02/07/2025
नीम की छाँव, पथ किनारे,
सपनों जैसी सादी धारे।
धरती सोहे हरियाली में,
शांत बसे जीवन प्याले।
सूनी राहें कुछ कहती हैं,
हवा ग़ज़लें बहती हैं।
पेड़ खड़े हैं मौन पहरे,
गाँव सुहाना, दिल के घेरे।
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