22/03/2025
राजनीति से परे राष्ट्रीय एकता के लिए...
छत्तीसगढ़ में आज, 22 मार्च को भाजपा बिहार दिवस मना रही है इसमें पार्टी और पार्टी की सरकार के लोग शामिल हो रहे हैं। इस प्रदेश के 25 बरस के अस्तित्व में किसी और प्रदेश का यह पहला ऐसा दिवस मनाया जा रहा है। इसके पहले न तो किसी पार्टी ने और न ही किसी सरकार ने किसी प्रदेश का दिवस मनाने की पहल की थी। कुछ लोगों को यह लग सकता है कि भाजपा संगठन की तरफ से छत्तीसगढ़ के प्रभारी बिहार के एक मंत्री नितिन नबीन हैं, और शायद उनको खुश करने के लिए छत्तीसगढ़ भाजपा यह समारोह कर रही है। कुछ दूसरे लोगों को लग सकता है कि बिहार में इस बरस विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, और इसलिए छत्तीसगढ़ में काम करने वाले लाखों बिहारी लोगों को खुश करने के लिए यह कार्यक्रम किया जा रहा है क्योंकि मतदान के लिए लोग अपने मूल प्रदेशों में जाते रहते हैं। भाजपा दुनिया की एक सबसे कल्पनाशील पार्टी है जो किसी प्रदेश में हो रहे चुनाव का प्रचार किसी और प्रदेश से, या नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से भी करती है। हाल के बरसों में जब भारत के कुछ प्रदेशों में विधानसभा चुनाव चल रहे थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी चुनाव के वक्त मतदान के पूरे दिन नेपाल के मंदिरों में दर्शन कर रहे थे और भारतीय चैनलों पर लाइव थे, तो किसी और प्रदेश में चुनाव के दिन वे बांग्लादेश के मठ और मंदिरों में पहुंचकर भारतीय खबरों में छाए हुए थे। अब छत्तीसगढ़ में बसे हुए बिहारियों के बीच आज से यह चुनाव प्रचार शुरू हो गया है, और इसमें कुछ भी अलोकतांत्रिक या अनुचित नहीं है।
लेकिन हम भाजपा की राजनीतिक कल्पनाशक्ति और सूझबूझ से परे देखें, तो इससे राष्ट्रीय एकता की एक बड़ी संभावना भी शुरू हो सकती है। ऐसा क्यों नहीं होना चाहिए कि छत्तीसगढ़ देश के हर राज्य के स्थापना दिवस को यहां पर उस राज्य से आए लोक कलाकारों के साथ वहां से आए हस्तशिल्पी और हाथकरघा कारीगरों के सामानों के साथ, वहां के संगीतकारों और लोकनर्तकों के साथ मनाए? ऐसी एक कल्पना ही छत्तीसगढ़ को देश के नक्शे में एक बहुत ही खास राज्य बना सकती है कि यह प्रदेश देश के हर राज्य का स्थापना दिवस वहां की संस्कृति की झांकी के साथ मनाता है। देश में अट्ठाइस राज्य हैं और कुछ केंद्र शासित प्रदेश हैं अगर ऐसे ढाई दर्जन समारोह छत्तीसगढ़ के संभागीय मुख्यालयों पर अलग-अलग बरस, अलग-अलग प्रदेशों के सहयोग से मनाए जाएंगे तो इससे छत्तीसगढ़ की हर पीढ़ी को पूरे देश की एक झांकी सीधे देखने मिलेगी। आम लोग तो इतने सक्षम नहीं रहते हैं कि वे देश के हर राज्य को जाकर वहां की कला-संस्कृति और जनजीवन को देख सकें, लेकिन छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य बन सकता है जो हर राज्य के स्थापना-समारोह को यहां मनाकर, और उन राज्यों के सहयोग से ही हर तरह के आयोजन करके राष्ट्रीय एकता की एक नई परंपरा कायम करे।
जिस तरह गणतंत्र दिवस पर देश के अलग-अलग राज्यों की एक-एक झांकी दिल्ली की परेड में देखने मिलती है, मैं उसी का एक विस्तार सुझा रही हूं कि छत्तीसगढ़ सरकार अपने सभी संभागीय मुख्यालयों पर अलग-अलग राज्यों के समारोह आयोजित करे जो जनता के बीच एक बड़े मेले की तरह रहे, और हर राज्य की इसमें दिलचस्पी भी होगी कि वे अपने हस्तशिल्प और हाथकरघा की बिक्री यहां पर करवाएं, अपने पर्यटन के स्टॉल लगाएं, अपने लोक संगीत और लोक नृत्य के कार्यक्रम पेश करें, और अपने राज्य की उपलब्धियों को छत्तीसगढ़ प्रदेश की जनता के सामने रखें। जिस तरह ग्वालियर में ऐसे बड़े आयोजनों के लिए मेला नाम की एक जगह बनायी गई है, छत्तीसगढ़ में भी सरकार हर संभागीय मुख्यालय पर कई एकड़ की सरकारी जमीन पर ऐसे मेला स्थल बना सकती है, और हर राज्य से संपर्क करके उन्हें आमंत्रित कर सकती है। इसमें राज्य सरकार का बहुत बड़ा खर्च नहीं लगेगा और अपनी जनता को पूरे देश की संस्कृति से परिचित कराने की एक बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी इससे पूरी होगी।
इससे दूसरे राज्यों को जो मिसाल मिलेगी उससे वहां पर भी जब वे अलग-अलग राज्यों को आमंत्रित करेंगे तो छत्तीसगढ़ को भी पूरे देश में जाकर अपने राज्य की एक विशाल झांकी पेश करने का मौका मिलेगा। और यह भी हो सकता है कि छत्तीसगढ़ सरकार की ऐसी पहल को देखकर भारत सरकार ही इसे एक बड़े आयोजन के रुप में रखे और शहरी विकास मंत्रालय देश के हर संभागीय मुख्यालय पर ग्वालियर के मेला जैसी जगह विकसित करे और देश के सारे राज्यों के आयोजन दूसरे प्रदेशों में करवाने की एक राष्ट्रीय परंपरा शुरू हो जाए। छत्तीसगढ़ को ऐसी पहल करने वाला पहला राज्य बनना चाहिए।
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