05/04/2026
दुमका में DAV स्कूल की नई शाखा का शुभारंभ, वैदिक हवन व मंत्रोच्चार से हुआ उद्घाटन
दुमका:
शिक्षा के क्षेत्र में दुमका को एक और बड़ी सौगात मिली है। सहायक क्षेत्रीय अधिकारी, झारखंड जोन-एच डॉ. प्रबिल हाजरा की अध्यक्षता में दुमका के टॉवर चौक के पास DAV स्कूल की नई शाखा का भव्य शुभारंभ किया गया।
उद्घाटन समारोह में DAV परिवार के कई प्रमुख शिक्षाविद उपस्थित रहे। इसमें DAV पाकुड़ के प्राचार्य डॉ. विश्वदीप चक्रवर्ती, ऊर्जानगर महगामा के प्राचार्य संजीव श्रीवास्तव, दुमका के प्राचार्य डी.के. देव, साहिबगंज के प्राचार्य संजीव कुमार मिश्रा सहित डी.के. सिंह, रतन कुमार पांडेय, पापिया मुखर्जी, अमित कुमार, संजय कुमार यादव और गोपाल विश्वास मुख्य रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पाकुड़ के संस्कृत शिक्षक दीपक कुमार गर्ग द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और हवन के साथ की गई। इस दौरान DAV पाकुड़ के छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए। मंत्रोच्चार से गूंजते वातावरण और हवन कार्यक्रम ने उपस्थित अतिथियों को आध्यात्मिक रूप से अभिभूत कर दिया।
इस अवसर पर DAV साहिबगंज, DAV पोड़ैयाहाट और DAV दुमका के लिए वॉक-इन इंटरव्यू का आयोजन भी किया गया, जिसमें लगभग 200 अभ्यर्थियों ने भाग लिया।
समारोह में गायत्री परिवार, विश्व हिंदू परिषद और भारत विकास परिषद के सदस्य समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
प्राचार्य डॉ. विश्वजीत चक्रवर्ती ने बताया DAV का उद्देश्य, कहा– बच्चों का विकास ही असली लाभ
दुमका में DAV स्कूल की नई शाखा के उद्घाटन अवसर पर DAV पाकुड़ के प्राचार्य डॉ. विश्वजीत चक्रवर्ती ने संस्थान के उद्देश्य और कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि DAV स्कूल “नो प्रॉफिट” के सिद्धांत पर चलता है, जहां किसी व्यक्ति विशेष को लाभ नहीं पहुंचाया जाता। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक बार उनसे पूछा गया कि आपके स्कूल के “बेनिफिशियरी” कौन हैं?
इस पर उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें स्पष्ट नहीं था, लेकिन बाद में समझाया गया कि न तो डायरेक्टर और न ही प्रेसिडेंट, बल्कि DAV के असली लाभार्थी स्कूल के छात्र होते हैं।
डॉ. चक्रवर्ती ने कहा कि यदि किसी स्कूल में 5000 छात्र हैं, तो संस्थान का जो भी लाभ होता है, वह उन्हीं छात्रों के विकास पर खर्च किया जाता है। बच्चों की शिक्षा, संसाधन और समग्र विकास के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं DAV द्वारा सुनिश्चित की जाती हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि DAV का मुख्य उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि छात्रों का सर्वांगीण विकास करना है, ताकि वे भविष्य में एक जिम्मेदार और सशक्त नागरिक बन सकें।हवन कार्यक्रम संपन्न करने के बाद शिक्षक दीपक कुमार ने विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा और सनातन मूल्यों से जुड़े रहने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मन को एकाग्र करना सफलता की कुंजी है और निरंतर अभ्यास व वैराग्य से ही व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज से कुरीतियों को दूर करना और नैतिक शिक्षा का प्रसार करना ही DAV संस्थानों का मुख्य उद्देश्य है।
स्कूल प्रबंधन ने बताया कि इस नई शाखा में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
दुमका में DAV स्कूल की इस नई शाखा के खुलने से क्षेत्र के शिक्षा स्तर को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।