांत ही हमें जीवन के उतार-चढ़ाव में संतुलन और शांति प्रदान करता है।

आज जब दुनिया तेजी से बदल रही है और लोग तनाव में जी रहे हैं, तब सनातन धर्म के सिद्धांत—जैसे वसुधैव कुटुम्बकम् (पूरी दुनिया एक परिवार है), अहिंसा परमो धर्मः (अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है), और पर्यावरण के प्रति सम्मान—हमें एक शांत, संतुलित और सार्थक जीवन जीने की दिशा दिखाते हैं।
यह धर्म हमारे भीतर की दिव्यता को जगाता है। यह हमें याद दिलाता है कि हम सिर्फ यह हाड़-मांस का शरीर नहीं हैं, बल्कि उस अमर आत्मा के वाहक हैं जो हर प्राणी में निवास करती है। सनातन धर्म हमें सिखाता है कि जब हम दूसरों की सेवा करते हैं, तो हम वास्तव में स्वयं की ही सेवा कर रहे होते हैं।
सनातन धर्म एक बहती हुई नदी की तरह है—जो प्राचीनता को सँजोए हुए भी, हर युग की चुनौतियों के साथ खुद को प्रासंगिक बनाए रखती है। यह केवल इतिहास नहीं है, यह वर्तमान का प्रकाश और भविष्य का मार्ग है।

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समस्त ब्रह्मांड सनातन में है। इससे परे कुछ नहीं। यही अटूट सत्य है। यही सत्य का सत्य है। ईश्वर की सनातन शिक्षा का पालन कर...
07/12/2025

समस्त ब्रह्मांड सनातन में है। इससे परे कुछ नहीं। यही अटूट सत्य है। यही सत्य का सत्य है। ईश्वर की सनातन शिक्षा का पालन करना ही परम कर्तव्य है यही जीने की सच्ची राह है।
🙏 🙏🙏 🙏🙏🙏
बागेश्वर धाम सरकार

05/12/2025

जय हो सनातन धर्म की।। नशा करना एक बुरी आदत है अधर्म का कार्य है इसे छोड़ो और धर्म के सदमार्ग की ओर चलो अच्छी आदतों को अपनाओ अपने को स्वस्थ करो।।

लक्ष्मी माता की जय हो।।                       बागेश्वर धाम सरकार
05/12/2025

लक्ष्मी माता की जय हो।।
बागेश्वर धाम सरकार

हे शम्भू, हे शम्भू.....तेरा सर पर हाथ हो तो सब कुछ है मेरा,वरना क्या लागे मेरा।मेरा मुझमें कुछ नहीं सब तेरा ही तेरा,क्या...
05/11/2023

हे शम्भू, हे शम्भू.....
तेरा सर पर हाथ हो तो सब कुछ है मेरा,
वरना क्या लागे मेरा।
मेरा मुझमें कुछ नहीं सब तेरा ही तेरा,
क्या लागे मेरा, क्या लागे मेरा
हे शम्भू , हे शम्भू.....

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