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सौरभ द्विवेदी ने THE LALLANTOP को छोड़ दिया है बहुत लोगो को आज तक ये लगता होगा की The lallantop सौरभ साहब का है लेकिन ऐस...
06/01/2026

सौरभ द्विवेदी ने THE LALLANTOP को छोड़ दिया है बहुत लोगो को आज तक ये लगता होगा की The lallantop सौरभ साहब का है लेकिन ऐसा नहीं है ये इंडिया टुडे ग्रुप का है !

जब सौरभ साहब इंडिया टुडे का हिस्सा बने थे शुरुआत में तब आजतक हुआ करता था सौरभ के आने के बाद ललनटॉप भी उसी समय शुरू किया गया लगभग 2015 के आसपास , आज सौरभ का चैनल लगता है ललनटॉप है क्युकी ललनटॉप से सौरभ द्विवेदी साहब ही याद आते है !

👉द लल्लनटॉप की शुरुआत 2015 में हुई
👉यह इंडिया टुडे ग्रुप का डिजिटल हिंदी प्लेटफॉर्म है
👉सौरभ द्विवेदी इसके संस्थापक संपादक (Founding Editor) रहे और उन्होंने ही इसकी कंटेंट आइडेंटिटी बनाई!

सौरभ द्विवेदी साहब अब फ्यूचर में क्या करने वाले है ख़ुद का स्टार्ट करेगे या किसी दूसरे चैनेल को जॉइन करेगें ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा!

लेकिन उनकी भाषा शैली और एंकरिंग में ऐसी पहचान है जहाँ भी जायेगें तहलका ही मचायेगे लोग के दिलो में जगह आसानी से बना लेते है !

आपको छत्तीसगढ़ के पावन लोक पर्व छेरछेरा की गाड़ा-गाड़ा बधाई और बहुत-बहुत शुभकामनाएं! 🌾 छत्तीसगढ़ की माटी का यह त्योहार द...
03/01/2026

आपको छत्तीसगढ़ के पावन लोक पर्व छेरछेरा की गाड़ा-गाड़ा बधाई और बहुत-बहुत शुभकामनाएं! 🌾 छत्तीसगढ़ की माटी का यह त्योहार दानशीलता, उदारता और आपसी प्रेम का प्रतीक है। छेरछेरा तिहार की मंगलकामनाएं "छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरते हेरा..." की गूंज आपके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली का संचार करे। छत्तीसगढ़ की यह गौरवशाली परंपरा, जहाँ 'दान' देने से अहंकार मिटता है और 'दान' लेने से ऊंच-नीच का भेदभाव समाप्त होता है, आपके परिवार में अन्नपूर्णा देवी की कृपा सदैव बनाए रखे। खलिहानों में सुनहरी फसल की महक हो, घर-आँगन में खुशियों का डेरा हो, और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की यह सोंधी महक आपके जीवन के हर कोने को महकाती रहे। नई फसल के आगमन का यह उत्सव आपके स्वास्थ्य, वैभव और उन्नति के लिए मंगलकारी हो।
जय जोहार, जय छत्तीसगढ़!

मेरे देश की युवा पीढ़ी......🥺कितने शौक से यह टैबलेट ले रही है और उसका प्रचार सोशल मीडिया पर करें रहे हैं.... और कितने शौ...
02/01/2026

मेरे देश की युवा पीढ़ी......🥺
कितने शौक से यह टैबलेट ले रही है और उसका प्रचार सोशल मीडिया पर करें रहे हैं.... और
कितने शौक से अपने भविष्य को बर्बाद करने पर तुली है इनहे..
इस टैबलेट का आंसर आज नहीं कल जब आपकी शादी होगी और बच्चे नहीं होंगे तब पता चलेगा की आपको ने अप लाइफ में कौन सी सबसे बड़ी गलती की है.. और
इसके जिम्मेदार आप खुद होंगे और कोई नहीं....

आप सभी को अंग्रेजी नववर्ष 2026 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।नूतन वर्ष का नव प्रभात आप सबके जीवन को सुख, शांति, समृद्धि...
01/01/2026

आप सभी को अंग्रेजी नववर्ष 2026 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

नूतन वर्ष का नव प्रभात आप सबके जीवन को सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य से आलोकित करे। आपके जीवन का हर क्षण असीम आनंद और प्रसन्नता से भरा रहे।

हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए.
13/04/2025

हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए.

पेड़ काटने के बहाने भी होते हैं,लेकिन बचाने के तरीके भी होते हैं।
12/04/2025

पेड़ काटने के बहाने भी होते हैं,
लेकिन बचाने के तरीके भी होते हैं।

ताकत, सत्ता, जवानी कुछ भी स्थायी नहीं, सभी की 'एक्सपायरी डेट' होती है..!
09/04/2025

ताकत, सत्ता, जवानी कुछ भी स्थायी नहीं,
सभी की 'एक्सपायरी डेट' होती है..!

सीता जैसा संयम,लक्ष्मण जैसी सेवा, हनुमान जैसी भक्ति, और राम जैसा धैर्य… यही तो है राम नवमी का सच्चा संदेश। आप सभी को राम...
06/04/2025

सीता जैसा संयम,लक्ष्मण जैसी सेवा, हनुमान जैसी भक्ति, और राम जैसा धैर्य…
यही तो है राम नवमी का सच्चा संदेश। आप सभी को रामनवमी के हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

😢गुनाह करके कहाँ जाओगे गालिब,ये जमीन और आसमान सब उसी का है।
03/04/2025

😢गुनाह करके कहाँ जाओगे गालिब,
ये जमीन और आसमान सब उसी का है।

AMERICA में आज से 40 साल पहले स्टीव जॉब्स और बिल गेट्स क्या कर रहे थे. शोध अध्ययन कर रहे थे. उनके मन में ठेकेदारी हासिल ...
22/03/2025

AMERICA में आज से 40 साल पहले स्टीव जॉब्स और बिल गेट्स क्या कर रहे थे. शोध अध्ययन कर रहे थे. उनके मन में ठेकेदारी हासिल कर व्यापार करने का उद्देश्य नही था. इसी कारण आज AMERICA के पास GOOGLE, APPLE है. MICROSOFT, CHATGPT, AMAZON और FACEBOOK है. SPACE𝕏 और GROK है. INDIA के उद्योगपति क्या कर रहे हैं. कांग्रेस शासनकाल में बने PSU को कम कीमत पर खरीदकर मुनाफा कमा रहे हैं. INDIA उद्योगपतियों ने देश को आज तक नया कुछ नही दिया. एक भी नया आविष्कार नही किया. सारा व्यापार ठेकेदारी की बुनियाद पर खड़ा है. यहां तक अब नजर अनाज मंडी पर भी है.

राजनीति से परे राष्ट्रीय एकता के लिए...छत्तीसगढ़ में आज, 22 मार्च को भाजपा बिहार दिवस मना रही है इसमें पार्टी और पार्टी ...
22/03/2025

राजनीति से परे राष्ट्रीय एकता के लिए...

छत्तीसगढ़ में आज, 22 मार्च को भाजपा बिहार दिवस मना रही है इसमें पार्टी और पार्टी की सरकार के लोग शामिल हो रहे हैं। इस प्रदेश के 25 बरस के अस्तित्व में किसी और प्रदेश का यह पहला ऐसा दिवस मनाया जा रहा है। इसके पहले न तो किसी पार्टी ने और न ही किसी सरकार ने किसी प्रदेश का दिवस मनाने की पहल की थी। कुछ लोगों को यह लग सकता है कि भाजपा संगठन की तरफ से छत्तीसगढ़ के प्रभारी बिहार के एक मंत्री नितिन नबीन हैं, और शायद उनको खुश करने के लिए छत्तीसगढ़ भाजपा यह समारोह कर रही है। कुछ दूसरे लोगों को लग सकता है कि बिहार में इस बरस विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, और इसलिए छत्तीसगढ़ में काम करने वाले लाखों बिहारी लोगों को खुश करने के लिए यह कार्यक्रम किया जा रहा है क्योंकि मतदान के लिए लोग अपने मूल प्रदेशों में जाते रहते हैं। भाजपा दुनिया की एक सबसे कल्पनाशील पार्टी है जो किसी प्रदेश में हो रहे चुनाव का प्रचार किसी और प्रदेश से, या नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से भी करती है। हाल के बरसों में जब भारत के कुछ प्रदेशों में विधानसभा चुनाव चल रहे थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी चुनाव के वक्त मतदान के पूरे दिन नेपाल के मंदिरों में दर्शन कर रहे थे और भारतीय चैनलों पर लाइव थे, तो किसी और प्रदेश में चुनाव के दिन वे बांग्लादेश के मठ और मंदिरों में पहुंचकर भारतीय खबरों में छाए हुए थे। अब छत्तीसगढ़ में बसे हुए बिहारियों के बीच आज से यह चुनाव प्रचार शुरू हो गया है, और इसमें कुछ भी अलोकतांत्रिक या अनुचित नहीं है।

लेकिन हम भाजपा की राजनीतिक कल्पनाशक्ति और सूझबूझ से परे देखें, तो इससे राष्ट्रीय एकता की एक बड़ी संभावना भी शुरू हो सकती है। ऐसा क्यों नहीं होना चाहिए कि छत्तीसगढ़ देश के हर राज्य के स्थापना दिवस को यहां पर उस राज्य से आए लोक कलाकारों के साथ वहां से आए हस्तशिल्पी और हाथकरघा कारीगरों के सामानों के साथ, वहां के संगीतकारों और लोकनर्तकों के साथ मनाए? ऐसी एक कल्पना ही छत्तीसगढ़ को देश के नक्शे में एक बहुत ही खास राज्य बना सकती है कि यह प्रदेश देश के हर राज्य का स्थापना दिवस वहां की संस्कृति की झांकी के साथ मनाता है। देश में अट्ठाइस राज्य हैं और कुछ केंद्र शासित प्रदेश हैं अगर ऐसे ढाई दर्जन समारोह छत्तीसगढ़ के संभागीय मुख्यालयों पर अलग-अलग बरस, अलग-अलग प्रदेशों के सहयोग से मनाए जाएंगे तो इससे छत्तीसगढ़ की हर पीढ़ी को पूरे देश की एक झांकी सीधे देखने मिलेगी। आम लोग तो इतने सक्षम नहीं रहते हैं कि वे देश के हर राज्य को जाकर वहां की कला-संस्कृति और जनजीवन को देख सकें, लेकिन छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य बन सकता है जो हर राज्य के स्थापना-समारोह को यहां मनाकर, और उन राज्यों के सहयोग से ही हर तरह के आयोजन करके राष्ट्रीय एकता की एक नई परंपरा कायम करे।

जिस तरह गणतंत्र दिवस पर देश के अलग-अलग राज्यों की एक-एक झांकी दिल्ली की परेड में देखने मिलती है, मैं उसी का एक विस्तार सुझा रही हूं कि छत्तीसगढ़ सरकार अपने सभी संभागीय मुख्यालयों पर अलग-अलग राज्यों के समारोह आयोजित करे जो जनता के बीच एक बड़े मेले की तरह रहे, और हर राज्य की इसमें दिलचस्पी भी होगी कि वे अपने हस्तशिल्प और हाथकरघा की बिक्री यहां पर करवाएं, अपने पर्यटन के स्टॉल लगाएं, अपने लोक संगीत और लोक नृत्य के कार्यक्रम पेश करें, और अपने राज्य की उपलब्धियों को छत्तीसगढ़ प्रदेश की जनता के सामने रखें। जिस तरह ग्वालियर में ऐसे बड़े आयोजनों के लिए मेला नाम की एक जगह बनायी गई है, छत्तीसगढ़ में भी सरकार हर संभागीय मुख्यालय पर कई एकड़ की सरकारी जमीन पर ऐसे मेला स्थल बना सकती है, और हर राज्य से संपर्क करके उन्हें आमंत्रित कर सकती है। इसमें राज्य सरकार का बहुत बड़ा खर्च नहीं लगेगा और अपनी जनता को पूरे देश की संस्कृति से परिचित कराने की एक बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी इससे पूरी होगी।

इससे दूसरे राज्यों को जो मिसाल मिलेगी उससे वहां पर भी जब वे अलग-अलग राज्यों को आमंत्रित करेंगे तो छत्तीसगढ़ को भी पूरे देश में जाकर अपने राज्य की एक विशाल झांकी पेश करने का मौका मिलेगा। और यह भी हो सकता है कि छत्तीसगढ़ सरकार की ऐसी पहल को देखकर भारत सरकार ही इसे एक बड़े आयोजन के रुप में रखे और शहरी विकास मंत्रालय देश के हर संभागीय मुख्यालय पर ग्वालियर के मेला जैसी जगह विकसित करे और देश के सारे राज्यों के आयोजन दूसरे प्रदेशों में करवाने की एक राष्ट्रीय परंपरा शुरू हो जाए। छत्तीसगढ़ को ऐसी पहल करने वाला पहला राज्य बनना चाहिए।

क्या सोचते हैं?

महाड आंदोलन पानी का मुद्दा नही था, बल्कि मानव अधिकार का मुद्दा था. तालाब महाड नगरपालिका का था. सार्वजनिक तालाब पर सभी का...
20/03/2025

महाड आंदोलन पानी का मुद्दा नही था, बल्कि मानव अधिकार का मुद्दा था. तालाब महाड नगरपालिका का था. सार्वजनिक तालाब पर सभी का अधिकार था. लेकिन इस तालाब में कुत्ता पानी पी सकता था, लेकिन दलितों को तालाब का पानी छूने की मनाही थी. आज ही के दिन 1927 में डॉ आंबेडकर ने आंदोलन का नेतृत्व किया. डॉ आंबेडकर ने तालाब का पानी पीकर अपने अधिकार का निर्वहन किया. महाड आंदोलन गांधी के नमक आंदोलन से भी बढ़ा और महत्वपूर्ण आंदोलन था. सवर्ण हिन्दुओं ने खुश होने बजाय लौटते आंदोलनकारियों पर लाठी डंडे से हमला कर दिया. कई स्थानों पर दलितों का बहिष्कार किया गया. उन्हें नौकरी से हटा दिया गया, बंटाई में दी गयी ज़मीन वापस छीन ली गई. इस घटना के बाद डॉ बाबा साहेब अंबेडकर बहुत आहत हुए. उन्होंने उसी साल सितंबर में दूसरा महाड आंदोलन आयोजित किया और अपने भाषण में जाति वर्ण अव्यवस्था के समूल नाश की डॉक्ट्रिन दी.

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